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पत्नी ने पति संग रहने से किया इनकार:हाईकोर्ट में अवैध बंधक आरोप खारिज, प्रेमी संग रहने पर बनी सहमति, पिता के पास रहेगा बेटा

पत्नी ने पति संग रहने से किया इनकार:हाईकोर्ट में अवैध बंधक आरोप खारिज, प्रेमी संग रहने पर बनी सहमति, पिता के पास रहेगा बेटा

ग्वालियर हाईकोर्ट में एक वैवाहिक विवाद से जुड़ा मामला सुनवाई के दौरान ही अप्रत्याशित मोड़ लेता नजर आया। पत्नी को अवैध रूप से बंधक बनाए जाने के गंभीर आरोपों के बीच जब महिला को कोर्ट में पेश किया गया तो पूरे मामले की दिशा ही बदल गई। दरअसल, पति लाखन कडेरे ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को प्रतिवादी पक्ष द्वारा जबरन अपने पास रखा गया है और उसे उससे मिलने नहीं दिया जा रहा। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को पेश करने के निर्देश दिए थे। निर्देश के पालन में जब महिला को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया और न्यायालय ने उसकी स्वतंत्र इच्छा जाननी चाही, तो महिला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं है। उसने बताया कि वह अपनी मर्जी से राकेश नामक व्यक्ति के साथ रह रही है और पति के साथ वापस नहीं जाना चाहती। अवैध बंधक बनाए जाने का आरोप कमजोर पड़ा महिला के इस बयान के बाद ‘अवैध बंधक’ बनाए जाने का आरोप स्वतः ही कमजोर पड़ गया और याचिका का मूल आधार खत्म हो गया। इसके बाद कोर्ट में ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई, जिसमें आपसी सहमति से विवाद को समाप्त करने का रास्ता निकाला गया। समझौते के तहत पति लाखन कडेरे ने पत्नी को तलाक देने पर सहमति जताई। हालांकि, उसने स्थायी गुजारा भत्ता (एलिमनी) न देने की शर्त रखी, जिसे महिला ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही, दोनों के चार वर्षीय बेटे की कस्टडी पिता के पास रखने पर भी सहमति बनी। इस निर्णय पर महिला के पिता ने भी अपनी मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट ने कहा- सुनवाई का औचित्य नहीं दोनों पक्षों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति बनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता। कोर्ट ने मामले को निष्फल मानते हुए निपटा दिया।
इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वैवाहिक विवादों में अदालत का प्रमुख उद्देश्य पक्षकारों की स्वतंत्र इच्छा और सहमति को महत्व देना होता है। साथ ही, यह भी दर्शाता है कि कई बार अदालत की प्रक्रिया के दौरान ही ऐसे मामलों का समाधान आपसी समझ और सहमति से निकल सकता है।

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पत्नी ने पति संग रहने से किया इनकार:हाईकोर्ट में अवैध बंधक आरोप खारिज, प्रेमी संग रहने पर बनी सहमति, पिता के पास रहेगा बेटा

पत्नी ने पति संग रहने से किया इनकार:हाईकोर्ट में अवैध बंधक आरोप खारिज, प्रेमी संग रहने पर बनी सहमति, पिता के पास रहेगा बेटा

ग्वालियर हाईकोर्ट में एक वैवाहिक विवाद से जुड़ा मामला सुनवाई के दौरान ही अप्रत्याशित मोड़ लेता नजर आया। पत्नी को अवैध रूप से बंधक बनाए जाने के गंभीर आरोपों के बीच जब महिला को कोर्ट में पेश किया गया तो पूरे मामले की दिशा ही बदल गई। दरअसल, पति लाखन कडेरे ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को प्रतिवादी पक्ष द्वारा जबरन अपने पास रखा गया है और उसे उससे मिलने नहीं दिया जा रहा। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को पेश करने के निर्देश दिए थे। निर्देश के पालन में जब महिला को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया और न्यायालय ने उसकी स्वतंत्र इच्छा जाननी चाही, तो महिला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं है। उसने बताया कि वह अपनी मर्जी से राकेश नामक व्यक्ति के साथ रह रही है और पति के साथ वापस नहीं जाना चाहती। अवैध बंधक बनाए जाने का आरोप कमजोर पड़ा महिला के इस बयान के बाद ‘अवैध बंधक’ बनाए जाने का आरोप स्वतः ही कमजोर पड़ गया और याचिका का मूल आधार खत्म हो गया। इसके बाद कोर्ट में ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई, जिसमें आपसी सहमति से विवाद को समाप्त करने का रास्ता निकाला गया। समझौते के तहत पति लाखन कडेरे ने पत्नी को तलाक देने पर सहमति जताई। हालांकि, उसने स्थायी गुजारा भत्ता (एलिमनी) न देने की शर्त रखी, जिसे महिला ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही, दोनों के चार वर्षीय बेटे की कस्टडी पिता के पास रखने पर भी सहमति बनी। इस निर्णय पर महिला के पिता ने भी अपनी मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट ने कहा- सुनवाई का औचित्य नहीं दोनों पक्षों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति बनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता। कोर्ट ने मामले को निष्फल मानते हुए निपटा दिया।
इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वैवाहिक विवादों में अदालत का प्रमुख उद्देश्य पक्षकारों की स्वतंत्र इच्छा और सहमति को महत्व देना होता है। साथ ही, यह भी दर्शाता है कि कई बार अदालत की प्रक्रिया के दौरान ही ऐसे मामलों का समाधान आपसी समझ और सहमति से निकल सकता है।

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