1 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी
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हाल ही में वडोदरा में 29 साल के स्टेट रिजर्व पुलिस (SRP) जवान की ट्रेनिंग के बाद अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। परेड के बाद उसने सीने में दर्द की शिकायत की थी। अस्पताल ले जाते समय हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।
भारत में हार्ट डिजीज अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन (WHF) के मुताबिक, दिल की बीमारियों से हर साल भारत में करीब 28 लाख लोगों की मौत होती है।
‘वर्ल्ड हार्ट फाउंडेशन’, ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ और ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (ICMR) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल मौतों में करीब 28% हिस्सेदारी कार्डियोवस्कुलर डिजीज की है।
ऐसे में यह समझना जरूरी है कि हार्ट के किन संकेतों को समय रहते पहचानना चाहिए। साथ ही यह भी कि हमारी रोजमर्रा की आदतें हार्ट हेल्थ को कैसे प्रभावित करती हैं।
इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज समझेंगे कि हार्ट क्या है और ये कैसे काम करता है। साथ ही जानेंगे कि-
- हार्ट क्यों बीमार पड़ता है?
- क्या सडन कार्डियक अरेस्ट वाकई सडन होता है?
- कौन सी चीजें हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती हैं?
सवाल- दिल क्या है?
जवाब- दिल यानी हार्ट शरीर का एक स्ट्रॉन्ग मसल पंप है। यह लगभग हमारी मुट्ठी जितना बड़ा होता है। यह सीने के बीच, थोड़ा बाईं ओर होता है।
हार्ट में चार चैम्बर होते हैं। ऊपर के दोनों चैम्बर्स को ‘एट्रियम’ कहते हैं और नीचे के चैम्बर्स को ‘वेंट्रिकल’ कहते हैं।

4 चैम्बर्स के साथ हार्ट की तस्वीर
हार्ट कैसे काम करता है?
- ऊपर के दोनों चैम्बर यानी एट्रियम का काम है, ब्लड को इकट्ठा करना। दायां एट्रियम शरीर से आया डिऑक्सिजिनेटेड ब्लड लेता है।
- बायां एट्रियम फेफड़ों से आया ऑक्सिजिनेटेड ब्लड लेता है। फिर ये ब्लड नीचे के चैम्बर वेंट्रिकल्स में जाता है।
- वेंट्रिकल्स का काम ब्लड को जोर से पंप करना है। दायां वेंट्रिकल ब्लड को फेफड़ों तक भेजता है और बायां वेंट्रिकल पूरे शरीर में ब्लड पहुंचाता है।

सवाल- दिल क्यों बीमार पड़ता है?
जवाब- समय के साथ दिल की नसों और मसल्स पर दबाव बढ़ता है।
- ज्यादा तला-भुना और नमक खाने से आर्टरीज में फैट जमा होने लगता है। इससे ब्लड फ्लो का रास्ता संकरा हो जाता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
- लगातार तनाव, नींद की कमी और लाे फिजिकल एक्टिविटी से ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ता है, जो दिल पर अतिरिक्त बोझ डालता है।
- स्मोकिंग और ड्रिकिंग हार्ट वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं।
- उम्र, जेनेटिक कारण और बीमारियां जोखिम बढ़ाती हैं।
मुख्य रूप से हार्ट हेल्थ इन 5 पॉइंट्स पर डिपेंड करती है, ग्राफिक में देखिए-

सभी पॉइंट्स विस्तार से समझिए-
आप दिन भर क्या खाते हैं?
हार्ट के बीमार होने की बड़ी वजह है कि हम क्या और कैसे खाते हैं। ज्यादा तेल-मसाले वाला फूड खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है, जो दिल की आर्टरीज में जमता है। खराब खानपान हार्ट को कैसे बीमार करता है, ग्राफिक में देखिए-

आप अपनी बॉडी को कितना मूव करते हैं?
आप कितनी फिजिकल एक्टिविटी करते हैं, इसका हार्ट हेल्थ पर सीधा असर पड़ता है-
- सिडेंटरी लाइफस्टाइल यानी लंबे समय तक बैठकर काम करना, कम चलना-फिरना और एक्सरसाइज न करना हार्ट को धीरे-धीरे बीमार करता है।
- जब शरीर मूव नहीं करता तो कैलोरी बर्न नहीं होती और फैट जमा होने लगता है। इससे वजन, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर बढ़ता है।
- फिजिकल एक्टिविटी कम होने पर हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हार्ट पर काम का बोझ बढ़ जाता है।
- रेगुलर वॉक करना, सीढ़ियां चढ़ना या हल्की एक्सरसाइज करने से हार्ट की मसल्स मजबूत होती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है।

आप रात में कितनी चैन की नींद सोते हैं?
इसका हार्ट हेल्थ पर सीधा असर पड़ता है।
- नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है और हार्ट समेत सभी ऑर्गन्स को आराम मिलता है।
- इसी समय हाॅर्मोन बैलेंस होते हैं, ब्लड प्रेशर कंट्रोल में आता है और वेसल्स की सूजन कम होती है।
- अच्छी और पूरी नींद लेने से स्ट्रेस हाॅर्मोन कम रिलीज होता है, जिससे हार्ट पर काम का बोझ घटता है।
- नींद पूरी न होने पर शरीर अलर्ट मोड में रहता है। इससे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और इंफ्लेमेशन बढ़ता है।
सिगरेट, शराब, कैफीन, निकोटिन के साथ आपका क्या रिश्ता है?
सिगरेट, शराब, कैफीन और निकोटिन सीधे हार्ट हेल्थ को प्रभावित करते हैं-
- सिगरेट में मौजूद निकोटिन ब्लड वेसल्स को संकरा करता है, जिससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इससे हार्ट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
- शराब पीने से हार्ट मसल्स कमजोर होती हैं और हार्ट रेड इर्रेगुलर हो सकती है।
- ज्यादा कैफीन लेने से बेचैनी, तेज धड़कन और बीपी बढ़ने का खतरा रहता है।
- ड्रग्स दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- लंबे समय तक इन चीजों का सेवन करने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
जिंदगी में कितने सुंदर रिश्ते, प्यार-मुहब्बत और खुशी है यानी स्ट्रेस का लेवल क्या है?
जिंदगी में रिश्ते, प्यार और भावनात्मक सपोर्ट जितना मजबूत होता है, हार्ट उतना ही हेल्दी रहता है।
- लगातार स्ट्रेस, अकेलापन और नकारात्मक भावनाएं शरीर में स्ट्रेस हाॅर्मोन बढ़ाती हैं।
- इससे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और इंफ्लेमेशन बढ़ता है, जिससे हार्ट पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
- लंबे समय तक ज्यादा स्ट्रेस रहने से आर्टरीज सख्त होने लगती हैं और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।
- वहीं अच्छे रिश्ते, अपनापन और खुशी दिमाग को शांत रखते हैं। इससे स्ट्रेस कम होता है, नींद बेहतर आती है और हार्ट को आराम मिलता है।
- भावनात्मक संतुलन और खुशहाल रिश्ते हार्ट हेल्थ के लिए उतने ही जरूरी हैं जितना सही खाना और एक्सरसाइज।

सवाल- क्या सडन कार्डियक अरेस्ट वाकई सडन होता है?
जवाब- ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ नाम से भले ही लगता है कि सबकुछ अचानक होता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह पूरी तरह सडन नहीं होता। शरीर पहले ही कई तरह से संकेत देता रहता है-
- बार-बार सीने में भारीपन
- जल्दी थकान
- सांस फूलना
- चक्कर आना
- बेचैनी
- नींद में परेशानी
- अनियमित हार्ट रेट
ये संकेत बताते हैं कि हार्ट पर दबाव बढ़ रहा है या उसका इलेक्ट्रिकल सिस्टम गड़बड़ हो रहा है। लेकिन तेज रफ्तार जिंदगी, काम का तनाव और जिम्मेदारियों में उलझे रहने के कारण हम इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं।
अगर समय रहते इन लक्षणों को समझ लिया जाए और जांच कराई जाए तो सडन कार्डियक अरेस्ट के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।
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