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बास्केटबॉल दिग्गज कोबे ब्रायंट की सफलता का सीक्रेट:आंख खुलते ही फोन देखने की बजाय 15 मिनट शांत बैठें; मेमोरी बढ़ेगी, तनाव दूर होगा

बास्केटबॉल दिग्गज कोबे ब्रायंट की सफलता का सीक्रेट:आंख खुलते ही फोन देखने की बजाय 15 मिनट शांत बैठें; मेमोरी बढ़ेगी, तनाव दूर होगा

भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में दिवंगत बास्केटबॉल खिलाड़ी कोबे ब्रायंट की दिनचर्या की एक आसान आदत हमारे लिए बेहद काम की हो सकती है। अपनी आक्रामक खेल शैली और जीतने की जिद के लिए मशहूर कोबे का अभ्यास सुबह 4 बजे ही शुरू हो जाता था। लेकिन इस कड़े रूटीन के बीच उनका एक खास नियम था, जिसने उन्हें मानसिक रूप से अभेद्य बनाया था। अमेरिका के कोबे हर सुबह उठने के बाद कम से कम 15 मिनट एक जगह बिल्कुल शांत बैठकर ध्यान लगाते थे। उनके लिए यह मौन शारीरिक कसरत जितना ही महत्वपूर्ण था। कोबे मानते थे कि सुबह की 15 मिनट की यह शांति उनके पूरे दिन की नींव तय करती है। यह उन्हें दिनभर मानसिक रूप से स्थिर रखती। इसके बिना उन्हें लगता था कि वे बस काम और तनाव के पीछे भाग रहे हैं। इस मौन के अभ्यास से वे अपने दिन को खुद नियंत्रित कर पाते थे। रात को बड़े मैचों से पहले भी वे इसी तरह शांत बैठकर चुनौतियों की कल्पना करते और मानसिक रूप से खुद को तैयार करते थे। मनोविज्ञान में इस अभ्यास को ‘टाइप 2 फन’ कहा जाता है। शुरुआत में 15-20 मिनट बिना मोबाइल या किसी बाहरी रुकावट के चुपचाप बैठना उबाऊ और बेचैन करने वाला लग सकता है। लेकिन आदत बनने पर यह गहरी संतुष्टि देता है। जब इंसान बिल्कुल शांत बैठता है, तो दिमाग में वो बातें और भावनाएं आने लगती हैं, जिन्हें वह दिनभर की भागदौड़ में नजरअंदाज कर देता है- जैसे शरीर का कोई पुराना दर्द, या अटका हुआ काम। खाली बैठकर हम विचारों से भागने के बजाय उनका सामना करना सीखते हैं। कोबे भी मानते थे कि डर या घबराहट को दबाने से वे बढ़ती हैं, जबकि शांत बैठकर उन्हें स्वीकार करने से नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाता है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार, दिन में कुछ देर की गहरी शांति दिमाग के ‘हिप्पोकैम्पस’ हिस्से में नई कोशिकाओं को जन्म देने में मदद करती है, जो याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़ा है। इयरफोन लगाकर टहलने और एक जगह स्थिर बैठकर शांति का अनुभव करने में बड़ा अंतर है। स्थिरता में हमारा दिमाग खुद को रिपेयर करके री-स्टोर मोड में चला जाता है, जबकि चलते या कुछ सुनते समय वह प्रतिक्रियाओं में उलझा रहता है। नोवाक जोकोविच जैसे टेनिस दिग्गज भी मुश्किल पलों में तुरंत फैसले लेने और तनाव के बीच शांत रहने के लिए ध्यान का सहारा लेते हैं। बिना शोर के बैठने पर आप खुद के भीतर गहराई से झांक पाते हैं। इसलिए, आंख खुलते ही फोन चेक करने या काम पर भागने के बजाय 15 मिनट की शांति के साथ दिन की शुरुआत करें। यह छोटा-सा बदलाव जीवन को नई ऊर्जा, बेहतर फोकस और गजब का नियंत्रण दे सकता है।

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