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इराक दे रहा क्रूड ऑयल पर 33 डॉलर तक डिस्काउंट:जंग के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरना होगा; भारत इराकी तेल का तीसरा बड़ा खरीदार

इराक दे रहा क्रूड ऑयल पर 33 डॉलर तक डिस्काउंट:जंग के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरना होगा; भारत इराकी तेल का तीसरा बड़ा खरीदार

इराक की सरकारी तेल कंपनी अपने ‘बसरा मीडियम’ क्रूड पर 33.40 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट दे रही है। अभी इसकी कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार यह छूट उन खरीदारों के लिए है जो मई में तेल लोड करना चाहते हैं। हालांकि, इस सस्ते तेल को हासिल करने के लिए टैंकरों को ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से होकर गुजरना होगा, जहां फिलहाल युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। फरवरी के अंत से शुरू हुए अमेरिका-ईरान जंग के बाद से हॉर्मुज से तेल टैंकरों का गुजरना लगभग नामुमकिन हो गया है। अप्रैल में सिर्फ 2 जहाजों ने ही भरा तेल शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, अप्रैल में इराक के दक्षिणी बसरा बंदरगाह से केवल 2 जहाजों ने ही तेल लोड किया, जबकि मार्च में यह संख्या 12 थी। सामान्य हालात में इस बंदरगाह से हर महीने करीब 80 टैंकर तेल लोड करते हैं। इराक इस संघर्ष की शुरुआत में ही उत्पादन घटाने वाले शुरुआती देशों में से एक था, क्योंकि निर्यात रुकने से उसके स्टोरेज टैंक तेजी से भर गए थे। 1 से 10 मई के बीच सबसे ज्यादा छूट इराक की सरकारी तेल कंपनी SOMO के नोटिस के अनुसार: रिस्क की जिम्मेदारी खरीदार की होगी SOMO ने नोटिस में साफ कहा है कि जो खरीदार इन शर्तों को स्वीकार करेंगे वे ‘फोर्स मेज्योर’ यानी अनहोनी की स्थिति में कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का प्रावधान का सहारा नहीं ले पाएंगे। कंपनी का कहना है कि खरीदारों को पहले से पता है कि हालात असाधारण हैं, इसलिए वे इस आधार पर सौदे से पीछे नहीं हट सकते। यानी रास्ते में किसी हमले की जिम्मेदारी पूरी तरह खरीदार की होगी। स्पॉट टेंडर के जरिए कय्याराह क्रूड भी पेश ट्रेडर्स के मुताबिक SOMO ने पिछले हफ्ते ‘कय्याराह क्रूड’ के लिए स्पॉट टेंडर भी जारी किया था। इसके लिए भी तेल के बैरल्स को फारस की खाड़ी के अंदर गहराई में जाकर लोड करना होगा। फिलहाल SOMO की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। भारत इराक का तीसरा बड़ा तेल खरीदार केपलर के अनुसार फरवरी 2026 में इराक भारत के टॉप 3 तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था: नॉलेज पार्ट: क्या है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और यह क्यों जरूरी है? स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का करीब 20% से 30% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं। युद्ध या तनाव की स्थिति में इस रास्ते के बंद होने से ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई घट गई है और कीमतें अचानक बढ़ गई हैं।

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