Wednesday, 12 Aug 2026 | 06:06 PM

Trending :

'रामायण' की आलोचना पर बोले रणबीर:फोन पर ट्रेलर देखकर AI समझ रहे लोग; एक सीन पूरा करने में 3 साल तक लगे कोलंबिया भूकंप के 48 घंटे बाद नवजात बच्चे का रेस्क्यू:पांच मंजिला इमारत के नीचे दबा मिला; अब तक 224 लोगों की मौत रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप SBI Clerk Recruitment 2026 | Apply Online 9124 Junior Associate Vacancy 'मुझे प्यार, वफादारी जैसी चीजें पसंद हैं':पूर्व पति मोहसिन अख्तर की दूसरी शादी के रिसेप्शन की तस्वीरों के बाद उर्मिला मातोंडकर की क्रिप्टिक पोस्ट
EXCLUSIVE

India Acquires S-400 Missile Squadrons

India Acquires S-400 Missile Squadrons

नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक

  • कॉपी लिंक

एस-400 मिसाइल के एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं।

भारत सरकार एस-400 मिसाइलों के 5 नए स्क्वॉड्रन खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं। इस हिसाब से करीब 32 बड़ी मिसाइलें मिलेंगी।

पिछले साल 7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर में हमारे एयर डिफेंस सिस्टम की एस-400 मिसाइलों ने पाकिस्तान में 300 किलोमीटर अंदर घुसकर कहर बरपाया था, अब हमारे रक्षा बेड़े में अब उनकी तादाद बढ़ने जा रही है।

खरीदी की दिशा में रूस के साथ चर्चा में सकारात्मक प्रगति हुई है। वायु सेना के लिए 5 एस-400 का पहला सौदा 2018 में हुआ था। 3 सिस्टम्स मिल चुके हैं। दो सिस्टम और ऑपरेशन सिंदूर में खर्च हुई बैटरी की मिसाइलों की भरपाई होनी है। इसके बाद नए स्क्वॉड्रन आएंगे।

इस तरह दोनों सौदे करीब एक लाख करोड़ रुपए के होंगे। डीआरडीओ एस-400 जैसी ही इंटरसेप्टर मिसाइलें बना रहा है। यह प्रोजेक्ट कुशा है। इसमें एम-1, 2 और 3 मिसाइलें बन रहीं हैं, जिनकी रेंज 105 से 350 किमी होगी।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी अटैक को रोका था और 5-6 लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को गिराया था

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी अटैक को रोका था और 5-6 लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को गिराया था

अगले 6 महीने में मिलेंगी पहले सौदे की दो स्क्वॉड्रन

एस-400 दोतरफा प्रहार करती है।

पहला: ध्वनि की गति से 3 से 14 गुना गति से 400 किमी दूर तक हमला करती हैं।

दूसरा: दुश्मन की तरफ से आ रही बैलिस्टिक मिसाइलों को 4.8 किमी प्रति सेकंड की गति से मार गिराती है। मैक 15 गति वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें भी इसकी रेंज से बच नहीं पातीं।

पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई

पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई थी। दूसरी पर सहमति रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान बनी थी। इनकी आपूर्ति का रोडमैप बन गया है। युद्ध के कारण रूस से डिलेवरी में देरी हो रही थी। अब भारत को आश्वस्त किया गया है कि आने वाले 6 महीने में शेष दो स्क्वैड्रन सप्लाई कर दिए जाएंगे।

अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करना सबसे बड़ी जरूरत है

रिटा. एयर वाइस मार्शल संजय भटनागर (स्ट्रेटेजिक प्लानिंग एवं ऑफेंसिव ऑपरेशन्स) के मुताबिक वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों का विश्लेषण करने के बाद कई कदम उठाए हैं। पाकिस्तान ने 7-8 मई 2025 की दरम्यानी रात दो घंटे में 800 ड्रोन्स की बौछार की थी।

ऐसे में ड्रोन्स को काउंटर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। चीन के पास 4 हजार सैटेलाइट हैं और इनमें भी 480 सर्विलांस के लिए हैं। हमें भी अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करने हैं। अभी भारत के पास इस काम के लिए 6 सैटेलाइट हैं। अब 52 उपग्रहों का सिस्टम तैयार हो रहा है।

S-400 डिफेंस सिस्टम क्या है?

S-400 ट्रायम्फ रूस का एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम है, जिसे 2007 में लॉन्च किया गया था। यह सिस्टम फाइटर जेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ विमानों तक को मार गिरा सकता है। यह हवा में कई तरह के खतरों से बचाव के लिए एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। दुनिया के बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में इसकी गिनती होती है।

इस सिस्टम की खासियत क्या है?

  • S-400 की सबसे बड़ी खासियत इसका मोबाइल होना है। यानी रोड के जरिए इसे कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है।
  • इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है।
  • ऑर्डर मिलने के 5 से 10 मिनट में ही ये ऑपरेशन के लिए रेडी हो जाता है।
  • S-400 की एक यूनिट से एक साथ 160 ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक किया जा सकता है। एक टारगेट के लिए 2 मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं।
  • S-400 में 400 इस सिस्टम की रेंज को दर्शाता है। भारत को जो सिस्टम मिल रहा है, उसकी रेंज 400 किलोमीटर है। यानी ये 400 किलोमीटर दूर से ही अपने टारगेट को डिटेक्ट कर काउंटर अटैक कर सकता है। साथ ही यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी अपने टारगेट पर अटैक कर सकता है।

कहां तैनात हैं एस-400?

एस-400 की एक स्क्वाड्रन में 256 मिसाइल होती हैं। भारत के पास इस वक्त 3 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें अलग-अलग तरफ की सीमाओं पर तैनात किया गया है।

  • पहली स्क्वाड्रन – पंजाब में तैनात की गई है। भारत को पहली 2021 में रूस ने पहली स्क्वाड्रन सौंपी थी। यह पाकिस्तान और चीन दोनों की ओर से आने वाले खतरों को रोकने के लिए है।
  • दूसरी स्क्वाड्रन – सिक्किम (चीन सीमा) में तैनात है। भारत को यह खेप जुलाई 2022 में मिली थी। यहां से चिकन नेक पर भी निगरानी रखी जाती है।
  • तीसरी स्क्वाड्रन- राजस्थान-गुजरात या पंजाब/राजस्थान सीमा पर तैनात है। भारत को यह खेप फरवरी 2023 में मिली। इस स्क्वाड्रन से पश्चिमी सीमा की सुरक्षा मजबूत होती है।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
SBI Staff Strike May 23-27

May 5, 2026/
3:41 pm

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कर्मचारी 25 और 26 मई को दो दिन...

टीएमसी बनाम बागी टीएमसी: कल्याण बनर्जी के खिलाफ काकोली घोष की 10 जून की नैतिक शिकायत पहुंची | न्यूज18

June 15, 2026/
7:13 pm

बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार का कल्याण बनर्जी के खिलाफ लोकसभा एथिक्स पैनल को 10 जून का शिकायती पत्र...

Gujarat Titans Record Run Chase; Surya 1000 Runs

May 30, 2026/
4:30 am

न्यू चंडीगढ़40 मिनट पहले कॉपी लिंक सूर्यवंशी के 96 रन पर गिल का शतक भारी पड़ा। गुजरात टाइटंस ने IPL...

"जाओ पीएम मोदी को गले लगाओ!" | पिनाराई विजयन ने राहुल गांधी की "नो हग" टिप्पणी पर पलटवार किया | ब्रेकिंग | न्यूज18

June 13, 2026/
4:58 pm

सीएनएन नाम, लोगो और सभी संबंधित तत्व ® और © 2026 केबल न्यूज नेटवर्क एलपी, एलएलएलपी। एक टाइम वार्नर कंपनी।...

राजनीति

India Acquires S-400 Missile Squadrons

India Acquires S-400 Missile Squadrons

नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक

  • कॉपी लिंक

एस-400 मिसाइल के एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं।

भारत सरकार एस-400 मिसाइलों के 5 नए स्क्वॉड्रन खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं। इस हिसाब से करीब 32 बड़ी मिसाइलें मिलेंगी।

पिछले साल 7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर में हमारे एयर डिफेंस सिस्टम की एस-400 मिसाइलों ने पाकिस्तान में 300 किलोमीटर अंदर घुसकर कहर बरपाया था, अब हमारे रक्षा बेड़े में अब उनकी तादाद बढ़ने जा रही है।

खरीदी की दिशा में रूस के साथ चर्चा में सकारात्मक प्रगति हुई है। वायु सेना के लिए 5 एस-400 का पहला सौदा 2018 में हुआ था। 3 सिस्टम्स मिल चुके हैं। दो सिस्टम और ऑपरेशन सिंदूर में खर्च हुई बैटरी की मिसाइलों की भरपाई होनी है। इसके बाद नए स्क्वॉड्रन आएंगे।

इस तरह दोनों सौदे करीब एक लाख करोड़ रुपए के होंगे। डीआरडीओ एस-400 जैसी ही इंटरसेप्टर मिसाइलें बना रहा है। यह प्रोजेक्ट कुशा है। इसमें एम-1, 2 और 3 मिसाइलें बन रहीं हैं, जिनकी रेंज 105 से 350 किमी होगी।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी अटैक को रोका था और 5-6 लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को गिराया था

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी अटैक को रोका था और 5-6 लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को गिराया था

अगले 6 महीने में मिलेंगी पहले सौदे की दो स्क्वॉड्रन

एस-400 दोतरफा प्रहार करती है।

पहला: ध्वनि की गति से 3 से 14 गुना गति से 400 किमी दूर तक हमला करती हैं।

दूसरा: दुश्मन की तरफ से आ रही बैलिस्टिक मिसाइलों को 4.8 किमी प्रति सेकंड की गति से मार गिराती है। मैक 15 गति वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें भी इसकी रेंज से बच नहीं पातीं।

पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई

पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई थी। दूसरी पर सहमति रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान बनी थी। इनकी आपूर्ति का रोडमैप बन गया है। युद्ध के कारण रूस से डिलेवरी में देरी हो रही थी। अब भारत को आश्वस्त किया गया है कि आने वाले 6 महीने में शेष दो स्क्वैड्रन सप्लाई कर दिए जाएंगे।

अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करना सबसे बड़ी जरूरत है

रिटा. एयर वाइस मार्शल संजय भटनागर (स्ट्रेटेजिक प्लानिंग एवं ऑफेंसिव ऑपरेशन्स) के मुताबिक वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों का विश्लेषण करने के बाद कई कदम उठाए हैं। पाकिस्तान ने 7-8 मई 2025 की दरम्यानी रात दो घंटे में 800 ड्रोन्स की बौछार की थी।

ऐसे में ड्रोन्स को काउंटर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। चीन के पास 4 हजार सैटेलाइट हैं और इनमें भी 480 सर्विलांस के लिए हैं। हमें भी अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करने हैं। अभी भारत के पास इस काम के लिए 6 सैटेलाइट हैं। अब 52 उपग्रहों का सिस्टम तैयार हो रहा है।

S-400 डिफेंस सिस्टम क्या है?

S-400 ट्रायम्फ रूस का एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम है, जिसे 2007 में लॉन्च किया गया था। यह सिस्टम फाइटर जेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ विमानों तक को मार गिरा सकता है। यह हवा में कई तरह के खतरों से बचाव के लिए एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। दुनिया के बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में इसकी गिनती होती है।

इस सिस्टम की खासियत क्या है?

  • S-400 की सबसे बड़ी खासियत इसका मोबाइल होना है। यानी रोड के जरिए इसे कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है।
  • इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है।
  • ऑर्डर मिलने के 5 से 10 मिनट में ही ये ऑपरेशन के लिए रेडी हो जाता है।
  • S-400 की एक यूनिट से एक साथ 160 ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक किया जा सकता है। एक टारगेट के लिए 2 मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं।
  • S-400 में 400 इस सिस्टम की रेंज को दर्शाता है। भारत को जो सिस्टम मिल रहा है, उसकी रेंज 400 किलोमीटर है। यानी ये 400 किलोमीटर दूर से ही अपने टारगेट को डिटेक्ट कर काउंटर अटैक कर सकता है। साथ ही यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी अपने टारगेट पर अटैक कर सकता है।

कहां तैनात हैं एस-400?

एस-400 की एक स्क्वाड्रन में 256 मिसाइल होती हैं। भारत के पास इस वक्त 3 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें अलग-अलग तरफ की सीमाओं पर तैनात किया गया है।

  • पहली स्क्वाड्रन – पंजाब में तैनात की गई है। भारत को पहली 2021 में रूस ने पहली स्क्वाड्रन सौंपी थी। यह पाकिस्तान और चीन दोनों की ओर से आने वाले खतरों को रोकने के लिए है।
  • दूसरी स्क्वाड्रन – सिक्किम (चीन सीमा) में तैनात है। भारत को यह खेप जुलाई 2022 में मिली थी। यहां से चिकन नेक पर भी निगरानी रखी जाती है।
  • तीसरी स्क्वाड्रन- राजस्थान-गुजरात या पंजाब/राजस्थान सीमा पर तैनात है। भारत को यह खेप फरवरी 2023 में मिली। इस स्क्वाड्रन से पश्चिमी सीमा की सुरक्षा मजबूत होती है।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.