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12 साल बाद ब्रेक पर बद्रीनाथ पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री:जीरो डिग्री तापमान में 21 दिन तक करेंगे साधना, घुटनों के बल बैठकर भक्तों ने किया स्वागत

12 साल बाद ब्रेक पर बद्रीनाथ पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री:जीरो डिग्री तापमान में 21 दिन तक करेंगे साधना, घुटनों के बल बैठकर भक्तों ने किया स्वागत

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 21 दिन की विशेष साधना के लिए बद्रीनाथ धाम पहुंच गए हैं। बद्रीनाथ पहुंचने के बाद मंदिर परिसर में उनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई भक्त हाथ जोड़कर आशीर्वाद लेते नजर आए, जबकि कुछ लोग भावुक होकर उनके सामने घुटनों के बल बैठ गए। धाम परिसर में जयकारों और मोबाइल कैमरों के बीच उनका स्वागत हुआ। यह पहली बार है जब धीरेंद्र शास्त्री ने लगातार 12 साल तक कथा, दिव्य दरबार और धार्मिक आयोजनों के बाद इतना लंबा विराम लिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र, सनातन और हिंदुत्व के लिए लगातार चल रहे अभियानों के बीच अब आत्मचिंतन और स्वयं को साधने का समय आया है। उनका कहना है कि समाज को नई दिशा देने से पहले खुद को साधना जरूरी है। धीरेंद्र शास्त्री 6 मई से 26 मई तक बद्रीनाथ के पहाड़ों में एकांत साधना करेंगे। इसके बाद 26 से 30 मई तक बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं को दिव्य कथा सुनाएंगे। साधना के दौरान उनके साथ सीमित संख्या में लोग रहेंगे और साधना स्थल को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। माता-पिता और कुल देवताओं का लिया आशीर्वाद बद्रीनाथ रवाना होने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने बागेश्वर बालाजी और संन्यासी बाबा के दर्शन किए। इसके बाद गुरु की आज्ञा के अनुसार वे पैदल अपने घर पहुंचे, जहां माता-पिता का आशीर्वाद लिया। उन्होंने गांव के कुल देवी-देवताओं को भी प्रणाम किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके साथ पैदल चलते नजर आए। रास्ते भर भक्तों ने पुष्प वर्षा की और जयकारे लगाए। इसके बाद वे खजुराहो से देहरादून होते हुए बद्रीनाथ के लिए रवाना हुए। बोले- संसार को साधने से पहले खुद को साधना जरूरी धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे लगातार हिंदुत्व, सनातन, पदयात्राओं, कन्या विवाह और दिव्य दरबारों में व्यस्त रहे। ऐसे में अब एक ऐसा समय जरूरी था, जब वे आत्मचिंतन कर सकें। उन्होंने कहा कि यदि संसार को साधना है तो उससे पहले स्वयं को साधना अनिवार्य है। मन, विचार और इंद्रियों को बेहतर बनाकर ही समाज को नई दिशा और नई ऊर्जा दी जा सकती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने बद्रीनाथ में एकांत साधना का निर्णय लिया है। फलाहार से शुरू की तैयारी, गुरु के आदेश से तय होगा नियम धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि साधना शुरू होने से पहले ही उन्होंने खान-पान नियंत्रित करना शुरू कर दिया था। पिछले 17-18 दिनों से वे एक समय फलाहार ले रहे हैं, ताकि अचानक भोजन छोड़ने का असर शरीर पर न पड़े। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ पहुंचने के बाद गुरु की प्रेरणा और साधना के संकल्प के अनुसार ही आगे का नियम तय होगा। साधना के दौरान अल्पाहार, फलाहार या पूर्ण उपवास में से क्या रहेगा, यह वहीं निश्चित किया जाएगा। साधना स्थल गुप्त रहेगा, सिर्फ एक सेवादार रहेगा साथ धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बद्रीनाथ तक उनके साथ सीमित संख्या में लोग और सुरक्षा कर्मी हैं, लेकिन जहां साधना होगी वहां सिर्फ वे और एक सेवादार मौजूद रहेंगे। सुरक्षा और साधना में व्यवधान से बचने के लिए स्थान को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि साधना स्थल की जानकारी पहले सामने आ गई तो वहां भीड़ पहुंच सकती है, जिससे प्रशासन को परेशानी होगी और साधना में विघ्न पड़ेगा। उन्होंने संकेत दिया कि साधना टेंट सिटी या किसी गुफा क्षेत्र में हो सकती है। 26 मई के बाद बद्रीनाथ में सुनाएंगे दिव्य कथा 21 दिन की विशेष साधना पूरी होने के बाद धीरेंद्र शास्त्री बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं को दिव्य कथा सुनाएंगे। यह कथा 26 मई से 30 मई तक चलेगी। बागेश्वर धाम के सेवादार ऋषि शुक्ला के अनुसार साधना और कथा कार्यक्रम को लेकर पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बद्रीनाथ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। युवाओं को सनातन से जोड़ने की तैयारी का दावा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन विचारों में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खासतौर पर युवा सनातन के विचारों से दूर हो रहे हैं और साधना के बाद युवाओं को जोड़ने के लिए नए अभियान शुरू किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि इस साधना के बाद वे ऐसे नए कार्य और योजनाएं लेकर आएंगे, जो युवाओं को सनातन और हिंदुत्व के प्रति प्रेरित करेंगी।

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बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 21 दिन की विशेष साधना के लिए बद्रीनाथ धाम पहुंच गए हैं। बद्रीनाथ पहुंचने के बाद मंदिर परिसर में उनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई भक्त हाथ जोड़कर आशीर्वाद लेते नजर आए, जबकि कुछ लोग भावुक होकर उनके सामने घुटनों के बल बैठ गए। धाम परिसर में जयकारों और मोबाइल कैमरों के बीच उनका स्वागत हुआ। यह पहली बार है जब धीरेंद्र शास्त्री ने लगातार 12 साल तक कथा, दिव्य दरबार और धार्मिक आयोजनों के बाद इतना लंबा विराम लिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र, सनातन और हिंदुत्व के लिए लगातार चल रहे अभियानों के बीच अब आत्मचिंतन और स्वयं को साधने का समय आया है। उनका कहना है कि समाज को नई दिशा देने से पहले खुद को साधना जरूरी है। धीरेंद्र शास्त्री 6 मई से 26 मई तक बद्रीनाथ के पहाड़ों में एकांत साधना करेंगे। इसके बाद 26 से 30 मई तक बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं को दिव्य कथा सुनाएंगे। साधना के दौरान उनके साथ सीमित संख्या में लोग रहेंगे और साधना स्थल को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। माता-पिता और कुल देवताओं का लिया आशीर्वाद बद्रीनाथ रवाना होने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने बागेश्वर बालाजी और संन्यासी बाबा के दर्शन किए। इसके बाद गुरु की आज्ञा के अनुसार वे पैदल अपने घर पहुंचे, जहां माता-पिता का आशीर्वाद लिया। उन्होंने गांव के कुल देवी-देवताओं को भी प्रणाम किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके साथ पैदल चलते नजर आए। रास्ते भर भक्तों ने पुष्प वर्षा की और जयकारे लगाए। इसके बाद वे खजुराहो से देहरादून होते हुए बद्रीनाथ के लिए रवाना हुए। बोले- संसार को साधने से पहले खुद को साधना जरूरी धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे लगातार हिंदुत्व, सनातन, पदयात्राओं, कन्या विवाह और दिव्य दरबारों में व्यस्त रहे। ऐसे में अब एक ऐसा समय जरूरी था, जब वे आत्मचिंतन कर सकें। उन्होंने कहा कि यदि संसार को साधना है तो उससे पहले स्वयं को साधना अनिवार्य है। मन, विचार और इंद्रियों को बेहतर बनाकर ही समाज को नई दिशा और नई ऊर्जा दी जा सकती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने बद्रीनाथ में एकांत साधना का निर्णय लिया है। फलाहार से शुरू की तैयारी, गुरु के आदेश से तय होगा नियम धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि साधना शुरू होने से पहले ही उन्होंने खान-पान नियंत्रित करना शुरू कर दिया था। पिछले 17-18 दिनों से वे एक समय फलाहार ले रहे हैं, ताकि अचानक भोजन छोड़ने का असर शरीर पर न पड़े। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ पहुंचने के बाद गुरु की प्रेरणा और साधना के संकल्प के अनुसार ही आगे का नियम तय होगा। साधना के दौरान अल्पाहार, फलाहार या पूर्ण उपवास में से क्या रहेगा, यह वहीं निश्चित किया जाएगा। साधना स्थल गुप्त रहेगा, सिर्फ एक सेवादार रहेगा साथ धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बद्रीनाथ तक उनके साथ सीमित संख्या में लोग और सुरक्षा कर्मी हैं, लेकिन जहां साधना होगी वहां सिर्फ वे और एक सेवादार मौजूद रहेंगे। सुरक्षा और साधना में व्यवधान से बचने के लिए स्थान को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि साधना स्थल की जानकारी पहले सामने आ गई तो वहां भीड़ पहुंच सकती है, जिससे प्रशासन को परेशानी होगी और साधना में विघ्न पड़ेगा। उन्होंने संकेत दिया कि साधना टेंट सिटी या किसी गुफा क्षेत्र में हो सकती है। 26 मई के बाद बद्रीनाथ में सुनाएंगे दिव्य कथा 21 दिन की विशेष साधना पूरी होने के बाद धीरेंद्र शास्त्री बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं को दिव्य कथा सुनाएंगे। यह कथा 26 मई से 30 मई तक चलेगी। बागेश्वर धाम के सेवादार ऋषि शुक्ला के अनुसार साधना और कथा कार्यक्रम को लेकर पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बद्रीनाथ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। युवाओं को सनातन से जोड़ने की तैयारी का दावा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन विचारों में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खासतौर पर युवा सनातन के विचारों से दूर हो रहे हैं और साधना के बाद युवाओं को जोड़ने के लिए नए अभियान शुरू किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि इस साधना के बाद वे ऐसे नए कार्य और योजनाएं लेकर आएंगे, जो युवाओं को सनातन और हिंदुत्व के प्रति प्रेरित करेंगी।

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