Wednesday, 07 Oct 2026 | 11:12 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Khud Se Jhooth To Mat Bolo Book Review; Self Honesty | Mental Health

Khud Se Jhooth To Mat Bolo Book Review; Self Honesty | Mental Health
  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Khud Se Jhooth To Mat Bolo Book Review; Self Honesty | Mental Health Joyful Life

28 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

किताब का नाम: ‘खुद से झूठ तो मत बोलो’ (101 कड़वे सच, जो आपकी जिंदगी बदलने में मदद करेंगे)

(‘स्टॉप लाइंग टू योरसेल्फ: 101 हार्ड ट्रुथ्स टू हेल्प यू चेंज योर लाइफ’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक: साइमन गिलहम

प्रकाशक: पेंगुइन

अनुवाद: विजय कुमार झा

मूल्य: 299 रुपए

जीवन कभी-कभी इतना भारी लगता है कि दूर-दूर तक बदलाव की कोई उम्मीद नजर नहीं आती है। हम खुद से कहते हैं “मैं ठीक हूं”, लेकिन अंदर ही अंदर एक संघर्ष चल रहा होता है। रिश्तों में गलत व्यवहार सहना, दोस्तों की गलतियों को इग्नोर करना या खुद को कम आंकना, ये सब छोटे-छोटे झूठ हैं जो हमें बांध लेते हैं। लेकिन अगर हम सच्चाई को स्वीकार कर लें तो बदलाव की शुरुआत हो सकती है।

ब्रिटिश लेखक और स्पीकर साइमन गिलहम की किताब ‘खुद से झूठ तो मत बोलो’ हमें सिखाती है कि कठोर सच्चाइयों को अपनाकर ही असली ग्रोथ, ऑथेंटिसिटी और फुलफिलमेंट मिल सकता है।

साइमन गिलहम एक सफल सीईओ हैं, जिनके पास 25 साल से ज्यादा का कॉर्पोरेट एक्सपीरियंस है। 2020 की महामारी ने उन्हें झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि बाहरी सफलता के बावजूद अंदर की जिंदगी खोखली थी। इसी ने उन्हें इंस्टाग्राम हैंडल शुरू करने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने कड़वी सच्चाई, ईमानदारी और पर्सनल ग्रोथ पर वीडियोज शेयर किए। साइमन कहते हैं, “झूठ बोलना आसान है, लेकिन सच्चाई ही असली फ्रीडम देती है।” 196 पेज की इस किताब में 101 हार्ड ट्रुथ्स हैं।

किताब का मकसद और अहमियत

साइमन का मैसेज साफ है कि हम अक्सर खुद से झूठ बोलते हैं क्योंकि समाज, डर या असुरक्षा हमें ऐसा करने पर मजबूर करती है। किताब बताती है कि ये झूठ रिश्तों को तोड़ते हैं, करियर में बाधा बनते हैं और खुशी छीन लेते हैं।

सेल्फ-ऑनेस्टी से रिश्ते मजबूत होते हैं, मेंटल हेल्थ बेहतर और लाइफ जॉयफुल होती है। लेखक पाठकों को अपने अंदर की सच्चाई को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करते हैं, जिसे वे असली शक्ति मानते हैं।

इस किताब का मकसद पाठकों को मिरर दिखाना है, जहां वे अपनी सच्चाई देख सकें। ये न सिर्फ प्रेरणा देती है, बल्कि डेली जर्नलिंग व सेल्फ-रिफ्लेक्शन एक्सरसाइज जैसे व्यावहारिक स्टेप्स भी। किताब में बताया गया है कि, “सच्चाई दर्द देती है, लेकिन झूठ जहर।” नीचे दिए ग्राफिक में 9 मुख्य सबक बताए गए हैं।

आइए किताब की मुख्य बाताें को समझते हैं-

ईमानदारी की शुरुआत करें

किताब की शुरुआत ही एक चैलेंज है कि “खुद से झूठ मत बोलो।” साइमन बताते हैं कि हम रोज छोटे-छोटे झूठ बोलते हैं, जैसे “मैं बिजी हूं” कहकर फीलिंग्स छिपाते हैं। इससे बचें। मान लीजिए, अगर जॉब में असंतुष्टि है तो खुद से कहें, “ये मुझे खुश नहीं देती।” यही बदलाव का पहला स्टेप है।

डर और असुरक्षा: झूठ की जड़ें उखाड़ें

साइमन लिखते हैं, “हमारे भीतर डर छिपा होता है, जो हमें झूठ बोलने पर मजबूर करता है।” किताब में एक दोस्त का उदाहरण है, जो ब्रेकअप के बाद खुद से कहता रहा, “मैं ठीक हूं,” लेकिन अंदर-ही-अंदर टूट रहा था। इसलिए अपने डर को स्वीकार करें।

रिश्ते में सच्चाई जरूरी

किताब का एक चैप्टर रिश्तों पर है, जिसमें बताया गया है कि “अगर आपका पार्टनर गलत व्यवहार करता है तो खुद से झूठ मत बोलो कि ये नॉर्मल है।”

करियर और सेल्फ-वर्थ: अपनी वैल्यू समझें

साइमन एक सीईओ होने के नाते कहते हैं, “वर्कप्लेस पर खुद को कम न आंकें।” किताब में एक एम्प्लॉई की स्टोरी है, जो प्रमोशन मिस करने पर खुद को ब्लेम करती रही। हमेशा अपनी वैल्यू समझें। साइमन कहते हैं, ‘’खुद को साबित करने में नहीं, बेहतर करने पर ध्यान दीजिए।’’

डेली ग्रेटीट्यूड जर्नलिंग करें

किताब में रोजाना ग्रेटीट्यूड जर्नलिंग का सुझाव है कि रोज तीन सच्ची चीजें लिखें, जिनके लिए आप शुक्रगुजार हैं। साइमन कहते हैं, “झूठ छोड़ने से चेंज आता है।”

यह किताब किसे पढ़नी चाहिए?

ये किताब इंट्रोस्पेक्शन और ईमानदारी की शक्ति पर आधारित है। सामाजिक दबावों और डर से खुद को धोखा देने की बजाय सच्चाई को अपनाने की प्रेरणा देती है। नीचे ग्राफिक में देखिए इस किताब को किन लोगों को पढ़नी चाहिए-

किताब से क्या सीख मिलती है?

ये किताब सिखाती है कि असली ग्रोथ झूठ छोड़ने से शुरू होती है। इसमें बताया गया है कि कैसे हम सामाजिक अपेक्षाओं, डर और असुरक्षा के चलते एक नकली जीवन जीने लगते हैं। लेखक ईमानदारी, सेल्फ-अवेयरनेस और बदलाव के महत्त्व पर जोर देते हैं।

वे सरल उदाहरणों और व्यावहारिक सलाह के जरिए पाठकों को खुद के प्रति सच्चे रहने की प्रेरणा देते हैं। लेखक हमें यह सिखाते हैं कि अपने अंदर की सच्चाई को स्वीकार करना ही असली शक्ति है।

किताब के बारे में मेरी राय

मुझे ये किताब इसलिए पसंद आई, क्योंकि ये थ्योरी से ज्यादा रियल-लाइफ पर बेस्ड है। साइमन की राइटिंग स्टाइल प्रेरक है। हालांकि कुछ लोगों को ये कठोर लग सकती है, लेकिन असरदार है। कुछ जगह रिपिटिशन है, लेकिन अगर आप सेल्फ-डाउट से परेशान हैं तो पढ़ें। ये लाइफ-लॉन्ग गाइड है। साइमन हमें याद दिलाते हैं कि चेंज पॉसिबल है। बस सच्चाई से शुरू करें।

………………

ये बुक रिव्यू भी पढ़िए

खबरें और भी हैं…

  • बुक रिव्यू- मोसाड की रोमांचक कहानियां: इजराइल की खुफिया एजेंसी ने कैसे दिया दुनिया के खतरनाक मिशन को अंजाम, पढ़ें इस किताब में

    इजराइल की खुफिया एजेंसी ने कैसे दिया दुनिया के खतरनाक मिशन को अंजाम, पढ़ें इस किताब में|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:42

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू: ताकत बाहर नहीं, भीतर है: हर दिन एक नया मौका है, कुछ सीखने, जीतने, विनम्र होने का, अपने मन की शक्ति को अनलॉक करें

    हर दिन एक नया मौका है, कुछ सीखने, जीतने, विनम्र होने का, अपने मन की शक्ति को अनलॉक करें|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:31

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू- भावनाओं से कंट्रोल मत हो, उन्हें कंट्रोल करो: चिंता को खाद-पानी मत दो, सुख हो या दुख, शांत रहो, तभी मिलेगी सफलता

    चिंता को खाद-पानी मत दो, सुख हो या दुख, शांत रहो, तभी मिलेगी सफलता|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:15

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू- जिंदगी सिर्फ 4000 हफ्तों की कहानी है: जिस चीज पर वश नहीं, उसे नियति पर छोड़ दो, सब जाने दो, बस खुशी और सुकून रख लो

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
रतलाम के पास राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग:एसी कोच बी-1 से उठीं लपटें, दो डिब्बे चपेट में, बाल-बाल बचे यात्री; रेल मार्ग बंद

May 17, 2026/
7:41 am

रतलाम जिले के आलोट से गुजर रही त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (12431) में रविवार सुबह आग लग गई। हादसा सुबह...

ask search icon

April 3, 2026/
2:44 pm

Last Updated:April 03, 2026, 14:44 IST सहजन (मोरिंगा) एक आयुर्वेदिक सुपरफूड है, जिसके पत्तों और टहनियों से तैयार पाउडर सेहत...

अश्नूर कौर के लग्जरी घर में घुसा बारिश का पानी:एक्ट्रेस बोलीं- लगी हुई नजर तरक्की में बदले, रणदीप हुड्डा ने मुंह छिपाकर मेट्रो में सफर किया

July 2, 2026/
9:33 am

बिग बॉस 19 में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस अश्नूर कौर के लग्जरी घर में मुंबई की बारिश का बुरा असर...

Hours after the press conference, Chadha, Pathak and Mittal went to the BJP headquarters in New Delhi and joined the ruling party.

April 25, 2026/
10:27 am

आखरी अपडेट:25 अप्रैल, 2026, 10:27 IST आंतरिक दरारों से लेकर रुकी हुई महत्वाकांक्षाओं तक, कविता का कदम व्यक्तिगत रीसेट और...

मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची

June 26, 2026/
2:34 pm

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और मेमोरी चिप की भारी मांग के चलते अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयरों में...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Khud Se Jhooth To Mat Bolo Book Review; Self Honesty | Mental Health

Khud Se Jhooth To Mat Bolo Book Review; Self Honesty | Mental Health
  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Khud Se Jhooth To Mat Bolo Book Review; Self Honesty | Mental Health Joyful Life

28 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

किताब का नाम: ‘खुद से झूठ तो मत बोलो’ (101 कड़वे सच, जो आपकी जिंदगी बदलने में मदद करेंगे)

(‘स्टॉप लाइंग टू योरसेल्फ: 101 हार्ड ट्रुथ्स टू हेल्प यू चेंज योर लाइफ’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक: साइमन गिलहम

प्रकाशक: पेंगुइन

अनुवाद: विजय कुमार झा

मूल्य: 299 रुपए

जीवन कभी-कभी इतना भारी लगता है कि दूर-दूर तक बदलाव की कोई उम्मीद नजर नहीं आती है। हम खुद से कहते हैं “मैं ठीक हूं”, लेकिन अंदर ही अंदर एक संघर्ष चल रहा होता है। रिश्तों में गलत व्यवहार सहना, दोस्तों की गलतियों को इग्नोर करना या खुद को कम आंकना, ये सब छोटे-छोटे झूठ हैं जो हमें बांध लेते हैं। लेकिन अगर हम सच्चाई को स्वीकार कर लें तो बदलाव की शुरुआत हो सकती है।

ब्रिटिश लेखक और स्पीकर साइमन गिलहम की किताब ‘खुद से झूठ तो मत बोलो’ हमें सिखाती है कि कठोर सच्चाइयों को अपनाकर ही असली ग्रोथ, ऑथेंटिसिटी और फुलफिलमेंट मिल सकता है।

साइमन गिलहम एक सफल सीईओ हैं, जिनके पास 25 साल से ज्यादा का कॉर्पोरेट एक्सपीरियंस है। 2020 की महामारी ने उन्हें झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि बाहरी सफलता के बावजूद अंदर की जिंदगी खोखली थी। इसी ने उन्हें इंस्टाग्राम हैंडल शुरू करने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने कड़वी सच्चाई, ईमानदारी और पर्सनल ग्रोथ पर वीडियोज शेयर किए। साइमन कहते हैं, “झूठ बोलना आसान है, लेकिन सच्चाई ही असली फ्रीडम देती है।” 196 पेज की इस किताब में 101 हार्ड ट्रुथ्स हैं।

किताब का मकसद और अहमियत

साइमन का मैसेज साफ है कि हम अक्सर खुद से झूठ बोलते हैं क्योंकि समाज, डर या असुरक्षा हमें ऐसा करने पर मजबूर करती है। किताब बताती है कि ये झूठ रिश्तों को तोड़ते हैं, करियर में बाधा बनते हैं और खुशी छीन लेते हैं।

सेल्फ-ऑनेस्टी से रिश्ते मजबूत होते हैं, मेंटल हेल्थ बेहतर और लाइफ जॉयफुल होती है। लेखक पाठकों को अपने अंदर की सच्चाई को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करते हैं, जिसे वे असली शक्ति मानते हैं।

इस किताब का मकसद पाठकों को मिरर दिखाना है, जहां वे अपनी सच्चाई देख सकें। ये न सिर्फ प्रेरणा देती है, बल्कि डेली जर्नलिंग व सेल्फ-रिफ्लेक्शन एक्सरसाइज जैसे व्यावहारिक स्टेप्स भी। किताब में बताया गया है कि, “सच्चाई दर्द देती है, लेकिन झूठ जहर।” नीचे दिए ग्राफिक में 9 मुख्य सबक बताए गए हैं।

आइए किताब की मुख्य बाताें को समझते हैं-

ईमानदारी की शुरुआत करें

किताब की शुरुआत ही एक चैलेंज है कि “खुद से झूठ मत बोलो।” साइमन बताते हैं कि हम रोज छोटे-छोटे झूठ बोलते हैं, जैसे “मैं बिजी हूं” कहकर फीलिंग्स छिपाते हैं। इससे बचें। मान लीजिए, अगर जॉब में असंतुष्टि है तो खुद से कहें, “ये मुझे खुश नहीं देती।” यही बदलाव का पहला स्टेप है।

डर और असुरक्षा: झूठ की जड़ें उखाड़ें

साइमन लिखते हैं, “हमारे भीतर डर छिपा होता है, जो हमें झूठ बोलने पर मजबूर करता है।” किताब में एक दोस्त का उदाहरण है, जो ब्रेकअप के बाद खुद से कहता रहा, “मैं ठीक हूं,” लेकिन अंदर-ही-अंदर टूट रहा था। इसलिए अपने डर को स्वीकार करें।

रिश्ते में सच्चाई जरूरी

किताब का एक चैप्टर रिश्तों पर है, जिसमें बताया गया है कि “अगर आपका पार्टनर गलत व्यवहार करता है तो खुद से झूठ मत बोलो कि ये नॉर्मल है।”

करियर और सेल्फ-वर्थ: अपनी वैल्यू समझें

साइमन एक सीईओ होने के नाते कहते हैं, “वर्कप्लेस पर खुद को कम न आंकें।” किताब में एक एम्प्लॉई की स्टोरी है, जो प्रमोशन मिस करने पर खुद को ब्लेम करती रही। हमेशा अपनी वैल्यू समझें। साइमन कहते हैं, ‘’खुद को साबित करने में नहीं, बेहतर करने पर ध्यान दीजिए।’’

डेली ग्रेटीट्यूड जर्नलिंग करें

किताब में रोजाना ग्रेटीट्यूड जर्नलिंग का सुझाव है कि रोज तीन सच्ची चीजें लिखें, जिनके लिए आप शुक्रगुजार हैं। साइमन कहते हैं, “झूठ छोड़ने से चेंज आता है।”

यह किताब किसे पढ़नी चाहिए?

ये किताब इंट्रोस्पेक्शन और ईमानदारी की शक्ति पर आधारित है। सामाजिक दबावों और डर से खुद को धोखा देने की बजाय सच्चाई को अपनाने की प्रेरणा देती है। नीचे ग्राफिक में देखिए इस किताब को किन लोगों को पढ़नी चाहिए-

किताब से क्या सीख मिलती है?

ये किताब सिखाती है कि असली ग्रोथ झूठ छोड़ने से शुरू होती है। इसमें बताया गया है कि कैसे हम सामाजिक अपेक्षाओं, डर और असुरक्षा के चलते एक नकली जीवन जीने लगते हैं। लेखक ईमानदारी, सेल्फ-अवेयरनेस और बदलाव के महत्त्व पर जोर देते हैं।

वे सरल उदाहरणों और व्यावहारिक सलाह के जरिए पाठकों को खुद के प्रति सच्चे रहने की प्रेरणा देते हैं। लेखक हमें यह सिखाते हैं कि अपने अंदर की सच्चाई को स्वीकार करना ही असली शक्ति है।

किताब के बारे में मेरी राय

मुझे ये किताब इसलिए पसंद आई, क्योंकि ये थ्योरी से ज्यादा रियल-लाइफ पर बेस्ड है। साइमन की राइटिंग स्टाइल प्रेरक है। हालांकि कुछ लोगों को ये कठोर लग सकती है, लेकिन असरदार है। कुछ जगह रिपिटिशन है, लेकिन अगर आप सेल्फ-डाउट से परेशान हैं तो पढ़ें। ये लाइफ-लॉन्ग गाइड है। साइमन हमें याद दिलाते हैं कि चेंज पॉसिबल है। बस सच्चाई से शुरू करें।

………………

ये बुक रिव्यू भी पढ़िए

खबरें और भी हैं…

  • बुक रिव्यू- मोसाड की रोमांचक कहानियां: इजराइल की खुफिया एजेंसी ने कैसे दिया दुनिया के खतरनाक मिशन को अंजाम, पढ़ें इस किताब में

    इजराइल की खुफिया एजेंसी ने कैसे दिया दुनिया के खतरनाक मिशन को अंजाम, पढ़ें इस किताब में|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:42

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू: ताकत बाहर नहीं, भीतर है: हर दिन एक नया मौका है, कुछ सीखने, जीतने, विनम्र होने का, अपने मन की शक्ति को अनलॉक करें

    हर दिन एक नया मौका है, कुछ सीखने, जीतने, विनम्र होने का, अपने मन की शक्ति को अनलॉक करें|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:31

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू- भावनाओं से कंट्रोल मत हो, उन्हें कंट्रोल करो: चिंता को खाद-पानी मत दो, सुख हो या दुख, शांत रहो, तभी मिलेगी सफलता

    चिंता को खाद-पानी मत दो, सुख हो या दुख, शांत रहो, तभी मिलेगी सफलता|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:15

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू- जिंदगी सिर्फ 4000 हफ्तों की कहानी है: जिस चीज पर वश नहीं, उसे नियति पर छोड़ दो, सब जाने दो, बस खुशी और सुकून रख लो

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.