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दाल या राजमा खाते ही पेट फूल जाता है? ये 3 आसान ट्रिक्स अपनाएं, गैस से मिलेगा तुरंत छुटकारा!

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दाल, राजमा और चना भारतीय खाने का अहम हिस्सा हैं, लेकिन कई लोगों को इन्हें खाने के बाद गैस और पेट फूलने की समस्या हो जाती है. ऐसे में लोग इन्हें डाइट से हटाने लगते हैं, जबकि असल में दिक्कत दाल में नहीं बल्कि उसे बनाने और खाने के तरीके में होती है. कुछ आसान बदलाव अपनाकर आप बिना किसी परेशानी के इन हेल्दी चीजों का आनंद ले सकते हैं.

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दाल या राजमा खाने के बाद गैस की समस्या.

दाल भारतीय खानपान का एक अहम हिस्सा है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. लेकिन कई लोग दाल, राजमा या चना खाने के बाद गैस और पेट फूलने यानी Bloating की समस्या से परेशान हो जाते हैं. इसी वजह से कुछ लोग इन हेल्दी चीजों को खाना ही बंद कर देते हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि समस्या दाल में नहीं, बल्कि उसे बनाने और खाने के तरीके में होती है. अगर आप कुछ आसान बदलाव कर लें, तो बिना किसी परेशानी के दाल का पूरा फायदा उठा सकते हैं.

सबसे पहला और जरूरी कदम है दाल या लेग्यूम्स को सही तरीके से भिगोना. कई लोग जल्दी में इस स्टेप को छोड़ देते हैं, लेकिन यही गलती गैस और ब्लोटिंग की बड़ी वजह बनती है. दाल को भिगोने से उसमें मौजूद फाइटिक एसिड और कुछ जटिल शर्करा टूटने लगती हैं, जो पाचन में रुकावट डालती हैं. ये वही तत्व होते हैं जो पेट में जाकर फर्मेंट होकर गैस बनाते हैं. इसलिए दाल को कुछ घंटों से लेकर पूरी रात तक भिगोकर रखना चाहिए. खासकर राजमा, काले चने और छोले जैसी भारी चीजों को 8–12 घंटे तक भिगोना जरूरी है, जबकि मूंग या मसूर जैसी हल्की दालों को कम समय में भी भिगोया जा सकता है. ध्यान रखें कि भिगोया हुआ पानी हमेशा फेंक दें और उसी में दाल न पकाएं.

दूसरा महत्वपूर्ण कदम है दाल पकाते समय सही मसालों का इस्तेमाल करना. कई ऐसे देसी मसाले हैं जो पाचन को बेहतर बनाते हैं और गैस बनने से रोकते हैं. जैसे हींग, अदरक, जीरा और अजवाइन दाल में डालने से न सिर्फ उसका स्वाद बढ़ता है, बल्कि यह पाचन एंजाइम्स को भी सक्रिय करते हैं. इससे शरीर जटिल फाइबर को आसानी से तोड़ पाता है और गैस बनने की संभावना कम हो जाती है. उदाहरण के लिए मूंग दाल में हींग और अजवाइन डालना या राजमा में अदरक-लहसुन का इस्तेमाल करना पेट के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है.

तीसरा और जरूरी तरीका है धीरे-धीरे दालों को अपनी डाइट में शामिल करना. अगर आपका शरीर हाई फाइबर फूड का आदी नहीं है और आप अचानक से भारी दालें जैसे राजमा या छोले खाने लगते हैं, तो पेट में परेशानी होना स्वाभाविक है. ऐसे में शुरुआत हल्की दालों जैसे पीली मूंग या मसूर से करें, जो आसानी से पच जाती हैं. जब आपका पाचन तंत्र धीरे-धीरे इन्हें अपनाने लगे, तब आप भारी दालों को अपनी डाइट में शामिल करें. यह तरीका आपके गट माइक्रोबायोम को एडजस्ट होने का समय देता है, जिससे पाचन बेहतर होता है.

ध्यान रखें कि सभी दालें पाचन के लिहाज से एक जैसी नहीं होतीं. हल्की दालें जैसे मूंग रोजाना खाई जा सकती हैं, जबकि राजमा, छोले और काले चने जैसी भारी चीजों को हफ्ते में 1–2 बार ही खाना बेहतर होता है, खासकर अगर आपको गैस या ब्लोटिंग की समस्या रहती है. सही तरीके से दाल बनाकर और थोड़ी सावधानी बरतकर आप बिना किसी परेशानी के इसके पोषण का पूरा लाभ ले सकते हैं.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें

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दाल या राजमा खाने के बाद गैस की समस्या.

दाल भारतीय खानपान का एक अहम हिस्सा है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. लेकिन कई लोग दाल, राजमा या चना खाने के बाद गैस और पेट फूलने यानी Bloating की समस्या से परेशान हो जाते हैं. इसी वजह से कुछ लोग इन हेल्दी चीजों को खाना ही बंद कर देते हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि समस्या दाल में नहीं, बल्कि उसे बनाने और खाने के तरीके में होती है. अगर आप कुछ आसान बदलाव कर लें, तो बिना किसी परेशानी के दाल का पूरा फायदा उठा सकते हैं.

सबसे पहला और जरूरी कदम है दाल या लेग्यूम्स को सही तरीके से भिगोना. कई लोग जल्दी में इस स्टेप को छोड़ देते हैं, लेकिन यही गलती गैस और ब्लोटिंग की बड़ी वजह बनती है. दाल को भिगोने से उसमें मौजूद फाइटिक एसिड और कुछ जटिल शर्करा टूटने लगती हैं, जो पाचन में रुकावट डालती हैं. ये वही तत्व होते हैं जो पेट में जाकर फर्मेंट होकर गैस बनाते हैं. इसलिए दाल को कुछ घंटों से लेकर पूरी रात तक भिगोकर रखना चाहिए. खासकर राजमा, काले चने और छोले जैसी भारी चीजों को 8–12 घंटे तक भिगोना जरूरी है, जबकि मूंग या मसूर जैसी हल्की दालों को कम समय में भी भिगोया जा सकता है. ध्यान रखें कि भिगोया हुआ पानी हमेशा फेंक दें और उसी में दाल न पकाएं.

दूसरा महत्वपूर्ण कदम है दाल पकाते समय सही मसालों का इस्तेमाल करना. कई ऐसे देसी मसाले हैं जो पाचन को बेहतर बनाते हैं और गैस बनने से रोकते हैं. जैसे हींग, अदरक, जीरा और अजवाइन दाल में डालने से न सिर्फ उसका स्वाद बढ़ता है, बल्कि यह पाचन एंजाइम्स को भी सक्रिय करते हैं. इससे शरीर जटिल फाइबर को आसानी से तोड़ पाता है और गैस बनने की संभावना कम हो जाती है. उदाहरण के लिए मूंग दाल में हींग और अजवाइन डालना या राजमा में अदरक-लहसुन का इस्तेमाल करना पेट के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है.

तीसरा और जरूरी तरीका है धीरे-धीरे दालों को अपनी डाइट में शामिल करना. अगर आपका शरीर हाई फाइबर फूड का आदी नहीं है और आप अचानक से भारी दालें जैसे राजमा या छोले खाने लगते हैं, तो पेट में परेशानी होना स्वाभाविक है. ऐसे में शुरुआत हल्की दालों जैसे पीली मूंग या मसूर से करें, जो आसानी से पच जाती हैं. जब आपका पाचन तंत्र धीरे-धीरे इन्हें अपनाने लगे, तब आप भारी दालों को अपनी डाइट में शामिल करें. यह तरीका आपके गट माइक्रोबायोम को एडजस्ट होने का समय देता है, जिससे पाचन बेहतर होता है.

ध्यान रखें कि सभी दालें पाचन के लिहाज से एक जैसी नहीं होतीं. हल्की दालें जैसे मूंग रोजाना खाई जा सकती हैं, जबकि राजमा, छोले और काले चने जैसी भारी चीजों को हफ्ते में 1–2 बार ही खाना बेहतर होता है, खासकर अगर आपको गैस या ब्लोटिंग की समस्या रहती है. सही तरीके से दाल बनाकर और थोड़ी सावधानी बरतकर आप बिना किसी परेशानी के इसके पोषण का पूरा लाभ ले सकते हैं.

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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें

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