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Summer Digestive Diet; What To Eat & Avoid

Summer Digestive Diet; What To Eat & Avoid

46 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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क्या आपने भी नोटिस किया है कि गर्मियों में डाइजेशन अक्सर खराब हो जाता है? यह सिर्फ खानपान की गलती नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों का असर होता है।

ज्यादा तापमान, डिहाइड्रेशन और लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी गलतियां पाचन तंत्र की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सही फूड चॉइस और खाने का टाइम समझना बेहद जरूरी है।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज समझेंगे कि गर्मियों में डाइजेशन क्यों कमजोर हो जाता है। साथ ही जानेंगे कि-

  • किन फूड्स-ड्रिंक्स को अवॉइड करना चाहिए?
  • कौन-सी चीजें डाइजेस्टिव सिस्टम को कूल और एक्टिव रखती हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. नरेंद्र कुमार सिंगला, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- क्या ये फैक्ट है कि गर्मियों में पाचन तंत्र की खाना पचाने की क्षमता कम हो जाती है?

जवाब- हां, गर्मियों में पाचन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं-

  • गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ता है, जिससे ब्लड फ्लो स्किन की तरफ शिफ्ट हो जाता है।
  • इसके कारण डाइजेस्टिव ऑर्गन्स को थोड़ा कम ब्लड मिलता है। इसलिए वे पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते हैं।
  • ज्यादा पसीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे पाचन एंजाइम्स की काम करने की क्षमता घट सकती है।

सवाल- गर्मियों में डाइजेशन सिस्टम कमजोर क्यों होता है?

जवाब- गर्मियों में तापमान बढ़ने पर शरीर का कामकाज प्रभावित होता है, इसके सभी कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- तापमान का बढ़ना डाइजेस्टिव सिस्टम और मेटाबॉलिज्म पर क्या असर डालता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

डाइजेस्टिव सिस्टम

  • ज्यादा गर्मी में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में ब्लड सप्लाई कम होने से पाचन क्षमता घटती है।
  • डिहाइड्रेशन के कारण गैस्ट्रिक जूस और डाइजेस्टिव एंजाइम्स का सिक्रेशन कम होने से फूड ब्रेकडाउन प्रभावित होता है।
  • हीट स्ट्रेस गट माइक्रोब्स के बैलेंस को बिगाड़ सकता है, जिससे डायरिया या गट इंफेक्शन का रिस्क बढ़ता है।

मेटाबॉलिज्म

  • शरीर का बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) गर्मी में थोड़ा कम हो सकता है क्योंकि शरीर को हीट प्रोडक्शन कम रखना होता है।
  • ज्यादा तापमान में थायरॉइड हाॅर्मोन एक्टिविटी पर हल्का असर पड़ सकता है, जिससे मेटाबॉलिक प्रोसेस धीमे हो सकते हैं।
  • हीट के कारण इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस (जैसे सोडियम-पोटेशियम) होता है, जो सेलुलर मेटाबॉलिज्म और एनर्जी प्रोडक्शन को प्रभावित करता है।

सवाल- आमतौर पर गर्मियों में कौन-सी डाइजेस्टिव समस्याएं हो सकती हैं?

जवाब- ज्यादा तापमान से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट कम हो जाते हैं।

  • डिहाइड्रेशन से पाचन एंजाइम और गट मूवमेंट प्रभावित होते हैं।
  • गर्मी में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
  • भूख कम लगने से खाने का पैटर्न बिगड़ सकता है।
  • ऑयली और स्पाइसी खाने से पाचन पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में किन लोगों को डाइजेस्टिव समस्याओं का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- किसी भी हेल्थ प्रॉब्लम का रिस्क सबसे ज्यादा उन लोगों को होता है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। ग्राफिक में देखिए, किन्हें ज्यादा रिस्क होता है-

सवाल- हाई टेम्परेचर और एनवायर्नमेंटल कारणों के अलावा क्या लाइफस्टाइल और फूड हैबिट्स भी गर्मियों में डाइजेशन बिगाड़ सकती हैं?

जवाब- बहुत तला-भुना भोजन पेट में ज्यादा समय तक रहता है, जिससे अपच और एसिडिटी का रिस्क होता है।

  • पर्याप्त पानी न पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन होता है, जो डाइजेस्टिव एंजाइम्स के सीक्रेशन और गट मूवमेंट को प्रभावित करता है।
  • देर रात भोजन करने से सर्केडियन रिद्म बाधित होती है और एंजाइम्स असंतुलित हो सकते हैं।
  • शुगरी और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स लेने से गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।
  • लंबे समय तक बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे फूड-ब्रेकडाउन प्रभावित होता है।
  • जल्दी-जल्दी या जरूरत से ज्यादा खाना पेट पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
  • ज्यादा तनाव गट-ब्रेन एक्सिस को प्रभावित कर पाचन समस्याएं बढ़ा सकता है।

सवाल- गर्मियों में डाइजेशन को अच्छा रखने के लिए रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में कौन-से बदलाव करने चाहिए?

जवाब- हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन लेने से पाचन तंत्र संतुलित रहता है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें-

  • डाइट में फाइबर रिच फूड्स शामिल करें।
  • रोज नियमित समय पर सोएं और जागें। 8 घंटे की अच्छी नींद लें।
  • रेगुलर वॉक या स्ट्रेचिंग करें।
  • बहुत गर्म भोजन या ड्रिंक से बचें।
  • प्रोबायोटिक फूड्स जैसे दही और छाछ लें।
  • लाइफस्टाइल में रिलैक्सेशन टेक्नीक जैसे मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग करें।

सवाल- इस मौसम में कौन-से फूड्स और ड्रिंक्स अवॉइड करने चाहिए, जो पाचन बिगाड़ते हैं?

जवाब- डीप फ्राइड फूड्स जैसे पकौड़े, समोसे और चिप्स देर से पचते हैं और हीट प्रोडक्शन बढ़ाते हैं। अवाॅइड फूड की पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कौन-से फूड्स, फल और ड्रिंक्स डाइजेस्टिव सिस्टम को ठंडा और एक्टिव रखते हैं?

जवाब- गर्मियों में पानी से भरपूर और सुपाच्य फूड पेट पर कम दबाव डालते हैं और डाइजेस्टिव प्रोसेस को आसान बनाते हैं। पूरी फूड लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में खाने का सही टाइम और पोर्शन साइज क्या होना चाहिए, ताकि पेट पर दबाव न पड़े?

जवाब- सुबह उठने के 1 घंटे के भीतर हल्का नाश्ता लेने से मेटाबॉलिक प्रोसेस समय पर शुरू होता है।

  • दिन में हर 3-4 घंटे पर छोटे मील्स लेने से गैस्ट्रिक ओवरलोड और एसिडिटी का रिस्क कम होता है।
  • लंच को दिन का मुख्य भोजन बनाएं। इस समय डाइजेस्टिव एंजाइम्स की एक्टिविटी अपेक्षाकृत बेहतर होती है।
  • एक बार में बहुत ज्यादा खाने की बजाय 60-70% पेट भरने का तरीका अपनाएं।

सवाल- अगर गर्मियों में बार-बार अपच, उल्टी और दस्त हो तो क्या डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

जवाब- हां, 2–3 दिनों से ज्यादा समय तक लक्षण बने रहने पर इन्फेक्शन या फूड पॉइजनिंग का रिस्क होता है।

  • तेज बुखार, पूप में ब्लड या बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे संकेत का मतलब मेडिकल अटेंशन की जरूरत है।
  • बच्चों, बुजुर्गों और प्रेग्नेंट महिलाओं को जल्दी सलाह लेनी चाहिए।
  • बार-बार अपच गैस्ट्राइटिस या इरिटेबल बाउल जैसी समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है।
  • डॉक्टर जरूरत के अनुसार ओरल रिहाइड्रेशन, दवाएं या टेस्ट सलाह दे सकते हैं। समय पर इलाज से बड़ी परेशानी से बच सकते हैं।

……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गर्मी, उमस और पसीने से होती घमौरियां: डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें घरेलू उपचार, बचाव के 8 टिप्स, कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी

गर्मियों में तेज धूप, उमस और पसीने से स्किन पर खुजली, लाल दाने या रैशेज हो जाते हैं। लोग इसे हल्की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार ये हीट रैश यानी घमौरियां हो सकती हैं। स्किन पर स्वेट डक्ट्स होते हैं, जिनसे पसीना निकलता है। इनके ब्लॉक होने पर पसीना स्किन के अंदर ही फंस जाता है। इससे हीट रैश होता है। आगे पढ़िए…

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राजनीति

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क्या आपने भी नोटिस किया है कि गर्मियों में डाइजेशन अक्सर खराब हो जाता है? यह सिर्फ खानपान की गलती नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों का असर होता है।

ज्यादा तापमान, डिहाइड्रेशन और लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी गलतियां पाचन तंत्र की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सही फूड चॉइस और खाने का टाइम समझना बेहद जरूरी है।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज समझेंगे कि गर्मियों में डाइजेशन क्यों कमजोर हो जाता है। साथ ही जानेंगे कि-

  • किन फूड्स-ड्रिंक्स को अवॉइड करना चाहिए?
  • कौन-सी चीजें डाइजेस्टिव सिस्टम को कूल और एक्टिव रखती हैं?

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सवाल- क्या ये फैक्ट है कि गर्मियों में पाचन तंत्र की खाना पचाने की क्षमता कम हो जाती है?

जवाब- हां, गर्मियों में पाचन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं-

  • गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ता है, जिससे ब्लड फ्लो स्किन की तरफ शिफ्ट हो जाता है।
  • इसके कारण डाइजेस्टिव ऑर्गन्स को थोड़ा कम ब्लड मिलता है। इसलिए वे पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते हैं।
  • ज्यादा पसीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे पाचन एंजाइम्स की काम करने की क्षमता घट सकती है।

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जवाब- गर्मियों में तापमान बढ़ने पर शरीर का कामकाज प्रभावित होता है, इसके सभी कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- तापमान का बढ़ना डाइजेस्टिव सिस्टम और मेटाबॉलिज्म पर क्या असर डालता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

डाइजेस्टिव सिस्टम

  • ज्यादा गर्मी में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में ब्लड सप्लाई कम होने से पाचन क्षमता घटती है।
  • डिहाइड्रेशन के कारण गैस्ट्रिक जूस और डाइजेस्टिव एंजाइम्स का सिक्रेशन कम होने से फूड ब्रेकडाउन प्रभावित होता है।
  • हीट स्ट्रेस गट माइक्रोब्स के बैलेंस को बिगाड़ सकता है, जिससे डायरिया या गट इंफेक्शन का रिस्क बढ़ता है।

मेटाबॉलिज्म

  • शरीर का बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) गर्मी में थोड़ा कम हो सकता है क्योंकि शरीर को हीट प्रोडक्शन कम रखना होता है।
  • ज्यादा तापमान में थायरॉइड हाॅर्मोन एक्टिविटी पर हल्का असर पड़ सकता है, जिससे मेटाबॉलिक प्रोसेस धीमे हो सकते हैं।
  • हीट के कारण इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस (जैसे सोडियम-पोटेशियम) होता है, जो सेलुलर मेटाबॉलिज्म और एनर्जी प्रोडक्शन को प्रभावित करता है।

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जवाब- ज्यादा तापमान से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट कम हो जाते हैं।

  • डिहाइड्रेशन से पाचन एंजाइम और गट मूवमेंट प्रभावित होते हैं।
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  • भूख कम लगने से खाने का पैटर्न बिगड़ सकता है।
  • ऑयली और स्पाइसी खाने से पाचन पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में किन लोगों को डाइजेस्टिव समस्याओं का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- किसी भी हेल्थ प्रॉब्लम का रिस्क सबसे ज्यादा उन लोगों को होता है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। ग्राफिक में देखिए, किन्हें ज्यादा रिस्क होता है-

सवाल- हाई टेम्परेचर और एनवायर्नमेंटल कारणों के अलावा क्या लाइफस्टाइल और फूड हैबिट्स भी गर्मियों में डाइजेशन बिगाड़ सकती हैं?

जवाब- बहुत तला-भुना भोजन पेट में ज्यादा समय तक रहता है, जिससे अपच और एसिडिटी का रिस्क होता है।

  • पर्याप्त पानी न पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन होता है, जो डाइजेस्टिव एंजाइम्स के सीक्रेशन और गट मूवमेंट को प्रभावित करता है।
  • देर रात भोजन करने से सर्केडियन रिद्म बाधित होती है और एंजाइम्स असंतुलित हो सकते हैं।
  • शुगरी और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स लेने से गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।
  • लंबे समय तक बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे फूड-ब्रेकडाउन प्रभावित होता है।
  • जल्दी-जल्दी या जरूरत से ज्यादा खाना पेट पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
  • ज्यादा तनाव गट-ब्रेन एक्सिस को प्रभावित कर पाचन समस्याएं बढ़ा सकता है।

सवाल- गर्मियों में डाइजेशन को अच्छा रखने के लिए रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में कौन-से बदलाव करने चाहिए?

जवाब- हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन लेने से पाचन तंत्र संतुलित रहता है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें-

  • डाइट में फाइबर रिच फूड्स शामिल करें।
  • रोज नियमित समय पर सोएं और जागें। 8 घंटे की अच्छी नींद लें।
  • रेगुलर वॉक या स्ट्रेचिंग करें।
  • बहुत गर्म भोजन या ड्रिंक से बचें।
  • प्रोबायोटिक फूड्स जैसे दही और छाछ लें।
  • लाइफस्टाइल में रिलैक्सेशन टेक्नीक जैसे मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग करें।

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जवाब- डीप फ्राइड फूड्स जैसे पकौड़े, समोसे और चिप्स देर से पचते हैं और हीट प्रोडक्शन बढ़ाते हैं। अवाॅइड फूड की पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कौन-से फूड्स, फल और ड्रिंक्स डाइजेस्टिव सिस्टम को ठंडा और एक्टिव रखते हैं?

जवाब- गर्मियों में पानी से भरपूर और सुपाच्य फूड पेट पर कम दबाव डालते हैं और डाइजेस्टिव प्रोसेस को आसान बनाते हैं। पूरी फूड लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में खाने का सही टाइम और पोर्शन साइज क्या होना चाहिए, ताकि पेट पर दबाव न पड़े?

जवाब- सुबह उठने के 1 घंटे के भीतर हल्का नाश्ता लेने से मेटाबॉलिक प्रोसेस समय पर शुरू होता है।

  • दिन में हर 3-4 घंटे पर छोटे मील्स लेने से गैस्ट्रिक ओवरलोड और एसिडिटी का रिस्क कम होता है।
  • लंच को दिन का मुख्य भोजन बनाएं। इस समय डाइजेस्टिव एंजाइम्स की एक्टिविटी अपेक्षाकृत बेहतर होती है।
  • एक बार में बहुत ज्यादा खाने की बजाय 60-70% पेट भरने का तरीका अपनाएं।

सवाल- अगर गर्मियों में बार-बार अपच, उल्टी और दस्त हो तो क्या डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

जवाब- हां, 2–3 दिनों से ज्यादा समय तक लक्षण बने रहने पर इन्फेक्शन या फूड पॉइजनिंग का रिस्क होता है।

  • तेज बुखार, पूप में ब्लड या बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे संकेत का मतलब मेडिकल अटेंशन की जरूरत है।
  • बच्चों, बुजुर्गों और प्रेग्नेंट महिलाओं को जल्दी सलाह लेनी चाहिए।
  • बार-बार अपच गैस्ट्राइटिस या इरिटेबल बाउल जैसी समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है।
  • डॉक्टर जरूरत के अनुसार ओरल रिहाइड्रेशन, दवाएं या टेस्ट सलाह दे सकते हैं। समय पर इलाज से बड़ी परेशानी से बच सकते हैं।

……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गर्मी, उमस और पसीने से होती घमौरियां: डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें घरेलू उपचार, बचाव के 8 टिप्स, कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी

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