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भारत- पहली बार 50 हजार जवानों की अलग ड्रोन फोर्स:BSF और ITBP में भी बनेंगी, किसी भी सैन्य हमले में सबसे पहले यही प्रहार करेंगी

भारत- पहली बार 50 हजार जवानों की अलग ड्रोन फोर्स:BSF और ITBP में भी बनेंगी, किसी भी सैन्य हमले में सबसे पहले यही प्रहार करेंगी

ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक युद्धों (रूस-यूक्रेन व पश्चिम एशिया) से सबक लेते हुए भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक ‘ड्रोन फोर्स’ बनाने का निर्णय लिया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ (पहली जवाबी कार्रवाई) के तौर पर तैनात की जाएगी। इसे डेटा और कॉग्निटिव वारफेयर फोर्स का तकनीकी समर्थन होगा। इंटीग्रेटेड रक्षा मुख्यालय के अनुसार इस फोर्स के लिए अभी 50 हजार सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। अगले 3 साल में 15 नए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाए जाएंगे। यहां सिम्युलेटर और वर्चुअल रियलिटी के जरिए रीयल-टाइम बैटल ट्रेनिंग दी जाएगी। भविष्य में बीएसएफ और आईटीबीपी जैसे सुरक्षा बलों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह फोर्स इंटेलिजेंस, सर्विलांस और सटीक प्रहार की दोहरी भूमिका निभाएगी। इस तंत्र को वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड और सेना के ‘आकाशतीर’ सिस्टम का कवच मिलेगा। डिफेंस ईकोसिस्टम भी नया, तीनों सेनाएं एक ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत ने खुद को रक्षा उत्पादन में काफी मजबूत किया है। यह 1.54 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। तीनों सेनाओं की थिएटर कमान बन रही है। दुश्मन के सस्ते ड्रोन्स से निपटने के लिए अब किफायती ‘सॉफ्ट किल’ (जैमिंग/स्पूफिंग) और ‘हार्ड किल’ (लेजर-आधारित डायरेक्टेड एनर्जी वेपन) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। बता दें कि ड्रोन फोर्स का विचार पिछले साल तब आया, जब पाकिस्तान ने 1,000 ड्रोन्स से हमला किया। उसका मकसद हमारे एयर डिफेंस गैप्स को समझना और महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम को सस्ते ड्रोन्स के जरिए आर्थिक नुकसान पहुंचाना था। हर फौजी के पास होगा अपना ड्रोन सेना की योजना इस ड्रोन फोर्स के हर जवान को ड्रोन चलाने की बेसिक ट्रेनिंग देने की है। लक्ष्य यह है कि युद्ध के मैदान में हर फौजी के पास अपना ड्रोन हो। इसके अलावा, सेना की प्रत्येक कोर में 8,000 ड्रोन्स शामिल करने की योजना है, जिससे एक लाख ड्रोन्स की विशाल शक्ति तैयार होगी। हमारे हथियार:- इस साल 120 डिफेंस स्टार्टअप खुले ​ 20 नई कंपनियां सिर्फ ड्रोन, एआई, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में एक्टिव हैं। इनकी मदद 16 हजार एमएसएमई कर रहे हैं। 7.85 लाख करोड़ के रक्षा बजट का 75% हिस्सा भारत में ही खर्च हो रहा। जबकि इस एक साल में भारत का कुल रक्षा आयात 11 से 15% घटा है। हमारा कौशल:- ड्रोन के ‘दिल-दिमाग’ भी यहीं बन रहे, मिसाइल का दिल यानी सीकर्स (अहम सेंसर) और दिमाग यानी इंजन। इन्हें भारतीय कंपनियां पीटीसी इंडस्ट्रीज, डेटा पैटर्न्स और सोलर इंडस्ट्रीज बना रहे हैं। पहले ये हिस्से रूस से मिलते थे। 2015 में ब्रह्मोस मिसाइल के 15% पुर्जे स्वदेशी थे, आज 72% हैं। मिसाइलों का मेंटेनेंस भारत में ही होगा इधर यूरोपीय रक्षा दिग्गज कंपनी एमबीडीए के साथ भारतीय वायुसेना का एक अहम समझौता हुआ है। समझौते के तहत राफेल लड़ाकू विमान में लगने वाली मीका एयर टू एयर मिसाइलों का रखरखाव अब भारत में ही वायुसेना करेगी। इसके लिए देश में इनके ‘मेंटेनेंस, रिपेयर, मिड लाइफ ओवरहॉल’ की सुविधा तैयार की जाएगी। यह कदम भारत द्वारा प्रस्तावित 114 अतिरिक्त मल्टीरोल लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण से ठीक पहले उठाया गया है। बता दें कि यह 60-80 किमी रेंज की छोटी से मध्यम दूरी वाली मिसाइल है। इसे राफेल विमानों में बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (दृश्य सीमा से परे) और क्लोज-कॉम्बैट (नजदीकी डॉगफाइट) दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे ड्रोन जो जाम नहीं होंगे और बिना जीपीएस चलेंगे एयर कमोडोर गौरव एम त्रिपाठी (रिटायर्ड) के मुताबिक भविष्य के ऑपरेशन मल्टी-डोमेन होंगे। ‘अंतरिक्ष से समुद्र’ तक। इसमें कम्युनिकेशन ‘चेन’ नहीं, बल्कि एक साथ चलने वाला ‘वेब’ होगा। त्रिपाठी ने बताया कि इसके अलावा, अगली बार हमारा सामना ‘हार्डन्ड’ ड्रोन से हो सकता है, जिन्हें जाम करना मुश्किल होगा, जिनमें बेहतर नेविगेशन, जीपीएस के बिना काम करने की क्षमता, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल होमिंग और झुंड में हमला करने की ताकत होगी। इसके लिए हमें एंटी-ड्रोन क्षमता का दायरा सभी अहम ठिकानों तक बढ़ाना होगा। कम्युनिकेशन सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर वॉरफेयर के खिलाफ मजबूत बनाना होगा। ………….. यह खबर भी पढ़ें… भारत रूस से 5 S-400 सुदर्शन डिफेंस सिस्टम खरीदेगा: पाकिस्तान-चीन सीमा पर तैनात किया जाएगा; वायुसेना ने इसे ऑपरेशन सिंदूर में गेम चेंजर बताया था
भारत रूस से 5 नए S-400 ‘सुदर्शन’ एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की तैयारी में है। रक्षा मंत्रालय जल्द ही वायुसेना के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाएगा। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के आधार पर सोमवार को बताया कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम के प्रदर्शन के बाद और खरीदने का निर्णय लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

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