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KPIT Co-Founder Ravi Pandit Passes Away

KPIT Co-Founder Ravi Pandit Passes Away

पुणे27 मिनट पहले

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टेक कंपनी केपीआईटी (KPIT) ग्रुप के चेयरमैन और को-फाउंडर रवि पंडित का 72 साल की उम्र में शुक्रवार (8 मई) को निधन हो गया। कंपनी ने एक बयान जारी कर उनके निधन की जानकारी दी।

हालांकि मौत के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। रवि पंडित को भारत के ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और मोबिलिटी टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के शुरुआती आर्किटेक्ट्स में गिना जाता था।

3 दशक में KPIT को ग्लोबल कंपनी बनाया

रवि पंडित ने तीन दशकों से ज्यादा समय तक पुणे मुख्यालय वाली कंपनी KPIT का नेतृत्व किया। उनके मार्गदर्शन में KPIT एक घरेलू आईटी सर्विसेज कंपनी से बदलकर ग्लोबल ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और मोबिलिटी इंजीनियरिंग फर्म बनी। आज यह कंपनी अमेरिका, यूरोप और एशिया के वाहन निर्माताओं को अपनी सेवाएं दे रही है।

पंडित के नेतृत्व में कंपनी ने सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी, इलेक्ट्रिफिकेशन, ऑटोनॉमस ड्राइविंग और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी पर फोकस किया। वर्तमान में KPIT का ऑपरेशन दुनिया के 15 देशों में फैला हुआ है।

इंटरनेशनल लेवल तक पहुंचाया चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म का काम

KPIT के अलावा रवि पंडित ‘कीर्तने एंड पंडित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स’ (KPCA) के भी चेयरमैन थे। यह एक प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म है, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने में मदद की।

उनके प्रयासों से KPCA भारतीय मूल की सबसे बड़ी प्रोफेशनल सर्विसेज फर्मों में से एक बन गई, जिसमें 15 देशों के 1,200 से ज्यादा एक्सपर्ट्स काम करते हैं।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के इकलौते प्राइवेट सेक्टर मेंबर

रवि पंडित का प्रभाव केवल कॉर्पोरेट जगत तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक नीति और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया।

वे भारत के ‘एम्पायर्ड ग्रुप फॉर नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ में प्राइवेट सेक्टर के एकमात्र प्रतिनिधि थे। हाल ही में उन्होंने ‘हृदय’ पहल को बढ़ावा दिया था, जो हाइड्रोजन आधारित ग्रामीण और कृषि विकास पर केंद्रित है।

रवि पंडित कई बड़े संस्थानों के बोर्ड में रहे शामिल

वे पुणे इंटरनेशनल सेंटर और ‘जनवानी’ जैसे नागरिक और नीतिगत प्लेटफार्मों के सह-संस्थापक भी थे। उन्होंने कई नामचीन संस्थाओं के बोर्ड में अपनी सेवाएं दीं।

जिनमें थरमैक्स लिमिटेड, वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया, आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम इंडिया शामिल हैं। वे मराठा चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (MCCIA) के अध्यक्ष भी रहे।

गोल्ड मेडलिस्ट CA और अवॉर्ड लेखक

रवि पंडित एक गोल्ड मेडलिस्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट थे। उन्होंने एमआईटी स्लोअन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से पढ़ाई की थी और वे इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के फेलो भी थे।

उन्हें कोवेंट्री यूनिवर्सिटी और एमिटी यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उन्होंने ‘लीपफ्रॉगिंग टू पोल-वॉल्टिंग’ नामक एक पुरस्कार विजेता पुस्तक भी लिखी, जो नवाचार और सतत विकास पर आधारित है।

सॉफ्टवेयर डिफाइंड मोबिलिटी क्या है?

यह ऐसी तकनीक है जहां वाहनों के फीचर्स और फंक्शन मैकेनिकल हार्डवेयर के बजाय सॉफ्टवेयर द्वारा कंट्रोल किए जाते हैं। रवि पंडित इसके शुरुआती समर्थकों में से थे।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

भारत सरकार का वह लक्ष्य जिसके तहत देश को स्वच्छ ऊर्जा का ग्लोबल हब बनाना है। रवि पंडित इस मिशन के कोर ग्रुप में प्राइवेट सेक्टर की इकलौती आवाज थे।

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हालांकि मौत के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। रवि पंडित को भारत के ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और मोबिलिटी टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के शुरुआती आर्किटेक्ट्स में गिना जाता था।

3 दशक में KPIT को ग्लोबल कंपनी बनाया

रवि पंडित ने तीन दशकों से ज्यादा समय तक पुणे मुख्यालय वाली कंपनी KPIT का नेतृत्व किया। उनके मार्गदर्शन में KPIT एक घरेलू आईटी सर्विसेज कंपनी से बदलकर ग्लोबल ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और मोबिलिटी इंजीनियरिंग फर्म बनी। आज यह कंपनी अमेरिका, यूरोप और एशिया के वाहन निर्माताओं को अपनी सेवाएं दे रही है।

पंडित के नेतृत्व में कंपनी ने सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी, इलेक्ट्रिफिकेशन, ऑटोनॉमस ड्राइविंग और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी पर फोकस किया। वर्तमान में KPIT का ऑपरेशन दुनिया के 15 देशों में फैला हुआ है।

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उनके प्रयासों से KPCA भारतीय मूल की सबसे बड़ी प्रोफेशनल सर्विसेज फर्मों में से एक बन गई, जिसमें 15 देशों के 1,200 से ज्यादा एक्सपर्ट्स काम करते हैं।

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वे भारत के ‘एम्पायर्ड ग्रुप फॉर नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ में प्राइवेट सेक्टर के एकमात्र प्रतिनिधि थे। हाल ही में उन्होंने ‘हृदय’ पहल को बढ़ावा दिया था, जो हाइड्रोजन आधारित ग्रामीण और कृषि विकास पर केंद्रित है।

रवि पंडित कई बड़े संस्थानों के बोर्ड में रहे शामिल

वे पुणे इंटरनेशनल सेंटर और ‘जनवानी’ जैसे नागरिक और नीतिगत प्लेटफार्मों के सह-संस्थापक भी थे। उन्होंने कई नामचीन संस्थाओं के बोर्ड में अपनी सेवाएं दीं।

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गोल्ड मेडलिस्ट CA और अवॉर्ड लेखक

रवि पंडित एक गोल्ड मेडलिस्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट थे। उन्होंने एमआईटी स्लोअन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से पढ़ाई की थी और वे इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के फेलो भी थे।

उन्हें कोवेंट्री यूनिवर्सिटी और एमिटी यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उन्होंने ‘लीपफ्रॉगिंग टू पोल-वॉल्टिंग’ नामक एक पुरस्कार विजेता पुस्तक भी लिखी, जो नवाचार और सतत विकास पर आधारित है।

सॉफ्टवेयर डिफाइंड मोबिलिटी क्या है?

यह ऐसी तकनीक है जहां वाहनों के फीचर्स और फंक्शन मैकेनिकल हार्डवेयर के बजाय सॉफ्टवेयर द्वारा कंट्रोल किए जाते हैं। रवि पंडित इसके शुरुआती समर्थकों में से थे।

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