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टाटा ट्रस्ट्स की अहम बैठक 16 मई तक टली:टाटा संस की लिस्टिंग पर फैसला होना था; बोर्ड में गवर्नेंस और हिस्सेदारी को लेकर मतभेद

टाटा ट्रस्ट्स की अहम बैठक 16 मई तक टली:टाटा संस की लिस्टिंग पर फैसला होना था; बोर्ड में गवर्नेंस और हिस्सेदारी को लेकर मतभेद

टाटा ट्रस्ट्स की आज 8 मई को होने वाली महत्वपूर्ण बोर्ड मीटिंग अब 16 मई को होगी। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक आंतरिक मतभेदों के चलते इस बैठक को टाला गया है। यह दूसरी बार है जब मीटिंग की तारीख बदली गई है। पहले यह मीटिंग 12 मई को होनी थी। बार-बार तारीखें बदलने से ट्रस्ट के भीतर चल रही चर्चाओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ग्रुप के भविष्य और गवर्नेंस से जुड़े 4 अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी मीटिंग: अब टाटा संस की लिस्टिंग विवाद पर यह QA पढ़े.. 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। नॉलेज पार्ट: क्या होता है नॉमिनी डायरेक्टर? जब कोई संस्था जैसे टाटा ट्रस्ट किसी दूसरी कंपनी जैसे टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी रखती है, तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए उस कंपनी के बोर्ड में अपने प्रतिनिधि भेजती है। इन्हें ही ‘नॉमिनी डायरेक्टर’ कहा जाता है। इनका काम यह सुनिश्चित करना होता है कि कंपनी के फैसले मुख्य संस्था की विचारधारा के अनुरूप हों।

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टाटा ट्रस्ट्स की अहम बैठक 16 मई तक टली:टाटा संस की लिस्टिंग पर फैसला होना था; बोर्ड में गवर्नेंस और हिस्सेदारी को लेकर मतभेद

टाटा ट्रस्ट्स की अहम बैठक 16 मई तक टली:टाटा संस की लिस्टिंग पर फैसला होना था; बोर्ड में गवर्नेंस और हिस्सेदारी को लेकर मतभेद

टाटा ट्रस्ट्स की आज 8 मई को होने वाली महत्वपूर्ण बोर्ड मीटिंग अब 16 मई को होगी। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक आंतरिक मतभेदों के चलते इस बैठक को टाला गया है। यह दूसरी बार है जब मीटिंग की तारीख बदली गई है। पहले यह मीटिंग 12 मई को होनी थी। बार-बार तारीखें बदलने से ट्रस्ट के भीतर चल रही चर्चाओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ग्रुप के भविष्य और गवर्नेंस से जुड़े 4 अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी मीटिंग: अब टाटा संस की लिस्टिंग विवाद पर यह QA पढ़े.. 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। नॉलेज पार्ट: क्या होता है नॉमिनी डायरेक्टर? जब कोई संस्था जैसे टाटा ट्रस्ट किसी दूसरी कंपनी जैसे टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी रखती है, तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए उस कंपनी के बोर्ड में अपने प्रतिनिधि भेजती है। इन्हें ही ‘नॉमिनी डायरेक्टर’ कहा जाता है। इनका काम यह सुनिश्चित करना होता है कि कंपनी के फैसले मुख्य संस्था की विचारधारा के अनुरूप हों।

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