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Karnataka Hijab Ban Order Revoked; Kalava, Rudraksha, Janeu Allowed

Karnataka Hijab Ban Order Revoked; Kalava, Rudraksha, Janeu Allowed

बेंगलुरु13 मिनट पहले

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फाइल फोटो।

कर्नाटक सरकार ने स्कूल और कॉलेजों में हिजाब बैन वाले 2022 के फैसले को वापस ले लिया है। नए आदेश के तहत स्टूडेंट्स को हिजाब के अलावा कलावा, रुद्राक्ष और जनेऊ की भी अनुमति दी गई है। बशर्ते ये स्कूल के अनुशासन और नियमों के तहत हों।

कर्नाटक की तत्कालीन BJP सरकार ने फरवरी 2022 में एक आदेश जारी किया था। जिसके तहत सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन करना अनिवार्य किया गया।

आदेश में कहा गया था कि ऐसे कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होगी जो ‘समानता, एकता और सार्वजनिक व्यवस्था’ को प्रभावित करें। इसी आदेश के बाद कई सरकारी शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर क्लॉस में इंट्री पर रोक लग गई थी।

अब कर्नाटक में हिजाब विवाद को जानिए…

दिसंबर 2021 में शुरू हुआ था हिजाब पर विवाद

कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज में 31 दिसंबर 2021 को 6 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने से रोक दिया गया था, जिसके बाद वे धरने पर बैठ गईं। यह विवाद राज्य के बाकी हिस्सों में भी फैल गया। इसके बाद हिंदू संगठनों से जुड़े छात्रों ने बदले में भगवा शॉल पहनकर कॉलेज आना शुरू कर दिया।

हिंसा हुई तो फरवरी 2022 में राज्य सरकार ने स्कूल-कॉलेजों में सभी तरह के धार्मिक पहचान वाले कपड़े पहनने पर रोक लगा दी। आदेश में कहा गया था कि कोई भी कपड़ा जो समानता, अखंडता और सार्वजनिक कानून व्यवस्था को परेशान करेगा, उसे पहनने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस आदेश को लेकर जमकर बवाल हुआ था।

मार्च 2022 में हाईकोर्ट पहुंचा मामला, आदेश बरकरार रहा

मार्च 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को सही ठहराया और कहा कि इस्लाम में हिजाब ‘अनिवार्य धार्मिक प्रथा’ साबित नहीं हुआ। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच में विभाजित फैसला आया। एक जज ने बैन हटाने की बात कही, दूसरे ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

कर्नाटक सरकार को फैसला बदलने में 4 साल क्यों लग गए

अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के दो-जजों की बेंच ने विभाजित फैसला दिया। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले और बैन को सही माना। जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा कि छात्राओं की शिक्षा और पसंद ज्यादा महत्वपूर्ण है और बैन गलत है।

दोनों जजों की राय अलग होने के कारण मामला बड़ी बेंच को रेफर कर दिया गया। इसके बाद कई साल तक बड़ी बेंच में नियमित सुनवाई शुरू नहीं हुई और अंतिम संवैधानिक फैसला लंबित रहा।

इस बीच कानूनी स्थिति यह बनी रही कि कर्नाटक हाईकोर्ट का 2022 वाला फैसला प्रभावी माना जाता रहा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उसे पूरी तरह निरस्त नहीं किया था। चार साल के इंतजार के बाद जब कोर्ट की तरफ से कोई अंतिम फैसला नहीं आया। तब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर पुराना बैन आदेश वापस ले लिया।

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ये खबर भी पढ़ें…

डिप्टी CM शिवकुमार बोले- आखिर हम भी हिंदू हैं: रोज करता हूं भगवान राम की पूजा

कर्नाटक के डिप्टी CM डीके शिवकुमार ने राम मंदिर को लेकर हो रही राजनीति पर कहा, भगवान राम किसी एक के नहीं हैं। आखिर हम सब हिंदू हैं। शिवकुमार ने ये बातें अपनी सरकार के उस फैसले का बचाव करते हुए कहीं। जिसमें राज्य सरकार ने 22 जनवरी को कर्नाटक के सभी मंदिरों में विशेष पूजा करवाने का आदेश दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

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बेंगलुरु13 मिनट पहले

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फाइल फोटो।

कर्नाटक सरकार ने स्कूल और कॉलेजों में हिजाब बैन वाले 2022 के फैसले को वापस ले लिया है। नए आदेश के तहत स्टूडेंट्स को हिजाब के अलावा कलावा, रुद्राक्ष और जनेऊ की भी अनुमति दी गई है। बशर्ते ये स्कूल के अनुशासन और नियमों के तहत हों।

कर्नाटक की तत्कालीन BJP सरकार ने फरवरी 2022 में एक आदेश जारी किया था। जिसके तहत सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन करना अनिवार्य किया गया।

आदेश में कहा गया था कि ऐसे कपड़े पहनने की अनुमति नहीं होगी जो ‘समानता, एकता और सार्वजनिक व्यवस्था’ को प्रभावित करें। इसी आदेश के बाद कई सरकारी शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर क्लॉस में इंट्री पर रोक लग गई थी।

अब कर्नाटक में हिजाब विवाद को जानिए…

दिसंबर 2021 में शुरू हुआ था हिजाब पर विवाद

कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज में 31 दिसंबर 2021 को 6 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने से रोक दिया गया था, जिसके बाद वे धरने पर बैठ गईं। यह विवाद राज्य के बाकी हिस्सों में भी फैल गया। इसके बाद हिंदू संगठनों से जुड़े छात्रों ने बदले में भगवा शॉल पहनकर कॉलेज आना शुरू कर दिया।

हिंसा हुई तो फरवरी 2022 में राज्य सरकार ने स्कूल-कॉलेजों में सभी तरह के धार्मिक पहचान वाले कपड़े पहनने पर रोक लगा दी। आदेश में कहा गया था कि कोई भी कपड़ा जो समानता, अखंडता और सार्वजनिक कानून व्यवस्था को परेशान करेगा, उसे पहनने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस आदेश को लेकर जमकर बवाल हुआ था।

मार्च 2022 में हाईकोर्ट पहुंचा मामला, आदेश बरकरार रहा

मार्च 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को सही ठहराया और कहा कि इस्लाम में हिजाब ‘अनिवार्य धार्मिक प्रथा’ साबित नहीं हुआ। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच में विभाजित फैसला आया। एक जज ने बैन हटाने की बात कही, दूसरे ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

कर्नाटक सरकार को फैसला बदलने में 4 साल क्यों लग गए

अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के दो-जजों की बेंच ने विभाजित फैसला दिया। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले और बैन को सही माना। जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा कि छात्राओं की शिक्षा और पसंद ज्यादा महत्वपूर्ण है और बैन गलत है।

दोनों जजों की राय अलग होने के कारण मामला बड़ी बेंच को रेफर कर दिया गया। इसके बाद कई साल तक बड़ी बेंच में नियमित सुनवाई शुरू नहीं हुई और अंतिम संवैधानिक फैसला लंबित रहा।

इस बीच कानूनी स्थिति यह बनी रही कि कर्नाटक हाईकोर्ट का 2022 वाला फैसला प्रभावी माना जाता रहा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उसे पूरी तरह निरस्त नहीं किया था। चार साल के इंतजार के बाद जब कोर्ट की तरफ से कोई अंतिम फैसला नहीं आया। तब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर पुराना बैन आदेश वापस ले लिया।

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