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SC Questions Centre on Election Commissioner Appointments

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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग में नियुक्तियों को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। कोर्ट ने कहा- अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि CBI डायरेक्टर की सिलेक्शन कमेटी में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं रखा गया है।

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। इनमें बहुमत के आधार पर एक नाम का चयन होता है। अभी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं।

दो दिन पहले 12 मई को राहुल ने CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति दी थी। राहुल ने PM आवास पर सिलेक्शन कमेटी की बैठक के बाद कहा- सरकार ने चयन प्रक्रिया को केवल एक औपचारिकता बना दिया है। किसी पहले से तय व्यक्ति का चयन होता है। विपक्ष का नेता रबर स्टांप नहीं होता।

कोर्ट ने कहा- नेता विपक्ष दिखावटी हो जाते हैं

कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से पूछा, “अगर प्रधानमंत्री एक नाम चुनते हैं और विपक्ष का नेता दूसरा नाम चुनता है, और दोनों में मतभेद होता है, तो क्या तीसरा सदस्य विपक्ष के नेता के पक्ष में जाएगा?”

इस पर अटॉर्नी जनरल ने माना कि शायद ऐसा नहीं होगा। इस पर कोर्ट ने कहा- तो फिर सब कुछ कार्यपालिका ही कंट्रोल कर रही है। ऐसे में विपक्ष के नेता को शामिल ही क्यों करते हैं? वे सिर्फ दिखावटी हो जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती

कोर्ट ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

इस कानून के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली समिति करेगी।

याचिकाओं में कहा गया है कि यह कानून स्वतंत्र चुनाव आयोग की संवैधानिक आवश्यकता का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसमें चयन प्रक्रिया से CJI को बाहर रखा गया है।

यह चुनौती सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ के बाद सामने आई है। उस फैसले में कहा गया था कि जब तक संसद कानून नहीं बनाती, तब तक चुनाव आयोग में नियुक्तियां प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI वाली समिति के जरिए की जाएंगी।

12 मई : राहुल बोले- विपक्ष का नेता रबर स्टैंप नहीं

राहुल गांधी ने 12 मई को पीएम आवास पर हुई मीटिंग में नए CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति जताई थी। राहुल ने आरोप लगाया कि चयन के लिए जिन 69 उम्मीदवारों की लिस्ट दी है। उन्हें उनकी डिटेल उपलब्ध नहीं कराई।

राहुल ने कहा- CBI डायरेक्टर का सिलेक्शन प्रोसेस सिर्फ एक फॉर्मेलिटी बना दिया गया। वे इस पक्षपातपूर्ण काम में शामिल होकर अपनी संवैधानिक ड्यूटी से पीछे नहीं हट सकते। लेकिन कड़े शब्दों में अपनी असहमति जताता हूं।

प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बैठक में CJI सूर्यकांत भी शामिल हुए थे। बैठक करीब एक घंटे चली। मीटिंग से निकलने के बाद राहुल ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया। जिसमें अपनी असहमति का कारण बताया।

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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि CBI डायरेक्टर की सिलेक्शन कमेटी में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं रखा गया है।

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। इनमें बहुमत के आधार पर एक नाम का चयन होता है। अभी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं।

दो दिन पहले 12 मई को राहुल ने CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति दी थी। राहुल ने PM आवास पर सिलेक्शन कमेटी की बैठक के बाद कहा- सरकार ने चयन प्रक्रिया को केवल एक औपचारिकता बना दिया है। किसी पहले से तय व्यक्ति का चयन होता है। विपक्ष का नेता रबर स्टांप नहीं होता।

कोर्ट ने कहा- नेता विपक्ष दिखावटी हो जाते हैं

कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से पूछा, “अगर प्रधानमंत्री एक नाम चुनते हैं और विपक्ष का नेता दूसरा नाम चुनता है, और दोनों में मतभेद होता है, तो क्या तीसरा सदस्य विपक्ष के नेता के पक्ष में जाएगा?”

इस पर अटॉर्नी जनरल ने माना कि शायद ऐसा नहीं होगा। इस पर कोर्ट ने कहा- तो फिर सब कुछ कार्यपालिका ही कंट्रोल कर रही है। ऐसे में विपक्ष के नेता को शामिल ही क्यों करते हैं? वे सिर्फ दिखावटी हो जाते हैं।

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इस कानून के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली समिति करेगी।

याचिकाओं में कहा गया है कि यह कानून स्वतंत्र चुनाव आयोग की संवैधानिक आवश्यकता का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसमें चयन प्रक्रिया से CJI को बाहर रखा गया है।

यह चुनौती सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ के बाद सामने आई है। उस फैसले में कहा गया था कि जब तक संसद कानून नहीं बनाती, तब तक चुनाव आयोग में नियुक्तियां प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI वाली समिति के जरिए की जाएंगी।

12 मई : राहुल बोले- विपक्ष का नेता रबर स्टैंप नहीं

राहुल गांधी ने 12 मई को पीएम आवास पर हुई मीटिंग में नए CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति जताई थी। राहुल ने आरोप लगाया कि चयन के लिए जिन 69 उम्मीदवारों की लिस्ट दी है। उन्हें उनकी डिटेल उपलब्ध नहीं कराई।

राहुल ने कहा- CBI डायरेक्टर का सिलेक्शन प्रोसेस सिर्फ एक फॉर्मेलिटी बना दिया गया। वे इस पक्षपातपूर्ण काम में शामिल होकर अपनी संवैधानिक ड्यूटी से पीछे नहीं हट सकते। लेकिन कड़े शब्दों में अपनी असहमति जताता हूं।

प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बैठक में CJI सूर्यकांत भी शामिल हुए थे। बैठक करीब एक घंटे चली। मीटिंग से निकलने के बाद राहुल ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया। जिसमें अपनी असहमति का कारण बताया।

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