Saturday, 24 Oct 2026 | 03:03 AM

Trending :

EXCLUSIVE

आयुर्वेद के अनुसार खाने का सही समय सूरज के साथ क्यों जरूरी है

authorimg

भूख लगने पर खाना के सिवा कुछ नहीं दिखता है, और न खाओ तो सबसे पहले दिमाग काम करना बंद कर देता है. इसलिए लोग खाने के सही समय को नजरअंदाज करके इस बात पर ध्यान देते हैं, कि जब भूख लगे तब खाना खा लेना चाहिए.जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर कोई मशीन नहीं है, बल्कि प्रकृति का हिस्सा है. इसे ठीक रखने के लिए दवाइयों या सख्त डाइट की बजाय सूरज के रिदम का सम्मान करना चाहिए.

वास्तव में बॉडी सन क्लॉक के हिसाब से चलती है.सदियों पुराना आयुर्वेद यही सिखाता आ रहा है कि खाने का समय घड़ी से नहीं, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त से तय होना चाहिए. जब हम सूरज के साथ खाते हैं तो पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर अंदर से खुद ठीक होने लगता है.

बीमारियों की जड़ सूरज को नजरअंदाज करना
आजकल हम घड़ी के हिसाब से जीते हैं, जिससे शरीर सूरज के पीछे चलता है. जब हम सूरज ढलने के बाद भी भारी खाना खाते हैं तो पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है और कई बीमारियां शुरू हो जाती हैं. आयुर्वेद का मूल मंत्र है– जब सूरज तेज हो, तब खाएं; जब सूरज डूब जाए, तब आराम करें. इस साधारण नियम को अपनाकर लोग बिना किसी सख्त डाइट के स्वस्थ रह सकते हैं.

हर समय का खाना अलग होना चाहिए
ब्रेकफास्ट
आयुर्वेद के अनुसार, दिन के तीन मुख्य समय हैं और हर समय का खाना अलग होना चाहिए. सुबह की शुरुआत हल्के और सादे भोजन से करें. सूरज उगते ही शरीर में पाचन की आग धीरे-धीरे जलनी शुरू होती है, इसलिए भारी या तला-भुना खाना न खाएं. इसके बजाय हल्दी वाला दूध, पोहा, उपमा, इडली, पोहा, फल या हल्का दलिया जैसे खाद्य पदार्थ लें. ये पेट को आराम देते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और दिनभर तरोताजा रखते हैं.

लंच
इसके बाद दोपहर का समय सबसे जरूरी है. जब सूरज सबसे ऊपर होता है, तब पाचन की अग्नि सबसे तेज जलती है. आयुर्वेद कहता है कि दोपहर का भोजन सबसे पौष्टिक और भरपूर होना चाहिए. इस समय दाल-चावल, रोटी-सब्जी, सांभर-चावल, घी वाली खिचड़ी खा सकते हैं. भारी और पौष्टिक भोजन दोपहर में ही पचता है, क्योंकि अग्नि मजबूत होती है.

डिनर
शाम को सूरज ढलते ही शरीर धीमा हो जाता है. पाचन की आग कमजोर पड़ जाती है, इसलिए रात का खाना हल्का और जल्दी पचने वाला होना चाहिए. सूप, खिचड़ी, मूंग दाल, नरम सब्जियां, दही-चावल या हल्की रोटी-सब्जी अच्छे विकल्प हैं. भारी, तला-भुना, मसालेदार या ज्यादा मीठा खाना रात में परेशानी पैदा करता है – जैसे अपच, भारीपन, नींद न आना या वजन बढ़ना.

रात में तेज भूख का मतलब गड़बड़ी
आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि ‘जब भी भूख लगे, खाओ’ जैसी आम सलाह गलत है. भूख का समय सूरज के साथ जुड़ा होता है. सुबह हल्की भूख, दोपहर में तेज भूख और शाम को बहुत कम भूख महसूस होनी चाहिए. अगर शाम को ज्यादा भूख लग रही है तो इसका मतलब है कि दिन का खान-पान गड़बड़ है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
अमेरिका-ईरान जंग से आज सोने में ₹5,000 की तेजी:ये ₹1.67 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा, चांदी ₹8500 बढ़कर ₹2.91 लाख पर कारोबार कर रही

March 2, 2026/
10:19 am

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते गोल्ड और सिल्वर मार्केट में तेजी है। वायदा बाजार (MCX) में सोने का दाम...

सलमान खान की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ में एंट्री कन्फर्म:रितेश देशमुख ने बिग बॉस मराठी में किया खुलासा, रोल पर सस्पेंस बरकरार

April 20, 2026/
4:04 pm

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने फैंस के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट पैदा कर...

मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों को भूली कंपनी:क्राफ्ट हाइंज को तोड़ने के बजाय सुधारेंगे नए सीईओ कैहिलेन; ग्राहकों की सेहत पर जोर

March 31, 2026/
1:53 pm

जब स्टीव कैहिलेन को क्राफ्ट हाइंज का सीईओ बनाया गया, तो काम साफ था- कंपनी को दो हिस्सों में तोड़ना।...

शतरंज का नन्हा जादूगर; दुनिया का नंबर-1 खिलाड़ी:तमिज अमुधन 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी, आठ साल की उम्र में जीती कार

March 11, 2026/
5:01 pm

तमिलनाडु के तमिज अमुधन इस समय विश्व शतरंज जगत में चर्चा का केंद्र है। मात्र 9 साल की उम्र में...

Google Preferred Source CTA

May 1, 2026/
5:53 am

ग्वालियर| सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समय-सीमा में निराकरण नहीं करने पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने 14 अधिकारियों...

Kerala cm VD Satheeshan oath udf congress rahul gandhi

May 18, 2026/
5:45 am

तिरुवनंतपुरम9 मिनट पहले कॉपी लिंक वीडी सतीशन केरलम के 13वें CM होंगे। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन (61) आज केरलम के...

Salman Khan Film Matrubhoomi Certificate Halted by CBFC

July 3, 2026/
5:59 pm

11 मिनट पहले कॉपी लिंक सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने एक्टर सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ का क्लियरेंस...

राजनीति

आयुर्वेद के अनुसार खाने का सही समय सूरज के साथ क्यों जरूरी है

authorimg

भूख लगने पर खाना के सिवा कुछ नहीं दिखता है, और न खाओ तो सबसे पहले दिमाग काम करना बंद कर देता है. इसलिए लोग खाने के सही समय को नजरअंदाज करके इस बात पर ध्यान देते हैं, कि जब भूख लगे तब खाना खा लेना चाहिए.जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर कोई मशीन नहीं है, बल्कि प्रकृति का हिस्सा है. इसे ठीक रखने के लिए दवाइयों या सख्त डाइट की बजाय सूरज के रिदम का सम्मान करना चाहिए.

वास्तव में बॉडी सन क्लॉक के हिसाब से चलती है.सदियों पुराना आयुर्वेद यही सिखाता आ रहा है कि खाने का समय घड़ी से नहीं, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त से तय होना चाहिए. जब हम सूरज के साथ खाते हैं तो पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर अंदर से खुद ठीक होने लगता है.

बीमारियों की जड़ सूरज को नजरअंदाज करना
आजकल हम घड़ी के हिसाब से जीते हैं, जिससे शरीर सूरज के पीछे चलता है. जब हम सूरज ढलने के बाद भी भारी खाना खाते हैं तो पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है और कई बीमारियां शुरू हो जाती हैं. आयुर्वेद का मूल मंत्र है– जब सूरज तेज हो, तब खाएं; जब सूरज डूब जाए, तब आराम करें. इस साधारण नियम को अपनाकर लोग बिना किसी सख्त डाइट के स्वस्थ रह सकते हैं.

हर समय का खाना अलग होना चाहिए
ब्रेकफास्ट
आयुर्वेद के अनुसार, दिन के तीन मुख्य समय हैं और हर समय का खाना अलग होना चाहिए. सुबह की शुरुआत हल्के और सादे भोजन से करें. सूरज उगते ही शरीर में पाचन की आग धीरे-धीरे जलनी शुरू होती है, इसलिए भारी या तला-भुना खाना न खाएं. इसके बजाय हल्दी वाला दूध, पोहा, उपमा, इडली, पोहा, फल या हल्का दलिया जैसे खाद्य पदार्थ लें. ये पेट को आराम देते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और दिनभर तरोताजा रखते हैं.

लंच
इसके बाद दोपहर का समय सबसे जरूरी है. जब सूरज सबसे ऊपर होता है, तब पाचन की अग्नि सबसे तेज जलती है. आयुर्वेद कहता है कि दोपहर का भोजन सबसे पौष्टिक और भरपूर होना चाहिए. इस समय दाल-चावल, रोटी-सब्जी, सांभर-चावल, घी वाली खिचड़ी खा सकते हैं. भारी और पौष्टिक भोजन दोपहर में ही पचता है, क्योंकि अग्नि मजबूत होती है.

डिनर
शाम को सूरज ढलते ही शरीर धीमा हो जाता है. पाचन की आग कमजोर पड़ जाती है, इसलिए रात का खाना हल्का और जल्दी पचने वाला होना चाहिए. सूप, खिचड़ी, मूंग दाल, नरम सब्जियां, दही-चावल या हल्की रोटी-सब्जी अच्छे विकल्प हैं. भारी, तला-भुना, मसालेदार या ज्यादा मीठा खाना रात में परेशानी पैदा करता है – जैसे अपच, भारीपन, नींद न आना या वजन बढ़ना.

रात में तेज भूख का मतलब गड़बड़ी
आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि ‘जब भी भूख लगे, खाओ’ जैसी आम सलाह गलत है. भूख का समय सूरज के साथ जुड़ा होता है. सुबह हल्की भूख, दोपहर में तेज भूख और शाम को बहुत कम भूख महसूस होनी चाहिए. अगर शाम को ज्यादा भूख लग रही है तो इसका मतलब है कि दिन का खान-पान गड़बड़ है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.