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आयुर्वेद के अनुसार खाने का सही समय सूरज के साथ क्यों जरूरी है

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भूख लगने पर खाना के सिवा कुछ नहीं दिखता है, और न खाओ तो सबसे पहले दिमाग काम करना बंद कर देता है. इसलिए लोग खाने के सही समय को नजरअंदाज करके इस बात पर ध्यान देते हैं, कि जब भूख लगे तब खाना खा लेना चाहिए.जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर कोई मशीन नहीं है, बल्कि प्रकृति का हिस्सा है. इसे ठीक रखने के लिए दवाइयों या सख्त डाइट की बजाय सूरज के रिदम का सम्मान करना चाहिए.

वास्तव में बॉडी सन क्लॉक के हिसाब से चलती है.सदियों पुराना आयुर्वेद यही सिखाता आ रहा है कि खाने का समय घड़ी से नहीं, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त से तय होना चाहिए. जब हम सूरज के साथ खाते हैं तो पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर अंदर से खुद ठीक होने लगता है.

बीमारियों की जड़ सूरज को नजरअंदाज करना
आजकल हम घड़ी के हिसाब से जीते हैं, जिससे शरीर सूरज के पीछे चलता है. जब हम सूरज ढलने के बाद भी भारी खाना खाते हैं तो पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है और कई बीमारियां शुरू हो जाती हैं. आयुर्वेद का मूल मंत्र है– जब सूरज तेज हो, तब खाएं; जब सूरज डूब जाए, तब आराम करें. इस साधारण नियम को अपनाकर लोग बिना किसी सख्त डाइट के स्वस्थ रह सकते हैं.

हर समय का खाना अलग होना चाहिए
ब्रेकफास्ट
आयुर्वेद के अनुसार, दिन के तीन मुख्य समय हैं और हर समय का खाना अलग होना चाहिए. सुबह की शुरुआत हल्के और सादे भोजन से करें. सूरज उगते ही शरीर में पाचन की आग धीरे-धीरे जलनी शुरू होती है, इसलिए भारी या तला-भुना खाना न खाएं. इसके बजाय हल्दी वाला दूध, पोहा, उपमा, इडली, पोहा, फल या हल्का दलिया जैसे खाद्य पदार्थ लें. ये पेट को आराम देते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और दिनभर तरोताजा रखते हैं.

लंच
इसके बाद दोपहर का समय सबसे जरूरी है. जब सूरज सबसे ऊपर होता है, तब पाचन की अग्नि सबसे तेज जलती है. आयुर्वेद कहता है कि दोपहर का भोजन सबसे पौष्टिक और भरपूर होना चाहिए. इस समय दाल-चावल, रोटी-सब्जी, सांभर-चावल, घी वाली खिचड़ी खा सकते हैं. भारी और पौष्टिक भोजन दोपहर में ही पचता है, क्योंकि अग्नि मजबूत होती है.

डिनर
शाम को सूरज ढलते ही शरीर धीमा हो जाता है. पाचन की आग कमजोर पड़ जाती है, इसलिए रात का खाना हल्का और जल्दी पचने वाला होना चाहिए. सूप, खिचड़ी, मूंग दाल, नरम सब्जियां, दही-चावल या हल्की रोटी-सब्जी अच्छे विकल्प हैं. भारी, तला-भुना, मसालेदार या ज्यादा मीठा खाना रात में परेशानी पैदा करता है – जैसे अपच, भारीपन, नींद न आना या वजन बढ़ना.

रात में तेज भूख का मतलब गड़बड़ी
आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि ‘जब भी भूख लगे, खाओ’ जैसी आम सलाह गलत है. भूख का समय सूरज के साथ जुड़ा होता है. सुबह हल्की भूख, दोपहर में तेज भूख और शाम को बहुत कम भूख महसूस होनी चाहिए. अगर शाम को ज्यादा भूख लग रही है तो इसका मतलब है कि दिन का खान-पान गड़बड़ है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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भूख लगने पर खाना के सिवा कुछ नहीं दिखता है, और न खाओ तो सबसे पहले दिमाग काम करना बंद कर देता है. इसलिए लोग खाने के सही समय को नजरअंदाज करके इस बात पर ध्यान देते हैं, कि जब भूख लगे तब खाना खा लेना चाहिए.जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर कोई मशीन नहीं है, बल्कि प्रकृति का हिस्सा है. इसे ठीक रखने के लिए दवाइयों या सख्त डाइट की बजाय सूरज के रिदम का सम्मान करना चाहिए.

वास्तव में बॉडी सन क्लॉक के हिसाब से चलती है.सदियों पुराना आयुर्वेद यही सिखाता आ रहा है कि खाने का समय घड़ी से नहीं, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त से तय होना चाहिए. जब हम सूरज के साथ खाते हैं तो पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर अंदर से खुद ठीक होने लगता है.

बीमारियों की जड़ सूरज को नजरअंदाज करना
आजकल हम घड़ी के हिसाब से जीते हैं, जिससे शरीर सूरज के पीछे चलता है. जब हम सूरज ढलने के बाद भी भारी खाना खाते हैं तो पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है और कई बीमारियां शुरू हो जाती हैं. आयुर्वेद का मूल मंत्र है– जब सूरज तेज हो, तब खाएं; जब सूरज डूब जाए, तब आराम करें. इस साधारण नियम को अपनाकर लोग बिना किसी सख्त डाइट के स्वस्थ रह सकते हैं.

हर समय का खाना अलग होना चाहिए
ब्रेकफास्ट
आयुर्वेद के अनुसार, दिन के तीन मुख्य समय हैं और हर समय का खाना अलग होना चाहिए. सुबह की शुरुआत हल्के और सादे भोजन से करें. सूरज उगते ही शरीर में पाचन की आग धीरे-धीरे जलनी शुरू होती है, इसलिए भारी या तला-भुना खाना न खाएं. इसके बजाय हल्दी वाला दूध, पोहा, उपमा, इडली, पोहा, फल या हल्का दलिया जैसे खाद्य पदार्थ लें. ये पेट को आराम देते हैं, एनर्जी बढ़ाते हैं और दिनभर तरोताजा रखते हैं.

लंच
इसके बाद दोपहर का समय सबसे जरूरी है. जब सूरज सबसे ऊपर होता है, तब पाचन की अग्नि सबसे तेज जलती है. आयुर्वेद कहता है कि दोपहर का भोजन सबसे पौष्टिक और भरपूर होना चाहिए. इस समय दाल-चावल, रोटी-सब्जी, सांभर-चावल, घी वाली खिचड़ी खा सकते हैं. भारी और पौष्टिक भोजन दोपहर में ही पचता है, क्योंकि अग्नि मजबूत होती है.

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शाम को सूरज ढलते ही शरीर धीमा हो जाता है. पाचन की आग कमजोर पड़ जाती है, इसलिए रात का खाना हल्का और जल्दी पचने वाला होना चाहिए. सूप, खिचड़ी, मूंग दाल, नरम सब्जियां, दही-चावल या हल्की रोटी-सब्जी अच्छे विकल्प हैं. भारी, तला-भुना, मसालेदार या ज्यादा मीठा खाना रात में परेशानी पैदा करता है – जैसे अपच, भारीपन, नींद न आना या वजन बढ़ना.

रात में तेज भूख का मतलब गड़बड़ी
आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि ‘जब भी भूख लगे, खाओ’ जैसी आम सलाह गलत है. भूख का समय सूरज के साथ जुड़ा होता है. सुबह हल्की भूख, दोपहर में तेज भूख और शाम को बहुत कम भूख महसूस होनी चाहिए. अगर शाम को ज्यादा भूख लग रही है तो इसका मतलब है कि दिन का खान-पान गड़बड़ है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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