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Companies are building their image with outsiders

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बीजिंग14 मिनट पहले

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चीन में विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स कमाई का आसान जरिया हैं, लेकिन यह पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।- प्रतीकात्मक फोटो

चीन के कॉरपोरेट जगत में ‘वाइट मंकी’ नाम का एक गैर-कानूनी ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इसके तहत कंपनियां अपने घरेलू प्रोडक्ट्स और ब्रांड को इंटरनेशनल दिखाने के लिए विदेशियों को मोटी रकम देकर हायर कर रही हैं। कई मामलों में बिना किसी अनुभव के सिर्फ ‘गैर-चीनी’ चेहरे के आधार पर इन्हें नकली डॉक्टर, वैज्ञानिक, वकील, शेफ और यहां तक कि फर्जी विदेशी सीईओ तक बना दिया जाता है।

भर्तियां वीचैट के गुप्त ग्रुप्स के जरिए होती हैं। कई कंपनियां गंभीर प्रोफेशनल मीटिंग्स में भी इनका इस्तेमाल करती हैं। पियर्स को एक बड़ी डील के दौरान पुडोंग के हाई-टेक पार्क में ‘इंटरनेशनल वकील’ बनाकर मीटिंग में बैठाया गया।

वहां उसने सिर्फ नोट्स लेने का नाटक किया। इसी तरह रूसी नागरिक एंज़ो को महीनों तक एक ऑटोमोबाइल कंपनी का फर्जी विदेशी सीईओ बनाकर अलग-अलग शहरों में घुमाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां जर्मन या अमेरिकी नागरिकों के मुकाबले रूसी और यूरोपीय लोगों को 2 से 3 गुना कम वेतन देती हैं।

विदेशी चेहरों का क्रेज 2008 के फूड स्कैंडल के बाद बढ़ा

बताया गया कि 2008 में मिलावटी दूध और फूड स्कैंडल के बाद घरेलू सामानों पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ। सानलु कंपनी के शिशु मिल्क पाउडर में मेलामाइन मिलने से लाखों बच्चे बीमार हुए और 6 की मौत हुई थी। इसके बाद विदेशी चेहरों वाले विज्ञापनों को लोग क्वालिटी और सेफ्टी की गारंटी मानने लगे।

दुनियाभर के चेहरों से चीनी प्रोडक्ट्स को मिली प्रतिष्ठा

मैनचेस्टर चाइना इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर श्याओबिंग वांग के अनुसार, लोग चीनी स्टार की पसंद को सिर्फ स्थानीय मानते हैं। लेकिन जब साल 2025 में दिग्गज पूर्व फुटबॉलर डेविड बेखम ने चीनी खिलौना ‘लाबुबु’ के साथ फोटो पोस्ट की, तो वह वायरल हो गई। बेखम जैसे ग्लोबल चेहरे चीनी प्रोडक्ट्स को दुनिया में असली वैधता और प्रतिष्ठा दिलाते हैं।

विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स अवैध

चीन में विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स कमाई का आसान जरिया हैं, लेकिन यह पूरी तरह गैर-कानूनी हैं। कानून के मुताबिक स्टूडेंट वीसा पर ऐसे काम करने पर करीब 70 हजार से 2 लाख रुपए जुर्माना, 15 दिन तक की जेल और डिपोर्टेशन हो सकता है। ऐसे ही मामले में युगांडा के एक छात्र को अवैध रूप से पढ़ाने पर भारी जुर्माना और डिपोर्ट झेलना पड़ा था।

फर्जी ‘प्रोफेसर’ का खुलासा, जांच शुरू

हाल ही में लाइव-स्ट्रीमिंग इन्फ्लुएंसर ‘श्यांगयी’ का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। उसने विटामिन्स के प्रचार के लिए विदेशी मॉडल ‘लिंडा’ को सिडनी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर बताया था। जांच में खुलासा हुआ कि उसने महज 71 हजार रुपए लेकर स्क्रिप्ट पढ़ी थी। अथॉरिटी मामले की जांच कर रही है।

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चीन के कॉरपोरेट जगत में ‘वाइट मंकी’ नाम का एक गैर-कानूनी ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इसके तहत कंपनियां अपने घरेलू प्रोडक्ट्स और ब्रांड को इंटरनेशनल दिखाने के लिए विदेशियों को मोटी रकम देकर हायर कर रही हैं। कई मामलों में बिना किसी अनुभव के सिर्फ ‘गैर-चीनी’ चेहरे के आधार पर इन्हें नकली डॉक्टर, वैज्ञानिक, वकील, शेफ और यहां तक कि फर्जी विदेशी सीईओ तक बना दिया जाता है।

भर्तियां वीचैट के गुप्त ग्रुप्स के जरिए होती हैं। कई कंपनियां गंभीर प्रोफेशनल मीटिंग्स में भी इनका इस्तेमाल करती हैं। पियर्स को एक बड़ी डील के दौरान पुडोंग के हाई-टेक पार्क में ‘इंटरनेशनल वकील’ बनाकर मीटिंग में बैठाया गया।

वहां उसने सिर्फ नोट्स लेने का नाटक किया। इसी तरह रूसी नागरिक एंज़ो को महीनों तक एक ऑटोमोबाइल कंपनी का फर्जी विदेशी सीईओ बनाकर अलग-अलग शहरों में घुमाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां जर्मन या अमेरिकी नागरिकों के मुकाबले रूसी और यूरोपीय लोगों को 2 से 3 गुना कम वेतन देती हैं।

विदेशी चेहरों का क्रेज 2008 के फूड स्कैंडल के बाद बढ़ा

बताया गया कि 2008 में मिलावटी दूध और फूड स्कैंडल के बाद घरेलू सामानों पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ। सानलु कंपनी के शिशु मिल्क पाउडर में मेलामाइन मिलने से लाखों बच्चे बीमार हुए और 6 की मौत हुई थी। इसके बाद विदेशी चेहरों वाले विज्ञापनों को लोग क्वालिटी और सेफ्टी की गारंटी मानने लगे।

दुनियाभर के चेहरों से चीनी प्रोडक्ट्स को मिली प्रतिष्ठा

मैनचेस्टर चाइना इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर श्याओबिंग वांग के अनुसार, लोग चीनी स्टार की पसंद को सिर्फ स्थानीय मानते हैं। लेकिन जब साल 2025 में दिग्गज पूर्व फुटबॉलर डेविड बेखम ने चीनी खिलौना ‘लाबुबु’ के साथ फोटो पोस्ट की, तो वह वायरल हो गई। बेखम जैसे ग्लोबल चेहरे चीनी प्रोडक्ट्स को दुनिया में असली वैधता और प्रतिष्ठा दिलाते हैं।

विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स अवैध

चीन में विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स कमाई का आसान जरिया हैं, लेकिन यह पूरी तरह गैर-कानूनी हैं। कानून के मुताबिक स्टूडेंट वीसा पर ऐसे काम करने पर करीब 70 हजार से 2 लाख रुपए जुर्माना, 15 दिन तक की जेल और डिपोर्टेशन हो सकता है। ऐसे ही मामले में युगांडा के एक छात्र को अवैध रूप से पढ़ाने पर भारी जुर्माना और डिपोर्ट झेलना पड़ा था।

फर्जी ‘प्रोफेसर’ का खुलासा, जांच शुरू

हाल ही में लाइव-स्ट्रीमिंग इन्फ्लुएंसर ‘श्यांगयी’ का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। उसने विटामिन्स के प्रचार के लिए विदेशी मॉडल ‘लिंडा’ को सिडनी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर बताया था। जांच में खुलासा हुआ कि उसने महज 71 हजार रुपए लेकर स्क्रिप्ट पढ़ी थी। अथॉरिटी मामले की जांच कर रही है।

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