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आटा और मैदा में क्या अंतर है? मैदा को क्यों माना जाता है नुकसानदायक, एक्सपर्ट ने बताई असली वजह

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Atta vs Maida Difference: आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं. गेहूं को पीसकर आटा बनाया जाता है, जबकि मैदा प्रोसेस्ड प्रोडक्ट है. मैदा बनाने की प्रक्रिया में फाइबर और कई पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इस वजह से मैदा को सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता है. ज्यादा मैदा खाने से पाचन, वजन और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

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आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनाए जाते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अलग होती है.

Atta or Maida Which is Better: गेहूं को पीसकर आटा बनाया जाता है और सदियों से इससे रोटी और पराठे बनाए जा रहे हैं. गेहूं से बना आटा सेहत के लिए फायदेमंद होता है. आजकल आटे के बजाय ज्यादातर चीजें मैदा से बनाई जा रही हैं. पिज्जा, बर्गर, केक, बिस्किट और समोसे जैसी चीजों में मैदा का इस्तेमाल ज्यादा होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मैदा को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. कई लोग तो मैदा को सफेद जहर तक बताते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों में बड़ा अंतर होता है. यह अंतर आटा और मैदा बनाने की प्रक्रिया में आ जाता है. एक्सपर्ट से यह जानने की कोशिश करते हैं कि आटे और मैदा में से कौन सी चीज सेहत के लिए ज्यादा बेहतर है.

नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया आटा साबुत गेहूं को पीसकर बनाया जाता है. मैदा बनाने के लिए गेहूं के छिलके और अंकुर को पूरी तरह से हटा दिया जाता है. इसके बाद बचे हुए हिस्से को बारीक पीसकर ब्लीच किया जाता है, जिससे मैदा का रंग सफेद हो जाता है. यही प्रक्रिया दोनों चीजों में बड़ा अंतर पैदा करती है. आटे में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. मैदा बनाने के दौरान अधिकांश फाइबर और पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. इसमें सिर्फ स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट ही बचते हैं. यही वजह है कि आटे को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, जबकि मैदा को नुकसानदायक माना जाता है. मैदा का सेवन कई बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है.

मैदा को नुकसानदायक क्यों माना जाता है?

एक्सपर्ट के मुताबिक मैदा में फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है. यही वजह है कि इसे खाने के बाद पेट जल्दी भरता नहीं और भूख जल्दी लग सकती है. मैदा जल्दी पचती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. बार-बार ज्यादा मात्रा में मैदा से बनी चीजें खाने से वजन बढ़ने, मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. यही कारण है कि इसे कम से कम खाना चाहिए. मैदा में फाइबर कम होने की वजह से यह पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. कुछ लोगों को ज्यादा मैदा खाने के बाद कब्ज, गैस या पेट भारी होने जैसी समस्या महसूस हो सकती है. दूसरी तरफ आटे में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर रखने और पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराने में मदद करता है. इसलिए मैदा के बजाय आटे का सेवन करना चाहिए.

क्या मैदा में पोषण बिल्कुल नहीं होता?

मैदा में कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और एनर्जी जरूर होती है, लेकिन इसमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व काफी कम हो जाते हैं. यही वजह है कि इसे रिफाइंड फ्लोर कहा जाता है. कई देशों में मैदा में कुछ विटामिन और आयरन बाद में मिलाए जाते हैं, लेकिन फिर भी इसे साबुत आटे जितना पौष्टिक नहीं माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लगातार ज्यादा मैदा खाने से भविष्य में लाइफस्टाइल डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. आजकल फास्ट फूड और बेकरी आइटम्स की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से बच्चे और युवा ज्यादा मात्रा में मैदा का सेवन कर रहे हैं. कई पैकेज्ड फूड्स में भी मैदा का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी जानकारी लोगों को नहीं होती है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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Atta vs Maida Difference: आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं. गेहूं को पीसकर आटा बनाया जाता है, जबकि मैदा प्रोसेस्ड प्रोडक्ट है. मैदा बनाने की प्रक्रिया में फाइबर और कई पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इस वजह से मैदा को सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता है. ज्यादा मैदा खाने से पाचन, वजन और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

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आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनाए जाते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अलग होती है.

Atta or Maida Which is Better: गेहूं को पीसकर आटा बनाया जाता है और सदियों से इससे रोटी और पराठे बनाए जा रहे हैं. गेहूं से बना आटा सेहत के लिए फायदेमंद होता है. आजकल आटे के बजाय ज्यादातर चीजें मैदा से बनाई जा रही हैं. पिज्जा, बर्गर, केक, बिस्किट और समोसे जैसी चीजों में मैदा का इस्तेमाल ज्यादा होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मैदा को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. कई लोग तो मैदा को सफेद जहर तक बताते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि आटा और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों में बड़ा अंतर होता है. यह अंतर आटा और मैदा बनाने की प्रक्रिया में आ जाता है. एक्सपर्ट से यह जानने की कोशिश करते हैं कि आटे और मैदा में से कौन सी चीज सेहत के लिए ज्यादा बेहतर है.

नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया आटा साबुत गेहूं को पीसकर बनाया जाता है. मैदा बनाने के लिए गेहूं के छिलके और अंकुर को पूरी तरह से हटा दिया जाता है. इसके बाद बचे हुए हिस्से को बारीक पीसकर ब्लीच किया जाता है, जिससे मैदा का रंग सफेद हो जाता है. यही प्रक्रिया दोनों चीजों में बड़ा अंतर पैदा करती है. आटे में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. मैदा बनाने के दौरान अधिकांश फाइबर और पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. इसमें सिर्फ स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट ही बचते हैं. यही वजह है कि आटे को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, जबकि मैदा को नुकसानदायक माना जाता है. मैदा का सेवन कई बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है.

मैदा को नुकसानदायक क्यों माना जाता है?

एक्सपर्ट के मुताबिक मैदा में फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है. यही वजह है कि इसे खाने के बाद पेट जल्दी भरता नहीं और भूख जल्दी लग सकती है. मैदा जल्दी पचती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. बार-बार ज्यादा मात्रा में मैदा से बनी चीजें खाने से वजन बढ़ने, मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. यही कारण है कि इसे कम से कम खाना चाहिए. मैदा में फाइबर कम होने की वजह से यह पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. कुछ लोगों को ज्यादा मैदा खाने के बाद कब्ज, गैस या पेट भारी होने जैसी समस्या महसूस हो सकती है. दूसरी तरफ आटे में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर रखने और पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराने में मदद करता है. इसलिए मैदा के बजाय आटे का सेवन करना चाहिए.

क्या मैदा में पोषण बिल्कुल नहीं होता?

मैदा में कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और एनर्जी जरूर होती है, लेकिन इसमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व काफी कम हो जाते हैं. यही वजह है कि इसे रिफाइंड फ्लोर कहा जाता है. कई देशों में मैदा में कुछ विटामिन और आयरन बाद में मिलाए जाते हैं, लेकिन फिर भी इसे साबुत आटे जितना पौष्टिक नहीं माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लगातार ज्यादा मैदा खाने से भविष्य में लाइफस्टाइल डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. आजकल फास्ट फूड और बेकरी आइटम्स की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से बच्चे और युवा ज्यादा मात्रा में मैदा का सेवन कर रहे हैं. कई पैकेज्ड फूड्स में भी मैदा का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी जानकारी लोगों को नहीं होती है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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