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Break down big goals into smaller parts to achieve success.

Break down big goals into smaller parts to achieve success.

रस्टिन डॉड. द न्यूयॉर्क टाइम्स4 मिनट पहले

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बास्केटबॉल टीम के कोच डस्टी मे मानते हैं कि जब आप खुद अपनी छोटी-छोटी प्रोग्रेस को स्वीकार करते हैं, तो सेल्फ बिलीफ मजबूत होता है।- फाइल फोटो

खिलाड़ी अक्सर किसी बड़े टूर्नामेंट की तैयारी या मुश्किल ट्रेनिंग सेशन शुरू करने से पहले मोटिवेशन का इंतजार करते हैं। लेकिन, खेल और मनोविज्ञान के शोधकर्ता कार्ल हेंड्रिक का शोध इस पारंपरिक सोच को खारिज करता है। हेंड्रिक के अनुसार, किसी खिलाड़ी को सफल होने के लिए काम शुरू करने से पहले मोटिवेट होना बिल्कुल जरूरी नहीं है। इसके उलट, जब आप मैदान पर उतरकर पसीना बहाते हैं और कोई छोटी सी सफलता हासिल करते हैं, तो असली मोटिवेशन वहीं से जन्म लेता है।

1. छोटे लक्ष्य पाने से दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है

एक खिलाड़ी के तौर पर यह सोचना कि ‘मुझे सीधे चैम्पियनशिप जीतनी है’, कई बार मानसिक दबाव बढ़ा देता है। इस विशाल लक्ष्य को हफ्तों, दिनों और घंटों के छोटे-छोटे ट्रेनिंग सेशन में बांट लें। जब आप दिनभर की कड़ी ट्रेनिंग के बाद एक छोटा सा टारगेट हासिल कर लेते हैं, तो आपके दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है। यही आपको अगले दिन वापसी करने की ऊर्जा देता है।

2. कंफर्ट जोन से बाहर आएं, इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा

प्रैक्टिस का स्तर हमेशा ऐसा होना चाहिए, जो कंफर्ट जोन से बाहर धकेले। चुनौती ऐसी हो जिससे गेम में कुछ नया जोड़ सकें, लेकिन यह इतनी भी कठिन न हो कि आप चोटिल हो जाएं। जब आप अपनी क्षमता से थोड़ा ऊपर उठकर किसी चुनौती को पार करते हैं, तो आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। बड़े मैचों में दबाव झेलने की मानसिक मजबूती इसी प्रोसेस से आती है।

3. सिर्फ स्कोर बोर्ड या मेडल टैली पर फोकस नहीं ​हो

पूरा फोकस सिर्फ स्कोरबोर्ड या मेडल टैली पर नहीं होना चाहिए। कई बार नतीजे तुरंत नहीं मिलते। ऐसे में अगर किसी बड़ी कमजोरी को सुधारने के लिए पसीना बहा रहे हैं, तो उस प्रयास पर गर्व करना सीखें। अमेरिका की मशहूर मिशिगन बास्केटबॉल टीम के कोच डस्टी मे मानते हैं कि जब आप खुद अपनी छोटी-छोटी प्रोग्रेस को स्वीकार करते हैं, तो सेल्फ बिलीफ मजबूत होता है।

4. अपने प्रदर्शन का खुद फीडबैक लें, आकलन करें

ट्रेनिंग पूरी होने पर ​​खिलाड़ी को खुद का आकलन करना चाहिए। आपको यह समझना होगा कि आपने जो नया शॉट या टेक्निक सीखी है, वह मैच के दौरान पूरे गेम को किस तरह से फायदा पहुंचाएगी। जब आपको यह स्पष्ट हो जाता है कि नेट पर बिताया गया एक घंटा आपके मौजूदा खेल को कितना अच्छा बना रहा है, तो आपके अंदर और बेहतर करने की भूख जागती है।

5. ‘परफेक्ट डे’ की प्रतीक्षा न करें, तुरंत मैदान पर उतरें

यदि आप प्रैक्टिस शुरू करने के लिए मोटिवेशन या किसी ‘परफेक्ट डे’ का इंतजार कर रहे हैं, तो आप केवल अपना समय और टैलेंट बर्बाद कर रहे हैं। एक्शन हमेशा मोटिवेशन से पहले आता है। जैसे ही आप पहला कदम उठाएंगे, आपके शरीर और दिमाग की वही लय आपके अंदर आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति को अपने-आप जगा देगी।

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रस्टिन डॉड. द न्यूयॉर्क टाइम्स4 मिनट पहले

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बास्केटबॉल टीम के कोच डस्टी मे मानते हैं कि जब आप खुद अपनी छोटी-छोटी प्रोग्रेस को स्वीकार करते हैं, तो सेल्फ बिलीफ मजबूत होता है।- फाइल फोटो

खिलाड़ी अक्सर किसी बड़े टूर्नामेंट की तैयारी या मुश्किल ट्रेनिंग सेशन शुरू करने से पहले मोटिवेशन का इंतजार करते हैं। लेकिन, खेल और मनोविज्ञान के शोधकर्ता कार्ल हेंड्रिक का शोध इस पारंपरिक सोच को खारिज करता है। हेंड्रिक के अनुसार, किसी खिलाड़ी को सफल होने के लिए काम शुरू करने से पहले मोटिवेट होना बिल्कुल जरूरी नहीं है। इसके उलट, जब आप मैदान पर उतरकर पसीना बहाते हैं और कोई छोटी सी सफलता हासिल करते हैं, तो असली मोटिवेशन वहीं से जन्म लेता है।

1. छोटे लक्ष्य पाने से दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है

एक खिलाड़ी के तौर पर यह सोचना कि ‘मुझे सीधे चैम्पियनशिप जीतनी है’, कई बार मानसिक दबाव बढ़ा देता है। इस विशाल लक्ष्य को हफ्तों, दिनों और घंटों के छोटे-छोटे ट्रेनिंग सेशन में बांट लें। जब आप दिनभर की कड़ी ट्रेनिंग के बाद एक छोटा सा टारगेट हासिल कर लेते हैं, तो आपके दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है। यही आपको अगले दिन वापसी करने की ऊर्जा देता है।

2. कंफर्ट जोन से बाहर आएं, इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा

प्रैक्टिस का स्तर हमेशा ऐसा होना चाहिए, जो कंफर्ट जोन से बाहर धकेले। चुनौती ऐसी हो जिससे गेम में कुछ नया जोड़ सकें, लेकिन यह इतनी भी कठिन न हो कि आप चोटिल हो जाएं। जब आप अपनी क्षमता से थोड़ा ऊपर उठकर किसी चुनौती को पार करते हैं, तो आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। बड़े मैचों में दबाव झेलने की मानसिक मजबूती इसी प्रोसेस से आती है।

3. सिर्फ स्कोर बोर्ड या मेडल टैली पर फोकस नहीं ​हो

पूरा फोकस सिर्फ स्कोरबोर्ड या मेडल टैली पर नहीं होना चाहिए। कई बार नतीजे तुरंत नहीं मिलते। ऐसे में अगर किसी बड़ी कमजोरी को सुधारने के लिए पसीना बहा रहे हैं, तो उस प्रयास पर गर्व करना सीखें। अमेरिका की मशहूर मिशिगन बास्केटबॉल टीम के कोच डस्टी मे मानते हैं कि जब आप खुद अपनी छोटी-छोटी प्रोग्रेस को स्वीकार करते हैं, तो सेल्फ बिलीफ मजबूत होता है।

4. अपने प्रदर्शन का खुद फीडबैक लें, आकलन करें

ट्रेनिंग पूरी होने पर ​​खिलाड़ी को खुद का आकलन करना चाहिए। आपको यह समझना होगा कि आपने जो नया शॉट या टेक्निक सीखी है, वह मैच के दौरान पूरे गेम को किस तरह से फायदा पहुंचाएगी। जब आपको यह स्पष्ट हो जाता है कि नेट पर बिताया गया एक घंटा आपके मौजूदा खेल को कितना अच्छा बना रहा है, तो आपके अंदर और बेहतर करने की भूख जागती है।

5. ‘परफेक्ट डे’ की प्रतीक्षा न करें, तुरंत मैदान पर उतरें

यदि आप प्रैक्टिस शुरू करने के लिए मोटिवेशन या किसी ‘परफेक्ट डे’ का इंतजार कर रहे हैं, तो आप केवल अपना समय और टैलेंट बर्बाद कर रहे हैं। एक्शन हमेशा मोटिवेशन से पहले आता है। जैसे ही आप पहला कदम उठाएंगे, आपके शरीर और दिमाग की वही लय आपके अंदर आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति को अपने-आप जगा देगी।

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