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Singapore Court Finds Byju Raveendran Guilty of Hiding Assets, Fines Him SGD 1 Million

Singapore Court Finds Byju Raveendran Guilty of Hiding Assets, Fines Him SGD 1 Million
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नई दिल्ली12 मिनट पहले

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बायजू रवींद्रन पहले ही विदेशी निवेशकों के साथ कानूनी विवाद का सामना कर रहे हैं।

देश के पहले एडटेक स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बनाने वाले बायजूस फाउंडर बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत ने 6 महीने जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन्हें अपनी संपत्तियों (एसेट्स) से जुड़े पेपर को छिपाने और उनसे जुड़े आदेशों की अवमानना का दोषी पाया है।

सिंगापुर कोर्ट के मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, बायजू रवींद्रन ने अप्रैल 2024 से अपनी संपत्तियों से जुड़े अदालत की ओर से दिए गए कई आदेशों का पालन नहीं किया।

बार-बार आदेशों की अनदेखी करने पर कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए जेल भेजने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने रवींद्रन को अब अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

67 लाख रुपए का जुर्माना भी देना होगा

सजा के साथ-साथ रवींद्रन पर 90,000 सिंगापुर डॉलर (करीब 67 लाख रुपए) का जुर्माना भी लगाया गया है। उन्हें यह राशि कानूनी खर्च (लीगल कॉस्ट) के तौर पर देनी होगी।

इसके अलावा, रवींद्रन को ‘बीआर इन्वेस्टको पीटीई’ की कानूनी मिल्कियत साबित करने वाले दस्तावेज भी कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया गया है। यह एक कॉरपोरेट एंटिटी है, जिसके पास संबंधित कंपनी के शेयर्स हैं।

कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने किया था केस

रवींद्रन के खिलाफ सिंगापुर की अदालत में यह मामला कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड ‘कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी’ (QIA) की एक सहायक कंपनी ने दर्ज कराया था। QIA ने बायजू के उस फंडिंग राउंड में निवेश किया था, जब कंपनी भारी संकट से गुजर रही थी और अपने कर्मचारियों की छंटनी कर रही थी।

इस मामले में कोर्ट में कतर होल्डिंग्स का पक्ष ‘ड्रू एंड नेपियर’ ने रखा। वहीं बायजू इन्वेस्टमेंट्स की ओर से ‘फर्वेंट चैंबर्स’ ने पैरवी की। फिलहाल रवींद्रन की ओर से इस सजा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि वे वर्तमान में सिंगापुर में मौजूद हैं या किसी अन्य देश में।

अमेरिकी निवेशकों के साथ भी चल रही कानूनी लड़ाई

जेल की सजा का यह फैसला रवींद्रन के लिए ऐसे समय में आया है जब वे दुनिया भर में विदेशी निवेशकों के मुकदमों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका में भी लेंडर्स उनसे 1.2 बिलियन डॉलर (करीब ₹11,000 करोड़) के लोन की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लोन उस समय विवादों में आ गया था, जब कंपनी की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी थी।

रवींद्रन ने ‘थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से अपनी कंपनी की शुरुआत की थी, जिसे दुनियाभर में ‘बायजूस’ के नाम से जाना गया। एक समय में वे भारत के सबसे सफल स्टार्टअप फाउंडर्स में गिने जाते थे और इस कंपनी ने उन्हें अरबपति बना दिया था। वैश्विक कंपनियों से बड़े पैमाने पर निवेश हासिल करने वाली यह कंपनी कभी भारतीय स्टार्टअप जगत की सबसे बड़ी ‘सक्सेस स्टोरी’ मानी जाती थी।

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देश के पहले एडटेक स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बनाने वाले बायजूस फाउंडर बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत ने 6 महीने जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन्हें अपनी संपत्तियों (एसेट्स) से जुड़े पेपर को छिपाने और उनसे जुड़े आदेशों की अवमानना का दोषी पाया है।

सिंगापुर कोर्ट के मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, बायजू रवींद्रन ने अप्रैल 2024 से अपनी संपत्तियों से जुड़े अदालत की ओर से दिए गए कई आदेशों का पालन नहीं किया।

बार-बार आदेशों की अनदेखी करने पर कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए जेल भेजने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने रवींद्रन को अब अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

67 लाख रुपए का जुर्माना भी देना होगा

सजा के साथ-साथ रवींद्रन पर 90,000 सिंगापुर डॉलर (करीब 67 लाख रुपए) का जुर्माना भी लगाया गया है। उन्हें यह राशि कानूनी खर्च (लीगल कॉस्ट) के तौर पर देनी होगी।

इसके अलावा, रवींद्रन को ‘बीआर इन्वेस्टको पीटीई’ की कानूनी मिल्कियत साबित करने वाले दस्तावेज भी कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया गया है। यह एक कॉरपोरेट एंटिटी है, जिसके पास संबंधित कंपनी के शेयर्स हैं।

कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने किया था केस

रवींद्रन के खिलाफ सिंगापुर की अदालत में यह मामला कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड ‘कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी’ (QIA) की एक सहायक कंपनी ने दर्ज कराया था। QIA ने बायजू के उस फंडिंग राउंड में निवेश किया था, जब कंपनी भारी संकट से गुजर रही थी और अपने कर्मचारियों की छंटनी कर रही थी।

इस मामले में कोर्ट में कतर होल्डिंग्स का पक्ष ‘ड्रू एंड नेपियर’ ने रखा। वहीं बायजू इन्वेस्टमेंट्स की ओर से ‘फर्वेंट चैंबर्स’ ने पैरवी की। फिलहाल रवींद्रन की ओर से इस सजा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि वे वर्तमान में सिंगापुर में मौजूद हैं या किसी अन्य देश में।

अमेरिकी निवेशकों के साथ भी चल रही कानूनी लड़ाई

जेल की सजा का यह फैसला रवींद्रन के लिए ऐसे समय में आया है जब वे दुनिया भर में विदेशी निवेशकों के मुकदमों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका में भी लेंडर्स उनसे 1.2 बिलियन डॉलर (करीब ₹11,000 करोड़) के लोन की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लोन उस समय विवादों में आ गया था, जब कंपनी की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी थी।

रवींद्रन ने ‘थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से अपनी कंपनी की शुरुआत की थी, जिसे दुनियाभर में ‘बायजूस’ के नाम से जाना गया। एक समय में वे भारत के सबसे सफल स्टार्टअप फाउंडर्स में गिने जाते थे और इस कंपनी ने उन्हें अरबपति बना दिया था। वैश्विक कंपनियों से बड़े पैमाने पर निवेश हासिल करने वाली यह कंपनी कभी भारतीय स्टार्टअप जगत की सबसे बड़ी ‘सक्सेस स्टोरी’ मानी जाती थी।

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