Thursday, 27 Aug 2026 | 01:04 AM

Trending :

EXCLUSIVE

एनएफएल प्लेयर जैक क्रॉफर्ड का लाइफ लेसन:स्टेडियम के स्टार को 12 लोगों ने डराया, ओपन माइक ने सिखाया- डर का सामना करो

एनएफएल प्लेयर जैक क्रॉफर्ड का लाइफ लेसन:स्टेडियम के स्टार को 12 लोगों ने डराया, ओपन माइक ने सिखाया- डर का सामना करो

6 फीट 5 इंच लंबा शरीर, एनएफएल के बड़े-बड़े स्टेडियमों का अनुभव और करोड़ों दर्शकों के सामने खेलने का आत्मविश्वास। लेकिन जब अमेरिकी फुटबॉलर जैक क्रॉफर्ड पहली बार न्यूयॉर्क के एक छोटे से कॉमेडी क्लब में ओपन माइक करने पहुंचे, तो उनके हाथ कांप रहे थे। कमरे में मुश्किल से 12 लोग थे। पांच मिनट की परफॉर्मेंस में उनके जोक्स पर कोई नहीं हंसा। इसी असफलता ने उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाया कि डर से भागने के बजाय उसका सामना करो। 1. डर का सामना करने से बढ़ता है आत्मविश्वास 37 वर्षीय जैक क्रॉफर्ड कई सालों से स्टैंडअप कॉमेडी करना चाहते थे, लेकिन लोगों के जज करने का डर उन्हें रोकता रहा। फिर एक दिन उनका दोस्त उन्हें अचानक ओपन माइक में ले गया। पहली परफॉर्मेंस बुरी रही, लेकिन उसी दिन उन्होंने महसूस किया कि सबसे बड़ा डर असलियत में उतना बड़ा नहीं होता। इसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। उन्होंने कहा, ‘जब आप सबसे डरावनी चीज कर लेते हैं, तो बाकी चीजें छोटी लगने लगती हैं। ’2. गलतियां करना हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के करियर में भी क्रॉफर्ड का सबसे बड़ा दुश्मन डर ही था। अभ्यास में वे शानदार खेलते थे, लेकिन मैच में गलती का डर उन्हें रोक देता था। डलास काउबॉयज के कोच रॉड मारिनेली ने उनसे कहा, ‘खूब गलती करो, लेकिन मैच में पूरी ताकत से खेलो।’ इसी सोच से उनकी जिंदगी बदल गई। क्रॉफर्ड ने समझा कि हर गलती शर्मिंदगी नहीं होती, बल्कि सीखने का मौका होती है। यही सोच उन्हें स्टैंडअप कॉमेडी में भी काम आई। 3. असहजता कमजोरी नहीं, बल्कि ग्रोथ का संकेत शिकागो यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग असहज और शर्मिंदगी वाले हालात को सीखने का हिस्सा मानते हैं, वे तेजी से आगे बढ़ते हैं। क्रॉफर्ड के मुताबिक, स्टैंडअप कॉमेडी ‘एक्सपोजर थेरेपी’ की तरह है। जब इंसान बार-बार शर्मिंदगी झेलता है, तो डर खत्म होने लगता है। उन्होंने महसूस किया कि लोग उतना ध्यान नहीं देते जितना हम सोचते हैं। यही सोच मानसिक मजबूती देती है। 4. कभी भी शर्मिंदगी से भागना नहीं चाहिए हाल ही में क्रॉफर्ड ने फिर खराब परफॉर्म किया। दर्शक उनके मजाक से जुड़ नहीं पाए। उन्हें बुरा लगा, लेकिन फर्क यह था कि अब वे उस डर से टूटते नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘अब शर्मिंदगी चुभती जरूर है, लेकिन पहले जितनी नहीं। सबसे जरूरी बात यह है कि अब मैं उससे डरता नहीं हूं।’ क्रॉफर्ड की कहानी यही बताती है कि आत्मविश्वास का मतलब डर खत्म होना नहीं, बल्कि डर के बावजूद आगे बढ़ते रहना है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
File photo of Prime Minister Narendra Modi

April 6, 2026/
1:24 pm

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 13:24 IST आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण 6...

England vs New Zealand Live Score: Follow the latest updates from Day 1 of the 2nd Test. (AP Photo)

June 17, 2026/
4:09 pm

आखरी अपडेट:17 जून, 2026, 16:09 IST मंत्री ने संजय राउत की भाषा और राजनीतिक आचरण की भी आलोचना की और...

ग्वालियर में न्यूनतम पारा 4 डिग्री लुढ़का:अगले दो हफ्तों तक तेज गर्मी की संभावना कम, दिन का तापमान भी 1.7 डिग्री नीचे आया

May 1, 2026/
10:29 am

ग्वालियर में गुरुवार शाम अचानक मौसम बदलने से शहरवासियों को गर्मी से राहत मिली है। तेज आंधी, बारिश और कुछ...

भारतीय मूल के श्रेयस मोव्वा कनाडा टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज:जहां टर्फ विकेट तक नहीं, उस बर्फ की धरती पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रेयस ने जिंदा रखा सपना

February 18, 2026/
8:36 am

जहां ‘आइस हॉकी’ सबसे लोकप्रिय खेल है और साल के छह महीने बर्फ की चादर बिछी रहती है, वहां एक...

authorimg

May 17, 2026/
3:41 pm

Last Updated:May 17, 2026, 15:41 IST Linguda benefits : लिंगुडे की सब्जी पहाड़ों की जान है. दिखने में यह मुड़े...

Rajesh Exports ED Raid | FEMA Violation Sebi Ban

June 24, 2026/
4:14 pm

मुंबई/बेंगलुरु10 मिनट पहले कॉपी लिंक ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर्स से...

पेरू की पहली महिला राष्ट्रपति, 19 वर्ष में संभाली जिम्मेदारी:पढ़ाई छूटी, जेल गईं और बंकर में काटी रातें, केइको ने बिखरने नहीं दी पार्टी

June 26, 2026/
12:35 pm

पेरू में पहली बार कोई महिला राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। यहां चौथी बार चुनाव लड़ रही दक्षिणपंथी नेता केइको...

राजनीति

एनएफएल प्लेयर जैक क्रॉफर्ड का लाइफ लेसन:स्टेडियम के स्टार को 12 लोगों ने डराया, ओपन माइक ने सिखाया- डर का सामना करो

एनएफएल प्लेयर जैक क्रॉफर्ड का लाइफ लेसन:स्टेडियम के स्टार को 12 लोगों ने डराया, ओपन माइक ने सिखाया- डर का सामना करो

6 फीट 5 इंच लंबा शरीर, एनएफएल के बड़े-बड़े स्टेडियमों का अनुभव और करोड़ों दर्शकों के सामने खेलने का आत्मविश्वास। लेकिन जब अमेरिकी फुटबॉलर जैक क्रॉफर्ड पहली बार न्यूयॉर्क के एक छोटे से कॉमेडी क्लब में ओपन माइक करने पहुंचे, तो उनके हाथ कांप रहे थे। कमरे में मुश्किल से 12 लोग थे। पांच मिनट की परफॉर्मेंस में उनके जोक्स पर कोई नहीं हंसा। इसी असफलता ने उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाया कि डर से भागने के बजाय उसका सामना करो। 1. डर का सामना करने से बढ़ता है आत्मविश्वास 37 वर्षीय जैक क्रॉफर्ड कई सालों से स्टैंडअप कॉमेडी करना चाहते थे, लेकिन लोगों के जज करने का डर उन्हें रोकता रहा। फिर एक दिन उनका दोस्त उन्हें अचानक ओपन माइक में ले गया। पहली परफॉर्मेंस बुरी रही, लेकिन उसी दिन उन्होंने महसूस किया कि सबसे बड़ा डर असलियत में उतना बड़ा नहीं होता। इसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। उन्होंने कहा, ‘जब आप सबसे डरावनी चीज कर लेते हैं, तो बाकी चीजें छोटी लगने लगती हैं। ’2. गलतियां करना हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के करियर में भी क्रॉफर्ड का सबसे बड़ा दुश्मन डर ही था। अभ्यास में वे शानदार खेलते थे, लेकिन मैच में गलती का डर उन्हें रोक देता था। डलास काउबॉयज के कोच रॉड मारिनेली ने उनसे कहा, ‘खूब गलती करो, लेकिन मैच में पूरी ताकत से खेलो।’ इसी सोच से उनकी जिंदगी बदल गई। क्रॉफर्ड ने समझा कि हर गलती शर्मिंदगी नहीं होती, बल्कि सीखने का मौका होती है। यही सोच उन्हें स्टैंडअप कॉमेडी में भी काम आई। 3. असहजता कमजोरी नहीं, बल्कि ग्रोथ का संकेत शिकागो यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग असहज और शर्मिंदगी वाले हालात को सीखने का हिस्सा मानते हैं, वे तेजी से आगे बढ़ते हैं। क्रॉफर्ड के मुताबिक, स्टैंडअप कॉमेडी ‘एक्सपोजर थेरेपी’ की तरह है। जब इंसान बार-बार शर्मिंदगी झेलता है, तो डर खत्म होने लगता है। उन्होंने महसूस किया कि लोग उतना ध्यान नहीं देते जितना हम सोचते हैं। यही सोच मानसिक मजबूती देती है। 4. कभी भी शर्मिंदगी से भागना नहीं चाहिए हाल ही में क्रॉफर्ड ने फिर खराब परफॉर्म किया। दर्शक उनके मजाक से जुड़ नहीं पाए। उन्हें बुरा लगा, लेकिन फर्क यह था कि अब वे उस डर से टूटते नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘अब शर्मिंदगी चुभती जरूर है, लेकिन पहले जितनी नहीं। सबसे जरूरी बात यह है कि अब मैं उससे डरता नहीं हूं।’ क्रॉफर्ड की कहानी यही बताती है कि आत्मविश्वास का मतलब डर खत्म होना नहीं, बल्कि डर के बावजूद आगे बढ़ते रहना है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.