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RBI की मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों का ऐलान आज:रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रहने का अनुमान; रुपए को संभालने और महंगाई रोकने पर फोकस

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों का ऐलान आज:रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रहने का अनुमान; रुपए को संभालने और महंगाई रोकने पर फोकस

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की तीन दिवसीय बैठक के फैसले आज घोषित होंगे। बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का एक छोटा हिस्सा रुपए पर बढ़ते दबाव और महंगाई के जोखिम को देखते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जता रहा है। इससे पहले अप्रैल में भी रेपो रेट में बदलाव नहीं हुआ था। RBI ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में ब्याज दर 0.25% घटाकर 5.25% की थी। RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है तो बैंक इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।
हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। ————————————————————— बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 74,500 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी 50 अंक ऊपर 23,450 पर पहुंचा; मीडिया और आईटी शेयरों में खरीदारी आज यानी शुक्रवार, 5 जून को सेंसेक्स 150 अंक (0.23%) की तेजी के साथ 74,500 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंकों (0.18%) की तेजी है, ये 23,450 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में मीडिया और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी है। पूरी खबर पढ़े…

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RBI की मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों का ऐलान आज:रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रहने का अनुमान; रुपए को संभालने और महंगाई रोकने पर फोकस

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की तीन दिवसीय बैठक के फैसले आज घोषित होंगे। बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का एक छोटा हिस्सा रुपए पर बढ़ते दबाव और महंगाई के जोखिम को देखते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जता रहा है। इससे पहले अप्रैल में भी रेपो रेट में बदलाव नहीं हुआ था। RBI ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में ब्याज दर 0.25% घटाकर 5.25% की थी। RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है तो बैंक इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।
हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। ————————————————————— बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 74,500 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी 50 अंक ऊपर 23,450 पर पहुंचा; मीडिया और आईटी शेयरों में खरीदारी आज यानी शुक्रवार, 5 जून को सेंसेक्स 150 अंक (0.23%) की तेजी के साथ 74,500 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंकों (0.18%) की तेजी है, ये 23,450 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में मीडिया और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी है। पूरी खबर पढ़े…

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