Sunday, 06 Sep 2026 | 04:43 PM

Trending :

EXCLUSIVE

AI could surpass humans by 2030

AI could surpass humans by 2030

न्यूयॉर्क9 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सीईओ हासाबिस ने एजीआई की तुलना ‘सिंगुलैरिटी’ से की, यानी वो पल जहां से पलटकर देखना मुमकिन नहीं होगा।- फाइल फोटो

गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हासाबिस ने हाल ही में एक ऐसी बात कही जो सुनने में उतनी ही रोमांचक है, जितनी डरावनी। उन्होंने कहा कि इंसान जैसी सोच रखने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एजीआई अब महज कुछ साल दूर है। स्टैनफर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘शायद 2030, एक-दो साल कम या ज्यादा लग सकते हैं।’ यह सुनकर खुद उन्हें भी हैरानी होती है।

हासाबिस ने एजीआई की तुलना ‘सिंगुलैरिटी’ से की, यानी वो पल जहां से पलटकर देखना मुमकिन नहीं होगा। उनके मुताबिक यह ‘एक नए मानव युग’ की शुरुआत होगी। और इसीलिए वे बार-बार यह कहते हैं कि नए दौर का सामना करने की तैयारी अभी से होनी चाहिए क्योंकि वक्त कम बचा है। हासाबिस इकलौते नहीं हैं जो इस तरह की बातें कर रहे हैं।

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि एआई की वजह से लाखों नौकरियां जा सकती हैं। एंथ्रोपिक के सीईओ डेरियो अमोदेई ने तो यहां तक कह चुके हैं कि अगले पांच वर्षों में आधे एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर काम गायब हो सकते हैं। हां, यह भी सच है कि हाल के दिनों में इन तमाम दिग्गजों ने अपनी ‘कयामत की भाषा’ में थोड़ी नरमी लाई है, लेकिन मुख्य संदेश वही है। हासाबिस ने यह भी माना कि उनके कुछ साथी अपनी भविष्यवाणियों में ‘बहुत ज्यादा निश्चित’ हो जाते हैं। यह ठीक नहीं। उन्होंने एजीआई को सिर्फ खतरे का पर्याय नहीं बताया। उनके मुताबिक यही टेक्नोलॉजी मेडिकल साइंस में क्रांति ला सकती है। यह आर्थिक बदलाव की वजह बन सकती है और एक ऐसी दुनिया की नींव रख सकती है जहां ‘अभाव’ शब्द का अर्थ बदल जाए, जिसे भविष्यवादी ‘पोस्ट-स्कार्सिटी वर्ल्ड’ कहते हैं।

युवाओं और छात्रों को उनका सीधा संदेश है- चाहे आप ‘ह्यूमैनिटीज’ पढ़ते हों या साइंस-टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग ले रहे हों, इस तकनीक से भागिए मत, इसे अपनाइए। उन्होंने सबसे दिलचस्प बात ये कही, ‘भविष्य अभी लिखा नहीं गया है, लेकिन अगले कुछ साल तय कर देंगे कि वो वास्तव में कैसा दिखेगा।’

एजीआई- जब मशीनें भी इंसान की तरह हर काम में माहिर होंगी

एजीआई यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। यह एआई का वो स्तर है जब मशीन हर काम इंसान जितनी या उससे भी बेहतर क्षमता से कर सके। अभी का एआई किसी एक काम में माहिर होता है, एजीआई हर काम में माहिर होगा। हासाबिस का अनुमान है कि यह 2030 तक हकीकत बन सकता है। सैम ऑल्टमैन और डेरियो अमोदेई भी इसी समयसीमा के आसपास इशारा कर चुके हैं। एजीआई के संभावित फायदे- बीमारियों का इलाज, आर्थिक बदलाव, अभावमुक्त दुनिया। लेकिन इसके साथ नौकरियां कम होने के खतरे, नियंत्रण का सवाल, समाज पर अप्रत्याशित प्रभाव जैसी आशंकाएं भी जुड़ी हुई हैं। दुनिया के पास तैयारी के लिए शायद पांच साल भी नहीं हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
कांग्रेस नेताओं ने लगाए कटनी पुलिस पर आरोप:कहा- अपराध बढ़े, अफसर शराब पकड़ने और चालान काटने में लगे

February 22, 2026/
6:52 pm

कटनी में बढ़ते अपराधों और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ आक्रामक...

वर्ल्ड अपडेट्स:इटली में ट्राम पटरी से उतरी, दुकान की खिड़की से टकराई, 2 लोगों की मौत, 40 घायल

February 28, 2026/
8:13 am

इटली के मिलान शहर में शुक्रवार को एक ट्राम (रेल) पटरी से उतर गई और पास की दुकान की खिड़की...

पारा 41.2 डिग्री सेल्सियस पार, गर्मी का प्रकोप बढ़ा:कलेक्टर ने स्कूलों का समय बदला, परीक्षाएं यथावत रहेंगी

April 20, 2026/
1:28 pm

जिले में गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। रविवार को अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस...

पाक राष्ट्रपति जरदारी बोले- हम यहां हिंदुओं को झेलते हैं:जावेद अख्तर भड़के, कहा- खुद भुट्टो से शादी कर सुर्खियों में आए; ट्रोलर्स को भी फटकारा

August 17, 2026/
10:40 am

भारतीय डायलॉग राइटर और गीतकार जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस बयान पर भड़क गए,...

शेफाली जरीवाला की क्या इंजेक्शन लगवाने से हुई मौत:पति पराग बोले- इंसान को जवान रखने वाला इंजेक्शन होता, तो रतन टाटा जिंदा होते

May 14, 2026/
12:12 pm

एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला की मौत को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए इंजेक्शन संबंधी दावों पर उनके पति पराग त्यागी...

31 जुलाई तक 5.9 करोड़ ITR फाइल हुए:2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन खत्म, अब ₹5000 तक लेट फीस लगेगी

August 1, 2026/
12:53 pm

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी पेनल्टी और ब्याज के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख...

सीनियर टीचर भर्ती एग्जाम दूसरे दिन भी जारी:पहली पारी में 66.85 प्रतिशत रही उपस्थिति; 18 जुलाई तक होंगे

July 13, 2026/
1:34 pm

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से आयोजित सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा दूसरे दिन भी 27 जिलों में हो...

राजनीति

AI could surpass humans by 2030

AI could surpass humans by 2030

न्यूयॉर्क9 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सीईओ हासाबिस ने एजीआई की तुलना ‘सिंगुलैरिटी’ से की, यानी वो पल जहां से पलटकर देखना मुमकिन नहीं होगा।- फाइल फोटो

गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हासाबिस ने हाल ही में एक ऐसी बात कही जो सुनने में उतनी ही रोमांचक है, जितनी डरावनी। उन्होंने कहा कि इंसान जैसी सोच रखने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एजीआई अब महज कुछ साल दूर है। स्टैनफर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘शायद 2030, एक-दो साल कम या ज्यादा लग सकते हैं।’ यह सुनकर खुद उन्हें भी हैरानी होती है।

हासाबिस ने एजीआई की तुलना ‘सिंगुलैरिटी’ से की, यानी वो पल जहां से पलटकर देखना मुमकिन नहीं होगा। उनके मुताबिक यह ‘एक नए मानव युग’ की शुरुआत होगी। और इसीलिए वे बार-बार यह कहते हैं कि नए दौर का सामना करने की तैयारी अभी से होनी चाहिए क्योंकि वक्त कम बचा है। हासाबिस इकलौते नहीं हैं जो इस तरह की बातें कर रहे हैं।

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि एआई की वजह से लाखों नौकरियां जा सकती हैं। एंथ्रोपिक के सीईओ डेरियो अमोदेई ने तो यहां तक कह चुके हैं कि अगले पांच वर्षों में आधे एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर काम गायब हो सकते हैं। हां, यह भी सच है कि हाल के दिनों में इन तमाम दिग्गजों ने अपनी ‘कयामत की भाषा’ में थोड़ी नरमी लाई है, लेकिन मुख्य संदेश वही है। हासाबिस ने यह भी माना कि उनके कुछ साथी अपनी भविष्यवाणियों में ‘बहुत ज्यादा निश्चित’ हो जाते हैं। यह ठीक नहीं। उन्होंने एजीआई को सिर्फ खतरे का पर्याय नहीं बताया। उनके मुताबिक यही टेक्नोलॉजी मेडिकल साइंस में क्रांति ला सकती है। यह आर्थिक बदलाव की वजह बन सकती है और एक ऐसी दुनिया की नींव रख सकती है जहां ‘अभाव’ शब्द का अर्थ बदल जाए, जिसे भविष्यवादी ‘पोस्ट-स्कार्सिटी वर्ल्ड’ कहते हैं।

युवाओं और छात्रों को उनका सीधा संदेश है- चाहे आप ‘ह्यूमैनिटीज’ पढ़ते हों या साइंस-टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग ले रहे हों, इस तकनीक से भागिए मत, इसे अपनाइए। उन्होंने सबसे दिलचस्प बात ये कही, ‘भविष्य अभी लिखा नहीं गया है, लेकिन अगले कुछ साल तय कर देंगे कि वो वास्तव में कैसा दिखेगा।’

एजीआई- जब मशीनें भी इंसान की तरह हर काम में माहिर होंगी

एजीआई यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। यह एआई का वो स्तर है जब मशीन हर काम इंसान जितनी या उससे भी बेहतर क्षमता से कर सके। अभी का एआई किसी एक काम में माहिर होता है, एजीआई हर काम में माहिर होगा। हासाबिस का अनुमान है कि यह 2030 तक हकीकत बन सकता है। सैम ऑल्टमैन और डेरियो अमोदेई भी इसी समयसीमा के आसपास इशारा कर चुके हैं। एजीआई के संभावित फायदे- बीमारियों का इलाज, आर्थिक बदलाव, अभावमुक्त दुनिया। लेकिन इसके साथ नौकरियां कम होने के खतरे, नियंत्रण का सवाल, समाज पर अप्रत्याशित प्रभाव जैसी आशंकाएं भी जुड़ी हुई हैं। दुनिया के पास तैयारी के लिए शायद पांच साल भी नहीं हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.