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LPG Cylinder Subsidy Cut | 4 Cylinders Now, PMUY Price Hike News

LPG Cylinder Subsidy Cut | 4 Cylinders Now, PMUY Price Hike News

नई दिल्ली11 मिनट पहले

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सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए सालाना सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर की रिफिल की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। यानी उज्ज्वला योजना के तहत ₹642 में अब सिर्फ 4 सिलेंडर ही मिलेंगे।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। युद्ध की वजह से LPG 46% तक महंगी हो चुकी है।

दुनिया में सबसे सस्ती कुकिंग गैस भारत में मिल रही

इस बीच सरकार का कहना है कि दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय परिवारों को सबसे सस्ती कुकिंग गैस मिल रही है।

भारत में घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत पड़ोसी देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसी एडवांस इकोनॉमी के मुकाबले काफी कम है।

वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत का बोझ सरकार खुद उठा रही है और इसे आम उपभोक्ताओं पर पास-ऑन नहीं होने दिया गया है।

उज्ज्वला लाभार्थियों को 642 रुपए में मिल रहा सिलेंडर

भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी हुई हैं। इसके बावजूद सरकार घरेलू एलपीजी की कीमतों को नियंत्रित रखती है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को हर साल रिफिलिंग पर प्रति सिलेंडर 300 रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिलती है।

यह छूट साल के पहले 4 सिलेंडरों पर लागू होती है, जिससे उन्हें एक सिलेंडर प्रभावी रूप से 642 रुपए का पड़ता है। भारत में 10.58 करोड़ से ज्यादा उज्ज्वला कनेक्शन हैं।

जानिए किस देश में कितने का मिलता है सिलेंडर

देश कीमत (रुपए में) उज्ज्वला कीमत (₹642) से कितना महंगा
भारत (उज्ज्वला कनेक्शन) ₹642
पाकिस्तान ₹1,046 लगभग 39% महंगा
नेपाल ₹1,207 लगभग 47% महंगा
बांग्लादेश लगभग ₹1,225 लगभग 48% महंगा
श्रीलंका ₹1,241 लगभग 48% महंगा
यूनाइटेड स्टेट्स (USA) लगभग ₹1,755 लगभग 63% महंगा
ऑस्ट्रेलिया लगभग ₹1,765 लगभग 64% महंगा
कनाडा लगभग ₹2,411 लगभग 73% महंगा

नोट: 14.2 किलोग्राम के आधार पर तुलना की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में भारत का उज्ज्वला सिलेंडर करीब 60% डिस्काउंट और सामान्य घरेलू सिलेंडर लगभग 45% डिस्काउंट पर मिलता है।

लागत ₹1600 पार, सरकार उठा रही प्रति सिलेंडर ₹700 का बोझ

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद भारत में एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत (कॉस्ट टू सप्लाई) 1,600 रुपए से ऊपर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू सिलेंडर पर करीब 700 रुपए की अंडर-रिकवरी (नुकसान) हो रही है।

इस अंडर-रिकवरी के अंतर को पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां झेल रही हैं, जिसकी आंशिक भरपाई सरकार द्वारा की जाती है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60,000 करोड़ रुपए पहुंच गई, जो इससे पिछले साल 41,338 करोड़ रुपए थी। केंद्रीय कैबिनेट ने इसके लिए कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है।

होटल-रेस्टोरेंट के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर ₹3,113.50 का हुआ

होटल और बिजनेस में इस्तेमाल होने वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर खुद-ब-खुद बदलती हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान 5 बार दाम बढ़ने के बाद दिल्ली में 19 किलोग्राम का कॉमर्शियल सिलेंडर 3,113.50 रुपए (करीब 164 रुपए प्रति किलोग्राम) पर बिक रहा है। इसकी तुलना में घरेलू उपभोक्ता केवल 66 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया तनाव से सऊदी एलपीजी बेंचमार्क 46% महंगा हुआ

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 60% हिस्सा आयात करता है। इसकी लैंडेड कॉस्ट सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से तय होती है, जिसे सऊदी अरामको हर महीने की शुरुआत में फिक्स करती है। पश्चिम एशिया में आए व्यवधान और फरवरी के अंत में होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है।

फरवरी में जो सऊदी सीपी बेंचमार्क 542.50 डॉलर प्रति टन पर था, वह अप्रैल में बढ़कर 775 डॉलर और जून 2026 में 790 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। इस तरह फरवरी के मुकाबले जून तक एलपीजी बेंचमार्क में करीब 46% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें प्रोपेन 39% और ब्यूटेन 52% महंगा हुआ है।

होर्मुज रूट बंद होने के बाद भी भारत ने जारी रखी सप्लाई

दुनिया के करीब एक-तिहाई तेल और भारत की 54% एलपीजी का आयात होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही होता है। इस मार्ग पर संघर्ष के कारण जहां अधिकांश कॉमर्शियल ट्रैफिक रुक गया, वहीं भारत ने बेहतर तालमेल के जरिए अपने जहाजों की आवाजाही जारी रखी। भारतीय झंडे वाले टैंकर लगातार इस रास्ते से कच्चे तेल और एलपीजी की खेप लेकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचे, जिससे देश में किसी भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट की किल्लत नहीं हुई।

घरेलू प्रोडक्शन 60% बढ़ाया, अमेरिका-कनाडा से शुरू की खरीद

सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को 60% से अधिक बढ़ाते हुए करीब 32 टीएमटी (TMT) से 52 टीएमटी तक पहुंचा दिया। इसके साथ ही होर्मुज रूट के बाहर के देशों जैसे अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी गैस की खरीद शुरू की गई। उपलब्ध गैस की सप्लाई में घरों के साथ अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे प्रायोरिटी यूजर्स को प्राथमिकता दी गई।

दूसरी तरफ मांग के दबाव को कम करने के लिए ग्राहकों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया। घरेलू गैस की कॉमर्शियल मार्केट में चोरी रोकने के लिए ओटीपी (OTP) आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन को बढ़ाकर 90% तक कर दिया गया है।

LPG से पहले पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े

पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े हैं। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर ₹7.50 प्रति लीटर बढ़ चुकी हैं, जबकि CNG करीब ₹6 प्रति किलो महंगी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹33.6 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

इसके बावजूद कंपनियों का दावा है कि पेट्रोल-डीजल अभी भी लागत से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। कच्चे तेल के महंगे होने का कुछ बोझ सरकारी तेल कंपनियां खुद उठा रही हैं।

कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत देखी जाती है।
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत का असर पड़ता है।
  • गैस आयात, ढुलाई, बॉटलिंग प्लांट और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च जोड़ा जाता है।
  • तेल कंपनियां लागत और बाजार की स्थिति देखकर कीमत तय करती हैं।
  • सरकार की टैक्स और सब्सिडी संबंधी नीतियों का भी असर पड़ता है।

क्या होती है अंडर-रिकवरी?

तेल और गैस कंपनियां जिस कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन खरीदती हैं या रिफाइन करती हैं, यदि सरकार के निर्देश पर आम जनता को उससे कम कीमत पर ईंधन बेचा जाए, तो उस लागत और बिक्री मूल्य के अंतर को ‘अंडर-रिकवरी’ कहा जाता है। यह सीधे तौर पर ग्राहकों को महंगाई से बचाने के लिए कंपनियों द्वारा सहा गया घाटा है।

क्या है होर्मुज स्ट्रेट?

यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद संकरा और महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% और भारत का 54% एलपीजी आयात इसी रास्ते से होकर गुजरता है, जिसके चलते यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सबसे संवेदनशील रूट माना जाता है।

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LPG Cylinder Subsidy Cut | 4 Cylinders Now, PMUY Price Hike News

नई दिल्ली11 मिनट पहले

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सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए सालाना सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर की रिफिल की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। यानी उज्ज्वला योजना के तहत ₹642 में अब सिर्फ 4 सिलेंडर ही मिलेंगे।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। युद्ध की वजह से LPG 46% तक महंगी हो चुकी है।

दुनिया में सबसे सस्ती कुकिंग गैस भारत में मिल रही

इस बीच सरकार का कहना है कि दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय परिवारों को सबसे सस्ती कुकिंग गैस मिल रही है।

भारत में घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत पड़ोसी देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसी एडवांस इकोनॉमी के मुकाबले काफी कम है।

वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत का बोझ सरकार खुद उठा रही है और इसे आम उपभोक्ताओं पर पास-ऑन नहीं होने दिया गया है।

उज्ज्वला लाभार्थियों को 642 रुपए में मिल रहा सिलेंडर

भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी हुई हैं। इसके बावजूद सरकार घरेलू एलपीजी की कीमतों को नियंत्रित रखती है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को हर साल रिफिलिंग पर प्रति सिलेंडर 300 रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिलती है।

यह छूट साल के पहले 4 सिलेंडरों पर लागू होती है, जिससे उन्हें एक सिलेंडर प्रभावी रूप से 642 रुपए का पड़ता है। भारत में 10.58 करोड़ से ज्यादा उज्ज्वला कनेक्शन हैं।

जानिए किस देश में कितने का मिलता है सिलेंडर

देश कीमत (रुपए में) उज्ज्वला कीमत (₹642) से कितना महंगा
भारत (उज्ज्वला कनेक्शन) ₹642
पाकिस्तान ₹1,046 लगभग 39% महंगा
नेपाल ₹1,207 लगभग 47% महंगा
बांग्लादेश लगभग ₹1,225 लगभग 48% महंगा
श्रीलंका ₹1,241 लगभग 48% महंगा
यूनाइटेड स्टेट्स (USA) लगभग ₹1,755 लगभग 63% महंगा
ऑस्ट्रेलिया लगभग ₹1,765 लगभग 64% महंगा
कनाडा लगभग ₹2,411 लगभग 73% महंगा

नोट: 14.2 किलोग्राम के आधार पर तुलना की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में भारत का उज्ज्वला सिलेंडर करीब 60% डिस्काउंट और सामान्य घरेलू सिलेंडर लगभग 45% डिस्काउंट पर मिलता है।

लागत ₹1600 पार, सरकार उठा रही प्रति सिलेंडर ₹700 का बोझ

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद भारत में एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत (कॉस्ट टू सप्लाई) 1,600 रुपए से ऊपर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू सिलेंडर पर करीब 700 रुपए की अंडर-रिकवरी (नुकसान) हो रही है।

इस अंडर-रिकवरी के अंतर को पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां झेल रही हैं, जिसकी आंशिक भरपाई सरकार द्वारा की जाती है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60,000 करोड़ रुपए पहुंच गई, जो इससे पिछले साल 41,338 करोड़ रुपए थी। केंद्रीय कैबिनेट ने इसके लिए कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है।

होटल-रेस्टोरेंट के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर ₹3,113.50 का हुआ

होटल और बिजनेस में इस्तेमाल होने वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर खुद-ब-खुद बदलती हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान 5 बार दाम बढ़ने के बाद दिल्ली में 19 किलोग्राम का कॉमर्शियल सिलेंडर 3,113.50 रुपए (करीब 164 रुपए प्रति किलोग्राम) पर बिक रहा है। इसकी तुलना में घरेलू उपभोक्ता केवल 66 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया तनाव से सऊदी एलपीजी बेंचमार्क 46% महंगा हुआ

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 60% हिस्सा आयात करता है। इसकी लैंडेड कॉस्ट सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से तय होती है, जिसे सऊदी अरामको हर महीने की शुरुआत में फिक्स करती है। पश्चिम एशिया में आए व्यवधान और फरवरी के अंत में होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है।

फरवरी में जो सऊदी सीपी बेंचमार्क 542.50 डॉलर प्रति टन पर था, वह अप्रैल में बढ़कर 775 डॉलर और जून 2026 में 790 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। इस तरह फरवरी के मुकाबले जून तक एलपीजी बेंचमार्क में करीब 46% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें प्रोपेन 39% और ब्यूटेन 52% महंगा हुआ है।

होर्मुज रूट बंद होने के बाद भी भारत ने जारी रखी सप्लाई

दुनिया के करीब एक-तिहाई तेल और भारत की 54% एलपीजी का आयात होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही होता है। इस मार्ग पर संघर्ष के कारण जहां अधिकांश कॉमर्शियल ट्रैफिक रुक गया, वहीं भारत ने बेहतर तालमेल के जरिए अपने जहाजों की आवाजाही जारी रखी। भारतीय झंडे वाले टैंकर लगातार इस रास्ते से कच्चे तेल और एलपीजी की खेप लेकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचे, जिससे देश में किसी भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट की किल्लत नहीं हुई।

घरेलू प्रोडक्शन 60% बढ़ाया, अमेरिका-कनाडा से शुरू की खरीद

सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को 60% से अधिक बढ़ाते हुए करीब 32 टीएमटी (TMT) से 52 टीएमटी तक पहुंचा दिया। इसके साथ ही होर्मुज रूट के बाहर के देशों जैसे अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी गैस की खरीद शुरू की गई। उपलब्ध गैस की सप्लाई में घरों के साथ अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे प्रायोरिटी यूजर्स को प्राथमिकता दी गई।

दूसरी तरफ मांग के दबाव को कम करने के लिए ग्राहकों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया। घरेलू गैस की कॉमर्शियल मार्केट में चोरी रोकने के लिए ओटीपी (OTP) आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन को बढ़ाकर 90% तक कर दिया गया है।

LPG से पहले पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े

पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े हैं। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर ₹7.50 प्रति लीटर बढ़ चुकी हैं, जबकि CNG करीब ₹6 प्रति किलो महंगी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹33.6 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

इसके बावजूद कंपनियों का दावा है कि पेट्रोल-डीजल अभी भी लागत से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। कच्चे तेल के महंगे होने का कुछ बोझ सरकारी तेल कंपनियां खुद उठा रही हैं।

कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत देखी जाती है।
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत का असर पड़ता है।
  • गैस आयात, ढुलाई, बॉटलिंग प्लांट और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च जोड़ा जाता है।
  • तेल कंपनियां लागत और बाजार की स्थिति देखकर कीमत तय करती हैं।
  • सरकार की टैक्स और सब्सिडी संबंधी नीतियों का भी असर पड़ता है।

क्या होती है अंडर-रिकवरी?

तेल और गैस कंपनियां जिस कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन खरीदती हैं या रिफाइन करती हैं, यदि सरकार के निर्देश पर आम जनता को उससे कम कीमत पर ईंधन बेचा जाए, तो उस लागत और बिक्री मूल्य के अंतर को ‘अंडर-रिकवरी’ कहा जाता है। यह सीधे तौर पर ग्राहकों को महंगाई से बचाने के लिए कंपनियों द्वारा सहा गया घाटा है।

क्या है होर्मुज स्ट्रेट?

यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद संकरा और महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% और भारत का 54% एलपीजी आयात इसी रास्ते से होकर गुजरता है, जिसके चलते यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सबसे संवेदनशील रूट माना जाता है।

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