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ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की जांच होगी आसान:IIT इंदौर ने डेवलप की हाई-एक्युरेसी तकनीक; ग्रामीण क्षेत्रों में भी समय पर इलाज की उम्मीद

ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की जांच होगी आसान:IIT इंदौर ने डेवलप की हाई-एक्युरेसी तकनीक; ग्रामीण क्षेत्रों में भी समय पर इलाज की उम्मीद

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में मृत्यु के दो प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल इमेजिंग के जरिए इन कैंसरों की समय पर पहचान हजारों जानें बचा सकती है। हालांकि, देश में प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसका असर खासतौर पर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है। इसी चुनौती का समाधान निकालते हुए आईआईटी इंदौर के शोधकर्ताओं ने अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एल्गोरिदम [डेवपल किए हैं। ये मेडिकल इमेज में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की बेहद सटीक पहचान और लोकेशन तय करने में सक्षम हैं। यह तकनीक न केवल कैंसर की जल्दी पहचान करती है, बल्कि अनावश्यक बायोप्सी की जरूरत को भी कम कर सकती है। आईआईटी इंदौर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की MODSS लैब में प्रोफेसर कपिल आहूजा के नेतृत्व में यह रिसर्च किया गया है। टीम में पीएचडी छात्र सौरभ सैनी, पूर्व पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता डॉ. दीप्ति ताम्रकार और पूर्व पीएचडी छात्र डॉ. आदित्य ए. शास्त्री शामिल रहे। मैमोग्राम से ब्रेस्ट कैंसर की सटीक पहचान ब्रेस्ट कैंसर की जांच में उपयोग होने वाले मैमोग्राम में बारीक टेक्सचर पैटर्न होते हैं, जो कैंसर की स्थिति में अनियमित हो जाते हैं। आईआईटी इंदौर की टीम ने ‘हिस्टोग्राम ऑफ ओरिएंटेड टेक्सचर (HOT)’ डिस्क्रिप्टर एल्गोरिदम के जरिए इन पैटर्न का गहराई से विश्लेषण किया, जिससे घने ब्रेस्ट टिशू की स्थिति में भी स्वस्थ और कैंसरग्रस्त ऊतकों के बीच स्पष्ट अंतर संभव हो सका। सर्वाइकल कैंसर के लिए डीप लर्निंग समाधान सर्वाइकल कैंसर की पहचान में उपयोग होने वाली कोल्पोस्कोपी इमेज के लिए शोधकर्ताओं ने ‘ब्लॉक-फ्यूज्ड अटेंशन-ड्रिवन एडाप्टिवली-पूल्ड रेसनेट’ नामक डीप लर्निंग एल्गोरिदम डेवलप किया है। यह तकनीक रंग, किनारे, आकार और संरचना जैसी सूक्ष्म व अमूर्त विशेषताओं को एक साथ पहचानने में सक्षम है। पारदर्शिता और भरोसे पर जोर आईआईटी इंदौर के डायरेक्टर प्रो. सुहास जोशी ने कहा कि यह शोध राष्ट्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि डेवलप AI सिस्टम यह भी स्पष्ट करता है कि वह किसी निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा, जिससे डॉक्टरों का भरोसा और पारदर्शिता दोनों बढ़ती हैं। भारतीय मरीजों पर होगा ट्रायल प्रोफेसर कपिल आहूजा ने बताया कि अब तक एल्गोरिदम को वैश्विक डेटासेट पर प्रशिक्षित किया गया है, लेकिन अब भारतीय मरीजों के लिए विशेष प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है। इसके लिए टीम ने एचसीजी कैंसर अस्पताल की सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रेणु दुबे शर्मा के साथ सहयोग किया है। इस ‘लैब-टू-मार्केट’ पहल को दृष्टि साइबर फिजिकल सिस्टम्स फाउंडेशन का समर्थन मिला है। शोधकर्ताओं का लक्ष्य भविष्य में इसी AI तकनीक को थायरॉयड, फेफड़े, ओरल, कोलोरेक्टल और इसोफेगल कैंसर जैसे अन्य प्रमुख कैंसरों तक विस्तार देने का है, जो भारत में कैंसर से होने वाली मौतों के शीर्ष कारणों में शामिल हैं।

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