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Street Food Health Risk; Diabetes Obesity

Street Food Health Risk; Diabetes Obesity

8 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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क्या आप भी ऐसी कॉलोनी या मोहल्ले में रहते हैं, जहां आसपास हर गली-नुक्कड़ पर स्ट्रीट फूड की दुकानें हैं। अगर हां, तो यह स्टडी आपके लिए बेहद अहम है। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि कभी-कभार स्ट्रीट फूड खाने से क्या ही फर्क पड़ेगा।

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो आपको इस स्टडी के बारे में जानना बेहद जरूरी है। ‘मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन’ की एक स्टडी के मुताबिक, जिन इलाकों में स्ट्रीट फूड के आउटलेट ज्यादा होते हैं, वहां रहने वालों में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग दो गुना तक बढ़ जाता है। यही स्थिति आगे चलकर डायबिसिटी (Diabesity) यानी मोटापा और डायबिटीज के खतरनाक मेल को जन्म देती है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम इस बारे में विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • लोग स्ट्रीट फूड की ओर क्यों ज्यादा आकर्षित होते हैं?
  • घर के आसपास स्ट्रीट फूड होने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

एक्सपर्ट: डॉ. आशीष मेहरोत्रा, कंसल्टेंट, क्रिटिकल केयर, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर

सवाल- स्ट्रीट फूड को लेकर हुई स्टडी क्या कहती है?

जवाब- इस स्टडी से पता चलता है कि ज्यादा स्ट्रीट फूड वाले इलाकों में मेटाबॉलिक डिजीज (मोटापा, डायबिटीज, फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर) का रिस्क ज्यादा होता है। जहां अनहेल्दी फूड आउटलेट ज्यादा थे, वहां मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग दो गुना तक ज्यादा था। यह स्टडी ‘मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन’ के रिसर्चर्स ने UK के डॉक्टरों के साथ मिलकर की।

सवाल- आसपास मिलने वाला फूड हमारी आदतों को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब- आमतौर पर लोग अपने घर के आसपास की दुकानों और आउलेट्स से ज्यादा खरीदारी करते हैं। खाने-पीने के सामान खरीदने हों तो यह ज्यादा कॉमन है। यह फूड चॉइस से ज्यादा सुविधा की बात है।

ऐसे में अगर घर के आसपास स्ट्रीट फूड/फास्ट-फूड के आउटलेट ज्यादा हैं तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि फास्टफूड ज्यादा खाएंगे।

सवाल- आसपास स्ट्रीट फूड की उपलब्धता ज्यादा होने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- घर के आसपास स्ट्रीट फूड होने का मतलब है कि आप उसे ज्यादा खाएंगे। इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखता है। इससे-

  • वजन तेजी से बढ़ता है,
  • शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है।
  • मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

मई 2025, में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक रिव्यू रिपोर्ट के मुताबिक, घर के आसपास के फूड एनवायर्नमेंट और सेहत के बीच गहरा संबंध है। आसपास स्ट्रीट फूड/फास्ट फूड की दुकानें और रेस्तरां की उपलब्धता डायबिटीज, हार्ट डिजीज और मृत्यु दर के खतरे को बढ़ा सकती है। नीचे दिए ग्राफिक से स्ट्रीट फूड के हेल्थ रिस्क समझिए-

सवाल- लोग आमतौर पर स्ट्रीट फूड ज्यादा क्यों खाते हैं?

जवाब- इसके कई कारण हैं। जैसेकि-

  • ये आसानी से मिल जाते हैं
  • ऑर्डर पर जल्दी तैयार हो जाते हैं।
  • सस्ते दामों में मिल जाते हैं।
  • खाने में स्वादिष्ट होते हैं।
  • मेहनत और समय बचाते हैं।

इसके अलावा एक बड़ी वजह ये भी है कि स्ट्रीट फूड हमारे घरों के आसपास आसानी से मिल जाते हैं।

सवाल- क्या स्ट्रीट फूड एडिक्टिव भी हो सकता है?

जवाब- साइंस मैगजीन ‘क्लिनिकल केमिस्ट्री’ में साल 2018 में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, फास्ट फूड में मौजूद रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (जैसे चीनी, मैदा) शरीर में उसी तरह प्रतिक्रिया करते हैं जैसे नशीले पदार्थ।

इन्हें खाने पर ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन लेवल तेजी से बढ़ता है। इससे ब्रेन में डोपामिन (न्यूरोट्रांसमीटर) का लेवल बढ़ता है। डोपामिन एक हैपी हॉर्मोन है, जो हमें अच्छा महसूस कराता है। इसलिए ब्रेन बार-बार ऐसे फूड्स के लिए क्रेविंग पैदा करता है। स्टडी के मुताबिक, ऐसे फूड्स क्रेविंग के साथ फूड एडिक्शन की वजह भी बन सकते हैं।

सवाल- स्ट्रीट फूड हमारे मेटाबॉलिज्म को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब- नवंबर, 2013 में ‘रिसर्चगेट’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, फास्ट फूड का ज्यादा सेवन मेटाबॉलिक सिंड्रोम (मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज) के खतरे को बढ़ाता है। इसमें मौजूद हाई-कैलोरी, सैचुरेटेड फैट, नमक और शुगर मेटाबॉलिज्म पर नेगेटिव असर डालते हैं।

अगर फास्ट फूड ज्यादा खा रहे हैं तो शरीर को ब्लड शुगर और इंसुलिन के संतुलन के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और मेटाबॉलिक सिस्टम सुस्त हो जाता है।

सवाल- क्या आसपास पार्क और जिम की कमी भी सेहत पर असर डालती है?

जवाब- मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की स्टडी में यह भी सामने आया कि समस्या सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। एक्सरसाइज के लिए घर के आसपास पार्क, जिम, प्लेग्राउंड और स्पोर्ट्स क्लब नहीं होने से भी सेहत खराब हो सकती है।

स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों में डायबिसिटी थी, उनमें से 56.2% लोग पार्क, जिम, प्लेग्राउंड और स्पोर्ट्स क्लब जैसी जगहों से 1.1 किलोमीटर से ज्यादा दूर रहते थे। यानी जिनके घर के पास चलने-फिरने और एक्सरसाइज की सुविधाएं नहीं थीं, उनमें मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कहीं ज्यादा पाया गया।

सवाल- अपनी फूड हैबिट्स को कैसे सुधारें?

जवाब- भूख लगने पर लोग सबसे पहले अपने किचन या फ्रिज में खाना तलाशते हैं। इसलिए फूड हैबिट्स की लड़ाई भी यहीं से शुरू हो जाती है। अच्छी फूड हैबिट के लिए जरूरी है कि जब आप बाजार जाएं तो उस समय ही हेल्दी फूड खरीदें।

घर पर बना संतुलित खाना खाने और आसपास उपलब्ध हेल्दी विकल्प अपनाने से बीमारियों का रिस्क काफी हद तक कम किया जा सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से फूड हैबिट्स सुधारने के टिप्स समझिए-

सवाल- हेल्दी और फिट रहने के लिए अपनी लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने की जरूरत है?

जवाब- फिट रहने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ छोटे-छोटे प्रैक्टिकल बदलाव जरूरी हैं। जैसे कि-

  • रोज कम-से-कम 30 मिनट तक फिजिकल एक्टिविटी करें।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
  • दिन में 2–3 बार हल्की स्ट्रेचिंग करें।
  • ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठे न रहें।
  • भोजन करते हुए मोबाइल फोन न देखें।
  • रात का खाना सोने से 2–3 घंटे पहले खाएं।
  • रोज 7–8 घंटे की नींद पूरी करें।
  • रोज कम-से-कम 7–8 गिलास पानी जरूर पिएं।

………………….

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क्या आप भी ऐसी कॉलोनी या मोहल्ले में रहते हैं, जहां आसपास हर गली-नुक्कड़ पर स्ट्रीट फूड की दुकानें हैं। अगर हां, तो यह स्टडी आपके लिए बेहद अहम है। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि कभी-कभार स्ट्रीट फूड खाने से क्या ही फर्क पड़ेगा।

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो आपको इस स्टडी के बारे में जानना बेहद जरूरी है। ‘मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन’ की एक स्टडी के मुताबिक, जिन इलाकों में स्ट्रीट फूड के आउटलेट ज्यादा होते हैं, वहां रहने वालों में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग दो गुना तक बढ़ जाता है। यही स्थिति आगे चलकर डायबिसिटी (Diabesity) यानी मोटापा और डायबिटीज के खतरनाक मेल को जन्म देती है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम इस बारे में विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • लोग स्ट्रीट फूड की ओर क्यों ज्यादा आकर्षित होते हैं?
  • घर के आसपास स्ट्रीट फूड होने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

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जवाब- इस स्टडी से पता चलता है कि ज्यादा स्ट्रीट फूड वाले इलाकों में मेटाबॉलिक डिजीज (मोटापा, डायबिटीज, फैटी लिवर, हाई ब्लड प्रेशर) का रिस्क ज्यादा होता है। जहां अनहेल्दी फूड आउटलेट ज्यादा थे, वहां मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग दो गुना तक ज्यादा था। यह स्टडी ‘मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन’ के रिसर्चर्स ने UK के डॉक्टरों के साथ मिलकर की।

सवाल- आसपास मिलने वाला फूड हमारी आदतों को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब- आमतौर पर लोग अपने घर के आसपास की दुकानों और आउलेट्स से ज्यादा खरीदारी करते हैं। खाने-पीने के सामान खरीदने हों तो यह ज्यादा कॉमन है। यह फूड चॉइस से ज्यादा सुविधा की बात है।

ऐसे में अगर घर के आसपास स्ट्रीट फूड/फास्ट-फूड के आउटलेट ज्यादा हैं तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि फास्टफूड ज्यादा खाएंगे।

सवाल- आसपास स्ट्रीट फूड की उपलब्धता ज्यादा होने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- घर के आसपास स्ट्रीट फूड होने का मतलब है कि आप उसे ज्यादा खाएंगे। इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखता है। इससे-

  • वजन तेजी से बढ़ता है,
  • शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है।
  • मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

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सवाल- लोग आमतौर पर स्ट्रीट फूड ज्यादा क्यों खाते हैं?

जवाब- इसके कई कारण हैं। जैसेकि-

  • ये आसानी से मिल जाते हैं
  • ऑर्डर पर जल्दी तैयार हो जाते हैं।
  • सस्ते दामों में मिल जाते हैं।
  • खाने में स्वादिष्ट होते हैं।
  • मेहनत और समय बचाते हैं।

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सवाल- क्या स्ट्रीट फूड एडिक्टिव भी हो सकता है?

जवाब- साइंस मैगजीन ‘क्लिनिकल केमिस्ट्री’ में साल 2018 में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, फास्ट फूड में मौजूद रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (जैसे चीनी, मैदा) शरीर में उसी तरह प्रतिक्रिया करते हैं जैसे नशीले पदार्थ।

इन्हें खाने पर ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन लेवल तेजी से बढ़ता है। इससे ब्रेन में डोपामिन (न्यूरोट्रांसमीटर) का लेवल बढ़ता है। डोपामिन एक हैपी हॉर्मोन है, जो हमें अच्छा महसूस कराता है। इसलिए ब्रेन बार-बार ऐसे फूड्स के लिए क्रेविंग पैदा करता है। स्टडी के मुताबिक, ऐसे फूड्स क्रेविंग के साथ फूड एडिक्शन की वजह भी बन सकते हैं।

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जवाब- नवंबर, 2013 में ‘रिसर्चगेट’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, फास्ट फूड का ज्यादा सेवन मेटाबॉलिक सिंड्रोम (मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज) के खतरे को बढ़ाता है। इसमें मौजूद हाई-कैलोरी, सैचुरेटेड फैट, नमक और शुगर मेटाबॉलिज्म पर नेगेटिव असर डालते हैं।

अगर फास्ट फूड ज्यादा खा रहे हैं तो शरीर को ब्लड शुगर और इंसुलिन के संतुलन के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और मेटाबॉलिक सिस्टम सुस्त हो जाता है।

सवाल- क्या आसपास पार्क और जिम की कमी भी सेहत पर असर डालती है?

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सवाल- अपनी फूड हैबिट्स को कैसे सुधारें?

जवाब- भूख लगने पर लोग सबसे पहले अपने किचन या फ्रिज में खाना तलाशते हैं। इसलिए फूड हैबिट्स की लड़ाई भी यहीं से शुरू हो जाती है। अच्छी फूड हैबिट के लिए जरूरी है कि जब आप बाजार जाएं तो उस समय ही हेल्दी फूड खरीदें।

घर पर बना संतुलित खाना खाने और आसपास उपलब्ध हेल्दी विकल्प अपनाने से बीमारियों का रिस्क काफी हद तक कम किया जा सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से फूड हैबिट्स सुधारने के टिप्स समझिए-

सवाल- हेल्दी और फिट रहने के लिए अपनी लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने की जरूरत है?

जवाब- फिट रहने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ छोटे-छोटे प्रैक्टिकल बदलाव जरूरी हैं। जैसे कि-

  • रोज कम-से-कम 30 मिनट तक फिजिकल एक्टिविटी करें।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
  • दिन में 2–3 बार हल्की स्ट्रेचिंग करें।
  • ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठे न रहें।
  • भोजन करते हुए मोबाइल फोन न देखें।
  • रात का खाना सोने से 2–3 घंटे पहले खाएं।
  • रोज 7–8 घंटे की नींद पूरी करें।
  • रोज कम-से-कम 7–8 गिलास पानी जरूर पिएं।

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