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फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है

फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है

अगर आपके पास करोड़ों रुपए हैं, तो भी आप शोरूम जाकर अपनी पसंद की फेरारी कार नहीं खरीद सकते। इसके कुछ स्पेशल और लिमिटेड एडिशन मॉडल्स जैसे- फेरारी ला-फेरारी या हालिया पुरोसांग्वे एसयूवी को खरीदने के लिए पहले आपको अपना बैकग्राउंड बताना होगा। यहां तक कि हो सकता है कि कंपनी खुद तय करे कि वह आपको गाड़ी बेचेगी या नहीं। फेरारी को लेकर दीवानगी का आलम यह है कि अगर आज आप कोई कार बुक करते हैं तो 2028 या 2029 में वह आपको मिल पाएगी। फेरारी रफ्तार और लग्जरी का ऐसा संगम है जो इसे सुपर-कार बनाती है। हालांकि फेरारी के इतिहास में दो ऐसे संकट भी आए जब कंपनी दिवालिया होने के करीब पहुंच कर अस्तित्व के लिए जूझती नजर आई। 1969 में यह दिवालिया होने के कगार पर थी, लेकिन तब फिएट ने हिस्सेदारी खरीदकर इसे बचा लिया। असली चुनौती 1988 में इसके संस्थापक एंजो फेरारी के निधन के बाद आई। 80 के दशक के अंत में सट्टेबाजों की वजह से कारों की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं। इसे कलेक्टर बबल कहा गया। जब 90 के दशक में वैश्विक मंदी आई और यह बुलबुला फूटा, तो 1991 के पीक के मुकाबले 1993 तक इसकी बिक्री आधी रह गई। कारें अपनी साख खोने लगी थीं। 8.50 लाख करोड़ रुपए की कंपनी है फेरारी आज फेरारी दुनिया के सबसे मजबूत ऑटोमोटिव और सुपर-कार ब्रांड्स में से एक है। ब्रांड्स फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार इसे दुनिया के सिर्फ 12 ब्रांड को मिलने वाली AAA+ रेटिंग हासिल है। आज यह करीब 8.50 लाख करोड़ रु. मूल्य की कंपनी है। वर्तमान में इसके दुनियाभर में करीब 5,718 कर्मचारी हैं। अगर भारत की बात करें तो यहां फेरारी की एक्स-शोरूम कीमत ₹3.76 करोड़ से शुरू होकर ₹10.37 करोड़ रु. तक जाती है। नई फेरारी कार के लिए ग्राहकों को दो साल तक की वेटिंग रहती है। देश में पूरा कोटा सोल्ड-आउट रहता है। शुरुआत – गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर ने रखी थी फेरारी की नींव इटली के मोदेना शहर में जन्मे और गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर एंजो फरारी ने 1939 में ऑटो एवियो कोस्त्रुजियोनी नाम से कंपनी शुरू की थी, लेकिन दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने के कारण करीब 8 साल तक काम बंद रहा। इसके बाद 1947 में उन्होंने फेरारी नाम से पहली कार सड़क पर उतारी। कार रेसिंग उनका जुनून था। नए कदम – लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी उतरी कंपनी कंपनी लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी धूम मचा रही है। हाल ही में मिलान फैशन वीक में फेरारी कलेक्शन पेश किया गया। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में कदम रख रही है, जिसके लिए मारानेलो में एक नई ‘ई-बिल्डिंग’ शुरू की गई है। इसके अलावा, मरीन इंजीनियरिंग और सेलिंग की दुनिया में भी प्रवेश की तैयारी कर रही है। यूं संकट में फंसी थी रेसिंग पर फोकस, ग्राहकों की अनदेखी – एंजो फेरारी का जुनून सिर्फ रेसिंग और फॉर्मूला वन जीतना था। इस रवैये के कारण उन्होंने कभी ग्राहकों की पसंद, आराम या लग्जरी को प्राथमिकता नहीं दी। लीडरशिप का अड़ियल रवैया, आंतरिक कलह – 1961 में एंजो की पत्नी ने प्रबंधन के कामों में दखल देना शुरू किया। जब अधिकारियों ने विरोध किया, तो एंजो ने कई प्रबंधकों को नौकरी से निकाल दिया। आर्थिक मंदी और कलेक्टर बबल का फूटना – 80 के दशक के अंत में लोग ये कारें निवेश के तौर पर खरीदते थे। 90 के दशक में मंदी की वजह से बिक्री आधी रह गई और कंपनी गहरे वित्तीय घाटे में डूब गई। भविष्य की रणनीति का अभाव – एंजो की मृत्यु के बाद फिएट के अधिकारियों ने कमान संभाली, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं थी। इस तरह की वापसी लुका डि मोंटेजेमोलो की लीडरशिप – 1991 में लुका डि मोंटेजेमोलो फेरारी के चेयरमैन बने। सबसे पहले कारों की क्वालिटी को सुधारा। सुनिश्चित किया कि फेरारी सड़क पर भी आरामदायक और भरोसेमंद हो। ब्रांड लाइसेंसिंग का विस्तार – मोंटेजेमोलो ने लग्जरी कपड़े, घड़ियां, परफ्यूम और अन्य लाइफस्टाइल उत्पादों के लिए अपने मशहूर ‘प्रान्सिंग हॉर्स’ लोगो को लाइसेंस पर देकर करोड़ों रुपए कमाए। एक्सक्लूसिविटी बरकरार रखना – लुका की रणनीति स्पष्ट थी- ‘हमेशा बाजार की मांग से एक कार कम बनाओ। इस कृत्रिम कमी ने अमीरों के बीच फेरारी का आकर्षण कई गुना बढ़ा दिया पर्सनलाइजेशन – 1993 में ‘फेरारी चैलेंज’ शुरू किया, जो फेरारी मालिकों के लिए एक एमेच्योर रेसिंग सीरीज थी। कई भारी पर्सनलाइजेशन के विकल्प दिए। ऐसे पड़ा नाम – कंपनी का नाम इसके संस्थापक एंजो फेरारी के सरनेम पर रखा गया है। रेसिंग शौकीन एंजो ने खुद ही यह नाम तय किया था। सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी – लैंबॉर्गिनी, मैकलारेन, पॉर्श, एस्टन मार्टिन और बुगाटी दुनियाभर में इसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों में हैं। – 3.5 लाख कारें ही बनाई हैं फेरारी ने आज तक।
– 60 से ज्यादा देशों में व्यापार करती है कंपनी दुनियाभर में।
– 179 अधिकृत डीलर हैं दुनियाभर में फेरारी के।
-13,640 कारें बिकी कंपनी की 2025 में विभिन्न देशों में।

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फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है

फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है

अगर आपके पास करोड़ों रुपए हैं, तो भी आप शोरूम जाकर अपनी पसंद की फेरारी कार नहीं खरीद सकते। इसके कुछ स्पेशल और लिमिटेड एडिशन मॉडल्स जैसे- फेरारी ला-फेरारी या हालिया पुरोसांग्वे एसयूवी को खरीदने के लिए पहले आपको अपना बैकग्राउंड बताना होगा। यहां तक कि हो सकता है कि कंपनी खुद तय करे कि वह आपको गाड़ी बेचेगी या नहीं। फेरारी को लेकर दीवानगी का आलम यह है कि अगर आज आप कोई कार बुक करते हैं तो 2028 या 2029 में वह आपको मिल पाएगी। फेरारी रफ्तार और लग्जरी का ऐसा संगम है जो इसे सुपर-कार बनाती है। हालांकि फेरारी के इतिहास में दो ऐसे संकट भी आए जब कंपनी दिवालिया होने के करीब पहुंच कर अस्तित्व के लिए जूझती नजर आई। 1969 में यह दिवालिया होने के कगार पर थी, लेकिन तब फिएट ने हिस्सेदारी खरीदकर इसे बचा लिया। असली चुनौती 1988 में इसके संस्थापक एंजो फेरारी के निधन के बाद आई। 80 के दशक के अंत में सट्टेबाजों की वजह से कारों की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं। इसे कलेक्टर बबल कहा गया। जब 90 के दशक में वैश्विक मंदी आई और यह बुलबुला फूटा, तो 1991 के पीक के मुकाबले 1993 तक इसकी बिक्री आधी रह गई। कारें अपनी साख खोने लगी थीं। 8.50 लाख करोड़ रुपए की कंपनी है फेरारी आज फेरारी दुनिया के सबसे मजबूत ऑटोमोटिव और सुपर-कार ब्रांड्स में से एक है। ब्रांड्स फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार इसे दुनिया के सिर्फ 12 ब्रांड को मिलने वाली AAA+ रेटिंग हासिल है। आज यह करीब 8.50 लाख करोड़ रु. मूल्य की कंपनी है। वर्तमान में इसके दुनियाभर में करीब 5,718 कर्मचारी हैं। अगर भारत की बात करें तो यहां फेरारी की एक्स-शोरूम कीमत ₹3.76 करोड़ से शुरू होकर ₹10.37 करोड़ रु. तक जाती है। नई फेरारी कार के लिए ग्राहकों को दो साल तक की वेटिंग रहती है। देश में पूरा कोटा सोल्ड-आउट रहता है। शुरुआत – गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर ने रखी थी फेरारी की नींव इटली के मोदेना शहर में जन्मे और गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर एंजो फरारी ने 1939 में ऑटो एवियो कोस्त्रुजियोनी नाम से कंपनी शुरू की थी, लेकिन दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने के कारण करीब 8 साल तक काम बंद रहा। इसके बाद 1947 में उन्होंने फेरारी नाम से पहली कार सड़क पर उतारी। कार रेसिंग उनका जुनून था। नए कदम – लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी उतरी कंपनी कंपनी लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी धूम मचा रही है। हाल ही में मिलान फैशन वीक में फेरारी कलेक्शन पेश किया गया। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में कदम रख रही है, जिसके लिए मारानेलो में एक नई ‘ई-बिल्डिंग’ शुरू की गई है। इसके अलावा, मरीन इंजीनियरिंग और सेलिंग की दुनिया में भी प्रवेश की तैयारी कर रही है। यूं संकट में फंसी थी रेसिंग पर फोकस, ग्राहकों की अनदेखी – एंजो फेरारी का जुनून सिर्फ रेसिंग और फॉर्मूला वन जीतना था। इस रवैये के कारण उन्होंने कभी ग्राहकों की पसंद, आराम या लग्जरी को प्राथमिकता नहीं दी। लीडरशिप का अड़ियल रवैया, आंतरिक कलह – 1961 में एंजो की पत्नी ने प्रबंधन के कामों में दखल देना शुरू किया। जब अधिकारियों ने विरोध किया, तो एंजो ने कई प्रबंधकों को नौकरी से निकाल दिया। आर्थिक मंदी और कलेक्टर बबल का फूटना – 80 के दशक के अंत में लोग ये कारें निवेश के तौर पर खरीदते थे। 90 के दशक में मंदी की वजह से बिक्री आधी रह गई और कंपनी गहरे वित्तीय घाटे में डूब गई। भविष्य की रणनीति का अभाव – एंजो की मृत्यु के बाद फिएट के अधिकारियों ने कमान संभाली, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं थी। इस तरह की वापसी लुका डि मोंटेजेमोलो की लीडरशिप – 1991 में लुका डि मोंटेजेमोलो फेरारी के चेयरमैन बने। सबसे पहले कारों की क्वालिटी को सुधारा। सुनिश्चित किया कि फेरारी सड़क पर भी आरामदायक और भरोसेमंद हो। ब्रांड लाइसेंसिंग का विस्तार – मोंटेजेमोलो ने लग्जरी कपड़े, घड़ियां, परफ्यूम और अन्य लाइफस्टाइल उत्पादों के लिए अपने मशहूर ‘प्रान्सिंग हॉर्स’ लोगो को लाइसेंस पर देकर करोड़ों रुपए कमाए। एक्सक्लूसिविटी बरकरार रखना – लुका की रणनीति स्पष्ट थी- ‘हमेशा बाजार की मांग से एक कार कम बनाओ। इस कृत्रिम कमी ने अमीरों के बीच फेरारी का आकर्षण कई गुना बढ़ा दिया पर्सनलाइजेशन – 1993 में ‘फेरारी चैलेंज’ शुरू किया, जो फेरारी मालिकों के लिए एक एमेच्योर रेसिंग सीरीज थी। कई भारी पर्सनलाइजेशन के विकल्प दिए। ऐसे पड़ा नाम – कंपनी का नाम इसके संस्थापक एंजो फेरारी के सरनेम पर रखा गया है। रेसिंग शौकीन एंजो ने खुद ही यह नाम तय किया था। सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी – लैंबॉर्गिनी, मैकलारेन, पॉर्श, एस्टन मार्टिन और बुगाटी दुनियाभर में इसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों में हैं। – 3.5 लाख कारें ही बनाई हैं फेरारी ने आज तक।
– 60 से ज्यादा देशों में व्यापार करती है कंपनी दुनियाभर में।
– 179 अधिकृत डीलर हैं दुनियाभर में फेरारी के।
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