Thursday, 21 May 2026 | 12:55 PM

Trending :

EXCLUSIVE

हाईकोर्ट ने जेसी मिल परिसमापक की भूमिका पर उठाए सवाल:कोर्ट ने कहा-सिर्फ रजिस्टर से काम नहीं चलेगा, डाक-कूरियर के पुख्ता सबूत पेश करें

हाईकोर्ट ने जेसी मिल परिसमापक की भूमिका पर उठाए सवाल:कोर्ट ने कहा-सिर्फ रजिस्टर से काम नहीं चलेगा, डाक-कूरियर के पुख्ता सबूत पेश करें

जेसी मिल से जुड़े लंबे समय से लंबित कंपनी प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आधिकारिक परिसमापक की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डाक एवं कूरियर से भेजे गए पत्रों की विधिवत रसीदें और प्राप्ति पावती भी रिकॉर्ड पर पेश की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान आधिकारिक परिसमापक की ओर से डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत किया गया, लेकिन उसमें डाक रसीदें संलग्न नहीं थीं और न ही संबंधित पत्रों की प्राप्ति संबंधी पावती दर्ज थी। जिन पत्रों को कूरियर से भेजे जाने का उल्लेख किया गया, उनके संबंध में भी कोई रसीद या प्राप्ति प्रमाण न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया गया। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया। न्यायालय ने आग्रह स्वीकार करते हुए 10 दिन का समय दिया और निर्देशित किया कि डाक रसीदें, प्राप्ति पावती और कूरियर से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं। कूरियर सेवा पर ‘प्रेजम्पशन’ किस धारा में? न्यायालय ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि कूरियर से भेजे गए पत्रों के मामले में सेवा की धारणा किस कानूनी प्रावधान के तहत मानी जा सकती है। अदालत ने संकेत दिया कि केवल उल्लेख भर से सेवा मान लेना उचित नहीं होगा, जब तक कि उसका विधिसम्मत प्रमाण उपलब्ध न हो। कई पक्षकार रहे मौजूद सुनवाई के दौरान एमपीआईडीसी, स्टेट बैंक, यूको बैंक, राज्य शासन, कर्मचारियों और श्रमिकों की ओर से अधिवक्ता उपस्थित रहे। बैंकों ने लंबित याचिका में अपने आवेदन भी प्रस्तुत किए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। 1997 से लंबित है कंपनी पिटीशन गौरतलब है कि जेसी मिल की कंपनी पिटीशन वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित है। मामले में मजदूरों की देनदारी का विवाद चल रहा है। राज्य शासन ने मिल की संपत्ति की नीलामी कर मजदूरों का बकाया भुगतान करने की पहल की थी, लेकिन प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण देनदारी पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। परिसमापक ने सुनवाई के दौरान तहसीलदार का एक पत्र भी प्रस्तुत किया था। उनका कहना था कि उक्त पत्र की जानकारी सभी हितधारकों, सुरक्षित ऋणदाताओं और संबंधित पक्षों को औपचारिक रूप से भेजी गई थी और इसमें किसी प्रकार का व्यक्तिगत हित या पक्षपात शामिल नहीं था। हालांकि न्यायालय ने दस्तावेजों के विधिसम्मत प्रमाण प्रस्तुत करने पर जोर देते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
सीधी में भू-अर्जन कर्मचारी 1 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार:लोकायुक्त टीम ने पकड़ा, 27 लाख मुआवजे पर मांगी थे 13 लाख

February 26, 2026/
4:21 pm

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में लोकायुक्त पुलिस रीवा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भू-अर्जन शाखा के कर्मचारी...

Rewa Fetus on Judges Table

March 22, 2026/
8:57 am

. यह कहना है रीवा के दयाशंकर पांडेय का। उनकी पत्नी ने सड़क हादसे से जुड़े एक हमले में गर्भ...

भारतीय मूल के श्रेयस मोव्वा कनाडा टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज:जहां टर्फ विकेट तक नहीं, उस बर्फ की धरती पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रेयस ने जिंदा रखा सपना

February 18, 2026/
8:36 am

जहां ‘आइस हॉकी’ सबसे लोकप्रिय खेल है और साल के छह महीने बर्फ की चादर बिछी रहती है, वहां एक...

ग्रीष्मकालीन दही रेसिपी: दही से बनने वाली 6 स्वादिष्ट समर रेसिपी, 5 मिनट में हो सकती है तैयार

March 15, 2026/
5:23 pm

ग्रीष्मकालीन दही रेसिपी: गर्मी के मौसम में शरीर का ठंडा और ठंडा रहना सबसे जरूरी होता है। इसके लिए दही...

authorimg

April 12, 2026/
2:42 pm

Last Updated:April 12, 2026, 14:42 IST Non-Stick Cookware Risks: नॉन-स्टिक तवा किचन में सुविधाजनक जरूर होता है, लेकिन खराब होने...

निवाड़ी में स्टोन क्रेशर प्लांट का हो रहा है विरोध:विधायक से मिलकर ग्रामीणों ने की शिकायत, प्रशासन ने जांच टीम बनाई

April 3, 2026/
4:25 pm

निवाड़ी के चुरारा अडजार सीमा पर प्रस्तावित स्टोन क्रेशर प्लांट का ग्रामीणों की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा...

Royal Challengers Bengaluru vs Gujarat Titans Live Score, IPL 2026 Today Match Updates, Scorecard & Commentary. (Picture Credit: AP)

April 24, 2026/
6:45 pm

आखरी अपडेट:24 अप्रैल, 2026, 18:45 IST वारिंग ने कहा कि राघव चड्ढा और छह अन्य आप सांसदों का भाजपा के...

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

April 3, 2026/
5:30 am

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

हाईकोर्ट ने जेसी मिल परिसमापक की भूमिका पर उठाए सवाल:कोर्ट ने कहा-सिर्फ रजिस्टर से काम नहीं चलेगा, डाक-कूरियर के पुख्ता सबूत पेश करें

हाईकोर्ट ने जेसी मिल परिसमापक की भूमिका पर उठाए सवाल:कोर्ट ने कहा-सिर्फ रजिस्टर से काम नहीं चलेगा, डाक-कूरियर के पुख्ता सबूत पेश करें

जेसी मिल से जुड़े लंबे समय से लंबित कंपनी प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आधिकारिक परिसमापक की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डाक एवं कूरियर से भेजे गए पत्रों की विधिवत रसीदें और प्राप्ति पावती भी रिकॉर्ड पर पेश की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान आधिकारिक परिसमापक की ओर से डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत किया गया, लेकिन उसमें डाक रसीदें संलग्न नहीं थीं और न ही संबंधित पत्रों की प्राप्ति संबंधी पावती दर्ज थी। जिन पत्रों को कूरियर से भेजे जाने का उल्लेख किया गया, उनके संबंध में भी कोई रसीद या प्राप्ति प्रमाण न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया गया। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया। न्यायालय ने आग्रह स्वीकार करते हुए 10 दिन का समय दिया और निर्देशित किया कि डाक रसीदें, प्राप्ति पावती और कूरियर से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं। कूरियर सेवा पर ‘प्रेजम्पशन’ किस धारा में? न्यायालय ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि कूरियर से भेजे गए पत्रों के मामले में सेवा की धारणा किस कानूनी प्रावधान के तहत मानी जा सकती है। अदालत ने संकेत दिया कि केवल उल्लेख भर से सेवा मान लेना उचित नहीं होगा, जब तक कि उसका विधिसम्मत प्रमाण उपलब्ध न हो। कई पक्षकार रहे मौजूद सुनवाई के दौरान एमपीआईडीसी, स्टेट बैंक, यूको बैंक, राज्य शासन, कर्मचारियों और श्रमिकों की ओर से अधिवक्ता उपस्थित रहे। बैंकों ने लंबित याचिका में अपने आवेदन भी प्रस्तुत किए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। 1997 से लंबित है कंपनी पिटीशन गौरतलब है कि जेसी मिल की कंपनी पिटीशन वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित है। मामले में मजदूरों की देनदारी का विवाद चल रहा है। राज्य शासन ने मिल की संपत्ति की नीलामी कर मजदूरों का बकाया भुगतान करने की पहल की थी, लेकिन प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण देनदारी पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। परिसमापक ने सुनवाई के दौरान तहसीलदार का एक पत्र भी प्रस्तुत किया था। उनका कहना था कि उक्त पत्र की जानकारी सभी हितधारकों, सुरक्षित ऋणदाताओं और संबंधित पक्षों को औपचारिक रूप से भेजी गई थी और इसमें किसी प्रकार का व्यक्तिगत हित या पक्षपात शामिल नहीं था। हालांकि न्यायालय ने दस्तावेजों के विधिसम्मत प्रमाण प्रस्तुत करने पर जोर देते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.