Monday, 24 Aug 2026 | 03:50 AM

Trending :

कार रेसिंग में हादसे का शिकार हुए एक्टर अजित कुमार:बेकाबू होकर दूसरी कार से टकराई गाड़ी, सुरक्षित बचे जापान में 5.9 तीव्रता का भूकंप, 37 लोग घायल:ट्रेन सेवाओं पर असर; सुनामी का खतरा नहीं 'अंग्रेजों के सम्मान में लिखा गया जन गण मन':मुकेश खन्ना बोले- ये राष्ट्रगान नहीं हो सकता; इसमें अंग्रेजों को भाग्य विधाता बताया गया पहली भारतीय महिला मिमिक्री आर्टिस्ट आशा सिंह जयसवाल का निधन:मीना कुमारी की नकल से फेम मिला, बीआर चोपड़ा की महाभारत में द्रोणाचार्य की पत्नी बनी थीं पाकिस्तान में 12-12 घंटे बिजली कटौती:लोग सड़कों पर उतरे, रास्ता जाम किया; लगातार कटौती से पानी सप्लाई ठप 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' एक्टर मोहसिन ने सगाई की:मंगेतर तमन्ना के साथ तस्वीरें शेयर की; बोले- पहली नजर में लगा हमसफर मिल गई
EXCLUSIVE

हाईकोर्ट ने जेसी मिल परिसमापक की भूमिका पर उठाए सवाल:कोर्ट ने कहा-सिर्फ रजिस्टर से काम नहीं चलेगा, डाक-कूरियर के पुख्ता सबूत पेश करें

हाईकोर्ट ने जेसी मिल परिसमापक की भूमिका पर उठाए सवाल:कोर्ट ने कहा-सिर्फ रजिस्टर से काम नहीं चलेगा, डाक-कूरियर के पुख्ता सबूत पेश करें

जेसी मिल से जुड़े लंबे समय से लंबित कंपनी प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आधिकारिक परिसमापक की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डाक एवं कूरियर से भेजे गए पत्रों की विधिवत रसीदें और प्राप्ति पावती भी रिकॉर्ड पर पेश की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान आधिकारिक परिसमापक की ओर से डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत किया गया, लेकिन उसमें डाक रसीदें संलग्न नहीं थीं और न ही संबंधित पत्रों की प्राप्ति संबंधी पावती दर्ज थी। जिन पत्रों को कूरियर से भेजे जाने का उल्लेख किया गया, उनके संबंध में भी कोई रसीद या प्राप्ति प्रमाण न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया गया। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया। न्यायालय ने आग्रह स्वीकार करते हुए 10 दिन का समय दिया और निर्देशित किया कि डाक रसीदें, प्राप्ति पावती और कूरियर से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं। कूरियर सेवा पर ‘प्रेजम्पशन’ किस धारा में? न्यायालय ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि कूरियर से भेजे गए पत्रों के मामले में सेवा की धारणा किस कानूनी प्रावधान के तहत मानी जा सकती है। अदालत ने संकेत दिया कि केवल उल्लेख भर से सेवा मान लेना उचित नहीं होगा, जब तक कि उसका विधिसम्मत प्रमाण उपलब्ध न हो। कई पक्षकार रहे मौजूद सुनवाई के दौरान एमपीआईडीसी, स्टेट बैंक, यूको बैंक, राज्य शासन, कर्मचारियों और श्रमिकों की ओर से अधिवक्ता उपस्थित रहे। बैंकों ने लंबित याचिका में अपने आवेदन भी प्रस्तुत किए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। 1997 से लंबित है कंपनी पिटीशन गौरतलब है कि जेसी मिल की कंपनी पिटीशन वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित है। मामले में मजदूरों की देनदारी का विवाद चल रहा है। राज्य शासन ने मिल की संपत्ति की नीलामी कर मजदूरों का बकाया भुगतान करने की पहल की थी, लेकिन प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण देनदारी पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। परिसमापक ने सुनवाई के दौरान तहसीलदार का एक पत्र भी प्रस्तुत किया था। उनका कहना था कि उक्त पत्र की जानकारी सभी हितधारकों, सुरक्षित ऋणदाताओं और संबंधित पक्षों को औपचारिक रूप से भेजी गई थी और इसमें किसी प्रकार का व्यक्तिगत हित या पक्षपात शामिल नहीं था। हालांकि न्यायालय ने दस्तावेजों के विधिसम्मत प्रमाण प्रस्तुत करने पर जोर देते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
ट्रम्प के डीलमेकर जम्पोली चर्चा में:20 मिनट में 20 अरब डॉलर के सौदे; मेलानिया से इन्होंने ही मिलवाया, बोइंग से डील करा जीता भरोसा

April 23, 2026/
12:35 pm

‘20 मिनट में 20 अरब डॉलर’ की डील यह दावा है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खास दूत पाओलो जम्पोली...

रेलवे, सड़क प्रोजेक्ट्स की हर माह होगी समीक्षा:केंद्रीय सचिव गोविल और सीएस अनुराग की बैठक में फैसला, जल्द अनुमति जारी कराएंगे अफसर

February 23, 2026/
10:56 pm

प्रदेश में रेलवे, सड़क सहित अधोसंरचना के जो भी बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उनकी प्रोग्रेस की समीक्षा हर माह...

authorimg

April 1, 2026/
2:02 pm

Last Updated:April 01, 2026, 14:02 IST नई दिल्‍ली में रहने वाले रेड‍ियोलॉज‍िस्‍ट डॉ तरुण कोठारी ने वेब आधारित एआई टूल...

दतिया में महिला से दहेज के लिए मारपीट का आरोप:लोको पायलट पति, सास और ससुर पर केस दर्ज

March 30, 2026/
12:57 pm

दतिया में महोनाजाट गांव की रहने वाली 32 वर्षीय महिला ने पति, सास और ससुर पर दहेज के लिए प्रताड़ित...

सुप्रीम कोर्ट में प्याज-लहसुन को तामसिक मानने की याचिका:CJI ने पूछा-आधी रात को पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या; फालतू बताकर 5 याचिकाएं खारिज

March 9, 2026/
3:09 pm

सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने 5 पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन(PIL)/जनहित याचिका फाइल की थीं। इनमें से एक कहा गया था...

राजनीति

हाईकोर्ट ने जेसी मिल परिसमापक की भूमिका पर उठाए सवाल:कोर्ट ने कहा-सिर्फ रजिस्टर से काम नहीं चलेगा, डाक-कूरियर के पुख्ता सबूत पेश करें

हाईकोर्ट ने जेसी मिल परिसमापक की भूमिका पर उठाए सवाल:कोर्ट ने कहा-सिर्फ रजिस्टर से काम नहीं चलेगा, डाक-कूरियर के पुख्ता सबूत पेश करें

जेसी मिल से जुड़े लंबे समय से लंबित कंपनी प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आधिकारिक परिसमापक की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डाक एवं कूरियर से भेजे गए पत्रों की विधिवत रसीदें और प्राप्ति पावती भी रिकॉर्ड पर पेश की जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान आधिकारिक परिसमापक की ओर से डिस्पैच रजिस्टर प्रस्तुत किया गया, लेकिन उसमें डाक रसीदें संलग्न नहीं थीं और न ही संबंधित पत्रों की प्राप्ति संबंधी पावती दर्ज थी। जिन पत्रों को कूरियर से भेजे जाने का उल्लेख किया गया, उनके संबंध में भी कोई रसीद या प्राप्ति प्रमाण न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया गया। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया। न्यायालय ने आग्रह स्वीकार करते हुए 10 दिन का समय दिया और निर्देशित किया कि डाक रसीदें, प्राप्ति पावती और कूरियर से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं। कूरियर सेवा पर ‘प्रेजम्पशन’ किस धारा में? न्यायालय ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि कूरियर से भेजे गए पत्रों के मामले में सेवा की धारणा किस कानूनी प्रावधान के तहत मानी जा सकती है। अदालत ने संकेत दिया कि केवल उल्लेख भर से सेवा मान लेना उचित नहीं होगा, जब तक कि उसका विधिसम्मत प्रमाण उपलब्ध न हो। कई पक्षकार रहे मौजूद सुनवाई के दौरान एमपीआईडीसी, स्टेट बैंक, यूको बैंक, राज्य शासन, कर्मचारियों और श्रमिकों की ओर से अधिवक्ता उपस्थित रहे। बैंकों ने लंबित याचिका में अपने आवेदन भी प्रस्तुत किए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। 1997 से लंबित है कंपनी पिटीशन गौरतलब है कि जेसी मिल की कंपनी पिटीशन वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित है। मामले में मजदूरों की देनदारी का विवाद चल रहा है। राज्य शासन ने मिल की संपत्ति की नीलामी कर मजदूरों का बकाया भुगतान करने की पहल की थी, लेकिन प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण देनदारी पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। परिसमापक ने सुनवाई के दौरान तहसीलदार का एक पत्र भी प्रस्तुत किया था। उनका कहना था कि उक्त पत्र की जानकारी सभी हितधारकों, सुरक्षित ऋणदाताओं और संबंधित पक्षों को औपचारिक रूप से भेजी गई थी और इसमें किसी प्रकार का व्यक्तिगत हित या पक्षपात शामिल नहीं था। हालांकि न्यायालय ने दस्तावेजों के विधिसम्मत प्रमाण प्रस्तुत करने पर जोर देते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.