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जापान में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी, शाही नियम बदले:राजा दूर के रिश्तेदारों को गोद लेकर बचाएंगे राजवंश, सम्राट नहीं बन पाएंगी राजकुमारी आइको

जापान में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी, शाही नियम बदले:राजा दूर के रिश्तेदारों को गोद लेकर बचाएंगे राजवंश, सम्राट नहीं बन पाएंगी राजकुमारी आइको

जापान की संसद ने 17 जुलाई को शाही परिवार के उत्तराधिकार से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव किया। नए कानून के तहत अब शाही परिवार 15 साल या उससे अधिक उम्र के दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेकर दोबारा शाही परिवार में शामिल कर सकेगा। इसके अलावा, अब शाही परिवार की महिलाएं किसी आम नागरिक से शादी करने के बाद भी अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। हालांकि, सबसे अहम नियम नहीं बदला गया। जापान में अब भी सिर्फ पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। यानी सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी राजकुमारी आइको भविष्य में भी सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकेंगी। शाही परिवार में नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी जापान का शाही परिवार दुनिया का सबसे पुराना लगातार चला आ रहा राजवंश माना जाता है, लेकिन आज वह उत्तराधिकार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। मौजूदा सम्राट की सिर्फ एक बेटी है। वह उत्तराधिकारी नहीं बन सकती, क्योंकि कानून सिर्फ पुरुषों को ही सिंहासन का अधिकार देता है।

शाही परिवार में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी हैं। उत्तराधिकार की कतार में पहले नंबर पर सम्राट के छोटे भाई प्रिंस फुमिहितो, दूसरे नंबर पर उनके 19 वर्षीय बेटे प्रिंस हिसाहितो और तीसरे नंबर पर 90 वर्षीय प्रिंस हिताची हैं। अगर भविष्य में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं बढ़े, तो शाही परिवार के सामने उत्तराधिकार का संकट और गहरा सकता है। सरकार के सामने दो ही रास्ते थे- सरकार ने दूसरा रास्ता क्यों चुना जापान में महिला को सम्राट बनाने का मुद्दा कई वर्षों से चर्चा में है। जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश जापानी नागरिक महिला सम्राट के पक्ष में रहे हैं। 2024 में क्योडो न्यूज के सर्वे में 90% जापानी नागरिकों ने महिला सम्राट का समर्थन किया था। लेकिन सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के परंपरावादी नेता इसका विरोध करते रहे हैं। इन नेताओं का तर्क है कि जापान का शाही परिवार करीब 2,000 वर्षों से पुरुष वंश के आधार पर चला आ रहा है। उनके अनुसार, अगर किसी महिला को सम्राट बनाया गया और उसके बच्चे भविष्य में सिंहासन पर बैठे, तो शाही परिवार की पितृवंश परंपरा टूट जाएगी। उनका मानना है कि यही परंपरा जापान की राजशाही की पहचान है और इसे नहीं बदला जाना चाहिए। इसी वजह से सरकार ने महिला सम्राट या महिलाओं की संतान को उत्तराधिकारी बनाने का कानून बदलने के बजाय दूसरा रास्ता चुना।

11 पूर्व शाही शाखाएं क्या हैं, जिन्हें सम्राट गोद ले सकेंगे

सम्राट को उत्तराधिकारी चुनने के लिए गोद लेने का अधिकार मिला है। लेकिन वे किसी भी बच्चे को गोद नहीं ले सकते। वे केवल 11 पूर्व शाही शाखाओं के वंशज के पुरुषों को ही गोद ले सकेंगे। दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध से पहले जापान के शाही परिवार में सिर्फ मुख्य राजपरिवार ही नहीं था, बल्कि उससे जुड़ी 11 अलग-अलग शाही शाखाएं भी थीं। इन शाखाओं के सदस्य भी सम्राट के पुरुष वंशज थे और जरूरत पड़ने पर सिंहासन के उत्तराधिकारी बन सकते थे। साल 1947 में, दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी कब्जे वाली प्रशासनिक व्यवस्था और जापानी सरकार ने शाही परिवार का आकार छोटा करने का फैसला किया। इसके तहत इन 11 शाखाओं के 51 सदस्यों से शाही दर्जा वापस ले लिया गया। वे आम नागरिक बन गए और उनके परिवारों का शाही परिवार से कानूनी रिश्ता खत्म हो गया। नियम बदलने के बाद शाही परिवार में पुरुष सदस्यों की संख्या लगातार घटती गई। दूसरी ओर, शाही परिवार की महिलाएं जब आम नागरिकों से शादी करती थीं, तो कानून के मुताबिक उन्हें भी शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। इससे शाही परिवार छोटा होता चला गया और उत्तराधिकार का संकट गहराने लगा। इसी वजह से जापानी सरकार ने करीब 79 साल बाद नियमों में बदलाव किया है। अब इन 11 पूर्व शाही शाखाओं के 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष वंशजों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए गोद लेकर फिर से शाही परिवार में शामिल किया जा सकेगा। महिलाओं का आम नागरिक से शादी करने पर शाही दर्जा नहीं छिनेगा

नए कानून के तहत अब शाही परिवार की महिला सदस्य अगर किसी आम नागरिक से शादी करती हैं, तब भी वे अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। यह पहले के नियम से बिल्कुल अलग है। पुराने कानून के तहत आम नागरिक से शादी करने वाली महिला को शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। नए कानून के पीछे सबसे बड़ा कारण राजकुमारी माको का मामला माना जा रहा है। सम्राट नारुहितो की भतीजी माको ने 2021 में अपने कॉलेज के साथी केई कोमुरो से शादी की थी। दोनों की मुलाकात 2013 में टोक्यो की इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में हुई थी। दोनों ने गुपचुप सगाई कर ली थी, जिसके बाद पूरे जापान में इस रिश्ते को लेकर काफी विवाद हुआ। अक्टूबर 2021 में दोनों की शादी बेहद सादगी से हुई। परंपरा के मुताबिक होने वाला जुलूस और भव्य समारोह भी नहीं हुआ। शादी के बाद कानून के तहत माको को अपना शाही दर्जा छोड़ना पड़ा और वे अपने पति के साथ न्यूयॉर्क चली गईं, जहां उनके पति वकील हैं। माको ने शाही परिवार छोड़ने पर मिलने वाली करीब 10 लाख पाउंड (करीब 11 करोड़ रुपए) की सरकारी राशि भी लेने से इनकार कर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा करने वाली वे शाही परिवार की पहली सदस्य थीं। जापान की सम्राट बन चुकी हैं 8 महिलाएं जापान के इतिहास में अब तक 8 महिलाएं सम्राट (महारानी) बन चुकी हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी अपने बच्चों को उत्तराधिकारी नहीं बना सकी। वे केवल तब सिंहासन पर बैठीं, जब कोई उपयुक्त पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था या वह बहुत छोटा था। इसलिए उन्हें अक्सर अस्थायी शासक माना गया और बाद में सत्ता फिर किसी पुरुष उत्तराधिकारी को सौंप दी गई। जापान की आखिरी महिला शासक महारानी गोसाकुरामाची थीं। उन्होंने 1762 से 1770 तक शासन किया। उनके बाद से पिछले 250 से अधिक साल में जापान में कोई महिला सम्राट नहीं बनी। फिर महिलाओं के लिए रास्ता क्यों बंद हो गया? पहले जापान में कानून में यह साफ नहीं लिखा था कि केवल पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। 19वीं सदी के आखिर में जापान ने खुद को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने की शुरुआत की। जापान पश्चिमी देशों की तरह आधुनिक सेना, प्रशासन और कानूनी व्यवस्था विकसित करना चाहता था। इसी प्रक्रिया में 1889 में मेइजी संविधान लागू किया गया, जिसने जापान में संवैधानिक राजतंत्र की नींव रखी और सम्राट की शक्तियों तथा शाही परिवार से जुड़े नियम तय किए। इसमें यह व्यवस्था की गई कि सिंहासन पर केवल पुरुष वंशज ही बैठेंगे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1947 में नया शाही परिवार कानून बनाया गया। इसमें भी पुरुष उत्तराधिकार की व्यवस्था को बरकरार रखा गया। यही कानून आज भी लागू है। इसलिए आज भी जापान में महिला सम्राट बनने या महिला की संतान के उत्तराधिकारी बनने की अनुमति नहीं है।

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जापान की संसद ने 17 जुलाई को शाही परिवार के उत्तराधिकार से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव किया। नए कानून के तहत अब शाही परिवार 15 साल या उससे अधिक उम्र के दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेकर दोबारा शाही परिवार में शामिल कर सकेगा। इसके अलावा, अब शाही परिवार की महिलाएं किसी आम नागरिक से शादी करने के बाद भी अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। हालांकि, सबसे अहम नियम नहीं बदला गया। जापान में अब भी सिर्फ पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। यानी सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी राजकुमारी आइको भविष्य में भी सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकेंगी। शाही परिवार में नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी जापान का शाही परिवार दुनिया का सबसे पुराना लगातार चला आ रहा राजवंश माना जाता है, लेकिन आज वह उत्तराधिकार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। मौजूदा सम्राट की सिर्फ एक बेटी है। वह उत्तराधिकारी नहीं बन सकती, क्योंकि कानून सिर्फ पुरुषों को ही सिंहासन का अधिकार देता है।

शाही परिवार में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी हैं। उत्तराधिकार की कतार में पहले नंबर पर सम्राट के छोटे भाई प्रिंस फुमिहितो, दूसरे नंबर पर उनके 19 वर्षीय बेटे प्रिंस हिसाहितो और तीसरे नंबर पर 90 वर्षीय प्रिंस हिताची हैं। अगर भविष्य में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं बढ़े, तो शाही परिवार के सामने उत्तराधिकार का संकट और गहरा सकता है। सरकार के सामने दो ही रास्ते थे- सरकार ने दूसरा रास्ता क्यों चुना जापान में महिला को सम्राट बनाने का मुद्दा कई वर्षों से चर्चा में है। जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश जापानी नागरिक महिला सम्राट के पक्ष में रहे हैं। 2024 में क्योडो न्यूज के सर्वे में 90% जापानी नागरिकों ने महिला सम्राट का समर्थन किया था। लेकिन सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के परंपरावादी नेता इसका विरोध करते रहे हैं। इन नेताओं का तर्क है कि जापान का शाही परिवार करीब 2,000 वर्षों से पुरुष वंश के आधार पर चला आ रहा है। उनके अनुसार, अगर किसी महिला को सम्राट बनाया गया और उसके बच्चे भविष्य में सिंहासन पर बैठे, तो शाही परिवार की पितृवंश परंपरा टूट जाएगी। उनका मानना है कि यही परंपरा जापान की राजशाही की पहचान है और इसे नहीं बदला जाना चाहिए। इसी वजह से सरकार ने महिला सम्राट या महिलाओं की संतान को उत्तराधिकारी बनाने का कानून बदलने के बजाय दूसरा रास्ता चुना।

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नए कानून के तहत अब शाही परिवार की महिला सदस्य अगर किसी आम नागरिक से शादी करती हैं, तब भी वे अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। यह पहले के नियम से बिल्कुल अलग है। पुराने कानून के तहत आम नागरिक से शादी करने वाली महिला को शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। नए कानून के पीछे सबसे बड़ा कारण राजकुमारी माको का मामला माना जा रहा है। सम्राट नारुहितो की भतीजी माको ने 2021 में अपने कॉलेज के साथी केई कोमुरो से शादी की थी। दोनों की मुलाकात 2013 में टोक्यो की इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में हुई थी। दोनों ने गुपचुप सगाई कर ली थी, जिसके बाद पूरे जापान में इस रिश्ते को लेकर काफी विवाद हुआ। अक्टूबर 2021 में दोनों की शादी बेहद सादगी से हुई। परंपरा के मुताबिक होने वाला जुलूस और भव्य समारोह भी नहीं हुआ। शादी के बाद कानून के तहत माको को अपना शाही दर्जा छोड़ना पड़ा और वे अपने पति के साथ न्यूयॉर्क चली गईं, जहां उनके पति वकील हैं। माको ने शाही परिवार छोड़ने पर मिलने वाली करीब 10 लाख पाउंड (करीब 11 करोड़ रुपए) की सरकारी राशि भी लेने से इनकार कर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा करने वाली वे शाही परिवार की पहली सदस्य थीं। जापान की सम्राट बन चुकी हैं 8 महिलाएं जापान के इतिहास में अब तक 8 महिलाएं सम्राट (महारानी) बन चुकी हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी अपने बच्चों को उत्तराधिकारी नहीं बना सकी। वे केवल तब सिंहासन पर बैठीं, जब कोई उपयुक्त पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था या वह बहुत छोटा था। इसलिए उन्हें अक्सर अस्थायी शासक माना गया और बाद में सत्ता फिर किसी पुरुष उत्तराधिकारी को सौंप दी गई। जापान की आखिरी महिला शासक महारानी गोसाकुरामाची थीं। उन्होंने 1762 से 1770 तक शासन किया। उनके बाद से पिछले 250 से अधिक साल में जापान में कोई महिला सम्राट नहीं बनी। फिर महिलाओं के लिए रास्ता क्यों बंद हो गया? पहले जापान में कानून में यह साफ नहीं लिखा था कि केवल पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। 19वीं सदी के आखिर में जापान ने खुद को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने की शुरुआत की। जापान पश्चिमी देशों की तरह आधुनिक सेना, प्रशासन और कानूनी व्यवस्था विकसित करना चाहता था। इसी प्रक्रिया में 1889 में मेइजी संविधान लागू किया गया, जिसने जापान में संवैधानिक राजतंत्र की नींव रखी और सम्राट की शक्तियों तथा शाही परिवार से जुड़े नियम तय किए। इसमें यह व्यवस्था की गई कि सिंहासन पर केवल पुरुष वंशज ही बैठेंगे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1947 में नया शाही परिवार कानून बनाया गया। इसमें भी पुरुष उत्तराधिकार की व्यवस्था को बरकरार रखा गया। यही कानून आज भी लागू है। इसलिए आज भी जापान में महिला सम्राट बनने या महिला की संतान के उत्तराधिकारी बनने की अनुमति नहीं है।

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