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रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:50 देशों को न्योता भेजा; हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों को बचाना मकसद

रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:50 देशों को न्योता भेजा; हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों को बचाना मकसद

सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएगा। इसका मकसद यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों की रक्षा करना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए कई देशों को न्योता भेजा गया है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन-कौन से देश इसमें शामिल होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सऊदी ने 50 से ज्यादा देशों को गठबंधन में शामिल होने का न्योता भेजा है। हालांकि अभी तक उन देशों की आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है। हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था। इससे रेड सी के रास्ते भेजे जा रहे तेल की खेप पर असर पड़ा है। गठबंधन में कौन हो सकता है शामिल? मिडिल ईस्ट की न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के मुताबिक अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये, जिबूती, सोमालिया और सूडान को न्योता भेजा गया है। इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देशों को भी निमंत्रण मिला है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि मिस्र, जिबूती और सूडान गठबंधन में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, सऊदी अरब का करीबी सहयोगी अमेरिका अभी तक आधिकारिक तौर पर गठबंधन में शामिल होने की पुष्टि नहीं कर पाया है, लेकिन उसके इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सऊदी रक्षा मंत्री की अमेरिकी नेताओं से मुलाकात एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ इमरजेंसी बैठक की। बैठक से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि प्रिंस खालिद ने अमेरिका से कहा कि सऊदी अरब, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध को और फैलाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 28 फरवरी से अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद, ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस खालिद ने जेडी वेंस से यह भी कहा कि सऊदी अरब, यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने में सक्षम है और फिलहाल उसे इस मामले में अमेरिका की सैन्य मदद की जरूरत नहीं है। दुनिया के लिए रेड सी इतना अहम क्यों है? रेड सी दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इसके एक तरफ सऊदी अरब और यमन हैं, जबकि दूसरी तरफ मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया स्थित हैं। दुनिया के करीब 30% समुद्री व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता है। रेड सी में आने-जाने के केवल दो रास्ते हैं। पूर्व में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और पश्चिम में स्वेज नहर। इसलिए इनमें से किसी एक रास्ते में रुकावट आने पर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ता है। बाब अल-मंदेब अपने सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 29 किलोमीटर चौड़ा है। इसी वजह से यहां जहाजों के आने और जाने के लिए केवल दो समुद्री लेन हैं। ईरान जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी के कारण सऊदी अरब अपना ज्यादातर तेल इसी रास्ते से भेज रहा है। लेकिन अब इस रास्ते में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का असर बढ़ गया है। ईरान जंग से एक चौथाई सप्लाई पर असर पड़ा सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। अब होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी, दोनों क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया की करीब 25% ऊर्जा आपूर्ति किसी न किसी रूप में इस संघर्ष से प्रभावित हो रही है। शिपिंग पर टोल लगाने की योजना रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही शिपिंग पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि की और आरोप लगाया कि इसमें ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल है। एर्यानी ने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री गलियारे को मिलिशिया की गतिविधियों के लिए फंडिंग का जरिया बनाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य के किनारे स्थित देशों को टोल वसूलने की अनुमति नहीं है। वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर लाल सागर में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति लाइनों पर बुरा असर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई, जबकि 2023 से पहले प्रतिदिन 70 से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे। फरवरी में अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें अस्थिर हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि पिछले हफ्ते कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई थीं।

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सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएगा। इसका मकसद यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों की रक्षा करना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए कई देशों को न्योता भेजा गया है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन-कौन से देश इसमें शामिल होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सऊदी ने 50 से ज्यादा देशों को गठबंधन में शामिल होने का न्योता भेजा है। हालांकि अभी तक उन देशों की आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है। हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था। इससे रेड सी के रास्ते भेजे जा रहे तेल की खेप पर असर पड़ा है। गठबंधन में कौन हो सकता है शामिल? मिडिल ईस्ट की न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के मुताबिक अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये, जिबूती, सोमालिया और सूडान को न्योता भेजा गया है। इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस और इटली समेत कई यूरोपीय देशों को भी निमंत्रण मिला है। इस रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि मिस्र, जिबूती और सूडान गठबंधन में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, सऊदी अरब का करीबी सहयोगी अमेरिका अभी तक आधिकारिक तौर पर गठबंधन में शामिल होने की पुष्टि नहीं कर पाया है, लेकिन उसके इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सऊदी रक्षा मंत्री की अमेरिकी नेताओं से मुलाकात एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ इमरजेंसी बैठक की। बैठक से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि प्रिंस खालिद ने अमेरिका से कहा कि सऊदी अरब, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध को और फैलाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वह अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 28 फरवरी से अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद, ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस खालिद ने जेडी वेंस से यह भी कहा कि सऊदी अरब, यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने में सक्षम है और फिलहाल उसे इस मामले में अमेरिका की सैन्य मदद की जरूरत नहीं है। दुनिया के लिए रेड सी इतना अहम क्यों है? रेड सी दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इसके एक तरफ सऊदी अरब और यमन हैं, जबकि दूसरी तरफ मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया स्थित हैं। दुनिया के करीब 30% समुद्री व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता है। रेड सी में आने-जाने के केवल दो रास्ते हैं। पूर्व में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और पश्चिम में स्वेज नहर। इसलिए इनमें से किसी एक रास्ते में रुकावट आने पर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ता है। बाब अल-मंदेब अपने सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 29 किलोमीटर चौड़ा है। इसी वजह से यहां जहाजों के आने और जाने के लिए केवल दो समुद्री लेन हैं। ईरान जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी के कारण सऊदी अरब अपना ज्यादातर तेल इसी रास्ते से भेज रहा है। लेकिन अब इस रास्ते में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का असर बढ़ गया है। ईरान जंग से एक चौथाई सप्लाई पर असर पड़ा सामान्य समय में दुनिया के लगभग 20% तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। अब होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी, दोनों क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया की करीब 25% ऊर्जा आपूर्ति किसी न किसी रूप में इस संघर्ष से प्रभावित हो रही है। शिपिंग पर टोल लगाने की योजना रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही शिपिंग पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहे हैं। यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि की और आरोप लगाया कि इसमें ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल है। एर्यानी ने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री गलियारे को मिलिशिया की गतिविधियों के लिए फंडिंग का जरिया बनाना है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, प्राकृतिक जलडमरूमध्य के किनारे स्थित देशों को टोल वसूलने की अनुमति नहीं है। वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर लाल सागर में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति लाइनों पर बुरा असर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताहांत में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई, जबकि 2023 से पहले प्रतिदिन 70 से अधिक जहाज यहां से गुजरते थे। फरवरी में अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें अस्थिर हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि पिछले हफ्ते कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई थीं।

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