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UN Secretary General Election | Carolyn Rodrigues Birkett Leads Race

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5 मिनट पहले

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UN के 80 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला महासचिव बन सकती है। फिलहाल इस रेस में कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं।

शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे हैं। वहीं दूसरे पायदान पर कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

UN महासचिव पद की उम्मीदवार गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट। (फाइल फोटो)

UN महासचिव पद की उम्मीदवार गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट। (फाइल फोटो)

UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है?

  • संयुक्त राष्ट्र का महासचिव सीधे जनता या सभी देशों की वोटिंग से नहीं चुना जाता। पहले सुरक्षा परिषद (UNSC) उम्मीदवारों के नामों पर विचार करती है।
  • सुरक्षा परिषद में उम्मीदवारों को लेकर कई दौर की अनौपचारिक और सीक्रेट वोटिंग होती है। इसमें 15 सदस्य देश बताते हैं कि वे उम्मीदवार के साथ हैं, उसके खिलाफ हैं या उनकी कोई राय नहीं है।
  • यह अंतिम या औपचारिक चुनाव नहीं होता। इसका मकसद यह देखना होता है कि कौन उम्मीदवार कितना मजबूत है। अगर किसी उम्मीदवार को कम समर्थन मिलता है, तो वह अपनी दावेदारी वापस भी ले सकता है।

महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी

  • सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इन पांचों के पास वीटो पावर है।
  • किसी उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद से आगे बढ़ने के लिए कम से कम 9 वोट चाहिए। लेकिन सिर्फ 9 वोट मिल जाना काफी नहीं है। पांच स्थायी सदस्यों में से किसी एक का विरोध भी उम्मीदवार की राह रोक सकता है।
  • इसलिए उम्मीदवार को बाकी देशों का समर्थन जुटाने के साथ यह भी देखना होता है कि पांचों स्थायी देशों में से कोई उसके खिलाफ न हो।
  • जब बातचीत और वोटिंग के बाद किसी एक उम्मीदवार के नाम पर पर्याप्त सहमति बन जाती है, तो सुरक्षा परिषद औपचारिक बैठक में उस नाम की सिफारिश करती है।
  • इसके बाद उम्मीदवार का नाम संयुक्त राष्ट्र महासभा के पास जाता है। महासभा में संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश होते हैं।
  • महासभा सुरक्षा परिषद की सिफारिश के आधार पर नए महासचिव की नियुक्ति करती है। कई बार यह मंजूरी बिना औपचारिक वोटिंग के सर्वसम्मति से भी हो जाती है।
  • नियुक्ति के बाद महासचिव का सामान्य कार्यकाल 5 साल का होता है। उसे दूसरी बार भी चुना जा सकता है।

वोटिंग की प्रक्रिया

अनौपचारिक वोटिंग में UNSC के 15 सदस्य हर उम्मीदवार के लिए अपनी राय देते हैं। इसमें तीन विकल्प होते हैं:

1. समर्थन 2. विरोध 3. कोई राय नहीं

इसका मतलब यह है कि हर देश को उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में ही वोट देना जरूरी नहीं है। वह ‘कोई राय नहीं’ भी चुन सकता है।

जैसे 30 जुलाई की पहली अनौपचारिक वोटिंग में रेबेका ग्रिन्सपैन को सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। उन्हें 10 देशों का समर्थन, 1 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी थी।

21 अगस्त की अनौपचारिक वोटिंग में कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे रहीं। उन्हें 8 देशों का समर्थन, 3 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी।

हालांकि इन वोटिंग के ये आंकड़े अंतिम चुनाव के नतीजे नहीं होते। इनका मकसद सिर्फ यह पता लगाना होता है कि कौन उम्मीदवार सबसे मजबूत स्थिति में है और किसके नाम पर UNSC में सहमति बन सकती है।

विकसित देशों से महासचिव क्यों नहीं बनता ?

1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश

संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है।

1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है।

2. महासचिव किसी एक बड़े देश का आदमी न लगे

महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा।

इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को तरजीह मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए।

3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा

संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो।

लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी।

2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे

भारत के सांसद शशि थरूर भी UN महासचिव पद के दावेदार रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें UN महासचिव पद के लिए उम्मीदवार बनाया था।

थरूर 1978 से UN में काम कर रहे थे। भारत ने उनके लंबे UN अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ को उनकी ताकत बताया। साथ ही, भारत ने कहा कि अब अगला महासचिव एशिया से होना चाहिए।

भारत ने दुनियाभर में थरूर के लिए समर्थन जुटाया। मनमोहन सिंह ने कई देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने खुद भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात की।

हालांकि, वे महासचिव नहीं बन सके। अनौपचारिक वोटिंग में थरूर दूसरे नंबर पर रहे, जबकि दक्षिण कोरिया के बान की-मून लगातार सबसे आगे रहे।

——————

यह खबर भी पढ़ें…

UN में चीफ गुटेरेस की जगह किसे मिलेगी:आज दूसरे दौर की वोटिंग, रेस में 8 दावेदार, कोस्टा रिका की ग्रिन्सपैन सबसे आगे

संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। उनके बाद अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पद के लिए इस समय 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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UN के 80 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला महासचिव बन सकती है। फिलहाल इस रेस में कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं।

शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे हैं। वहीं दूसरे पायदान पर कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

UN महासचिव पद की उम्मीदवार गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट। (फाइल फोटो)

UN महासचिव पद की उम्मीदवार गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट। (फाइल फोटो)

UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है?

  • संयुक्त राष्ट्र का महासचिव सीधे जनता या सभी देशों की वोटिंग से नहीं चुना जाता। पहले सुरक्षा परिषद (UNSC) उम्मीदवारों के नामों पर विचार करती है।
  • सुरक्षा परिषद में उम्मीदवारों को लेकर कई दौर की अनौपचारिक और सीक्रेट वोटिंग होती है। इसमें 15 सदस्य देश बताते हैं कि वे उम्मीदवार के साथ हैं, उसके खिलाफ हैं या उनकी कोई राय नहीं है।
  • यह अंतिम या औपचारिक चुनाव नहीं होता। इसका मकसद यह देखना होता है कि कौन उम्मीदवार कितना मजबूत है। अगर किसी उम्मीदवार को कम समर्थन मिलता है, तो वह अपनी दावेदारी वापस भी ले सकता है।

महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी

  • सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इन पांचों के पास वीटो पावर है।
  • किसी उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद से आगे बढ़ने के लिए कम से कम 9 वोट चाहिए। लेकिन सिर्फ 9 वोट मिल जाना काफी नहीं है। पांच स्थायी सदस्यों में से किसी एक का विरोध भी उम्मीदवार की राह रोक सकता है।
  • इसलिए उम्मीदवार को बाकी देशों का समर्थन जुटाने के साथ यह भी देखना होता है कि पांचों स्थायी देशों में से कोई उसके खिलाफ न हो।
  • जब बातचीत और वोटिंग के बाद किसी एक उम्मीदवार के नाम पर पर्याप्त सहमति बन जाती है, तो सुरक्षा परिषद औपचारिक बैठक में उस नाम की सिफारिश करती है।
  • इसके बाद उम्मीदवार का नाम संयुक्त राष्ट्र महासभा के पास जाता है। महासभा में संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश होते हैं।
  • महासभा सुरक्षा परिषद की सिफारिश के आधार पर नए महासचिव की नियुक्ति करती है। कई बार यह मंजूरी बिना औपचारिक वोटिंग के सर्वसम्मति से भी हो जाती है।
  • नियुक्ति के बाद महासचिव का सामान्य कार्यकाल 5 साल का होता है। उसे दूसरी बार भी चुना जा सकता है।

वोटिंग की प्रक्रिया

अनौपचारिक वोटिंग में UNSC के 15 सदस्य हर उम्मीदवार के लिए अपनी राय देते हैं। इसमें तीन विकल्प होते हैं:

1. समर्थन 2. विरोध 3. कोई राय नहीं

इसका मतलब यह है कि हर देश को उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में ही वोट देना जरूरी नहीं है। वह ‘कोई राय नहीं’ भी चुन सकता है।

जैसे 30 जुलाई की पहली अनौपचारिक वोटिंग में रेबेका ग्रिन्सपैन को सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। उन्हें 10 देशों का समर्थन, 1 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी थी।

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हालांकि इन वोटिंग के ये आंकड़े अंतिम चुनाव के नतीजे नहीं होते। इनका मकसद सिर्फ यह पता लगाना होता है कि कौन उम्मीदवार सबसे मजबूत स्थिति में है और किसके नाम पर UNSC में सहमति बन सकती है।

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1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश

संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है।

1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है।

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महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा।

इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को तरजीह मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए।

3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा

संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो।

लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी।

2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे

भारत के सांसद शशि थरूर भी UN महासचिव पद के दावेदार रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें UN महासचिव पद के लिए उम्मीदवार बनाया था।

थरूर 1978 से UN में काम कर रहे थे। भारत ने उनके लंबे UN अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ को उनकी ताकत बताया। साथ ही, भारत ने कहा कि अब अगला महासचिव एशिया से होना चाहिए।

भारत ने दुनियाभर में थरूर के लिए समर्थन जुटाया। मनमोहन सिंह ने कई देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने खुद भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात की।

हालांकि, वे महासचिव नहीं बन सके। अनौपचारिक वोटिंग में थरूर दूसरे नंबर पर रहे, जबकि दक्षिण कोरिया के बान की-मून लगातार सबसे आगे रहे।

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संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। उनके बाद अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पद के लिए इस समय 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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