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IIT Mandi Bhagavad Gita Poster; Shudra Remark Controversy

IIT Mandi Bhagavad Gita Poster; Shudra Remark Controversy
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  • IIT Mandi Bhagavad Gita Poster; Shudra Remark Controversy | Laxmidhar Behera

18 मिनट पहले

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IIT मंडी के कैंपस में लगे एक भगवद्गीता-थीम वाले पोस्टर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पोस्टर में शूद्रों का काम ‘ऊंची जातियों की सेवा करना’ बताया गया था।

मामला तूल पकड़ता देख संस्थान के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह छात्रों की अपनी व्याख्या थी, संस्थान का इससे कोई लेना-देना नहीं।

दिलचस्प बात यह है कि बेहरा खुद लंबे समय से भगवद्गीता पढ़ाते आए हैं और इस्कॉन (ISKCON) से भी उनका पुराना नाता है। वे IIT मंडी में गीता पर एक पूरा कोर्स पढ़ाते हैं और प्रस्तावित भक्तिवेदांत यूनिवर्सिटी के संस्थापक भी हैं, जिसे इस्कॉन की ही एक पहल बताया जाता है।

निदेशक ने बताया छात्रों की गलती

रविवार को पीटीआई से बात करते हुए बेहरा ने कहा- ‘कुछ छात्रों ने गीता की अपने तरीके से व्याख्या कर दी। मैंने जांच समिति बना दी है। यह एक स्टूडेंट इवेंट था।’

साथ ही उन्होंने साफ किया कि वे और उनका संस्थान, दोनों जातिगत भेदभाव के सख्त खिलाफ हैं।

वायरल पोस्टर, जिसमें शूद्रों को अगड़ी जातियों का सेवक बताया गया है।

वायरल पोस्टर, जिसमें शूद्रों को अगड़ी जातियों का सेवक बताया गया है।

कैंपस को भेजा माफीनामा जैसा ईमेल

रविवार को ही बेहरा ने पूरे कैंपस को एक ईमेल भेजा, जिसका टाइटल है- कैंपस में हाल ही में लगाए गए पोस्टर की खुली निंदा।’

इसमें उन्होंने लिखा कि 4 सितंबर को जन्माष्टमी के दौरान यह पोस्टर लगा, और इसकी जानकारी मिलते ही उन्हें ‘झटका’ लगा। उन्होंने साफ किया कि संस्थान ने इसे किसी भी तरह से समर्थन नहीं दिया।

ईमेल में बेहरा ने लिखा- ‘मैंने हर मंच पर निजी तौर पर जातिगत भेदभाव के हर रूप के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। मैंने जांच समिति बना दी है, ताकि कैंपस का इस्तेमाल आगे कभी ऐसी किसी हरकत के लिए न हो। जो लोग इससे आहत हुए हैं, मैं उनकी भावनाएं समझता हूं।’

बेहरा- मैंने पोस्टर नहीं देखा

उन्होंने आगे लिखा कि संस्थान संविधान में दर्ज समानता, सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक सोच जैसे मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, और कैंपस से हर तरह के भेदभाव के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने की अपील की।

बेहरा के मुताबिक, यह पोस्टर एक छात्र के नेतृत्व में तैयार हुआ था। मामले की जांच के लिए अब फैकल्टी सदस्यों के साथ-साथ SC और OBC समेत अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों वाली एक समिति बना दी गई है।

बेहरा ने बताया कि इस दौरान वे कैंपस से बाहर थे और शनिवार को ही लौटे। विवाद की जानकारी उन्हें रविवार सुबह मिली।

उन्होंने कहा- ‘मैंने पोस्टर देखा तक नहीं है। मैं किसी का पक्ष नहीं लेना चाहता, फैसला समिति पर छोड़ता हूं।’

निदेशक कई बार विवादों में आ चुके हैं

बेहरा की IIT मंडी प्रोफाइल के मुताबिक, वे पिछले 27 सालों से युवाओं को ‘गीता के जरिए शांति के सार्वभौमिक सिद्धांत’ सिखा रहे हैं।

‘एचजी लीला पुरुषोत्तम दास’ नाम से भी जाने जाने वाले बेहरा, प्रस्तावित भक्तिवेदांत यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं।

उन्होंने दावा किया- ‘इस्कॉन ही अकेला संगठन है जो जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ सबसे सख्ती से बोलता है। वहां शूद्र समुदाय के लोग भी पुजारी हैं, मुस्लिम भी पुजारी हैं। हम हर तरह के जातिवाद के खिलाफ हैं- सारे काम गुण और कर्म से तय होते हैं, जाति से नहीं।’

उन्होंने यह भी बताया कि जब वे संस्थान में आए थे, तब OBC, SC और ST वर्गों से कोई फैकल्टी सदस्य नहीं था, अब यह संख्या काफी बढ़ चुकी है।

मांस न खाने की कसम दिलवा चुके हैं बेहरा

रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पढ़ाने वाले इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग प्रोफेसर बेहरा पहले भी विवादों में रह चुके हैं।

2023 में उन्होंने छात्रों से मांस न खाने की कसम दिलवाई थी, यह कहते हुए कि हिमाचल में हो रहे भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं जानवरों पर हो रही क्रूरता की वजह से हैं।

इससे एक साल पहले, निदेशक बनने के तुरंत बाद, एक वीडियो सामने आया था जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने मंत्र जपकर एक दोस्त के परिवार को ‘बुरी आत्माओं’ से छुटकारा दिलाया।

जून में भी IIT मंडी के इंडियन नॉलेज सिस्टम एंड मेंटल हेल्थ सेंटर ने गीता, आयुर्वेद और पुनर्जन्म पर एक सम्मेलन कराया था, जिसमें बेहरा जनरल चेयर की भूमिका में थे और ‘पुनर्जन्म व मृत्यु के बाद संवाद’ नाम के एक सेशन के सह-आयोजक भी रहे।

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ये खबर भी पढ़ें…

हॉस्टल में खराब खाने, बदहाली के खिलाफ छात्राओं का प्रदर्शन:छात्राओं ने रामधुन गाकर किया विरोध, खाने में प्लास्टिक, सिगरेट के टुकड़े मिले

सूरत के सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने 1 सितंबर की रात को विरोध प्रदर्शन किया। उनका ये प्रदर्शन खाने की खराब क्वालिटी, पानी की सप्लाई और रहने की खराब व्यवस्थाओं को लेकर था। छात्राओं ने “रामधुन” गाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। पूरी खबर यहां पढ़ें

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इसमें उन्होंने लिखा कि 4 सितंबर को जन्माष्टमी के दौरान यह पोस्टर लगा, और इसकी जानकारी मिलते ही उन्हें ‘झटका’ लगा। उन्होंने साफ किया कि संस्थान ने इसे किसी भी तरह से समर्थन नहीं दिया।

ईमेल में बेहरा ने लिखा- ‘मैंने हर मंच पर निजी तौर पर जातिगत भेदभाव के हर रूप के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। मैंने जांच समिति बना दी है, ताकि कैंपस का इस्तेमाल आगे कभी ऐसी किसी हरकत के लिए न हो। जो लोग इससे आहत हुए हैं, मैं उनकी भावनाएं समझता हूं।’

बेहरा- मैंने पोस्टर नहीं देखा

उन्होंने आगे लिखा कि संस्थान संविधान में दर्ज समानता, सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक सोच जैसे मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, और कैंपस से हर तरह के भेदभाव के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने की अपील की।

बेहरा के मुताबिक, यह पोस्टर एक छात्र के नेतृत्व में तैयार हुआ था। मामले की जांच के लिए अब फैकल्टी सदस्यों के साथ-साथ SC और OBC समेत अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों वाली एक समिति बना दी गई है।

बेहरा ने बताया कि इस दौरान वे कैंपस से बाहर थे और शनिवार को ही लौटे। विवाद की जानकारी उन्हें रविवार सुबह मिली।

उन्होंने कहा- ‘मैंने पोस्टर देखा तक नहीं है। मैं किसी का पक्ष नहीं लेना चाहता, फैसला समिति पर छोड़ता हूं।’

निदेशक कई बार विवादों में आ चुके हैं

बेहरा की IIT मंडी प्रोफाइल के मुताबिक, वे पिछले 27 सालों से युवाओं को ‘गीता के जरिए शांति के सार्वभौमिक सिद्धांत’ सिखा रहे हैं।

‘एचजी लीला पुरुषोत्तम दास’ नाम से भी जाने जाने वाले बेहरा, प्रस्तावित भक्तिवेदांत यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं।

उन्होंने दावा किया- ‘इस्कॉन ही अकेला संगठन है जो जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ सबसे सख्ती से बोलता है। वहां शूद्र समुदाय के लोग भी पुजारी हैं, मुस्लिम भी पुजारी हैं। हम हर तरह के जातिवाद के खिलाफ हैं- सारे काम गुण और कर्म से तय होते हैं, जाति से नहीं।’

उन्होंने यह भी बताया कि जब वे संस्थान में आए थे, तब OBC, SC और ST वर्गों से कोई फैकल्टी सदस्य नहीं था, अब यह संख्या काफी बढ़ चुकी है।

मांस न खाने की कसम दिलवा चुके हैं बेहरा

रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पढ़ाने वाले इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग प्रोफेसर बेहरा पहले भी विवादों में रह चुके हैं।

2023 में उन्होंने छात्रों से मांस न खाने की कसम दिलवाई थी, यह कहते हुए कि हिमाचल में हो रहे भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं जानवरों पर हो रही क्रूरता की वजह से हैं।

इससे एक साल पहले, निदेशक बनने के तुरंत बाद, एक वीडियो सामने आया था जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने मंत्र जपकर एक दोस्त के परिवार को ‘बुरी आत्माओं’ से छुटकारा दिलाया।

जून में भी IIT मंडी के इंडियन नॉलेज सिस्टम एंड मेंटल हेल्थ सेंटर ने गीता, आयुर्वेद और पुनर्जन्म पर एक सम्मेलन कराया था, जिसमें बेहरा जनरल चेयर की भूमिका में थे और ‘पुनर्जन्म व मृत्यु के बाद संवाद’ नाम के एक सेशन के सह-आयोजक भी रहे।

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