वॉशिंगटन डीसी31 मिनट पहले
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अमेरिका यूरोप में तैनात अपने 25 हजार से 40 हजार सैनिक कम कर सकता है। फिलहाल यूरोप में करीब 80 हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं।
पेंटागन ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से NATO देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि यूरोप को अपनी रक्षा के लिए अमेरिका पर कम निर्भर होना चाहिए।
पेंटागन ने जून में यूरोप में अमेरिकी सैनिकों, सैन्य ठिकानों और हथियारों की तैनाती की समीक्षा शुरू की थी। अगर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती कम की जाती है तो यूरोप का सुरक्षा खर्च बढ़ सकता है।
जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे देशों पर ज्यादा असर पड़ेगा
अमेरिका के इस कदम से जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। कुछ अमेरिकी सैनिकों को यूरोप से पूरी तरह हटाने के बजाय NATO की पूर्वी सीमा के करीब तैनात करने का विकल्प भी मौजूद है।
यूरोप में अमेरिका के इतने सैनिक क्यों हैं?
दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने यूरोप में बड़ी सैन्य मौजूदगी बनाई थी। आज भी अमेरिकी सैनिक कई अहम भूमिकाएं निभाते हैं।
- NATO देशों की सुरक्षा में मदद करते हैं
- रूस के खिलाफ सैन्य संतुलन बनाए रखते हैं
- यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य और लॉजिस्टिक सहायता में भूमिका निभाते हैं
- मध्य-पूर्व और अफ्रीका में अभियानों के लिए यूरोपीय सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं
यही वजह है कि यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम होने को सिर्फ एक सैन्य फैसला नहीं, बल्कि बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान संघर्ष के बाद मतभेद भी बढ़े
इस समीक्षा के पीछे सिर्फ रूस का खतरा नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके कुछ यूरोपीय सहयोगियों के बीच बढ़ते मतभेद भी अहम माने जा रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान कुछ सहयोगी देशों ने अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए अपने एयरस्पेस या सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल पर सीमाएं लगाई थीं। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि अगर यूरोप अपनी सुरक्षा में ज्यादा जिम्मेदारी लेता है तो अमेरिका अपने संसाधनों को दूसरी प्राथमिकताओं पर लगा सकता है।
जर्मनी, इटली और स्पेन पर सबसे ज्यादा असर
यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की सबसे बड़ी मौजूदगी जर्मनी में है। इसके अलावा इटली और स्पेन में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने हैं। इसलिए सैनिकों की संख्या घटाने की स्थिति में इन देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
हालांकि अमेरिका सिर्फ सैनिकों की संख्या घटाने के बजाय उनकी तैनाती की जगह भी बदल सकता है। कुछ सैनिकों को रूस के करीब स्थित NATO देशों की ओर भेजने का विकल्प भी समीक्षा में शामिल है।
यूरोपीय देशों को साइबर और ड्रोन हमलों का भी खतरा
अमेरिका की सैन्य मौजूदगी घटाने की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब रूस और NATO के बीच तनाव बना हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा यूरोपीय देश साइबर हमलों, ड्रोन गतिविधियों और दूसरी हाइब्रिड गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताते रहे हैं। रूस इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
यूरोप की चिंता इसलिए भी है क्योंकि अमेरिकी सेना सिर्फ सैनिक उपलब्ध नहीं कराती। लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता, खुफिया निगरानी, एयर डिफेंस, हवा में ईंधन भरने वाले विमान और दूसरी सैन्य क्षमताओं में भी अमेरिका की बड़ी भूमिका है।
अमेरिका पीछे हटा तो यूरोप को क्या करना होगा?
अगर अमेरिकी सैनिकों की संख्या बड़े स्तर पर घटती है तो यूरोपीय देशों को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ानी पड़ेगी। उन्हें सिर्फ ज्यादा सैनिक ही नहीं, बल्कि हथियार, एयर डिफेंस, खुफिया निगरानी और लॉजिस्टिक्स जैसी क्षमताओं में भी निवेश बढ़ाना होगा।
अंतिम सिफारिश मिलने के बाद ट्रम्प लेंगें फैसला
पेंटागन अभी छह महीने की समीक्षा कर रहा है, जिसमें यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या और तैनाती से जुड़े कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। समीक्षा की शुरुआती रिपोर्ट जनरल एलेक्सस ग्रिंकेविच रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को सौंपेंगे, जबकि अंतिम सिफारिश नवंबर की शुरुआत तक आने की उम्मीद है। इसके बाद ही राष्ट्रपति ट्रम्प कोई फैसला लेंगे।
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