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India Has Only 25 Days Crude Oil Stock Amid West Asia Tensions

India Has Only 25 Days Crude Oil Stock Amid West Asia Tensions
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नई दिल्ली3 मिनट पहले

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत सरकार ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत के पास वर्तमान में सिर्फ 25 दिनों का क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक अवेलेबल है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और कच्चे तेल, LPG और LNG के लिए वैकल्पिक देशों से बातचीत कर रही है, ताकि सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए।

दरअसल, ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया है। साथ ही ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि इस रूट से अगर कोई भी जहाज गुजरता है, तो उसे आग लगा दी जाएगी। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह रूट दुनिया के ऑयल बिजनेस के लिए सबसे जरूरी माना जाता है।

होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया के कई देशों की तेल सप्लाई पर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भारत समेत एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर होगा। इस रूट के बंद होने कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। अभी ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2.6% बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का अभी कोई प्लान नहीं

वहीं आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि भारत सरकार का फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में प्रमुख पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अवेलेबिलिटी और किफायती दाम तय करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

सोमवार को पेट्रोलियम मंत्री ने रिव्यू मीटिंग की थी

इससे पहले सोमवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी तेल कंपनियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की थी। इस बैठक में कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई स्थिति की समीक्षा की गई। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि वे बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी।

एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर असर को लेकर सरकार एक्टिव

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सरकार एक्टिव है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन मीटिंग की थी। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव का भारत के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट और कार्गो फ्लो पर क्या असर पड़ सकता है।

शिपिंग रूट और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने की चुनौती

बैठक में लॉजिस्टिक ऑपरेटर्स और शिपिंग लाइन्स के प्रतिनिधियों ने बताया कि मौजूदा तनाव के कारण जहाजों के रूट बदलने पड़ रहे हैं, जिससे ट्रांजिट टाइम बढ़ गया है। इसके अलावा, माल ढुलाई और इंश्योरेंस की लागत में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सरकार ने एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स के लिए डॉक्यूमेंटेशन और पेमेंट प्रोसेस को आसान बनाने और कार्गो मूवमेंट में देरी को कम करने पर जोर दिया है।

पश्चिम एशिया पर भारत की निर्भरता बड़ी

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 85% इंपोर्ट करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर भारत की इकोनॉमी और एनर्जी सिक्योरिटी पर पड़ता है। सरकार अब रूस और अन्य अफ्रीकी देशों जैसे वैकल्पिक रास्तों पर फोकस बढ़ा रही है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।

भारत पर दोहरा असर, तेल के साथ गैस महंगी होगी

एनर्जी कंसल्टिंग फर्म केप्लर (Kpler) के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत की 53% LNG (LNG) और करीब 60% कच्चा तेल मिडिल ईस्ट के देशों से इंपोर्ट करता है। होर्मुज की नाकेबंदी से भारत को न केवल सप्लाई की कमी झेलनी पड़ेगी, बल्कि कीमतों में उछाल से वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ सकता है और महंगाई दर में इजाफा होने की पूरी संभावना है।

कतर के प्लांट पर ड्रोन अटैक, LNG सप्लाई भी ठप

दुनिया के सबसे बड़े LNG सप्लायर कतर ने सोमवार को अपना प्रोडक्शन रोक दिया है। दरअसल, ईरानी ड्रोन्स ने कतर के रास लफान और मेसैद इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित प्लांट को निशाना बनाया है।

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की 20% LNG सप्लाई इसी रास्ते से होती है। सप्लाई रुकने से पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में बिजली संकट गहरा सकता है, क्योंकि वे अपनी जरूरत की 70-90% गैस के लिए कतर और यूएई पर निर्भर हैं।

एशिया के ये देश सबसे ज्यादा जोखिम में हैं

नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे बुरा असर थाईलैंड, भारत, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस पर पड़ेगा।

थाईलैंड: यहां कच्चे तेल का आयात जीडीपी का 4.7% है। तेल की कीमतों में हर 10% की बढ़त इसकी जीडीपी को 0.5% तक प्रभावित करती है।

दक्षिण कोरिया और जापान: ये देश अपनी जरूरत का 70-75% तेल मिडिल ईस्ट से मंगाते हैं। दक्षिण कोरिया के पास केवल 2 से 4 हफ्ते का ही रिजर्व स्टॉक बचा है।

चीन: हालांकि चीन सबसे बड़ा इंपोर्टर है, लेकिन उसके पास 7.6 मिलियन टन का LNG रिजर्व है, जो उसे थोड़े समय के लिए सुरक्षा देता है।

बाजार में 100 डॉलर के पार जा सकता है कच्चा तेल

रयस्टैड एनर्जी के मुताबिक, अगर यह नाकेबंदी लंबे समय तक चलती है, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर सकती हैं।

2025 में इस रास्ते से रोजाना करीब 13 मिलियन बैरल तेल गुजरता था, जो कुल समुद्री तेल व्यापार का 31% है। हालांकि, सऊदी अरब ने हाल के हफ्तों में अपनी लोडिंग बढ़ाई है, जिससे बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।

ये खबर भी पढ़ें…

भारत फिर बढ़ाएगा रूस से कच्चे तेल की खरीद: 95 लाख बैरल तेल पर नजर; ईरान-इजराइल जंग के बीच स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से सप्लाई रुकी

मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल के बीच जंग और तेल की सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद भारत ने एक बार फिर रूस की ओर रुख किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का प्लान बना रहा है।

पिछले कुछ दिनों में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिसके चलते सरकारी रिफाइनरीज और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने दिल्ली में एक इमरजेंसी मीटिंग कर विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
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दरअसल, ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया है। साथ ही ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि इस रूट से अगर कोई भी जहाज गुजरता है, तो उसे आग लगा दी जाएगी। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह रूट दुनिया के ऑयल बिजनेस के लिए सबसे जरूरी माना जाता है।

होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया के कई देशों की तेल सप्लाई पर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भारत समेत एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर होगा। इस रूट के बंद होने कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। अभी ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2.6% बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का अभी कोई प्लान नहीं

वहीं आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि भारत सरकार का फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में प्रमुख पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अवेलेबिलिटी और किफायती दाम तय करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

सोमवार को पेट्रोलियम मंत्री ने रिव्यू मीटिंग की थी

इससे पहले सोमवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी तेल कंपनियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की थी। इस बैठक में कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई स्थिति की समीक्षा की गई। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि वे बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी।

एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर असर को लेकर सरकार एक्टिव

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सरकार एक्टिव है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन मीटिंग की थी। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव का भारत के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट और कार्गो फ्लो पर क्या असर पड़ सकता है।

शिपिंग रूट और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने की चुनौती

बैठक में लॉजिस्टिक ऑपरेटर्स और शिपिंग लाइन्स के प्रतिनिधियों ने बताया कि मौजूदा तनाव के कारण जहाजों के रूट बदलने पड़ रहे हैं, जिससे ट्रांजिट टाइम बढ़ गया है। इसके अलावा, माल ढुलाई और इंश्योरेंस की लागत में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सरकार ने एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स के लिए डॉक्यूमेंटेशन और पेमेंट प्रोसेस को आसान बनाने और कार्गो मूवमेंट में देरी को कम करने पर जोर दिया है।

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एनर्जी कंसल्टिंग फर्म केप्लर (Kpler) के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत की 53% LNG (LNG) और करीब 60% कच्चा तेल मिडिल ईस्ट के देशों से इंपोर्ट करता है। होर्मुज की नाकेबंदी से भारत को न केवल सप्लाई की कमी झेलनी पड़ेगी, बल्कि कीमतों में उछाल से वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ सकता है और महंगाई दर में इजाफा होने की पूरी संभावना है।

कतर के प्लांट पर ड्रोन अटैक, LNG सप्लाई भी ठप

दुनिया के सबसे बड़े LNG सप्लायर कतर ने सोमवार को अपना प्रोडक्शन रोक दिया है। दरअसल, ईरानी ड्रोन्स ने कतर के रास लफान और मेसैद इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित प्लांट को निशाना बनाया है।

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की 20% LNG सप्लाई इसी रास्ते से होती है। सप्लाई रुकने से पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में बिजली संकट गहरा सकता है, क्योंकि वे अपनी जरूरत की 70-90% गैस के लिए कतर और यूएई पर निर्भर हैं।

एशिया के ये देश सबसे ज्यादा जोखिम में हैं

नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे बुरा असर थाईलैंड, भारत, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस पर पड़ेगा।

थाईलैंड: यहां कच्चे तेल का आयात जीडीपी का 4.7% है। तेल की कीमतों में हर 10% की बढ़त इसकी जीडीपी को 0.5% तक प्रभावित करती है।

दक्षिण कोरिया और जापान: ये देश अपनी जरूरत का 70-75% तेल मिडिल ईस्ट से मंगाते हैं। दक्षिण कोरिया के पास केवल 2 से 4 हफ्ते का ही रिजर्व स्टॉक बचा है।

चीन: हालांकि चीन सबसे बड़ा इंपोर्टर है, लेकिन उसके पास 7.6 मिलियन टन का LNG रिजर्व है, जो उसे थोड़े समय के लिए सुरक्षा देता है।

बाजार में 100 डॉलर के पार जा सकता है कच्चा तेल

रयस्टैड एनर्जी के मुताबिक, अगर यह नाकेबंदी लंबे समय तक चलती है, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर सकती हैं।

2025 में इस रास्ते से रोजाना करीब 13 मिलियन बैरल तेल गुजरता था, जो कुल समुद्री तेल व्यापार का 31% है। हालांकि, सऊदी अरब ने हाल के हफ्तों में अपनी लोडिंग बढ़ाई है, जिससे बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।

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मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल के बीच जंग और तेल की सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद भारत ने एक बार फिर रूस की ओर रुख किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का प्लान बना रहा है।

पिछले कुछ दिनों में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिसके चलते सरकारी रिफाइनरीज और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने दिल्ली में एक इमरजेंसी मीटिंग कर विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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