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Barmer HPCL Refinery Fire | PM Modi Visit Postponed; Rajasthan Economy Loss

Barmer HPCL Refinery Fire | PM Modi Visit Postponed; Rajasthan Economy Loss

20 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा स्थित पचपदरा में भीषण आग लग गई थी। 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने वाले थे।

राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा (पचपदरा) में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में 20 अप्रैल दोपहर 2 बजे आग लग गई। रिफाइनरी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (आज) उद्घाटन करने वाले थे। इस घटना के बाद उनका दौरा स्थगित हो गया। आ

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इस हादसे ने न सिर्फ सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राजस्थान की इकोनॉमी को बड़ा घाव भी दिया है। साल 2013 से लेकर अब तक 13 सालों में पहले ही रिफाइनरी की लागत 37 हजार 230 करोड़ से बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

भास्कर ने एक्सपट्‌र्स से बात कर जाना कि शिलान्यास से उद्घाटन तक कौन सी चुनौतियां आईं, जिसके कारण बार-बार रिफाइनरी का काम रुका। साथ ही अब इस हादसे से कितना बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।

20 अप्रैल को बालोतरा के पचपदरा रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में आग लग गई थी। इससे बड़ा नुकसान हुआ है।

इस तरह देखा गया रिफाइनरी का सपना

बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के सपने के पीछे की असल कहानी की शुरुआत साल 2004 में बाड़मेर के मंगला ऑयल फील्ड की खोज से शुरू हुई। साल 2009 में यहां से प्रोडक्शन शुरू हुआ। इसी के साथ ही राजस्थान में लोकल रिफाइनिंग की जरूरत महसूस की गई।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया। उस समय अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे।

रिफाइनरी प्रोजेक्ट के मॉडल में हिंदुस्तान पेट्रोलियम काॅरपोरेशन लिमिटेड को 74 फीसदी और राजस्थान सरकार को 26 फीसदी का हिस्सेदार बनाते हुए जॉइंट वेंचर में रखा गया था। तब इसकी अनुमानित लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए थी। साल 2017–18 तक रिफाइनरी चालू करने का टारगेट रखा गया था।

शिलान्यास और घोषणा की टाइमिंग चुनाव से ऐन पहले थी। ऐसे में शिलान्यास के साथ ही राजनीति भी शुरू हो गई। प्रोजेक्ट में ठोस टेंडरिंग व कंस्ट्रक्शन स्टार्ट होता इससे पहले ही राजस्थान में आचार संहिता लग गई। चुनाव के बाद सरकार बदली और रिफाइनरी प्रोजेक्ट री-एसेसमेंट, लागत बढ़ोतरी और नई शर्तों में उलझता चला गया।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।

प्रोजेक्ट को री-नेगोशिएशन और रिव्यू में डाला

वसुंधरा राजे की अगुआई वाली बीजेपी सरकार आने के बाद प्रोजेक्ट में दी जा रही ज्यादा सब्सिडी, टैक्स बेनिफिट और कम रिटर्न की आशंका के चलते इसे री-नेगोशिएशन और रिव्यू में डाल दिया गया। इसके बाद अगले पांच साल तक ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। कांग्रेस का आरोप था कि बीजेपी ने इसे जानबूझकर रोक दिया। बीजेपी का पक्ष था कि रिव्यू के बिना ये प्रोजेक्ट घाटे का सौदा था।

करीब 5 साल की देरी और विवादों के बीच आखिरकार पचपदरा रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट को लेकर फिर से उम्मीद जागी। रिफाइनरी की शर्तों में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से इसके कार्य का शुभारंभ किया। इस समय इसकी लागत बढ़कर 43 हजार 129 करोड़ रुपए हो गई थी। इसका काम 31 अक्टूबर 2022 तक पूरा किया जाना था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ किया था।

कोविड के दौरान ठप हो गया काम

इसके बाद फिर राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो गया। अशोक गहलोत की अगुआई में कांग्रेस सरकार बन गई। हालांकि इसके बाद भी पचपदरा रिफाइनरी का प्रोजेक्ट चलता रहा, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, रीडिजाइन, टेक्निकल बदलावों और लागत बढ़ोतरी के चलते स्पीड धीमी ही रही। कोविड के दौरान साल 2020 और 2021 में तो काम पूरा ठप ही हो गया था।

2023 में फिर राजस्थान में भजनलाल सरकार बनी। रिफाइनरी के लागत मूल्य में दूसरा संशोधन प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत करने के बाद इसकी लागत बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ रुपए हो गई थी। इसे 8 अप्रैल 2026 को मंजूर कर दिया गया और एक जुलाई 2026 से कॉमर्शियल ऑपरेशन का टारगेट तय किया गया।

अब 20 अप्रैल को हुए अग्निकांड के बाद न सिर्फ रिफाइनरी का उद्घाटन बल्कि इसका कॉमर्शियल ऑपरेशन का टारगेट भी आगे बढ़ना तय हो गया है। एक दिन पहले की स्टेटस रिपोर्ट की मानें तो रिफाइनरी का 92 फीसदी काम पूरा हो चुका था। ऐसे में जहां तेल शोधन (ऑयल रिफाइनिंग) का बड़ा काम होना था, ठीक उसी यूनिट में आग लगने से राजस्थान में रिफाइनरी के सपनों को झटका लगा है। अब ये जख्म कब तक भरेगा, इसका फिलहाल अंदाजा लगना मुश्किल है।

20 अप्रैल की दोपहर बालोतरा के पचपदरा स्थित रिफाइनरी में आग लग गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम घंटों मशक्कत करती रही।

20 अप्रैल की दोपहर बालोतरा के पचपदरा स्थित रिफाइनरी में आग लग गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम घंटों मशक्कत करती रही।

रिपेयरिंग और डैमेज असेसमेंट में लग सकता है समय

रिफाइनरी मामलों के जानकार सोर्सेज ने बताया कि इस रिफाइनरी को लेकर दावा किया जा रहा था कि इसमें दुनिया की बेस्ट टेक्नोलॉजी, बेस्ट इक्यूप्मेंट्स और बेस्ट इंजीनियर्स का इस्तेमाल हो रहा था। ऐसे में उद्घाटन से पहले ये हादसा बड़े सवाल खड़े करता है।

एक्सपट्‌र्स ने बताया कि फिलहाल इतनी बड़ी घटना को लेकर कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी ही होगी। इसके लिए सबसे पहले ये देखना होगा कि ये यूनिट किस कंपनी की थी? सप्लाई किसने किया था? क्या ये कंपनी इंजीनियर के चार्ज में थी या इसे रिफाइनरी के इंजीनियर्स ने चार्ज में ले लिया था? टेक्निकल ऑडिट किसने किया था? और उन एक्सपट्‌र्स की क्या रिपोर्ट थी। इन सभी सवालों के जवाब आने के बाद ही इस हादसे को लेकर कुछ ठोस कहा जा सकता है।

एक्सपट्‌र्स का मानना है कि रिफाइनरी के दिल में ही आग लगी है तो नुकसान तो बड़ा ही हुआ है। रिफाइनरी की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं कॉमर्शियल रन समय पर स्टार्ट नहीं होने से नुकसान अलग है। हालांकि इतनी बड़ी रिफाइनरी में सभी यूनिट और इक्यूप्मेंट्स डबल इंश्योर्ड होते हैं। ग्लोबल सप्लायर कंपनीज की गारंटी में भी होते हैं, लेकिन रिप्लेसमेंट और दुबारा फेब्रिकेशन व इंस्टॉलेशन में लगने वाला टाइम प्रोडक्शन को बड़ा इकोनॉमिक लॉस देता है।

CDU-VDU यूनिट से क्रूड ऑयल की डिस्टिलेशन शुरू होती है। साधारण शब्दों में कहें तो यहीं क्रूड से पेट्रोल, डीजल, और दूसरे पेट्रोलियम पदार्थ निकलते हैं। इस आग के बाद इसकी रिपेयरिंग और इसके डैमेज असेसमेंट में 1 से 6 महीने लग सकते हैं। अगर जुलाई 2026 से कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होता, तो 9 MMTPA क्षमता के हिसाब से मंथली रेवेन्यू 50 हजार से 80 हजार करोड़ के आसपास होने वाला था। अब हर महीने की देरी से यह संभावित रेवेन्यू लॉस होना तय है।

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ये खबरें भी पढ़िए…

1- राजस्थान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग:कई घंटे बाद काबू पाया गया; कल प्रधानमंत्री उद्घाटन करने वाले थे, घटना के बाद कार्यक्रम स्थगित

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राजस्थान के बालोतरा में पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार को सिस्टम फेलियर की वजह से आग लगी थी। प्रत्यक्षदर्शी इंजीनियर का कहना है- रिफाइनरी की 2 महत्वपूर्ण यूनिट में मशीनों के बीच फ्रिक्शन(घर्षण) हुआ। इससे चिंगारी निकली। पढ़ें पूरी खबर…

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20 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा स्थित पचपदरा में भीषण आग लग गई थी। 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने वाले थे।

राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा (पचपदरा) में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में 20 अप्रैल दोपहर 2 बजे आग लग गई। रिफाइनरी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (आज) उद्घाटन करने वाले थे। इस घटना के बाद उनका दौरा स्थगित हो गया। आ

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इस हादसे ने न सिर्फ सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राजस्थान की इकोनॉमी को बड़ा घाव भी दिया है। साल 2013 से लेकर अब तक 13 सालों में पहले ही रिफाइनरी की लागत 37 हजार 230 करोड़ से बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

भास्कर ने एक्सपट्‌र्स से बात कर जाना कि शिलान्यास से उद्घाटन तक कौन सी चुनौतियां आईं, जिसके कारण बार-बार रिफाइनरी का काम रुका। साथ ही अब इस हादसे से कितना बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।

20 अप्रैल को बालोतरा के पचपदरा रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में आग लग गई थी। इससे बड़ा नुकसान हुआ है।

इस तरह देखा गया रिफाइनरी का सपना

बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के सपने के पीछे की असल कहानी की शुरुआत साल 2004 में बाड़मेर के मंगला ऑयल फील्ड की खोज से शुरू हुई। साल 2009 में यहां से प्रोडक्शन शुरू हुआ। इसी के साथ ही राजस्थान में लोकल रिफाइनिंग की जरूरत महसूस की गई।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया। उस समय अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे।

रिफाइनरी प्रोजेक्ट के मॉडल में हिंदुस्तान पेट्रोलियम काॅरपोरेशन लिमिटेड को 74 फीसदी और राजस्थान सरकार को 26 फीसदी का हिस्सेदार बनाते हुए जॉइंट वेंचर में रखा गया था। तब इसकी अनुमानित लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए थी। साल 2017–18 तक रिफाइनरी चालू करने का टारगेट रखा गया था।

शिलान्यास और घोषणा की टाइमिंग चुनाव से ऐन पहले थी। ऐसे में शिलान्यास के साथ ही राजनीति भी शुरू हो गई। प्रोजेक्ट में ठोस टेंडरिंग व कंस्ट्रक्शन स्टार्ट होता इससे पहले ही राजस्थान में आचार संहिता लग गई। चुनाव के बाद सरकार बदली और रिफाइनरी प्रोजेक्ट री-एसेसमेंट, लागत बढ़ोतरी और नई शर्तों में उलझता चला गया।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।

प्रोजेक्ट को री-नेगोशिएशन और रिव्यू में डाला

वसुंधरा राजे की अगुआई वाली बीजेपी सरकार आने के बाद प्रोजेक्ट में दी जा रही ज्यादा सब्सिडी, टैक्स बेनिफिट और कम रिटर्न की आशंका के चलते इसे री-नेगोशिएशन और रिव्यू में डाल दिया गया। इसके बाद अगले पांच साल तक ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। कांग्रेस का आरोप था कि बीजेपी ने इसे जानबूझकर रोक दिया। बीजेपी का पक्ष था कि रिव्यू के बिना ये प्रोजेक्ट घाटे का सौदा था।

करीब 5 साल की देरी और विवादों के बीच आखिरकार पचपदरा रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट को लेकर फिर से उम्मीद जागी। रिफाइनरी की शर्तों में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से इसके कार्य का शुभारंभ किया। इस समय इसकी लागत बढ़कर 43 हजार 129 करोड़ रुपए हो गई थी। इसका काम 31 अक्टूबर 2022 तक पूरा किया जाना था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ किया था।

कोविड के दौरान ठप हो गया काम

इसके बाद फिर राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो गया। अशोक गहलोत की अगुआई में कांग्रेस सरकार बन गई। हालांकि इसके बाद भी पचपदरा रिफाइनरी का प्रोजेक्ट चलता रहा, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, रीडिजाइन, टेक्निकल बदलावों और लागत बढ़ोतरी के चलते स्पीड धीमी ही रही। कोविड के दौरान साल 2020 और 2021 में तो काम पूरा ठप ही हो गया था।

2023 में फिर राजस्थान में भजनलाल सरकार बनी। रिफाइनरी के लागत मूल्य में दूसरा संशोधन प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत करने के बाद इसकी लागत बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ रुपए हो गई थी। इसे 8 अप्रैल 2026 को मंजूर कर दिया गया और एक जुलाई 2026 से कॉमर्शियल ऑपरेशन का टारगेट तय किया गया।

अब 20 अप्रैल को हुए अग्निकांड के बाद न सिर्फ रिफाइनरी का उद्घाटन बल्कि इसका कॉमर्शियल ऑपरेशन का टारगेट भी आगे बढ़ना तय हो गया है। एक दिन पहले की स्टेटस रिपोर्ट की मानें तो रिफाइनरी का 92 फीसदी काम पूरा हो चुका था। ऐसे में जहां तेल शोधन (ऑयल रिफाइनिंग) का बड़ा काम होना था, ठीक उसी यूनिट में आग लगने से राजस्थान में रिफाइनरी के सपनों को झटका लगा है। अब ये जख्म कब तक भरेगा, इसका फिलहाल अंदाजा लगना मुश्किल है।

20 अप्रैल की दोपहर बालोतरा के पचपदरा स्थित रिफाइनरी में आग लग गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम घंटों मशक्कत करती रही।

20 अप्रैल की दोपहर बालोतरा के पचपदरा स्थित रिफाइनरी में आग लग गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम घंटों मशक्कत करती रही।

रिपेयरिंग और डैमेज असेसमेंट में लग सकता है समय

रिफाइनरी मामलों के जानकार सोर्सेज ने बताया कि इस रिफाइनरी को लेकर दावा किया जा रहा था कि इसमें दुनिया की बेस्ट टेक्नोलॉजी, बेस्ट इक्यूप्मेंट्स और बेस्ट इंजीनियर्स का इस्तेमाल हो रहा था। ऐसे में उद्घाटन से पहले ये हादसा बड़े सवाल खड़े करता है।

एक्सपट्‌र्स ने बताया कि फिलहाल इतनी बड़ी घटना को लेकर कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी ही होगी। इसके लिए सबसे पहले ये देखना होगा कि ये यूनिट किस कंपनी की थी? सप्लाई किसने किया था? क्या ये कंपनी इंजीनियर के चार्ज में थी या इसे रिफाइनरी के इंजीनियर्स ने चार्ज में ले लिया था? टेक्निकल ऑडिट किसने किया था? और उन एक्सपट्‌र्स की क्या रिपोर्ट थी। इन सभी सवालों के जवाब आने के बाद ही इस हादसे को लेकर कुछ ठोस कहा जा सकता है।

एक्सपट्‌र्स का मानना है कि रिफाइनरी के दिल में ही आग लगी है तो नुकसान तो बड़ा ही हुआ है। रिफाइनरी की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं कॉमर्शियल रन समय पर स्टार्ट नहीं होने से नुकसान अलग है। हालांकि इतनी बड़ी रिफाइनरी में सभी यूनिट और इक्यूप्मेंट्स डबल इंश्योर्ड होते हैं। ग्लोबल सप्लायर कंपनीज की गारंटी में भी होते हैं, लेकिन रिप्लेसमेंट और दुबारा फेब्रिकेशन व इंस्टॉलेशन में लगने वाला टाइम प्रोडक्शन को बड़ा इकोनॉमिक लॉस देता है।

CDU-VDU यूनिट से क्रूड ऑयल की डिस्टिलेशन शुरू होती है। साधारण शब्दों में कहें तो यहीं क्रूड से पेट्रोल, डीजल, और दूसरे पेट्रोलियम पदार्थ निकलते हैं। इस आग के बाद इसकी रिपेयरिंग और इसके डैमेज असेसमेंट में 1 से 6 महीने लग सकते हैं। अगर जुलाई 2026 से कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होता, तो 9 MMTPA क्षमता के हिसाब से मंथली रेवेन्यू 50 हजार से 80 हजार करोड़ के आसपास होने वाला था। अब हर महीने की देरी से यह संभावित रेवेन्यू लॉस होना तय है।

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