Tuesday, 01 Sep 2026 | 07:16 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Book Review; Bhawna: Jeevan Ka GPS

Book Review; Bhawna: Jeevan Ka GPS

5 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

बुक का नाम: ‘भावना: जीवन का GPS’ (भावना योग के साथ अपनी राह खोजें)

लेखक: मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज

प्रकाशक: निर्ग्रन्थ फाउंडेशन

मूल्य: 150 रुपए

आज इंसान के पास तेज दिमाग, आधुनिक साधन और मनोरंजन के कई विकल्प हैं, फिर भी वह उलझा हुआ है। कारण है कि हमने बाहर की दुनिया संभालना सीख लिया है, लेकिन भावनाओं को समझना बाकी है।

जैन मुनि प्रमाणसागर जी की किताब ‘भावना: जीवन का GPS’ इस विषय पर प्रकाश डालती है। यह सिखाती है कि जीवन की असली दिशा बाहर नहीं, बल्कि भीतर तय होती है।

मुनिश्री बताते हैं कि अगर हम अपनी भावनाओं को समझना और कंट्रोल करना सीख लें, तो पर्सनल और प्रोफेशनल सक्सेस दूर नहीं है।

मुनिश्री बताते हैं कि-

‘’भावना चेतना की वह अदृश्य धारा है, जो हमारे जीवन को दिशा देती है। हम जो सोचते हैं, जो निर्णय लेते हैं और जो बनते हैं, उसके पीछे भावनाओं की ही भूमिका होती है।’’

किताब का उद्देश्य और महत्व

  • किताब का उद्देश्य व्यक्ति को उसकी ‘भावनाओं से परिचित कराना और उन्हें सही दिशा देना’ है।
  • किताब बताती है कि जीवन की ज्यादातर समस्याएं, ‘चाहे तनाव हो, रिश्तों की कड़वाहट हो या फैसले लेने में कठिनाई हो’, इनका मूल कारण अनियंत्रित भावनाएं हैं।
  • हमारे जीवन के ज्यादातर निर्णय तर्क से नहीं, भावनाओं से प्रेरित होते हैं।
  • जब हम भावनाओं को समझकर उन्हें शुद्ध और संतुलित करते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन होता है।
  • भावना योग की प्रक्रिया से यह किताब व्यक्ति को आत्म-चिंतन, आत्म-शुद्धि और सेल्फ-ग्रोथ की दिशा में आगे बढ़ाती है।

नीचे ग्राफिक में किताब के 8 जरूरी सबक देखिए-

किताब में भावनाओं को तीन स्तरों में समझाया गया है-

  • शारीरिक भावनाएं (भूख, थकान, भय)
  • मानसिक भावनाएं (ईर्ष्या, अपेक्षा, निराशा)
  • आध्यात्मिक भावनाएं (करुणा, शांति, क्षमा)

मुनिश्री बताते हैं कि भावनाएं न अच्छी होती हैं न बुरी। उनका दिशा-निर्देशन ही उन्हें सकारात्मक या नकारात्मक बनाता है।

नकारात्मक भावनाएं: समस्या की जड़

किताब का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘विकृत भावनाओं की पहचान’ है। मुनिश्री बताते हैं कि कैसे हमारे ‘शुद्ध भाव’ विकृत (खराब) होकर हमें नुकसान पहुंचाते हैं। जैसेकि-

  • प्रेम विकृत होकर आसक्ति (अधिकार और खोने का डर) में बदलता है।
  • आत्मसम्मान विकृत होकर अहंकार में बदलता है।
  • करुणा विकृत होकर ‘हीनता वाली दया’ में बदलती है।
  • सावधानी विकृत होकर भय और चिंता में बदलती है।
  • आत्मरक्षा विकृत होकर क्रोध और प्रतिशोध में बदलती है।
  • यह हिस्सा समझाता है कि समस्याएं बाहरी नहीं, भीतर की भावनात्मक विकृतियों से पैदा होती हैं।

भावना के चार स्तंभ: जीवन बदलने की प्रक्रिया

किताब में भावना योग को चार चरणों में समझाया गया है-

  • प्रार्थना– सकारात्मक शुरुआत।
  • प्रतिक्रमण– आत्म-विश्लेषण और शुद्धि।
  • प्रत्याख्यान– नकारात्मकता छोड़ने का संकल्प।
  • सामायिक– वर्तमान में जीना और साक्षी भाव।

ये चारों चरण आत्म-परिवर्तन की प्रक्रिया बनाते हैं। इन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जा सकता है।

प्रार्थना

जैन दर्शन में प्रार्थना का अर्थ केवल ईश्वर से कुछ मांगना नहीं, बल्कि भावनाओं के प्रति जागरूक होना और उन्हें स्वीकार करना है। जब व्यक्ति समझता है कि वह क्या महसूस कर रहा है तो समर्पण की भावना विकसित होती है। यह अहंकार को कम करके आत्म-जागरूकता बढ़ाती है और आंतरिक परिवर्तन की शुरुआत करती है।

प्रतिक्रमण

प्रतिक्रमण आत्म-विश्लेषण और भावनात्मक शुद्धि की प्रक्रिया है। इसमें व्यक्ति नकारात्मक भावनाओं (जैसे क्रोध, भय, ईर्ष्या या दोषबोध) को पहचानता है, कारण समझता है और उन्हें छोड़ने का प्रयास करता है। यह मानसिक बोझ हल्का करता है और सकारात्मकता के लिए जगह बनाता है।

प्रत्याख्यान

प्रत्याख्यान का मतलब है गलतियों और नकारात्मक पैटर्न को पहचानकर उन्हें दोहराने से बचने का संकल्प लेना। यह सोच तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाता है। इससे आत्म-अनुशासन मजबूत होता है और व्यक्ति बेहतर दिशा में बढ़ता है।

सामायिक

सामायिक वह अवस्था है, जहां व्यक्ति वर्तमान में स्थिर होकर साक्षी भाव से जीता है। इसमें न अतीत का बोझ होता है, न भविष्य की चिंता। मन शांत और संतुलित रहता है। यही समता की स्थिति है, जो भावना योग की अंतिम उपलब्धि मानी जाती है।

सेल्फ मैनेजमेंट कैसे करें?

यह किताब केवल भावनाओं की थ्योरी तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि भावनाएं रोजमर्रा की जिंदगी के हर हिस्से को कैसे प्रभावित करती हैं। लेखक सेल्फ मैनेजमेंट को पांच क्षेत्रों में बांटते हैं, जो जीवन को व्यवस्थित और संतुलित बनाने का आधार हैं।

  • विचार प्रबंधन

हमारे विचार ही दिशा तय करते हैं। किताब सिखाती है कि नकारात्मक और व्यर्थ सोच से हटकर सकारात्मक और समाधान-केंद्रित सोच कैसे विकसित की जाए।

  • भाव प्रबंधन

हर भावना को पहचानना और समझना जरूरी है। जब हम जान लेते हैं कि इस समय भीतर क्या चल रहा है, तब हम भावनाओं के गुलाम नहीं, बल्कि उनके संचालक बनते हैं।

  • वाणी प्रबंधन

शब्द केवल आवाज नहीं, भावनाओं के वाहक होते हैं। लेखक बताते हैं कि सोच-समझकर, संयमित और संवेदनशील बोलना रिश्तों को बेहतर बनाता है।

  • क्रिया प्रबंधन

हमारे कर्म भावनाओं से प्रेरित होते हैं। अगर भावनाएं संतुलित हैं, तो निर्णय और कार्य सही दिशा में जाते हैं।

  • ऊर्जा प्रबंधन

हमारी मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा सीमित होती है। किताब सिखाती है कि इसे व्यर्थ चिंता और नकारात्मकता में खर्च करने के बजाय सही जगह निवेश करना जीवन को प्रभावी बनाता है।

रिश्ते मजबूत बनाने के पांच स्वर्णिम सूत्र

किताब का एक प्रभावशाली पहलू है, रिश्तों को देखने का नजरिया। मुनिश्री कहते हैं कि रिश्ते केवल तर्क और लॉजिक से नहीं चलते, बल्कि भावनाओं की बुनियाद पर टिके होते हैं। इसे मजबूत करने के लिए पांच स्वर्णिम सूत्र दिए गए हैं।

  • संवाद: केवल बोलना नहीं, बल्कि दिल से सुनना और समझना ही सच्चा संवाद है।
  • आत्म-चिंतन: किसी भी प्रतिक्रिया से पहले अपने भीतर झांकना (मैं क्या और क्यों महसूस कर रहा हूं?) जरूरी है।
  • सह-अस्तित्व: हर व्यक्ति अलग है, उसे बदलने के बजाय स्वीकार करना ही संबंधों की खूबसूरती है।
  • क्षमा और नम्रता: अहंकार रिश्तों को तोड़ता है, जबकि क्षमा और विनम्रता उन्हें जोड़ती है।
  • सचेत प्रयास: रिश्तों में हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए।

यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए?

अगर आप भावनाओं को समझना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए है। कुछ लोगों के लिए यह सबक के तौर पर भी काम कर सकती है। इसे नीचे ग्राफिक से समझिए-

किताब के बारे में मेरी राय

किताब की भाषा थोड़ी कठिन जरूर है, लेकिन पढ़ने पर समझ आती है। इसमें केवल ज्ञान नहीं, अभ्यास पर जोर है। साथ ही आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न दिए गए हैं। जीवन के हर पहलू भावना, स्वास्थ्य और संबंध को कवर किया गया है।

……………

ये बुक रिव्यू भी पढ़िए

बुक-रिव्यू- एक दिन की सफलता के पीछे बरसों की मेहनत: रातोंरात कुछ नहीं होता, कैसे चलें कि थकें नहीं, हारें नहीं, निराशा न घेरे

हर कोई बेहतर जीवन चाहता है, जहां रिश्तों में मधुरता, काम में संतुलन और भीतर सुकून हो। लेकिन दौड़ती-भागती जिंदगी में यह संतुलन मिलना मुश्किल है। मशहूर लाइफ कोच और संत गौर गोपाल दास की किताब ‘जीवन के अद्भुत रहस्य’ यह संतुलन बनाना सिखाती है। पूरा रिव्यू पढ़िए…

खबरें और भी हैं…

  • बुक रिव्यू- मोसाड की रोमांचक कहानियां: इजराइल की खुफिया एजेंसी ने कैसे दिया दुनिया के खतरनाक मिशन को अंजाम, पढ़ें इस किताब में

    इजराइल की खुफिया एजेंसी ने कैसे दिया दुनिया के खतरनाक मिशन को अंजाम, पढ़ें इस किताब में|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:42

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू: ताकत बाहर नहीं, भीतर है: हर दिन एक नया मौका है, कुछ सीखने, जीतने, विनम्र होने का, अपने मन की शक्ति को अनलॉक करें

    हर दिन एक नया मौका है, कुछ सीखने, जीतने, विनम्र होने का, अपने मन की शक्ति को अनलॉक करें|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:31

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू- फीलिंग से हीलिंग तक: जो भी महसूस करते हैं, उसे दबाएं नहीं, समझें और सही दिशा दें, यही सिखाती है किताब ‘फील टू हील’

    जो भी महसूस करते हैं, उसे दबाएं नहीं, समझें और सही दिशा दें, यही सिखाती है किताब ‘फील टू हील’|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:49

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू- मंजिल तक पहुंचने का ‘फ्लाइट प्लान’: मुश्किलें तो आएंगी, लेकिन उनसे लड़ें कैसे, यही सीक्रेट बताती है ये किताब

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
चाय के साथ कुछ एक्स्ट्रा चाहिए? इस ट्रिक से नारियल के गरमा-गरम क्रिस्पी पकौड़े; हर कोई बोलेगा वाह!

July 17, 2026/
11:42 pm

पकोड़ा रेसिपी: बारिश का मौसम आते ही अक्सर कुछ न कुछ चटपटा खाने के लिए मन मचल जाता है। ऐसे...

प्रसून जोशी बने प्रसार भारती के नए अध्यक्ष:केंद्र सरकार ने की नियुक्ति, रचनात्मक दुनिया के दिग्गज को मिली बड़ी जिम्मेदारी

May 2, 2026/
7:57 pm

केंद्र सरकार ने प्रख्यात गीतकार, लेखक और संचार विशेषज्ञ प्रसून जोशी को प्रसार भारती का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।...

ask search icon

May 14, 2026/
6:35 am

Last Updated:May 14, 2026, 06:35 IST जंगली जलेबी स्वाद में खट्टी-मीठी होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद...

Delhi Poster: Rahul Gandhi Compared to Umar Khalid by BJP

February 26, 2026/
12:30 am

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक यह पोस्टर भाजपा के नेशनल स्पोक्सपर्सन आरपी सिंह ने लगवाया है। दिल्ली में एआई...

आमिर की पार्टी में सलमान नए लुक में दिखे:लगान के 25 साल होने के सेलिब्रेशन में करीना-रेखा समेत कई सेलेब्स पहुंचे

June 14, 2026/
9:28 am

आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ के 25 साल पूरे होने और ‘आमिर खान प्रोडक्शंस’ की 25वीं सालगिरह के मौके पर...

CBSE Revaluation Physics Marks Allegation

June 29, 2026/
1:17 pm

8 मिनट पहले कॉपी लिंक रविवार को CBSE बोर्ड और स्टूडेंट वेदांत श्रीवास्तव के बीच एक बार फिर सोशल मीडिया...

राजनीति

Book Review; Bhawna: Jeevan Ka GPS

Book Review; Bhawna: Jeevan Ka GPS

5 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

बुक का नाम: ‘भावना: जीवन का GPS’ (भावना योग के साथ अपनी राह खोजें)

लेखक: मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज

प्रकाशक: निर्ग्रन्थ फाउंडेशन

मूल्य: 150 रुपए

आज इंसान के पास तेज दिमाग, आधुनिक साधन और मनोरंजन के कई विकल्प हैं, फिर भी वह उलझा हुआ है। कारण है कि हमने बाहर की दुनिया संभालना सीख लिया है, लेकिन भावनाओं को समझना बाकी है।

जैन मुनि प्रमाणसागर जी की किताब ‘भावना: जीवन का GPS’ इस विषय पर प्रकाश डालती है। यह सिखाती है कि जीवन की असली दिशा बाहर नहीं, बल्कि भीतर तय होती है।

मुनिश्री बताते हैं कि अगर हम अपनी भावनाओं को समझना और कंट्रोल करना सीख लें, तो पर्सनल और प्रोफेशनल सक्सेस दूर नहीं है।

मुनिश्री बताते हैं कि-

‘’भावना चेतना की वह अदृश्य धारा है, जो हमारे जीवन को दिशा देती है। हम जो सोचते हैं, जो निर्णय लेते हैं और जो बनते हैं, उसके पीछे भावनाओं की ही भूमिका होती है।’’

किताब का उद्देश्य और महत्व

  • किताब का उद्देश्य व्यक्ति को उसकी ‘भावनाओं से परिचित कराना और उन्हें सही दिशा देना’ है।
  • किताब बताती है कि जीवन की ज्यादातर समस्याएं, ‘चाहे तनाव हो, रिश्तों की कड़वाहट हो या फैसले लेने में कठिनाई हो’, इनका मूल कारण अनियंत्रित भावनाएं हैं।
  • हमारे जीवन के ज्यादातर निर्णय तर्क से नहीं, भावनाओं से प्रेरित होते हैं।
  • जब हम भावनाओं को समझकर उन्हें शुद्ध और संतुलित करते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन होता है।
  • भावना योग की प्रक्रिया से यह किताब व्यक्ति को आत्म-चिंतन, आत्म-शुद्धि और सेल्फ-ग्रोथ की दिशा में आगे बढ़ाती है।

नीचे ग्राफिक में किताब के 8 जरूरी सबक देखिए-

किताब में भावनाओं को तीन स्तरों में समझाया गया है-

  • शारीरिक भावनाएं (भूख, थकान, भय)
  • मानसिक भावनाएं (ईर्ष्या, अपेक्षा, निराशा)
  • आध्यात्मिक भावनाएं (करुणा, शांति, क्षमा)

मुनिश्री बताते हैं कि भावनाएं न अच्छी होती हैं न बुरी। उनका दिशा-निर्देशन ही उन्हें सकारात्मक या नकारात्मक बनाता है।

नकारात्मक भावनाएं: समस्या की जड़

किताब का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘विकृत भावनाओं की पहचान’ है। मुनिश्री बताते हैं कि कैसे हमारे ‘शुद्ध भाव’ विकृत (खराब) होकर हमें नुकसान पहुंचाते हैं। जैसेकि-

  • प्रेम विकृत होकर आसक्ति (अधिकार और खोने का डर) में बदलता है।
  • आत्मसम्मान विकृत होकर अहंकार में बदलता है।
  • करुणा विकृत होकर ‘हीनता वाली दया’ में बदलती है।
  • सावधानी विकृत होकर भय और चिंता में बदलती है।
  • आत्मरक्षा विकृत होकर क्रोध और प्रतिशोध में बदलती है।
  • यह हिस्सा समझाता है कि समस्याएं बाहरी नहीं, भीतर की भावनात्मक विकृतियों से पैदा होती हैं।

भावना के चार स्तंभ: जीवन बदलने की प्रक्रिया

किताब में भावना योग को चार चरणों में समझाया गया है-

  • प्रार्थना– सकारात्मक शुरुआत।
  • प्रतिक्रमण– आत्म-विश्लेषण और शुद्धि।
  • प्रत्याख्यान– नकारात्मकता छोड़ने का संकल्प।
  • सामायिक– वर्तमान में जीना और साक्षी भाव।

ये चारों चरण आत्म-परिवर्तन की प्रक्रिया बनाते हैं। इन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जा सकता है।

प्रार्थना

जैन दर्शन में प्रार्थना का अर्थ केवल ईश्वर से कुछ मांगना नहीं, बल्कि भावनाओं के प्रति जागरूक होना और उन्हें स्वीकार करना है। जब व्यक्ति समझता है कि वह क्या महसूस कर रहा है तो समर्पण की भावना विकसित होती है। यह अहंकार को कम करके आत्म-जागरूकता बढ़ाती है और आंतरिक परिवर्तन की शुरुआत करती है।

प्रतिक्रमण

प्रतिक्रमण आत्म-विश्लेषण और भावनात्मक शुद्धि की प्रक्रिया है। इसमें व्यक्ति नकारात्मक भावनाओं (जैसे क्रोध, भय, ईर्ष्या या दोषबोध) को पहचानता है, कारण समझता है और उन्हें छोड़ने का प्रयास करता है। यह मानसिक बोझ हल्का करता है और सकारात्मकता के लिए जगह बनाता है।

प्रत्याख्यान

प्रत्याख्यान का मतलब है गलतियों और नकारात्मक पैटर्न को पहचानकर उन्हें दोहराने से बचने का संकल्प लेना। यह सोच तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाता है। इससे आत्म-अनुशासन मजबूत होता है और व्यक्ति बेहतर दिशा में बढ़ता है।

सामायिक

सामायिक वह अवस्था है, जहां व्यक्ति वर्तमान में स्थिर होकर साक्षी भाव से जीता है। इसमें न अतीत का बोझ होता है, न भविष्य की चिंता। मन शांत और संतुलित रहता है। यही समता की स्थिति है, जो भावना योग की अंतिम उपलब्धि मानी जाती है।

सेल्फ मैनेजमेंट कैसे करें?

यह किताब केवल भावनाओं की थ्योरी तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि भावनाएं रोजमर्रा की जिंदगी के हर हिस्से को कैसे प्रभावित करती हैं। लेखक सेल्फ मैनेजमेंट को पांच क्षेत्रों में बांटते हैं, जो जीवन को व्यवस्थित और संतुलित बनाने का आधार हैं।

  • विचार प्रबंधन

हमारे विचार ही दिशा तय करते हैं। किताब सिखाती है कि नकारात्मक और व्यर्थ सोच से हटकर सकारात्मक और समाधान-केंद्रित सोच कैसे विकसित की जाए।

  • भाव प्रबंधन

हर भावना को पहचानना और समझना जरूरी है। जब हम जान लेते हैं कि इस समय भीतर क्या चल रहा है, तब हम भावनाओं के गुलाम नहीं, बल्कि उनके संचालक बनते हैं।

  • वाणी प्रबंधन

शब्द केवल आवाज नहीं, भावनाओं के वाहक होते हैं। लेखक बताते हैं कि सोच-समझकर, संयमित और संवेदनशील बोलना रिश्तों को बेहतर बनाता है।

  • क्रिया प्रबंधन

हमारे कर्म भावनाओं से प्रेरित होते हैं। अगर भावनाएं संतुलित हैं, तो निर्णय और कार्य सही दिशा में जाते हैं।

  • ऊर्जा प्रबंधन

हमारी मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा सीमित होती है। किताब सिखाती है कि इसे व्यर्थ चिंता और नकारात्मकता में खर्च करने के बजाय सही जगह निवेश करना जीवन को प्रभावी बनाता है।

रिश्ते मजबूत बनाने के पांच स्वर्णिम सूत्र

किताब का एक प्रभावशाली पहलू है, रिश्तों को देखने का नजरिया। मुनिश्री कहते हैं कि रिश्ते केवल तर्क और लॉजिक से नहीं चलते, बल्कि भावनाओं की बुनियाद पर टिके होते हैं। इसे मजबूत करने के लिए पांच स्वर्णिम सूत्र दिए गए हैं।

  • संवाद: केवल बोलना नहीं, बल्कि दिल से सुनना और समझना ही सच्चा संवाद है।
  • आत्म-चिंतन: किसी भी प्रतिक्रिया से पहले अपने भीतर झांकना (मैं क्या और क्यों महसूस कर रहा हूं?) जरूरी है।
  • सह-अस्तित्व: हर व्यक्ति अलग है, उसे बदलने के बजाय स्वीकार करना ही संबंधों की खूबसूरती है।
  • क्षमा और नम्रता: अहंकार रिश्तों को तोड़ता है, जबकि क्षमा और विनम्रता उन्हें जोड़ती है।
  • सचेत प्रयास: रिश्तों में हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए।

यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए?

अगर आप भावनाओं को समझना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए है। कुछ लोगों के लिए यह सबक के तौर पर भी काम कर सकती है। इसे नीचे ग्राफिक से समझिए-

किताब के बारे में मेरी राय

किताब की भाषा थोड़ी कठिन जरूर है, लेकिन पढ़ने पर समझ आती है। इसमें केवल ज्ञान नहीं, अभ्यास पर जोर है। साथ ही आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न दिए गए हैं। जीवन के हर पहलू भावना, स्वास्थ्य और संबंध को कवर किया गया है।

……………

ये बुक रिव्यू भी पढ़िए

बुक-रिव्यू- एक दिन की सफलता के पीछे बरसों की मेहनत: रातोंरात कुछ नहीं होता, कैसे चलें कि थकें नहीं, हारें नहीं, निराशा न घेरे

हर कोई बेहतर जीवन चाहता है, जहां रिश्तों में मधुरता, काम में संतुलन और भीतर सुकून हो। लेकिन दौड़ती-भागती जिंदगी में यह संतुलन मिलना मुश्किल है। मशहूर लाइफ कोच और संत गौर गोपाल दास की किताब ‘जीवन के अद्भुत रहस्य’ यह संतुलन बनाना सिखाती है। पूरा रिव्यू पढ़िए…

खबरें और भी हैं…

  • बुक रिव्यू- मोसाड की रोमांचक कहानियां: इजराइल की खुफिया एजेंसी ने कैसे दिया दुनिया के खतरनाक मिशन को अंजाम, पढ़ें इस किताब में

    इजराइल की खुफिया एजेंसी ने कैसे दिया दुनिया के खतरनाक मिशन को अंजाम, पढ़ें इस किताब में|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:42

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू: ताकत बाहर नहीं, भीतर है: हर दिन एक नया मौका है, कुछ सीखने, जीतने, विनम्र होने का, अपने मन की शक्ति को अनलॉक करें

    हर दिन एक नया मौका है, कुछ सीखने, जीतने, विनम्र होने का, अपने मन की शक्ति को अनलॉक करें|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:31

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू- फीलिंग से हीलिंग तक: जो भी महसूस करते हैं, उसे दबाएं नहीं, समझें और सही दिशा दें, यही सिखाती है किताब ‘फील टू हील’

    जो भी महसूस करते हैं, उसे दबाएं नहीं, समझें और सही दिशा दें, यही सिखाती है किताब ‘फील टू हील’|लाइफस्टाइल,Lifestyle - Dainik Bhaskar1:49

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बुक रिव्यू- मंजिल तक पहुंचने का ‘फ्लाइट प्लान’: मुश्किलें तो आएंगी, लेकिन उनसे लड़ें कैसे, यही सीक्रेट बताती है ये किताब

    Play video

    • कॉपी लिंक

    शेयर

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.