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BPCL Warns Fuel Prices May Rise Amid Energy Crisis

BPCL Warns Fuel Prices May Rise Amid Energy Crisis

नई दिल्ली5 मिनट पहले

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तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम के डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने कहा है कि अगर वैश्विक ऊर्जा संकट इसी तरह जारी रहा, तो देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक और बढ़ोतरी तय है।

भारत में 9 दिन में तीन बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। कल 23 मई को 19 मई को दामों में एवरेज 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले 15 मई दाम ₹3 बढ़े थे।

अमेरिका-ईरान जंग की वजह से कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इससे निपटने के लिए नीति निर्माताओं के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं। दुबे के मुताबिक, इस संकट से निपटने के लिए सरकार और तेल कंपनियों के सामने अभी मुख्य रूप से तीन रास्ते खुले हैं:

  • पहला विकल्प-पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों को बढ़ा दिया जाए।
  • दूसरा विकल्प- तेल कंपनियां खुद इस नुकसान को उठाएं और घाटे को बढ़ने दें।
  • तीसरा विकल्प- सरकार फाइनेंसिंग के जरिए तेल कंपनियों को फंड मुहैया कराए।

अमेरिका-ईरान जंग से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा

दुबे ने बताया कि शुरुआत में वैश्विक स्तर पर कीमतों में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी को अस्थायी माना जा रहा था। लेकिन अब जिस तरह से स्थितियां बदल रही हैं, उसे देखकर लगता है कि यह संकट आगे भी जारी रहने वाला है।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। इस इंफ्रास्ट्रक्चर की तबाही को ठीक करने में ही अभी बहुत लंबा समय लगने वाला है। मौजूदा हालात को देखते हुए अगर यही स्थिति बनी रही, तो ईंधन के दामों में एक और बढ़ोतरी होना बिल्कुल तय है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कीमतों में कुल कितनी बढ़ोतरी की जाएगी।

भारत में रूस और अफ्रीका से आ रहा तेल

दुबे ने कहा कि भारत ने अपनी तेल सप्लाई के स्रोतों में बदलाव किया है। अब रूसी तेल, अफ्रीका और कई अन्य जगहों से डाइवर्सिफिकेशन के जरिए तेल आ रहा है। बीपीसीएल और अन्य भारतीय ऊर्जा कंपनियों ने अपनी सोर्सिंग का काफी विस्तार किया है। पहले जहां भारत के पास केवल 20 सप्लाई पॉइंट्स थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है।

28 फरवरी को शुरू हुई थी जंग, अप्रैल में सीजफायर हुआ था

मिडिल ईस्ट में यह विवाद तब बढ़ा था, जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़े हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद अप्रैल की शुरुआत में दोनों देश युद्धविराम के लिए राजी हुए और तब से पर्दे के पीछे से शांति समझौते की बातचीत चल रही है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल के दाम बढ़े

जंग की वजह से ईरान ने हॉर्मुज बंद कर दिया था। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए लाइफलाइन की तरह है। वैश्विक स्तर पर कुल तेल सप्लाई का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

जब जंग शुरू हुई थी तो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब चल रहा था। मार्च तक दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। फिर सीजफायर के ऐलान के बाद दामों में उतार-चढ़ाव रहा और ये 100 डॉलर से नीचे आ गए। अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 103 डॉलर के करीब है।

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भारत में 9 दिन में तीन बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। कल 23 मई को 19 मई को दामों में एवरेज 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले 15 मई दाम ₹3 बढ़े थे।

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  • पहला विकल्प-पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों को बढ़ा दिया जाए।
  • दूसरा विकल्प- तेल कंपनियां खुद इस नुकसान को उठाएं और घाटे को बढ़ने दें।
  • तीसरा विकल्प- सरकार फाइनेंसिंग के जरिए तेल कंपनियों को फंड मुहैया कराए।

अमेरिका-ईरान जंग से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा

दुबे ने बताया कि शुरुआत में वैश्विक स्तर पर कीमतों में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी को अस्थायी माना जा रहा था। लेकिन अब जिस तरह से स्थितियां बदल रही हैं, उसे देखकर लगता है कि यह संकट आगे भी जारी रहने वाला है।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। इस इंफ्रास्ट्रक्चर की तबाही को ठीक करने में ही अभी बहुत लंबा समय लगने वाला है। मौजूदा हालात को देखते हुए अगर यही स्थिति बनी रही, तो ईंधन के दामों में एक और बढ़ोतरी होना बिल्कुल तय है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कीमतों में कुल कितनी बढ़ोतरी की जाएगी।

भारत में रूस और अफ्रीका से आ रहा तेल

दुबे ने कहा कि भारत ने अपनी तेल सप्लाई के स्रोतों में बदलाव किया है। अब रूसी तेल, अफ्रीका और कई अन्य जगहों से डाइवर्सिफिकेशन के जरिए तेल आ रहा है। बीपीसीएल और अन्य भारतीय ऊर्जा कंपनियों ने अपनी सोर्सिंग का काफी विस्तार किया है। पहले जहां भारत के पास केवल 20 सप्लाई पॉइंट्स थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है।

28 फरवरी को शुरू हुई थी जंग, अप्रैल में सीजफायर हुआ था

मिडिल ईस्ट में यह विवाद तब बढ़ा था, जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़े हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद अप्रैल की शुरुआत में दोनों देश युद्धविराम के लिए राजी हुए और तब से पर्दे के पीछे से शांति समझौते की बातचीत चल रही है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल के दाम बढ़े

जंग की वजह से ईरान ने हॉर्मुज बंद कर दिया था। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए लाइफलाइन की तरह है। वैश्विक स्तर पर कुल तेल सप्लाई का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

जब जंग शुरू हुई थी तो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब चल रहा था। मार्च तक दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। फिर सीजफायर के ऐलान के बाद दामों में उतार-चढ़ाव रहा और ये 100 डॉलर से नीचे आ गए। अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 103 डॉलर के करीब है।

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