Tuesday, 07 Apr 2026 | 03:54 PM

Trending :

लंबी उम्र के ‘जेनेटिक ब्लूप्रिंट’ पर काम:लॉन्जिविटी इंडिया बना रहा है भारतीयों के लिए सेहत का ‘स्वदेशी पैमाना’ गुड़ शरबत रेसिपी: लू और थकान को कहें बाय-बाय, सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें यह देसी एनर्जी ड्रिंक दमोह में कुत्तों ने किया हिरण पर हमला:फुटेरा तालाब पर पानी पीने आया था, बचने के लिए तालाब में लगाई छलांग अवॉर्ड शो में राजपाल का अपमान; सपोर्ट में आए सलमान:कहा- दिल से काम करो, डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है अमेरिका में हरियाणा के गैंगस्टर की हत्या का दावा:लॉरेंस गैंग ने लिखा- धरती में दफनाया; पंजाब में ग्रेनेड सप्लाई में नाम आ चुका दिव्यांग को 14 साल से नहीं मिला मुआवजा:6.34 लाख का भुगतान अटका, कलेक्टर ने दिए निर्देश
EXCLUSIVE
कनाडा में गुरुद्वारे साहिब में हिंसक झड़प:खालिस्तान समर्थकों ने बुजुर्ग कमेटी के कार्यक्रम में किया हंगामा; 7 साल से कब्जा करने का आरोप

कनाडा में गुरुद्वारे साहिब में हिंसक झड़प:खालिस्तान समर्थकों ने बुजुर्ग कमेटी के कार्यक्रम में किया हंगामा; 7 साल से कब्जा करने का आरोप

कनाडा के सरे शहर के गुरु नानक सिख गुरुद्वारे में कमेटी कंट्रोल को लेकर हिंसक झड़प हो गई। खालिस्तानी गुट ने बुजुर्गों द्वारा चलाई जा रही सोसायटी पर कब्जा करने की कोशिश की। जिससे धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें गुरुद्वारे के हॉल में भीड़ और हिंसा दिख रही है। यह वीडियो 30 मार्च का बताया जा रहा है। दरअसल 30 मार्च को गुरुद्वारे में बुजुर्ग कमेटी के सदस्यों के बीच बैठक चल रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने बैनर लगाकर कमेटी पर कब्जा करने की कोशिश की। संगत ने इसका विरोध किया तो माहौल बिगड़ गया। लोग धक्का-मुक्की करने लगे और बात हाथापाई तक पहुंच गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को अलग किया। पुलिस के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। यह गुरुद्वारा खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर से जुड़ा माना जाता है, जिसकी 2023 में यहीं की पार्किंग में हत्या हो गई थी। उसके बाद से यहां कमिटी कंट्रोल को लेकर तनाव बना हुआ है। गुरुद्वारा साहिब के कंट्रोल को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं। खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। इस वजह से सरे में रहने वाले सिख खालिस्तान समर्थकों का विरोध करने लगे हैं। 88 सेकंड के वायरल वीडियो में क्या हो रहा है, सिलसिलेवार जानिए… दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे एक पक्ष का कहना है कि 7 साल से निज्जर समर्थक गुट गुरुद्वारे पर कब्जा किए हुए है। बुजुर्गों की पुरानी कमेटी को हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे खालिस्तान समर्गुथकों के गुट की साजिश बताया है। दूसरी ओर, गुरुद्वारे के कुछ समर्थक और वैंकूवर सरे टाइम्स जैसे अकाउंट्स ने इसे सुनयोजित घटना करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि पेड इंडियन गुंडों ने गुरुद्वारे में घुसकर हिंसा फैलाई। सोशल मीडिया पोस्ट में इसे विदेशी दखलंदाजी बतायाऔर कहा कि यह सिख संस्थानों की संप्रभुता पर हमला है। सोशल मीडिया पर हो रही वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर गुरुद्वारा साहिब के अंदर हो रही लड़ाई का वीडियो वायरल हो रहा है। दोनों गुटों के समर्थक अपने अपने हिसाब से इस वीडियो को वायरल कर रहे हैं। बुजुर्ग कमेटी वाले खालिस्तान समर्थकों पर गुरुद्वारा साहिब पर कब्जा करने के आरोप लगा रहे हैं जबकि खालिस्तान समर्थक बुजुर्ग कमेटी के सदस्यों को भारत का एजेंट बता रहे हैं।

Read More »
US-Israel vs Iran Conflict Live Updates Trump Addresses Netanyahu

US-Israel vs Iran Conflict Live Updates Trump Addresses Netanyahu

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी34 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गुरुवार सुबह भारतीय समय के अनुसार 6:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। ट्रम्प इस दौरान ईरान युद्ध को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प इस संबोधन में यह दावा कर सकते हैं कि अमेरिका इस जंग में जीत की स्थिति में है। वे पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अमेरिका ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है। ऐसे में संभावना है कि वे औपचारिक तौर पर जीत का ऐलान करें या फिर युद्ध खत्म करने की कोई समय-सीमा (डेडलाइन) भी बता दें। इसी के साथ ही ट्रम्प NATO को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। उन्होंने कल ही NATO को “कागजी शेर” बताया था और कहा था कि वे NATO छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ईरान पर हमले तेज कर सकता है अमेरिका रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प के संबोधन से पहले अमेरिका ईरान पर कुछ बड़े हमले कर सकता है और उसके बाद ट्रम्प युद्ध खत्म करने का रोडमैप पेश कर सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी उनका रुख साफ हो सकता है। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस समुद्री रास्ते को खुलवाने की जिम्मेदारी अमेरिका नहीं लेगा। उनका कहना है कि जिन देशों को इस रास्ते की जरूरत है, उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी होगी। इसके अलावा ईरान से जुड़े देशों पर नए प्रतिबंध लगाने का भी ऐलान किया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान ने सीजफायर की अपील की ट्रम्प ने कल दावा किया है कि ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है। उन्होंने कहा कि ईरान की नई लीडरशिप पहले से कम कट्टर और ज्यादा समझदार है। हालांकि ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका अभी सीजफायर नहीं करेगा। उनका कहना है कि जब तक होर्मुज पूरी तरह सुरक्षित और खुला नहीं हो जाता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, ईरान के एक सीनियर अफसर ने कहा कि ट्रम्प के भाषण को लेकर कहा कि उस पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। CNN से बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि ट्रम्प बहुत अस्थिर और अजीब इंसान हैं। उनके बयान को बहुत महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। ट्रम्प बोले- ईरान से किसी डील की जरूरत नहीं ट्रम्प ने कल यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते (डील) की जरूरत नहीं है। अमेरिका यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में खत्म कर सकता है। उन्होंने कहा था- ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि वे इतने कमजोर हो गए हैं कि कई सालों तक परमाणु हथियार नहीं बना सकते, तब हम वहां से निकल जाएंगे। डील हो या न हो, अब यह जरूरी नहीं है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास जो यूरेनियम बचा है, उससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह जमीन के अंदर है और आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अमेरिका पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा चुका है। फ्रांस बोला- NATO का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना NATO के कई देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रम्प नाराज हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई उसके साथ नहीं आया। वहीं फ्रांस की मंत्री एलिस रूफो ने साफ किया है कि NATO का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना है और होर्मुज में सैन्य कार्रवाई करना उसके दायरे में नहीं आता। ब्रिटेन इस हफ्ते 35 देशों की एक बड़ी बैठक आयोजित करने जा रहा है। इस बैठक का मकसद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के रास्ते तलाशना है। इसमें दुनिया के कई बड़े देश शामिल होंगे और संभावना है कि भारत भी इसमें भाग ले सकता है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतें इस क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं। ———- यह खबर भी पढ़ें… ईरान ने बहरीन में अमेजन ऑफिस पर हमला किया:माइक्रोसॉफ्ट-एपल, गूगल भी निशाने पर; ट्रम्प बोले- ईरान से डील की कोई जरूरत नहीं ईरान ने बहरीन में आज अमेरिकी कंपनी अमेजन वेब सर्विस के एक डेटा सेंटर पर हमला किया। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, हमले के बाद उस जगह पर आग लग गई। इससे पहले बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी बताया था कि एक कंपनी की इमारत में आग लगी है, जिसे फायर ब्रिगेड की टीम बुझा रही थी। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Read More »
US-Israel vs Iran Conflict Live Updates Trump Addresses Netanyahu

US-Israel vs Iran Conflict Live Updates Trump Addresses Netanyahu

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी2 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गुरुवार सुबह भारतीय समय के अनुसार 6:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। ट्रम्प इस दौरान ईरान युद्ध को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प इस संबोधन में यह दावा कर सकते हैं कि अमेरिका इस जंग में जीत की स्थिति में है। वे पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अमेरिका ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है। ऐसे में संभावना है कि वे औपचारिक तौर पर जीत का ऐलान करें या फिर युद्ध खत्म करने की कोई समय-सीमा (डेडलाइन) भी बता दें। इसी के साथ ही ट्रम्प NATO को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। उन्होंने कल ही NATO को “कागजी शेर” बताया था और कहा था कि वे NATO छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ईरान पर हमले तेज कर सकता है अमेरिका रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प के संबोधन से पहले अमेरिका ईरान पर कुछ बड़े हमले कर सकता है और उसके बाद ट्रम्प युद्ध खत्म करने का रोडमैप पेश कर सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी उनका रुख साफ हो सकता है। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस समुद्री रास्ते को खुलवाने की जिम्मेदारी अमेरिका नहीं लेगा। उनका कहना है कि जिन देशों को इस रास्ते की जरूरत है, उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी होगी। इसके अलावा ईरान से जुड़े देशों पर नए प्रतिबंध लगाने का भी ऐलान किया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान ने सीजफायर की अपील की ट्रम्प ने कल दावा किया है कि ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है। उन्होंने कहा कि ईरान की नई लीडरशिप पहले से कम कट्टर और ज्यादा समझदार है। हालांकि ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका अभी सीजफायर नहीं करेगा। उनका कहना है कि जब तक होर्मुज पूरी तरह सुरक्षित और खुला नहीं हो जाता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, ईरान के एक सीनियर अफसर ने कहा कि ट्रम्प के भाषण को लेकर कहा कि उस पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। CNN से बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि ट्रम्प बहुत अस्थिर और अजीब इंसान हैं। उनके बयान को बहुत महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। लाइव अपडेट्स 2 मिनट पहले कॉपी लिंक ट्रम्प बोले- ईरान से किसी डील की जरूरत नहीं ट्रम्प ने कल यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते (डील) की जरूरत नहीं है। अमेरिका यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में खत्म कर सकता है। उन्होंने कहा था- ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि वे इतने कमजोर हो गए हैं कि कई सालों तक परमाणु हथियार नहीं बना सकते, तब हम वहां से निकल जाएंगे। डील हो या न हो, अब यह जरूरी नहीं है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास जो यूरेनियम बचा है, उससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह जमीन के अंदर है और आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अमेरिका पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा चुका है। 3 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रांस बोला- NATO का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना NATO के कई देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रम्प नाराज हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई उसके साथ नहीं आया। वहीं फ्रांस की मंत्री एलिस रूफो ने साफ किया है कि NATO का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना है और होर्मुज में सैन्य कार्रवाई करना उसके दायरे में नहीं आता। ब्रिटेन इस हफ्ते 35 देशों की एक बड़ी बैठक आयोजित करने जा रहा है। इस बैठक का मकसद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के रास्ते तलाशना है। इसमें दुनिया के कई बड़े देश शामिल होंगे और संभावना है कि भारत भी इसमें भाग ले सकता है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतें इस क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं। 5 मिनट पहले कॉपी लिंक यह खबर भी पढ़ें… ईरान ने बहरीन में अमेजन ऑफिस पर हमला किया:माइक्रोसॉफ्ट-एपल, गूगल भी निशाने पर; ट्रम्प बोले- ईरान से डील की कोई जरूरत नहीं ईरान ने बहरीन में आज अमेरिकी कंपनी अमेजन वेब सर्विस के एक डेटा सेंटर पर हमला किया। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, हमले के बाद उस जगह पर आग लग गई। इससे पहले बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी बताया था कि एक कंपनी की इमारत में आग लगी है, जिसे फायर ब्रिगेड की टीम बुझा रही थी। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Read More »
Artemis-II Mission Launch Today | NASA Moon Orbit

Artemis-II Mission Launch Today | NASA Moon Orbit

वॉशिंगटन9 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आज 2 अप्रैल को ‘आर्टेमिस-2’ मिशन लॉन्च किया। सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग हुई। साल 1972 में ‘अपोलो-17’ के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री स्पेसक्राफ्ट से चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर धरती पर लौटेंगे। यह मिशन 10 दिन का है। मिशन लॉन्च की 5 तस्वीरें… बैटरी और सेफ्टी सिस्टम में आखिरी समय में किए गए कुछ सुधारों के बाद आर्टेमिस-2 मिशन की लॉन्चिंग कामयाब रही। सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ। फ्लोरिडा के टाइटसविले में नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से यह लॉन्चिंग हुई। इसे देखने के लिए जुटे लोग। जैसे ही यह ऐतिहासिक नजारा सामने आया, वहां मौजूद भीड़ खुशी से झूम उठी। लोगों के चेहरों पर जीत की मुस्कान और इस अद्भुत पल को देखने की हैरानी साफ झलक रही थी। लॉन्चिंग से पहले नासा के केनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च पैड पर खड़ा ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS)। ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ में खराबी आ गई थी टेक-ऑफ से ठीक एक घंटा पहले ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ में कुछ ऐसी दिक्कतें आईं, जिनसे लॉन्चिंग पर खतरा मंडराने लगा था। यह रॉकेट का वो ‘इमरजेंसी एग्जिट’ है, जो खराबी आने पर एस्ट्रोनॉट्स वाले हिस्से को तुरंत रॉकेट से अलग कर देता है। हालांकि इंजीनियरों ने इस समस्या को तेजी से सुलझा लिया। फिर सेफ्टी चेक के लिए काउंटडाउन घड़ी को 10 मिनट पर रोक दिया गया। इसके बाद रॉकेट के अलग-अलग जरूरी सिस्टम्स की जिम्मेदारी संभाल रहे इंजीनियरों की ‘ओके’ रिपोर्ट आई। फिर क्रू को संदेश मिला- “आर्टेमिस II, मैं लॉन्च डायरेक्टर बोल रहा हूं, आप उड़ान के लिए तैयार हैं।” कमांडर रीड वाइजमैन ने जवाब दिया, “हम पूरी मानवता की खातिर जा रहे हैं।” इसके तुरंत बाद चार RS-25 इंजन और दो रॉकेट बूस्टर चालू हुए और एस्ट्रोनॉट रवाना हो गए। तकनीकी दिक्कत: सिग्नल में आई रुकावट कॉम्प्युकेशन इश्यू: उड़ान के करीब 51 मिनट बाद जब सैटेलाइट्स का हैंडओवर हो रहा था, तब ओरियन कैप्सूल का संपर्क कुछ देर के लिए टूट गया था। एकतरफा संपर्क: नासा के चीफ जेरेड इसाकमैन ने बताया कि मिशन कंट्रोल की आवाज तो क्रू को सुनाई दे रही थी, लेकिन क्रू का जवाब नीचे नहीं पहुंच पा रहा था। हालांकि, अब इस समस्या को सुलझा लिया गया है और सिस्टम सही काम कर रहा है। टॉयलेट खराब: लॉन्च के कुछ ही देर बाद ओरियन कैप्सूल का इकलौता टॉयलेट खराब हो गया था। एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना कोच ने मिशन कंट्रोल की मदद से इसे ठीक कर दिया। बिना टॉयलेट के यह 10 दिन का सफर काटना बहुत मुश्किल हो जाता। वीडियो के इस स्क्रीनशॉट में ओरियन स्पेसक्राफ्ट को केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होने के बाद अपने मिशन की शुरुआत करते हुए देखा जा सकता है। टेस्ट ड्राइव: पहली बार मैनुअल कंट्रोल टेस्ट ड्राइव: पायलट विक्टर ग्लोवर ने करीब एक घंटे तक ओरियन कैप्सूल की ‘टेस्ट ड्राइव’ की। यह पहली बार था जब किसी ने इस कैप्सूल को मैनुअली कंट्रोल किया। भावुक पल: जब रॉकेट का ऊपरी हिस्सा ओझल हो रहा था, तब ग्लोवर ने कहा, “ओह, उसे देखो – वाह!” उन्होंने मिशन कंट्रोल को “ग्रेट फ्लाइंग विद यू ह्यूस्टन” कहकर धन्यवाद दिया। मिशन के अगले पड़ाव: अब आराम की बारी एस्ट्रोनॉट्स का ब्रेक: लॉन्चिंग के बाद अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने ऑरेंज सूट उतारकर आरामदायक कपड़े पहन लिए हैं। अब वे कुछ घंटों की नींद (झपकी) लेंगे। अगला मिशन: कुछ घंटों बाद उन्हें फिर जागना होगा। ‘ओरियन कैप्सूल’ का इंजन फिर से स्टार्ट किया जाएगा, ताकि उसकी कक्षा को और ऊपर ले जाया जा सके। मेडिकल चेकअप: हर दिन ग्राउंड कंट्रोलर्स के साथ एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें एस्ट्रोनॉट्स अपनी सेहत और किसी भी शारीरिक परेशानी की जानकारी साझा करेंगे। मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता है नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है। नासा देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। 10 दिन में सफर: अगले 10 दिनों में आर्टेमिस II का क्रू आने-जाने में करीब 6,85,000 मील (लगभग 11 लाख Km) की दूरी तय करेगा। सबसे यादगार पल: जब स्पेसक्राफ्ट चांद के दूसरी तरफ अधिकतम दूरी पर होगा। वहां से चांद की ऐसी तस्वीरें आएगी जो पहले कभी नहीं देखी गईं। 4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है। 1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) मिशन कमांडर हैं। 2014 में स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं। 2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई ‘अर्थराइज’ फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी। 3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले गए हैं। 4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले गए हैं। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है। लॉन्च पैड की ओर बढ़ते अंतरिक्ष यात्री (बाएं से दाएं) जेरेमी हैनसन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और रीड वाइजमैन; केनेडी स्पेस सेंटर में

Read More »
Artemis-II Mission Launch Today | NASA Moon Orbit

Artemis-II Mission Launch Today | NASA Moon Orbit

वॉशिंगटन2 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा आज 2 अप्रैल को ‘आर्टेमिस-2’ मिशन लॉन्च करेगा। सुबह 3:54 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग होगी। साल 1972 में ‘अपोलो-17’ के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री इस मिशन में चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर वापस धरती पर लौटेंगे। ये मिशन करीब 10 दिनों का होगा। ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा। मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता है नासा मिशन का मकसद ओरियन स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है। नासा यह देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने के रास्ते को आसान बनाएगा। 4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है। 1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) इस मिशन के लिए कमांडर हैं। 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं। 2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई ‘अर्थराइज’ फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी। 3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले जाएंगे। 4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट के तौर पर चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले जाएंगे। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है। लॉन्च पैड की ओर बढ़ते अंतरिक्ष यात्री (बाएं से दाएं) जेरेमी हैनसन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और रीड वाइजमैन; केनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च डे रिहर्सल के दौरान की तस्वीर। अगला कदम: चांद की सतह पर उतरने की तैयारी आर्टेमिस-II के बाद नासा ‘आर्टेमिस-III’ मिशन पर काम करेगा। उसमें डॉकिंग सिस्टम की टेस्टिंग होगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो साल 2028 में आर्टेमिस-IV के जरिए इंसान एक बार फिर चांद पर कदम रखेगा। इससे पहले 2022 में मानवरहित आर्टेमिस-1 भेजा गया था। अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। लेकिन आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। साल 1969 में चंद्रमा की सतह पर अमेरिकी झंडे के पास खड़े अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन। यूट्यूब और नासा की वेबसाइट पर 24/7 कवरेज दुनियाभर के लोग इस ऐतिहासिक पल को घर बैठे देख सकते हैं। नासा अपने यूट्यूब चैनल और ‘NASA+’ प्लेटफॉर्म पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग करेगा। ओरियन स्पेसक्राफ्ट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद वहां से लाइव व्यूज भी शेयर किए जाएंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Read More »
IRGC vs President Pezeshkian Control Crisis

IRGC vs President Pezeshkian Control Crisis

तेहरान2 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान में सरकार और धार्मिक सेना (IRGC) के बीच टकराव बढ़ने की खबर है। तेहरान टाइम्स रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ताकतवर सेना जैसी संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। अखबार के मुताबिक IRGC ने देश का कंट्रोल अब अपने हाथ में ले लिया है। दावा यह भी है कि राष्ट्रपति पजशकियान की मुलाकात सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से नहीं हो पा रही है। दरअसल इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। ट्रम्प के मुताबिक, उनकी टीम कुछ ‘समझदार’ ईरानी नेताओं के संपर्क में है और बातचीत के जरिए हालात को शांत करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा कि किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं चल रही है। ट्रम्प का दावा खारिज होने के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर ईरान में असली कंट्रोल किसके पास है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान। (फाइल फोटो) राष्ट्रपति के फैसलों में दखल दे रही IRCG रिपोर्ट के मुताबिक पजशकियान कोई बड़ा फैसला नहीं ले पा रहे हैं। IRGC जिसका काम अमेरिका के हमलों का जवाब देना था, अब सरकार की अहम फैसले भी ले रहा है। अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पजशकियान ने 26 मार्च को नया खुफिया मंत्री नियुक्त करने की कोशिश की थी। वे हुसैन देहगान को यह पद देना चाहते थे, लेकिन IRGC चीफ अहमद वहीदी ने इसे रोक दिया। वहीदी ने यह पद तब संभाला था, जब युद्ध की शुरुआत में पिछले कमांडर मोहम्मद पाकपुर मारे गए थे। वहीदी का कहना है कि युद्ध की स्थिति में सभी अहम और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति IRGC ही करेगा और वही उन्हें संभालेगा। आमतौर पर ईरान की व्यवस्था में राष्ट्रपति खुफिया मंत्री का नाम तभी तय करते हैं, जब सुप्रीम लीडर की मंजूरी मिल जाती है, क्योंकि सुरक्षा से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार उन्हीं के पास होता है। ईरान की धार्मिक सेना IRGC के चीफ अहमद वहीदी। (फाइल फोटो) IRGC सिस्टम पर पकड़ मजबूत कर रहा अखबार लिखता है कि ईरान में सुप्रीम लीडर कौन है, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। 28 फरवरी को जब जंग शुरू हुई उसी दिन अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े नेता मारे गए थे। कुछ दिनों बाद खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता बनाया गया, लेकिन तब से वे न तो सामने आए हैं और न ही सीधे कोई बयान दिया है। उनके संदेश सिर्फ टीवी पर पढ़कर सुनाए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अब IRGC के बड़े अधिकारियों की एक ‘मिलिट्री काउंसिल’ रोज के फैसले ले रही है। इतना ही नहीं, IRGC ने मुजतबा के चारों तरफ कड़ी सुरक्षा लगा दी है। यहां तक कि देश की स्थिति से जुड़े सरकारी रिपोर्ट भी उन तक नहीं पहुंचने दी जा रही हैं। अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति पजशकियान और खामेनेई के बीच हाल के दिनों में कोई संपर्क नहीं हुआ है। पजशकियान ने कई बार सुप्रीम लीडर से मिलने की कोशिश की, लेकिन IRGC ने उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया। राष्ट्रपति और IRGC के बीच मतभेद पहले से ही सामने आने लगे थे। पजशकियान इस बात से नाराज थे कि IRGC पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर तनाव बढ़ा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक बुरा असर पड़ेगा। पहले से ही कई हफ्तों के युद्ध के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है और गोला-बारूद भी कम होता जा रहा है। होर्मुज पर भी IRGC का कंट्रोल ईरान में सत्ता का खालीपन पैदा हो गया है यही वजह है कि अब IRGC, जो नियमित सेना से अलग काम करता है, देश की कमान संभालता हुआ दिख रहा है। IRGC की शुरुआत 1979 की क्रांति के बाद एक अर्धसैनिक बल के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ यह बहुत ताकतवर बन गया। आज यह तेल, ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे बड़े सेक्टर में भी काम करता है और अपनी कमाई से खुद को मजबूत बनाता है। अब होर्मुज जैसे अहम तेल मार्ग का नियंत्रण भी IRGC के पास है, जिसे ईरान ने प्रभावी रूप से बंद कर रखा है। मुजतबा खामेनेई कहां हैं, यह भी साफ नहीं है। इसी वजह से IRGC ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। कुछ लोगों का कहना है कि मुजतबा की मौत हो चुकी है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे शायद कोमा में हैं। ट्रम्प ने भी इशारा किया है कि उनकी हालत गंभीर हो सकती है, जबकि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि उनका चेहरा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Read More »
बगदाद में बीच सड़क से अमेरिकी पत्रकार का अपहरण:जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए, अमेरिकी दूतावास ने इराक न जाने की सलाह दी थी

बगदाद में बीच सड़क से अमेरिकी पत्रकार का अपहरण:जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए, अमेरिकी दूतावास ने इराक न जाने की सलाह दी थी

अमेरिका की फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन का मंगलवार को इराक की राजधानी बगदाद में अपहरण कर लिया गया। अज्ञात हमलावरों ने शैली को अल-सादून स्ट्रीट पर स्थित बगदाद होटल के पास से अगवा किया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें अपराधी, पत्रकार को जबरन गाड़ी में खींचकर ले जाते नजर आ रहे हैं। इराक के गृह मंत्रालय ने भी घटना की पुष्टि की है, हालांकि उसने पत्रकार की पहचान सार्वजनिक नहीं की। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एक विदेशी पत्रकार का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को तुरंत कार्रवाई के लिए भेजा गया। न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन को पहले से सुरक्षा खतरे की जानकारी थी और उसने पत्रकार को इराक की यात्रा न करने की सलाह भी दी थी। शैली किटल्सन युद्ध क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं और उन्हें 2017 में प्रेमियो कारावेला अवॉर्ड मिल चुका है। वह मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट, खासकर इराक और सीरिया से जुड़ी रिपोर्टिंग करती रही हैं। एक आरोपी गिरफ्तार लेकिन पत्रकार का सुराग नहीं गृह मंत्रालय के अनुसार सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर अपहरणकर्ताओं का पीछा किया। इस दौरान अपहरण में इस्तेमाल हो रही एक गाड़ी पलट गई, जिससे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ वाहन भी जब्त किए गए। हालांकि पत्रकार को ले जा रही दूसरी गाड़ी मौके से फरार हो गई और वह बगदाद के दक्षिण की ओर निकल गई। दो इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अपहरण की शिकार पत्रकार एक अमेरिकी महिला हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हथियारबंद लोग उनकी गाड़ी रोककर उन्हें जबरन बाहर निकालते दिख रहे हैं। सउदी अरब के चैनल अल-अरबिया ने इस कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह घटना मिडिल ईस्ट में चल रही जंग से जुड़ी है या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों द्वारा पहले भी विदेशी नागरिकों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाता रहा है। ISIS की हार के बाद की स्टोरी कर चर्चित हुईं शैली अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन उन रिपोर्टर्स में गिनी जाती हैं जो दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्ष क्षेत्रों से ग्राउंड रिपोर्टिंग करती हैं। उनका काम मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट खासकर इराक और सीरिया पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए काम किया है। उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य विषय युद्ध और संघर्ष, मिलिशिया समूह, स्थानीय आबादी पर असर और मानवीय संकट रहा है। शैली किटल्सन की सबसे ज्यादा चर्चा उन रिपोर्ट्स को लेकर हुई, जिनमें उन्होंने ISIS के पतन (2017 के बाद) के बाद इराक की स्थिति को ग्राउंड से दिखाया। उस वक्त उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ISIS की हार के बाद जमीनी स्तर पर संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और सत्ता का खालीपन बना हुआ है। स्थानीय मिलिशिया इसे भरने की कोशिश में लगे हुए हैं। अमेरिका ने दी थी इराक छोड़ने की सलाह इराक की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दी है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने 29 मार्च को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि सभी अमेरिकी नागरिक जल्द से जल्द इराक छोड़ दें। दूतावास ने साफ कहा कि इराक में रहना इस समय बहुत खतरनाक है। यहां आतंकवाद, अपहरण और हिंसा का खतरा बढ़ गया है। इससे पहले भी मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने इराक के लिए “Do Not Travel” (लेवल 4) की चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इराक की यात्रा न करें। इराक में पहले भी विदेशी नागरिक किडनैप हुए एलिजाबेथ त्सुरकोव- 2023 में बगदाद से लापता हुईं, बाद में एक मिलिशिया समूह के कब्जे में होने की पुष्टि हुई। (2026 तक भी उनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है; रिहाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है) जिल कैरोल- 2006 में अमेरिकी पत्रकार जिल का रिपोर्टिंग के दौरान अपहरण हुआ। उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई, हालांकि उन्हें 3 महीने बाद रिहा कर दिया गया। गिउलियाना स्ग्रेना- 2005 में इटली की पत्रकार को उग्रवादियों ने उन्हें बंधक बना लिया, लगभग 1 महीने तक कैद में रखा। बाद में रिहा कर दिया गया। जुनपेई यासुदा- 2004 में जापानी पत्रकार को जासूसी के शक में अगवा किया गया, हालांकि कुछ दिनों में ही छोड़ दिया गया। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक की स्थिति चिंताजनक अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक को 180 देशों में 155वां स्थान मिला है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले थोड़ा सुधार दिखाता है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट में इराक को ‘बहुत गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि वहां पत्रकारों को काम करते समय कई तरह के खतरे और दबाव का सामना करना पड़ता है।

Read More »
बगदाद में बीच सड़क से अमेरिकी पत्रकार का अपहरण:जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए; अमेरिकी दूतावास ने इराक न जाने की सलाह दी थी

बगदाद में बीच सड़क से अमेरिकी पत्रकार का अपहरण:जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए; अमेरिकी दूतावास ने इराक न जाने की सलाह दी थी

अमेरिका की फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन का मंगलवार को इराक की राजधानी बगदाद में अपहरण कर लिया गया। अज्ञात हमलावरों ने शैली को अल-सादून स्ट्रीट पर स्थित बगदाद होटल के पास से अगवा किया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें अपराधी, पत्रकार को जबरन गाड़ी में खींचकर ले जाते नजर आ रहे हैं। इराक के गृह मंत्रालय ने भी घटना की पुष्टि की है, हालांकि उसने पत्रकार की पहचान सार्वजनिक नहीं की। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एक विदेशी पत्रकार का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को तुरंत कार्रवाई के लिए भेजा गया। कुछ समय से वह न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के लिए रिपोर्टिंग कर रही थी। इसी वेबसाइट के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने पत्रकार को सुरक्षा वजहों से इराक की यात्रा न करने की सलाह भी दी थी। शैली किटल्सन युद्ध क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं और उन्हें 2017 में प्रेमियो कारावेला अवॉर्ड मिल चुका है। वह मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट, खासकर इराक और सीरिया से जुड़ी रिपोर्टिंग करती रही हैं। एक आरोपी गिरफ्तार लेकिन पत्रकार का सुराग नहीं गृह मंत्रालय के अनुसार सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर अपहरणकर्ताओं का पीछा किया। इस दौरान अपहरण में इस्तेमाल हो रही एक गाड़ी पलट गई, जिससे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ वाहन भी जब्त किए गए। हालांकि पत्रकार को ले जा रही दूसरी गाड़ी मौके से फरार हो गई और वह बगदाद के दक्षिण की ओर निकल गई। दो इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अपहरण की शिकार पत्रकार एक अमेरिकी महिला हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हथियारबंद लोग उनकी गाड़ी रोककर उन्हें जबरन बाहर निकालते दिख रहे हैं। सउदी अरब के चैनल अल-अरबिया ने इस कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इराकी मिलिशिया कतीब हिजबुल्लाह पर आरोप फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह घटना मिडिल ईस्ट में चल रही जंग से जुड़ी है या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों द्वारा पहले भी विदेशी नागरिकों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाता रहा है। CNN से जुड़े वॉर एक्सपर्ट एलेक्स प्लिटास ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि किटल्सन को ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया कतीब हिजबुल्लाह ने अगवा किया है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह ग्रुप ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के करीब माना जाता है। इराक में यह पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) का हिस्सा है। PMF को इराक सरकार ने ISIS के खिलाफ लड़ाई के दौरान आधिकारिक दर्जा दिया था। ISIS की हार के बाद की स्टोरी कर चर्चित हुईं शैली अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन उन रिपोर्टर्स में गिनी जाती हैं जो दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्ष क्षेत्रों से ग्राउंड रिपोर्टिंग करती हैं। उनका काम मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट खासकर इराक और सीरिया पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए काम किया है। उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य विषय युद्ध और संघर्ष, मिलिशिया समूह, स्थानीय आबादी पर असर और मानवीय संकट रहा है। शैली किटल्सन की सबसे ज्यादा चर्चा उन रिपोर्ट्स को लेकर हुई, जिनमें उन्होंने ISIS के पतन (2017 के बाद) के बाद इराक की स्थिति को ग्राउंड से दिखाया। उस वक्त उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ISIS की हार के बाद जमीनी स्तर पर संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और सत्ता का खालीपन बना हुआ है। स्थानीय मिलिशिया इसे भरने की कोशिश में लगे हुए हैं। अमेरिका ने दी थी इराक छोड़ने की सलाह इराक की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दी है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने 29 मार्च को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि सभी अमेरिकी नागरिक जल्द से जल्द इराक छोड़ दें। दूतावास ने साफ कहा कि इराक में रहना इस समय बहुत खतरनाक है। यहां आतंकवाद, अपहरण और हिंसा का खतरा बढ़ गया है। इससे पहले भी मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने इराक के लिए “Do Not Travel” (लेवल 4) की चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इराक की यात्रा न करें। इराक में पहले भी विदेशी नागरिक किडनैप हुए एलिजाबेथ त्सुरकोव- 2023 में बगदाद से लापता हुईं, बाद में एक मिलिशिया समूह के कब्जे में होने की पुष्टि हुई। (2026 तक भी उनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है; रिहाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है) जिल कैरोल- 2006 में अमेरिकी पत्रकार जिल का रिपोर्टिंग के दौरान अपहरण हुआ। उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई, हालांकि उन्हें 3 महीने बाद रिहा कर दिया गया। गिउलियाना स्ग्रेना- 2005 में इटली की पत्रकार को उग्रवादियों ने उन्हें बंधक बना लिया, लगभग 1 महीने तक कैद में रखा। बाद में रिहा कर दिया गया। जुनपेई यासुदा- 2004 में जापानी पत्रकार को जासूसी के शक में अगवा किया गया, हालांकि कुछ दिनों में ही छोड़ दिया गया। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक की स्थिति चिंताजनक अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक को 180 देशों में 155वां स्थान मिला है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले थोड़ा सुधार दिखाता है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट में इराक को ‘बहुत गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि वहां पत्रकारों को काम करते समय कई तरह के खतरे और दबाव का सामना करना पड़ता है।

Read More »
रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE:होर्मुज को जबरन खोलने में अमेरिका की मदद करेगा; UN में सिक्योरिटी फोर्स के लिए प्रस्ताव

रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE:होर्मुज को जबरन खोलने में अमेरिका की मदद करेगा; UN में सिक्योरिटी फोर्स के लिए प्रस्ताव

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) US-ईरान जंग में सीधे तौर पर शामिल होने की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा हैं। इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को जबरन खोलने के लिए सभी तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा रही है। इसके तहत हार्मुज सिक्योरिटी फोर्स बनाई जाएई, जो जहाजों की सुरक्षा तय करेगी। होर्मुज एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। UAE पहला खाड़ी देश बन सकता है जो इस जंग में सीधे तौर पर हिस्सा लेगा। हाल के दिनों में ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। अब तक करीब 2500 हमले हो चुके हैं, जिनमें एयरपोर्ट, रिहायशी इमारत और ऑयल फैसिलिटी जैसे नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। UAE दूसरे देशों से गठबंधन बनाने की मांग कर रहा UAE अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों से अपील कर रहा है कि वे एक साथ गठबंधन बनाएं और स्ट्रेट को सुरक्षित करें। UAE अधिकारी ने WSJ को बताया कि ईरान अपनी जान बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है, इसलिए वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी बर्बाद करने को तैयार है। UAE का मानना है कि अगर UNSC से प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाए तो वर्तमान में झिझक रहे एशियाई और यूरोपीय देश भी हार्मुज को खुलवाने में मदद करने के लिए आगे आ सकते हैं। रूस और चीन UAE के प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और चीन इस प्रस्ताव को वीटो (रोक) कर सकते हैं। रिपोर्ट में खाड़ी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि भले ही प्रस्ताव पास न हो, UAE फिर भी सैन्य प्रयासों में समर्थन देने के लिए तैयार है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से UAE की तेल आपूर्ति, शिपिंग और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यह इसे अपनी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मानता है। UAE माइंस हटाने, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और अमेरिकी नेतृत्व वाले ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार कर रहा है। उसके पास जेबेल अली पोर्ट, एयरबेस और आधुनिक फाइटर जेट जैसे संसाधन मौजूद हैं। UAE ने अमेरिका से यह सुझाव भी दिया है कि वह हार्मुज में स्थित द्वीपों, खासकर अबू मूसा द्वीप पर कब्जा कर ले। ईरान पिछले लगभग पांच दशकों से इस द्वीप पर कब्जा किए हुए है, लेकिन UAE इसे अपना बताता है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर बैन लगाया UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दुनिया भर में इस बात पर सहमति है कि होर्मुज में जहाजों को आने-जाने की आजादी होनी चाहिए। सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देश भी अब ईरान के खिलाफ हो गए हैं। वे चाहते हैं कि युद्ध तब तक चले जब तक ईरान की सरकार कमजोर न हो जाए। बहरीन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है। गुरुवार को इसपर वोट हो सकता है। पहले UAE ईरान को पैसे से मदद करता था और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध थे। युद्ध शुरू होने से पहले UAE शांति बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब UAE ईरान को खतरनाक पड़ोसी मान रहा है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर भी रोक लगा दी है। साथ ही कुछ ईरानी संस्थाओं को भी बंद कर दिया है। ईरान ने अमेरिका का साथ देने पर हमले की चेतावनी दी ईरान जंग शुरू होने के बाद कई बार खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी दे चुका है कि अगर कोई भी देश अमेरिका की जंग में मदद करेगा या हार्मुज को फिर से खोलने के प्रयासों में शामिल होगा, तो वह उस देश के अहम बुनियादी ढांचों को हमला कर नष्ट कर देगा। ईरान ने विशेष रूप से UAE को निशाना बनाते हुए कहा था कि अगर उन्होंने अमेरिका की मदद की तो उनके बंदरगाहों, एल्यूमिनियम प्लांट्स, गैस फील्ड्स, और बिजली सुविधाओं पर हमले किए जाएंगे। होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए अहम क्यों ईरान की मजबूती की सबसे बड़ी वजह हार्मुज की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं।

Read More »
रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE:होर्मुज को जबरन खोलने में अमेरिका की मदद करेगा; UN में सिक्योरिटी फोर्स के लिए प्रस्ताव

रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE:होर्मुज को जबरन खोलने में अमेरिका की मदद करेगा; UN में सिक्योरिटी फोर्स के लिए प्रस्ताव

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) US-ईरान जंग में सीधे तौर पर शामिल होने की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा हैं। इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को जबरन खोलने के लिए सभी तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा रही है। इसके तहत हार्मुज सिक्योरिटी फोर्स बनाई जाएई, जो जहाजों की सुरक्षा तय करेगी। होर्मुज एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। UAE पहला खाड़ी देश बन सकता है जो इस जंग में सीधे तौर पर हिस्सा लेगा। हाल के दिनों में ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। अब तक करीब 2500 हमले हो चुके हैं, जिनमें एयरपोर्ट, रिहायशी इमारत और ऑयल फैसिलिटी जैसे नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। UAE दूसरे देशों से गठबंधन बनाने की मांग कर रहा UAE अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों से अपील कर रहा है कि वे एक साथ गठबंधन बनाएं और स्ट्रेट को सुरक्षित करें। UAE अधिकारी ने WSJ को बताया कि ईरान अपनी जान बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है, इसलिए वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी बर्बाद करने को तैयार है। UAE का मानना है कि अगर UNSC से प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाए तो वर्तमान में झिझक रहे एशियाई और यूरोपीय देश भी हार्मुज को खुलवाने में मदद करने के लिए आगे आ सकते हैं। रूस और चीन UAE के प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और चीन इस प्रस्ताव को वीटो (रोक) कर सकते हैं। रिपोर्ट में खाड़ी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि भले ही प्रस्ताव पास न हो, UAE फिर भी सैन्य प्रयासों में समर्थन देने के लिए तैयार है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से UAE की तेल आपूर्ति, शिपिंग और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यह इसे अपनी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मानता है। UAE माइंस हटाने, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और अमेरिकी नेतृत्व वाले ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार कर रहा है। उसके पास जेबेल अली पोर्ट, एयरबेस और आधुनिक फाइटर जेट जैसे संसाधन मौजूद हैं। UAE ने अमेरिका से यह सुझाव भी दिया है कि वह हार्मुज में स्थित द्वीपों, खासकर अबू मूसा द्वीप पर कब्जा कर ले। ईरान पिछले लगभग पांच दशकों से इस द्वीप पर कब्जा किए हुए है, लेकिन UAE इसे अपना बताता है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर बैन लगाया UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दुनिया भर में इस बात पर सहमति है कि होर्मुज में जहाजों को आने-जाने की आजादी होनी चाहिए। सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देश भी अब ईरान के खिलाफ हो गए हैं। वे चाहते हैं कि युद्ध तब तक चले जब तक ईरान की सरकार कमजोर न हो जाए। बहरीन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है। गुरुवार को इसपर वोट हो सकता है। पहले UAE ईरान को पैसे से मदद करता था और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध थे। युद्ध शुरू होने से पहले UAE शांति बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब UAE ईरान को खतरनाक पड़ोसी मान रहा है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर भी रोक लगा दी है। साथ ही कुछ ईरानी संस्थाओं को भी बंद कर दिया है। ईरान ने अमेरिका का साथ देने पर हमले की चेतावनी दी ईरान जंग शुरू होने के बाद कई बार खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी दे चुका है कि अगर कोई भी देश अमेरिका की जंग में मदद करेगा या हार्मुज को फिर से खोलने के प्रयासों में शामिल होगा, तो वह उस देश के अहम बुनियादी ढांचों को हमला कर नष्ट कर देगा। ईरान ने विशेष रूप से UAE को निशाना बनाते हुए कहा था कि अगर उन्होंने अमेरिका की मदद की तो उनके बंदरगाहों, एल्यूमिनियम प्लांट्स, गैस फील्ड्स, और बिजली सुविधाओं पर हमले किए जाएंगे। होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए अहम क्यों ईरान की मजबूती की सबसे बड़ी वजह हार्मुज की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं।

Read More »

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
श्मशान की राशि से सरपंचों लगवाई स्ट्रीट लाइट:19 पंचायतों के कामों की होगी जांच, इंजीनियर उतरेंगे मैदान में

April 5, 2026/
9:06 am

उमरिया जिले की 19 ग्राम पंचायतों में कुल 543 एलईडी स्ट्रीट लाइटों के नियम विरुद्ध लगाए जाने की शिकायतों के...

Dewas Blinkit Delivery Partners Strike

April 1, 2026/
12:54 pm

देवास में ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी सेवा Blinkit के डिलीवरी पार्टनर्स ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है।...

धुरंधर एक्टर रणवीर को विक्की कौशल ने किया रिप्लेस:साउथ सुपरस्टार धनुष के ड्रीम प्रोजेक्ट में नई एंट्री, एस शंकर करेंगे फिल्म का निर्देशन

March 14, 2026/
4:35 pm

साउथ सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस. शंकर के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वेलपरी’ को लेकर नया अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के...

Delhi Poster: Rahul Gandhi Compared to Umar Khalid by BJP

February 26, 2026/
12:30 am

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक यह पोस्टर भाजपा के नेशनल स्पोक्सपर्सन आरपी सिंह ने लगवाया है। दिल्ली में एआई...

राजनीति