
बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं
बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं


बमोरी में दो सट्टे के कारोबारी पकड़ाए:11 लोगों पर कैंट पुलिस ने की कार्रवाई; सात बैंक अकाउंट, कई आईडी मिलीं

सिवनी जिले में सक्रिय जेबकतरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने शनिवार की रात एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी की नकदी और पर्स बरामद किया। कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को सिवनी निवासी अमित राजपूत (42) ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि हनुमान प्रकटोत्सव के दौरान बालस्वरूप हनुमान मंदिर में पूजा करते समय रात करीब 8 बजे किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से लगभग 17 हजार रुपए चुरा लिए थे। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना स्तर पर एक टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास पूछताछ, संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया। इसके आधार पर सिवनी के टिग्गा मोहल्ला निवासी इस्लाम खान (30) की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने चोरी की गई राशि में से कुछ पैसे खर्च कर दिए थे। उसके पास से 7,250 रुपये नकद और एक पर्स बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी इस्लाम खान के खिलाफ पहले भी कोतवाली थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सतीश तिवारी के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक संजय यादव, मनोज पाल, मुकेश चौरिया और राजेंद्र राजपूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

भोपाल से 119 किलोमीटर दूर ब्यावरा के 3 दोस्तों की इन दिनों देश-दुनिया में चर्चा है। 20 और 18-18 साल के तीनों दोस्त एक ही मोहल्ले में रहते हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर, जब लोग ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान कर रहे थे, तब इन्होंने अजनार नदी की सफाई का संकल्प लिया। तीनों को तैरना नहीं आता, फिर भी नदी में उतर गए। रोजमर्रा के काम की रील बनाकर अपलोड करने लगे। लोग ट्रोल करते और मजाक बनाते रहे, लेकिन ये हर दिन क्रिकेट खेलने का कहकर निकलते और नदी से गंदगी निकालते रहे। फरवरी-मार्च में परीक्षा के दौरान भी ये रोज सफाई करते रहे। नदी के एक घाट पर, जहां पहले कचरे का पहाड़ था, वहां अब इन्होंने पुताई कर दी है। वहां लोग घूमने आने लगे हैं। बीते दिनों मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इनके काम को सराहा, तो देश-दुनिया की नजर इन पर पड़ी। कुछ लोगों ने कहा कि ये सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए ऐसा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ब्यावरा पहुंचा और असली तस्वीर समझी। बिट्टू ने दिया नदी सफाई का आइडिया भास्कर की टीम जब ब्यावरा पहुंची तो तीनों दोस्त एक स्कूटी पर सवार होकर नदी के घाट जाने की तैयारी कर रहे थे। अब ये शहर में फेमस चेहरे हो गए हैं। सबसे मुख्य किरदार है बिट्टू तबाही उर्फ सुरेंद्र चौधरी। दो अन्य किरदार हैं कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल। बातचीत की शुरूआत करते हुए कृष्णा ने बताया कि ये आयडिया बिट्टू का था। 26 जनवरी को बिट्टू ने कहा कि क्यों न हम कुछ ऐसा करें कि लोगों को लगे कि हमने कुछ बदलाव लाया है। हम यहां क्रिकेट खेलने आते थे। कई बार घाट पर बैठने का मन करता था लेकिन इतनी गंदगी होती थी कि बैठ नहीं पाते थे। उसके बाद से हम लोग अबतक 3 घाटों की सफाई कर चुके हैं। लोग मजाक उड़ाते थे लेकिन हम जुटे रहे कृष्णा की बात को आगे बढ़ाते हुए बिट्टू ने कहा कि हमने नदी सफाई की बात सोच तो ली, लेकिन दिक्कत ये थी हम तीनों को तैरना नहीं आता था। फिर भी हम पीछे नहीं हटे। हमने ग्लव्स, जूते और एक जाल का इंतजाम किया। फिर कचरा खींचने के लिए एक टूल बनवाया। 26 जनवरी के बाद एक दिन ऐसा नहीं गुजरा कि हम घाट पर न आएं हों। एक बार नदी में काम करते हुए मेरे पैरों पर सांप आ गया था। मेरे दोस्त कृष्णा ने मुझे बताया। वो तो अच्छा हुआ कि मैं बड़े जूते पहना हुआ था। पैसों का इंतजाम कैसे करते हो? इस सवाल पर बिट्टू ने कहा कि पॉकेट मनी को बचाकर अपने लिए हाथ में पहनने वाले दस्ताने, जूते और जाल खरीदते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी हमें थोड़ी मदद मिली है। अब तक हम सफाई में अपने करीब 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। हमें जब कोई काम करना है तो हम 15 दिन से उसके लिए पैसे जोड़ते हैं। ड्रम, पेंट और बाकी टूल पर अब तक 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। स्किन इंफेक्शन हुआ, कई बार बुखार भी आया गंदगी के कारण तीनों लड़कों को हाथ-पैरों में स्किन इंफेक्शन भी हो गया है। वे कहते हैं कि कई बार बुखार भी आ जाता है। हमें भी पता है कि ये सब गंदे पानी में ज्यादा समय तक रहने के कारण ही हो रहा है। लेकिन एक बार यदि हम इसे साफ करने में आगे बढ़ गए तो शहर के लिए ये बहुत बड़ा काम हो जाएगा। बिट्टू कहता है नदी से जो कचरा निकला है, वो हमने फेंका नहीं है। घाट के पास ही इसे दबाकर रखा है। हम चाहते हैं कि इस कचरे को रीसाइकिल करके कहीं इस्तेमाल किया जा सके। आजकल तो सड़क बनाने में भी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हो रहा है। परीक्षाओं के दौरान भी काम करते रहे बिट्टू के दूसरे साथी कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल दोनों बारहवीं क्लास में पढ़ रहे थे। फरवरी-मार्च में उनकी परीक्षाएं भी थीं। हमने पूछा परीक्षाओं के दौरान कैसे काम किया? तो जवाब मिला कि इस दौरान भी रोजाना शाम को घाट पर आते थे। एक भी दिन हम इस काम से गैरहाजिर नहीं रहे। घर वालों को भी कभी नहीं बताया। घर वाले जब भी पूछते तो यही कहते कि थोड़ा रिलेक्स होने के लिए खेलने जा रहे हैं। मां-पिता से कहकर निकलते-क्रिकेट खेलने जा रहे हैं बिट्टू और कृष्णा कहते हैं कि वो बीते दो ढाई महीने से नदी की सफाई के रील सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड कर रहे हैं। लेकिन उनके माता–पिता सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते। उन्हें कभी ये पता नहीं लगा कि वे क्या करते हैं? हम तो घर से यही कहकर निकलते हैं कि हम क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। हां, बीते कुछ दिनों से जब से महिंद्रा जी ने हमारे काम की सोशल मीडिया पर तारीफ की है, तब से कई लोग हमसे अच्छे से बात करते हैं। कलेक्टर ने भी हमें बुलाकर सम्मान किया। स्थानीय विधायक ने भी हमें बुलाया है। प्रशासन भी अब इन घाटों पर जेसीबी से कचरा हटवाने में जुट गया है। 15 नाले, पूरे शहर का सीवरेज और कचरा भी इसी नदी में ब्यावरा शहर के बीचों बीच से बहने वाली ये नदी प्लास्टिक कचरे से अटी पड़ी है। जहां नजर डालो वहीं से सीवरेज मिलता दिख रहा है। इन लड़कों ने बीते दो महीने में नदी के 3 घाटों पर तस्वीर बदलने की कोशिश की है। इन्होंने घाट की सीढ़ियों की सफाई करके यहां पुताई की। घाटों पर कचरा न फेंके के पोस्टर लगाए वहीं घाट पर कचरा फेंकने के लिए दो ड्रम रखे। तीनों दोस्त रोज ड्रम का कचरा खाली करते हैं, लोगों से कहते हैं कचरा बाहर न फेंके। इनकी कोशिश के बाद अब सरकारी अमला भी एक्टिव होता दिख रहा है। नगर पालिका ब्यावरा के सीएमओ इकरार अहमद अपनी टीम के साथ ऐसे ही एक घाट पर पहुंचे थे। अहमद कहते हैं कि अजनार नदी का उद्गम स्थल यहां से 15 किलोमीटर दूर है। पूरे शहर का सीवरेज और छोटे-बड़े नालों की गंदगी नदी में मिलती है। सीवरेज को इसमें मिलने से रोकने

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। . नेता जी का गजब का ‘माला’ मैनेजमेंट आपने एक तीर से दो निशाने वाली कहावत सुनी होगी, लेकिन मंदसौर में एक नेता जी इससे एक कदम आगे निकल गए। उन्होंने एक माला से तीन स्वागत करने का कमाल कर दिया। हालांकि, इस दौरान राज्यपाल ने टोक दिया, जिससे उनकी फजीहत भी हो गई। हुआ यूं कि कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत मंदसौर के पिपलिया मंडी पहुंचे थे, जहां एक नेता जी ने एक बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक माला से उनका स्वागत किया। यह माला खास तौर पर इंदौर से मंगवाई गई थी। यहां तक तो सब ठीक था। राज्यपाल के एक दूसरे कार्यक्रम में भी उनका इसी माला से स्वागत किया गया। इस दौरान राज्यपाल ने माला को पहचान लिया। इस पर उन्होंने मंच पर टोकते हुए कहा – ये वही माला ले आए। ये इंदौर से आई हुई माला है। ये बहुत हरकत करते हो। इतना सब कुछ होने पर भी नेता जी नहीं रुके। उन्होंने इसी माला से एक अन्य कार्यक्रम में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश कोषाध्यक्ष धीरज पाटीदार का भी स्वागत कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अब नेता जी के माला मैनेजमेंट की जमकर चर्चा हो रही है। मंदसौर में एक नेता ने एक ही माला से कर्नाटक के राज्यपाल का दो बार स्वागत किया। कलेक्टर ने विधायक को कराया इंतजार कहने को तो मध्य प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन की सरकार है, लेकिन हालत ये है कि भाजपा के जनप्रतिनिधियों को ही अधिकारी इंतजार करा रहे हैं। रतलाम में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जहां आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय किसानों की समस्याओं को लेकर कलेक्टर से मिलने आए थे, लेकिन कलेक्टर अपने केबिन में बैठी रहीं और विधायक बाहर सीढ़ियों पर बैठकर उनकी राह तकते रहे। इस दौरान विधायक यह कहते रहे कि अभी तो हम जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। मुर्दाबाद के नारे भी लगा सकते हैं। इंतजार की हद होने पर उन्होंने यह भी कहा कि पांच मिनट में अधिकारी आ जाते हैं तो ठीक, नहीं तो इस आंदोलन को दूसरा स्वरूप देंगे। हालांकि, इस दौरान दूसरे अधिकारियों ने विधायक को अंदर बुलाया, लेकिन विधायक भी अड़ गए कि कलेक्टर को जनता के बीच आकर ही बात करना होगी। फिर काफी देर इंतजार कराने के बाद कलेक्टर हाथ जोड़कर बाहर आईं और विधायक से मिलीं। इसके बाद विधायक ने सबके सामने अपने विधानसभा क्षेत्र के किसानों की बात कलेक्टर के सामने रखी, जिस पर कलेक्टर ने समाधान का भरोसा दिया। अंततः कलेक्टर विधायक से मिलीं, लेकिन विधायक को उनका यह एटीट्यूड पसंद नहीं आया। खरी बात यह है कि यह पहला मौका नहीं है। अभी हाल ही में कलेक्टर के इसी तरह के रवैये से नाराज होकर जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने पति के साथ मिलकर कलेक्टर के खिलाफ कलेक्ट्रेट में ही धरना दिया था। रतलाम में कलेक्टर से मिलने आए भाजपा विधायक बाहर सीढ़ियों पर ही बैठ गए। ड्यूटी के साथ मंच पर बैठकर डांस देखा मुरैना में पुलिसकर्मी मंच पर बैठकर डांस प्रोग्राम का आनंद लेते नजर आए। मामला जिले के सबलगढ़ की रामपुर कलां पंचायत का है, जहां कंस वध मेले का आयोजन किया गया था। इस प्रोग्राम में महिला डांसर्स ने फिल्मी गानों पर डांस किया। इस कार्यक्रम का जो वीडियो सामने आया है, उसमें रामपुर थाना प्रभारी एएसआई रामकुमार वर्मा और दीवान संतोष बाथम मंच पर बैठे नजर आ रहे हैं। इस दौरान गांव का सरपंच पुलिसकर्मियों पर रुपए घुमाकर डांसर को देता नजर आ रहा है। अब लोग इसे पुलिस सेवा आचरण के खिलाफ मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह पुलिस की छवि धूमिल करने वाला कृत्य है। लोगों ने मंच पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस मामले में एएसआई रामकुमार वर्मा ने कहा कि वे तो व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंच पर चढ़े थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन परंपरा के अनुसार कंस वध मेले में देर रात नौटंकी का आयोजन होता है, जिसे देखने सैकड़ों लोग आते हैं। ऐसे में मनचले युवकों को मंच पर चढ़ने से रोकने और डांसर के साथ किसी भी तरह का गलत व्यवहार न हो, इसी उद्देश्य से वे मंच पर चढ़े थे। मुरैना में सरपंच ने पुलिसकर्मी पर नोट घुमाकर मंच पर डांस कर रही डांसर को दे दिए। वाराणसी में सीएम का अलग अंदाज दिखा यूपी के वाराणसी में सीएम डॉ. मोहन यादव का अलग ही अंदाज देखने को मिला। वे पत्नी सीमा यादव के साथ यहां की फेमस राम भंडार की दुकान पर पहुंचे। उन्होंने दुकानदार से पूछा – क्या खिलाओगे? इस पर दुकानदार भी मुस्कुराने लगा। फिर सीएम ने कचौरी, जलेबी और लस्सी का ऑर्डर दिया। इसके बाद आम लोगों के साथ वहीं बैठकर नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद सीएम ने पर्स निकाला और खुद दुकानदार के पास जाकर उसका बिल भी चुकाया। सीएम मोहन यादव ने पत्नी सीमा यादव के साथ वाराणसी में एक दुकान पर नाश्ता किया। इनपुट सहयोग – शादाब चौधरी (मंदसौर), केके शर्मा (रतलाम), दुष्यंत सिकरवार (मुरैना) ये भी पढ़ें – सिंधिया ने सूंघाए गुलाब, फिर विधायक ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद: काम के बदले केंद्रीय मंत्री ने रखी शर्त अशोक नगर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चंदेरी से भाजपा विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी को गुलाब के फूल सूंघने को कहा। सिंधिया के कहने पर उन्होंने फूलों की खुशबू ली। फिर सिंधिया ने वही माला विधायक को पहना दी। इस सम्मान के बाद 78 साल के जगन्नाथ सिंह रघुवंशी ने 55 वर्षीय ज्योतिरादित्य सिंधिया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। पूरी खबर पढ़ें

दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को फर्जीवाडे़ के मामले में दिल्ली की राउज अवेन्यू कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट रिक्त घोषित करने की सूचना चुनाव आयोग को भेजते हुए गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया। अब राजेन्द्र भारती इस सजा और सदस्यता खत्म करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी में हैं। सोमवार को उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो सकती है। मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा के ऐसे पांच प्रमुख मामले हैं जिनमें न्यायालय से विधायकों को सजा हुई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की लेकिन, उच्च अदालतों से कुछ विधायकों को राहत मिल गई तो उनकी विधायकी बच गई। लेकिन, एक विधायक की सदस्यता चली गई थी। 1. आशा रानी सिंह (विधायक,बिजावर) छतरपुर जिले के बिजावर सीट से भाजपा विधायक आशा रानी सिंह को 2011 में एक नौकरानी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके पति पर नौकरानी उनकी सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त की और सीट रिक्त घोषित की थी। भाजपा की पूर्व विधायक आशारानी सिंह को उनकी घरेलू सहायिका (तिजिया बाई) को प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया गया था। 10 साल की सजा के बाद गई थी विधायकी 31 जनवरी 2011 को छतरपुर की एक अदालत ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद उनकी सदस्यता खतरे में आ गई थी, लेकिन उस समय ‘लिली थॉमस’ फैसला लागू नहीं था। हालांकि, जेल जाने के कारण और सजा की अवधि लंबी होने के कारण 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। आशारानी सिंह ने हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन उन्हें सजा पर स्टे नहीं मिला, जिसके कारण उनकी सदस्यता नहीं बच सकी और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। 2. प्रहलाद लोधी (विधायक, पवई) भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का मामला मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय और न्यायपालिका के बीच खींचतान का एक बड़ा उदाहरण बना। 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) ने लोधी को साल 2014 के एक मामले में 2 साल की जेल और सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई करने गए पवई के तत्कालीन तहसीलदार के साथ मारपीट की थी। कोर्ट से मिला स्टे तो बच गई सदस्यता विधानसभा सचिवालय ने इस सजा के आधार पर 2 नवंबर 2019 को उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद प्रहलाद लोधी हाई कोर्ट पहुंचे और 7 नवंबर 2019 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दिया। इस स्टे के आधार पर काफी कानूनी विवाद हुआ, लेकिन अंततः सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे। कोर्ट से राहत मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने तत्कालीन स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाए थे सत्यमेव जयते! साथी विधायक प्रहलाद लोधी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली है। स्पीकर ने विधायक को असंवैधानिक तरीके से अयोग्य घोषित किया था। प्रदेश सरकार ने घटिया हरकत की और एक महीने तक क्षेत्र की जनता को अपने जनप्रतिनिधि से वंचित रखने का महापाप किया। #MP_मांगे_जवाब— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 6, 2019 3. खरगापुर विधायक का निर्वाचन हो गया था शून्य टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी चंदा सिंह गौर ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में दो मुख्य आरोप लगाए गए थे। जिनमें, राहुल सिंह लोधी ने अपने नामांकन पत्र (एफिडेविट) में यह जानकारी छिपाई थी कि उनकी फर्म ‘आरआर कंस्ट्रक्शन’ का सरकार के साथ अनुबंध था, जो कि लाभ के पद के अंतर्गत आता है। उन्होनें चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित सीमाओं और नियमों का उल्लंघन किया गया था। हाई कोर्ट का फैसला और तारीख मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के जस्टिस नमिन्द्रा सिंह ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राहुल सिंह लोधी के 2018 के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने माना कि नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951’ की धारा 100 के तहत चुनाव रद्द करने का ठोस आधार है। विधानसभा सचिवालय की कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद, नवंबर 2022 में मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की। इसके तहत राहुल सिंह लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी गई और खरगापुर विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इसकी सूचना तत्काल चुनाव आयोग को भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट से ‘स्टे’ और सदस्यता की बहाली विधानसभा से सदस्यता रद्द होने के तुरंत बाद राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उनकी सदस्यता बहाल तो हो गई, लेकिन कोर्ट ने उन पर कुछ शर्तें लगाई थीं। वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते थे, लेकिन अंतिम फैसला आने तक उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं था और वे विधायक के रूप में मिलने वाले कुछ भत्तों के लिए भी पात्र नहीं थे। 4. मुकेश मल्होत्रा (विधायक, विजयपुर) विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को मार्च 2026 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक मामले में दोषी मानते हुए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। कोर्ट ने माना कि मतदाता को उम्मीदवार के आपराधिक इतिहास को जानने का अधिकार है और इसे छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है। राज्यसभा चुनाव में नहीं दे पाएंगे वोट, विधायकी बची रहेगी मुकेश मल्होत्रा ने एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें विधायक

बड़ा गणपति चौराहे पर फ्लायओवर बनाने का मामला दो साल से चल रहा है। वर्कऑर्डर के बाद भी अब तक यूटिलिटी लाइनों की शिफ्टिंग का काम ही शुरू नहीं हुआ है। लाइनों की शिफ्टिंग में ही एक साल लग जाएगा। उसके बाद कहीं फ्लायओवर निर्माण शुरू हो सकेगा। बड़ा गणपति के साथ ही चंदन नगर ब्रिज की समीक्षा के लिए शनिवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अफसरों की बैठक ली। मंत्री ने साफ कहा कि काम समयबद्ध तरीके से पूरा होना चाहिए, क्योंकि पुल को सिंहस्थ से पहले तैयार करना है। बड़ा गणपति फ्लायओवर को लेकर अफसरों ने कहा, ड्रेनेज और पानी की यूटिलिटी लाइनें चौराहे से गुजर रही हैं। इनमें एक लाइन अंतिम चौराहे की ओर से आ रही है। इन लाइनों को हटाकर नई लाइनें डालनी होंगी। 8 से 10 दिन में काम शुरू कर देंगे। पूरा काम अंडरग्राउंड तरीके से किया जाएगा। बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, आईडीए के सीईओ परीक्षित झाड़े, एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर और मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अफसर मौजूद रहे। काम के दौरान ट्रैफिक की दिक्कत, वैकल्पिक मार्ग तैयार होंगे अफसरों ने बताया कि बड़ा गणपति चौराहे पर मेट्रो स्टेशन भी प्रस्तावित है। ऐसे में जब यहां ब्रिज और मेट्रो दोनों का काम चलेगा तो यातायात का दबाव काफी बढ़ेगा। इस पर पुलिस विभाग से वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान तैयार करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि कहां से ज्यादा ट्रैफिक इस रास्ते पर आता है तो बताया गया कि रामबाग और किला मैदान की तरफ से आने वाला भारी यातायात इसी मार्ग से गुजरता है। इसके लिए जिंसी और कंडीलपुरा को वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा गया, लेकिन दोनों ही सड़कें अभी संकरी हैं। इस पर विजयवर्गीय ने निर्देश दिए कि पहले इन मार्गों को दुरुस्त किया जाए, ताकि निर्माण के दौरान शहर को ट्रैफिक परेशानी न झेलनी पड़े। सुस्त एजेंसियों पर सख्ती काम में देरी करने वाली निर्माण एजेंसियों का मुद्दा भी उठा। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने कहा सड़कें बनाने वाली एजेंसियां समय पर काम नहीं कर रही हैं। कई बार जवाब मिलता है कि लेबर नहीं मिल रही। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी माना कि कई बार निर्देश देने के बावजूद एजेंसियां समय सीमा में काम नहीं कर रही हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि सोमवार को सभी एजेंसियों को बुलाकर स्पष्ट बात करें और जवाबदेही तय करें। 1 एजेंसी के पास कई काम बैठक में बड़ा गणपति पर यूटिलिटी लाइन शिफ्टिंग का काम लेने वाली एजेंसी पर भी सवाल उठे। बैठक में कहा गया कि वरुण जैन की कंपनी ने इस काम के साथ कई अन्य प्रोजेक्ट भी ले रखे हैं, ऐसे में एक ही एजेंसी इतने काम समय पर पूरे नहीं कर पाएगी। एजेंसी की ओर से बैठक में मौजूद प्रतिनिधि ने दावा किया कि सभी काम तय समय सीमा में पूरे किए जाएंगे। चंदन नगर फ्लायओवर : 8 दिन में जारी होगा टेंडर चंदन नगर फ्लायओवर प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई। आईडीए की ओर से बताया गया कि इस प्रोजेक्ट के टेंडर 8 दिन में जारी कर दिए जाएंगे। आईडीए सीईओ ने कहा कि अगले डेढ़ महीने में वर्क ऑर्डर और एक साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि यहां भी निगम की ड्रेनेज और पानी की लाइनें निर्माण में बाधा बन रही हैं। बैठक में चंदन नगर से नगीन नगर तक जाने वाली सड़क पर भी चर्चा हुई।

भोपाल में विजय मेवाड़ा की बेरहमी से हत्या करने वाला आसिफ उर्फ बम इंदौर के डॉन सलमान लाला से इंस्पायर्ड था। सलमान की तर्ज पर महंगी कार-बाइक पर घूमता था। 5 स्टार होटलों में ठहरता और अवैध कारोबार से लाखों रुपए बना चुका था। आसिफ सोशल मीडियो प्लेटफॉर्म पर भी खासा एक्टिव रहता था। हर गतिविधि की रील बनाकर अपलोड करता था। सलमान की तरह आसिफ भी अपना एक बड़ा नेटवर्क बनाना चाहता था। यहां तक कि पुलिस की मौजूदगी में कोर्ट पेशी के दौरान कई रील बनाई और वायरल की हैं। उसके करीबियों की मानें तो नशे में आसिफ हैवान बन जाता था। साथ वालों तक को पीटता था। वह शराब पीने का बेहद शौकीन था। उसका बड़ा भाई शरीफ उर्फ बच्चा भी अपराधी है और भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है। हत्या के बाद शॉर्ट एनकाउंटर में पकड़े गए आसिफ को न्यायालय ने 13 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। फिलहाल आरोपी हमीदिया अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। पुलिस को गुमराह कर रहा आसिफ इलाजरत आसिफ से पुलिस फिलहाल कोई खास पूछताछ नहीं कर सकी है। जैसे फरारी काटने में उसकी मदद किसने की। तीन दिनों तक आरोपी कहां रहा। समसपुरा गांव तक कैसे पहुंचा। आरोपी लगातार बयान बदलकर पुलिस को गुमराह कर रहा है। उसने पुलिस को अपराध के बाद पैदल ही समसपुरा के जंगल तक पहुंचने की बात कही है। हालांकि उसकी बताई कहानी पुलिस के गले नहीं उतर रही है। अब रातीबड़ पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। जुआ-सटटा और अड़ीबाजी के धंधे से जुड़ा शरीफ और आसिफ दोनों ही भाई जुआ, सट्टा और अड़ीबाजी के धंधे से जुड़े हैं। आसिफ के खिलाफ एक दर्जन से अधिक अपराध शहर के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। दोनों ही भाई शहर में अवैध कारोबार करने वालों से अड़ीबाजी कर रकम वसूलने का काम भी करते हैं। पर्शियन बिल्लियां पालने का शौकीन आसिफ बम पर्शियन कैट पालने का शौकीन है। उसके पास करीब 6 पर्शियन कैट हैं। इसी के साथ वह बकरा पालन का काम भी कर चुका है। प्रदेश सहित देश के अलग-अलग राज्यों में घूम चुका है। इसकी पुष्टि उसके इंस्टा अकाउंट से होती है। घेराबंदी देख पुलिस पर फायरिंग कर दी थी कारोबारी विजय मेवाड़ा हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुख्यात बदमाश आसिफ उर्फ बम को पुलिस ने एक 1 अप्रैल को नाटकीय घेराबंदी के बाद दबोच लिया। 10 मिनट के भीतर दोनों ओर से तीन राउंड फायर किए गए। एक गोली आरोपी के दाहिने पैर के घुटने के करीब लगी। वह लड़खड़ाकर गिरा और उसे पकड़ लिया गया। 12 बजकर 15 मिनट पर पुलिस टीम आरोपी को लेकर सरकारी बोलेरो वाहन से समसपुरा गांव से हमीदिया अस्पताल के लिए रवाना हुई। फिलहाल आसिफ का इलाज जारी है। रातीबड़ थाना पुलिस ने अशोका गार्डन थाने के टीआई अनुराग लाल की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का एक और मुकदमा दर्ज कर लिया है। जंगल में स्थित घटनास्थल से पुलिस ने लोडेड देसी पिस्टल सहित चले हुए कारतूस जब्त कर लिए हैं। सलमान लाला भी चला था दुर्लभ कश्यप की राह पर भले ही भोपाल का आसिफ इंदौर का बदमाश सलमान लाला से प्रेरित रहा हो, लेकिन खुद सलमान लाला उज्जैन के डॉन दुर्लभ कश्यप से प्रेरित था। दुर्लभ को सलमान अपना आइडल मानता था। दुर्लभ की तरह वह भी अपना नेटवर्क बढ़ाता था और युवा लड़कों को इस नेटवर्क से जोड़ता था। दुर्लभ कश्यप बेहद ही कम उम्र में बड़ा बदमाश बन गया था और एक दिन आपसी रंजिश के चलते गैंगवार में उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर आज तक दुर्लभ कश्यप के किस्से बताए जाते रहे हैं। दुर्लभ कश्यप उज्जैन के जीवाजीगंज के अब्दालपुरा का रहने वाला था। वही भी बिल्लयां पालने का शौकीन था। बताया जाता है कि दुर्लभ से प्रेरित होकर आसिफ भी बिल्लयां पालने लगा था। 15 साल की उम्र से उसने हथियारों के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालनी शुरू कर दी थीं। लोगों धमकाता था। ये खबर भी पढ़ें… पुलिस को देखते ही जंगल में भागने लगा हत्यारा भोपाल के कारोबारी विजय मेवाड़ा हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुख्यात बदमाश आसिफ उर्फ बम को पुलिस ने एक नाटकीय घेराबंदी के बाद दबोच लिया। 10 मिनट के भीतर दोनों ओर से तीन राउंड फायर किए गए। एक गोली आरोपी के दाहिने पैर के घुटने के करीब लगी। वह लड़खड़ाकर गिरा और उसे पकड़ लिया गया।पूरी खबर पढ़ें

इंदौर3 घंटे पहले कॉपी लिंक 23 फरवरी को एक नाबालिग किशोरी का अपहरण हुआ था। पुलिस एफआईआर करने में नानुकुर करती रही। थाने पहुंचे पीड़िता के चाचा को पीट भी दिया। बाद में एफआईआर दर्ज हुई तो अपहरण के मामले में भी अज्ञात आरोपित बता दिए गए, जबकि किशोरी के परिवार वाले आरोपितों का नाम पुलिस को बताते रहे। बालिका के पिता ने हाई कोर्ट की शरण ली। मजदूर पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर शनिवार को छुट्टी के बाद भी सुनवाई की गई। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मामले की न केवल अवकाश के दिन सुनवाई की, बल्कि पुलिस को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने आदेश जारी किया कि पुलिस बालिका के साथ तमाम आरोपितों को भी कोर्ट में 6 अप्रैल को पेश करे। महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र में अनुसूचित जाति की नाबालिग का दबंगों द्वारा अपहरण करने की शिकायत मजदूर पिता ने की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन पहले दबंगों का नाम गायब किया। महीनेभर में भी बालिका को तलाशने की कोई कोशिश नहीं की। पीड़िता के पिता के अनुसार पवन सिंह उसे उठाकर ले गया है। बालिका की उम्र 17 साल 3 माह है और वह पवन सिंह के कब्जे में है। एफआईआर में नाम न होने पर नाराजगी पीड़िता के पिता ने अभिभाषक शुभम मांडिल और गौरव गुप्ता के जरिए हाई कोर्ट के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। कोर्ट में इस दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी सरकार की ओर से उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नामजद एफआईआर नहीं करने को लेकर फटकार भी लगाई। साथ ही सरकार को निर्देश जारी किए कि सोमवार को पुलिस नाबालिग, जो कि पवन सिंह की अवैध हिरासत में है, उसे किसी भी हालत में कोर्ट के समक्ष पेश करे। कोर्ट के आदेश के बाद बदला पुलिस का रवैया डेढ़ माह पहले अपनी बेटी के अपहरण की एफआईआर कराने वाले पिता से पुलिस ने कोई जानकारी नहीं ली थी। वहीं शनिवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होने और हाई कोर्ट से आदेश के तुरंत बाद पुलिस का रवैया बदल गया। 6 अप्रैल को बालिका को कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश होने की बात सामने आते ही बडगोंदा पुलिस तुरंत पीड़िता के घर पहुंच गई और उसके परिवारजनों से घटना की जानकारी लेने की कोशिश करती रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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