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Childrens Bodies Kept 24 Days; Grandfather Demands Justice

Childrens Bodies Kept 24 Days; Grandfather Demands Justice
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  • Manipur Bomb Attack: Childrens Bodies Kept 24 Days; Grandfather Demands Justice

इंफाल1 मिनट पहलेलेखक: डी. कुमार

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तस्वीर उस घर की उस खिड़की की है, जहां 7 अप्रैल को बम फटा था। बच्चे कमरे में सो रहे थे। स्थानीय लोगों ने खिड़की की मरम्मत करवा दी है।

मणिपुर के ट्रोंगलाओबी गांव में 7 अप्रैल को बम धमाके में 5 साल के बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई थी। दो भाई-बहनों का शव 24 दिन बाद भी इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मुर्दाघर में रखे हैं।

इस हमले का आरोप संदिग्ध कुकी उग्रवादियों पर लगाया गया। इन मासूम मौतों ने मणिपुर हिंसा के दर्द को कई गुना बढ़ा दिया है। भास्कर टीम गुरुवार को बच्चों के घर ट्रोंगलाओबी गांव पहुंची। खुले खेतों के पास बने घर में घुसते ही दीवार और आसपास मौजूद टिन की चादरों पर बम के छर्रों से हुए छेद दिल दहला देंगे।

जिस खिड़की पर बम फोड़ा गया था, उसकी मरम्मत करा दी गई है। लेकिन पूरा परिवार सदमे में है। बच्चों के 71 साल के दादा, बाबुटन ओइनाम कहते हैं- सरकार 10-10 लाख रुपए लेकर बच्चों का अंतिम संस्कार करने को कह रही है, लेकिन हमें पैसा नहीं चहिए। हमें हत्यारे चाहिए।

हमले के समय दोनों भाई-बहन अपनी मां के साथ सो रहे थे।

हमले के समय दोनों भाई-बहन अपनी मां के साथ सो रहे थे।

जिन्हें गिरफ्तार किया, वो तो पहले से ही जेल में थे…

मणिपुर की भाजपा सरकार ने इस घटना की जांच एनआईए को सौंपी है। हैरानी वाली बात ये है कि शुरुआत में कुछ संदिग्ध कुकी उग्रवादियों को गिरफ्तार करने की खबरें आईं, लेकिन आरोपी कौन हैं, कहां के हैं, ऐसे कई सवालों पर सरकार और पुलिस चुप्पी साधे हुए है।

बाबुटन ने बताया कि सरकार जिन तीन लोगों को पकड़ने का दावा कर रही है, उनके बारे में लोग कह रहे हैं कि ये उग्रवादी पहले से जेल में बंद हैं। फिर पुलिस ने उन्हीं को दोबारा क्यों गिरफ्तार किया? इन्हीं झूठे दावों के चलते हम अपने बच्चों के शव अब तक घर नहीं लाए।

परिवार का आरोप- सरकार हमसे कुछ छिपा रही

बाबुटन ओइनाम ने आगे कहा- हम तब तक अपने बच्चों का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे, जब तक उन्हें मारने वालों को सरकार गिरफ्तार कर सजा नहीं दे देती है। पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया, हमें नहीं पता। उन निर्दयी लोगों ने एक ऐसी नन्हीं बच्ची को मार डाला, जिसने जन्म के बाद अन्न का एक दाना भी नहीं चखा था।

बाबुटन कहते हैं कि गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम सिंह घटना के बाद हमारे घर पर आए थे। हमने उनसे दो टूक कहा था- हत्यारों को हमारे सामने सजा दो। सरकार हमसे कुछ छिपा रही है लेकिन हमें नहीं पता कि क्या?

24 दिन से 24 घंटे प्रदर्शन, महिलाएं बोलीं- सरकार झूठी

बच्चों की मौत के खिलाउ नेशनल हाईवे 202 पर मोइरांग में मैतेई महिलाएं 24 दिन से प्रदर्शन कर रही हैं। यहां बैठीं प्रेमिता कहती हैं, ‘हम 24 घंटे धरने पर हैं। सरकार से कोई मिलने नहीं आया। सरकार झूठ बोल रही है। उन्होंने किसी को गिरफ्तार नहीं किया। दूसरी ओर, कुकी संगठन ने भी ​गिरफ्तारी पर अनभिज्ञता जाहिर की।’

मणिपुर में एक साल राष्ट्रपति शासन रहा, 4 फरवरी को नई सरकार बनी

मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए।

मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था।

बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। करीब एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को मणिपुर में नई सरकार का गठन हुआ। भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

मणिपुर की यह खबर भी पढ़ें…

मणिपुर के उखरुल में फायरिंग से 3 की मौत:मिलिटेंट्स ने कई घर जलाए, नगा-कुकी समुदाय में तनाव; 7 अप्रैल से अब तक 10 मौतें

मणिपुर के उखरुल जिले में 24 अप्रैल को दो अलग-अलग फायरिंग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। सिनाकेइथेई गांव में हमलावरों ने फायरिंग के साथ कई घरों में आग भी लगा दी। राज्य में अप्रैल में हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में 10 मौतें हुईं। पूरी खबर पढ़ें…

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तस्वीर उस घर की उस खिड़की की है, जहां 7 अप्रैल को बम फटा था। बच्चे कमरे में सो रहे थे। स्थानीय लोगों ने खिड़की की मरम्मत करवा दी है।

मणिपुर के ट्रोंगलाओबी गांव में 7 अप्रैल को बम धमाके में 5 साल के बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई थी। दो भाई-बहनों का शव 24 दिन बाद भी इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मुर्दाघर में रखे हैं।

इस हमले का आरोप संदिग्ध कुकी उग्रवादियों पर लगाया गया। इन मासूम मौतों ने मणिपुर हिंसा के दर्द को कई गुना बढ़ा दिया है। भास्कर टीम गुरुवार को बच्चों के घर ट्रोंगलाओबी गांव पहुंची। खुले खेतों के पास बने घर में घुसते ही दीवार और आसपास मौजूद टिन की चादरों पर बम के छर्रों से हुए छेद दिल दहला देंगे।

जिस खिड़की पर बम फोड़ा गया था, उसकी मरम्मत करा दी गई है। लेकिन पूरा परिवार सदमे में है। बच्चों के 71 साल के दादा, बाबुटन ओइनाम कहते हैं- सरकार 10-10 लाख रुपए लेकर बच्चों का अंतिम संस्कार करने को कह रही है, लेकिन हमें पैसा नहीं चहिए। हमें हत्यारे चाहिए।

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जिन्हें गिरफ्तार किया, वो तो पहले से ही जेल में थे…

मणिपुर की भाजपा सरकार ने इस घटना की जांच एनआईए को सौंपी है। हैरानी वाली बात ये है कि शुरुआत में कुछ संदिग्ध कुकी उग्रवादियों को गिरफ्तार करने की खबरें आईं, लेकिन आरोपी कौन हैं, कहां के हैं, ऐसे कई सवालों पर सरकार और पुलिस चुप्पी साधे हुए है।

बाबुटन ने बताया कि सरकार जिन तीन लोगों को पकड़ने का दावा कर रही है, उनके बारे में लोग कह रहे हैं कि ये उग्रवादी पहले से जेल में बंद हैं। फिर पुलिस ने उन्हीं को दोबारा क्यों गिरफ्तार किया? इन्हीं झूठे दावों के चलते हम अपने बच्चों के शव अब तक घर नहीं लाए।

परिवार का आरोप- सरकार हमसे कुछ छिपा रही

बाबुटन ओइनाम ने आगे कहा- हम तब तक अपने बच्चों का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे, जब तक उन्हें मारने वालों को सरकार गिरफ्तार कर सजा नहीं दे देती है। पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया, हमें नहीं पता। उन निर्दयी लोगों ने एक ऐसी नन्हीं बच्ची को मार डाला, जिसने जन्म के बाद अन्न का एक दाना भी नहीं चखा था।

बाबुटन कहते हैं कि गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम सिंह घटना के बाद हमारे घर पर आए थे। हमने उनसे दो टूक कहा था- हत्यारों को हमारे सामने सजा दो। सरकार हमसे कुछ छिपा रही है लेकिन हमें नहीं पता कि क्या?

24 दिन से 24 घंटे प्रदर्शन, महिलाएं बोलीं- सरकार झूठी

बच्चों की मौत के खिलाउ नेशनल हाईवे 202 पर मोइरांग में मैतेई महिलाएं 24 दिन से प्रदर्शन कर रही हैं। यहां बैठीं प्रेमिता कहती हैं, ‘हम 24 घंटे धरने पर हैं। सरकार से कोई मिलने नहीं आया। सरकार झूठ बोल रही है। उन्होंने किसी को गिरफ्तार नहीं किया। दूसरी ओर, कुकी संगठन ने भी ​गिरफ्तारी पर अनभिज्ञता जाहिर की।’

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मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था।

बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। करीब एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को मणिपुर में नई सरकार का गठन हुआ। भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

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