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Dewas Firecracker Factory Blast | 3 Dead, 25 Injured

Dewas Firecracker Factory Blast | 3 Dead, 25 Injured

“इन्हें उठाओ…जल्दी बाहर लेकर चलो…कोई एंबुलेंस वाले को कॉल करो… इतने लोगों की यहां मौत हो गई…” देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद घटनास्थल पर यही चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।

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आगरा-मुंबई हाईवे किनारे स्थित इस फैक्ट्री में हुआ विस्फोट इतना भीषण था कि 5 मजदूरों के शरीर के चीथड़े उड़कर 20-25 फीट दूर जा गिरे। टुकड़ों को बोरे में समेटना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि 72 बार कॉल करने के बाद एम्बुलेंस मौके पर पहुंची थीं। घायलों को कंधे पर ढोकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था।

हादसे में धीरज, सनी, सुमित, अमर और गुड्डू की मौत हो गई, जबकि 25 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें 13 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को देवास और इंदौर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।

काले चश्मे में सुमित। उसके साथ ही धीरज की फोटो। दोनों की हादसे में जान चली गई।

फैक्ट्री मालिक पर रासुका की कार्रवाई

घटना के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने आरोपी अनिल मालवीय के विरुद्ध रासुका की कार्रवाई की है। आरोपी अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एसपी की रिपोर्ट पर पटाखा लाइसेंस का गलत तरीके से उपयोग करने एवं नियम शर्तों का पालन नहीं करने पर की गई है। मामले में पुलिस चार लोगों पर प्रकरण दर्ज करने की तैयारी कर रही है, जिसमें तीन फैक्ट्री के ठेकेदार शामिल है। कलेक्टर ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

दैनिक भास्कर टीम जब आगरा-मुंबई हाईवे किनारे स्थित फैक्ट्री पहुंची, तब तक परिसर से धुआं उठ रहा था। चारों तरफ अफरा-तफरी थी। बारूद से झुलसे मजदूरों को बाहर निकालने की कोशिशें जारी थीं। कई घायल बिना कपड़ों के तपती जमीन पर पड़े थे। उनके शरीर की चमड़ी तक झुलस चुकी थी और दर्द से उनकी चीखें निकल रही थीं।

मजदूरों ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद एंबुलेंस मौके तक नहीं पहुंच सकी। साथी मजदूर ही घायलों को कंधों पर उठाकर हाईवे तक लेकर आए। कुछ लोग गत्तों से हवा कर झुलसे लोगों को राहत देने की कोशिश करते रहे।

पढ़िए रिपोर्ट…

फैक्ट्री के अंदर पटाखों और पैकिंग सामग्री के बीच बैठे कर्मचारी बदहवास थे।

फैक्ट्री के अंदर पटाखों और पैकिंग सामग्री के बीच बैठे कर्मचारी बदहवास थे।

कपड़ों को उठाकर बोरे में भरती टीम।

कपड़ों को उठाकर बोरे में भरती टीम।

मृतकों में दो बिहार, एक यूपी का

10 मीटर दूर हुआ ब्लास्ट, पूरा जल गया सुमित शशि कुमार पासवान ने बताया कि हादसे में उनके दोस्त सुमित कुमार पासवान की मौत हुई है। सुमित उनसे करीब 10 मीटर की दूरी पर काम कर रहा था।

शशि ने कहा, “ब्लास्ट होते ही मैं जान बचाकर भागा। कुछ देर बाद लौटा तो सुमित जला हुआ पड़ा था। उसे और अन्य लोगों को बाहर निकाला। अंदर का मंजर इतना भयावह था कि शवों को देखना भी मुश्किल था।”

उन्होंने बताया कि सुमित फैक्ट्री में केमिकल बनाने का काम करता था। “हम खाना खाने के बाद वापस काम पर बैठे ही थे कि धमाका हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि लोगों के कपड़े तक जल गए।” सुमित के परिवार में माता-पिता और पत्नी हैं।

चचेरे भाई धीरज ने आंखों के सामने दम तोड़ा

अंजेश कुमार ने बताया कि हादसे में उनके चचेरे भाई धीरज कुमार की मौत हो गई। दोनों साथ में रहते थे। घटना के समय अंजेश फैक्ट्री के दूसरे सेगमेंट में काम कर रहे थे, जबकि धीरज पास के कमरे में था। अंजेश ने बताया, “ब्लास्ट में धीरज बुरी तरह झुलस गया था। लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं बच सका।”

दोस्त ने कहा-सुबह साथ में खाया था खाना बिहार के अररिया निवासी नीरज कुमार ने बताया कि वह भी कुछ दूरी पर दूसरे सेगमेंट में काम कर रहा था। सुबह दोनों साथ में फैक्ट्री पहुंचे थे और साथ बैठकर खाना खाया था। नीरज ने कहा, “हम अपने काम पर लौटे ही थे कि जोरदार धमाका हुआ।

धुआं हटने के बाद देखा तो सबकुछ खत्म हो चुका था। धीरज बुरी तरह झुलस चुका था और उसकी सांसें थम चुकी थीं।” नीरज ने बताया कि धीरज की शादी हो चुकी थी। उसकी पत्नी और माता-पिता गांव में रहते हैं। वह करीब एक माह पहले ही दोस्तों के साथ यहां काम करने आया था।

धमाके के बाद मजदूर बुरी तरह झुलस गए। कपड़े तक चमड़ी में चिपक गए।

धमाके के बाद मजदूर बुरी तरह झुलस गए। कपड़े तक चमड़ी में चिपक गए।

यूपी का रहने वाला था शनि

हादसे में शनि नाम के युवक की भी मौत हुई है, जो उत्तर प्रदेश का रहने वाला था। उसके दोस्त विपिन कुमार ने बताया, “मैं मशीन चला रहा था। हम दोनों लंबे समय से साथ रह रहे थे। सुबह 9 बजे की शिफ्ट में साथ फैक्ट्री पहुंचे थे। हंसते हुए काम पर आए थे, नहीं पता था कि यह आखिरी मुलाकात होगी।” विपिन ने बताया कि ब्लास्ट के बाद शनि पूरी तरह झुलस गया था।

2 किमी दूर गांव तक सुनाई दी धमाके की आवाज

प्रत्यक्षदर्शी राकेश मंडलोई ने बताया कि उनका घर फैक्ट्री से कुछ दूरी पर है। “सुबह करीब 11 बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ। बाहर निकला तो फैक्ट्री से धुआं उठ रहा था। टीन शेड हवा में उड़ते दिखे। पास जाकर देखा तो हाईवे तक शरीर के टुकड़े पड़े थे।”

ग्रामीणों के मुताबिक, धमाके की आवाज करीब 2 किलोमीटर दूर गांवों तक सुनाई दी। टोंककलां और कलमा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। कई घरों में धमाके से बर्तन तक हिल गए।

धमाका इतना तेज था कि मजदूरों के शरीर के चीथड़े हाईवे तक जा गिरे।

धमाका इतना तेज था कि मजदूरों के शरीर के चीथड़े हाईवे तक जा गिरे।

हाईवे तक पहुंचे शरीर के अवशेष

ब्लास्ट इतना तेज था कि फैक्ट्री का टीन शेड उड़कर हाईवे पर जा गिरा। विस्फोट वाली इमारत पूरी तरह ढह गई। मौके पर मलबे के बीच बारूद और केमिकल दबे दिखाई दिए। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद शवों के अवशेष 20 से 25 फीट दूर तक बिखरे पड़े थे। कुछ हिस्से हाईवे पर मिले, जबकि कुछ फैक्ट्री परिसर के आसपास। राहत टीम ने उन्हें समेटकर बोरे में भरा।

हादसे में झुलसे लोगों को इस तरह से बाहर निकाला।

हादसे में झुलसे लोगों को इस तरह से बाहर निकाला।

जहां बारूद बनता था, वहां अब सिर्फ मलबा

फैक्ट्री परिसर में छह से ज्यादा ब्लॉक बने थे। जिस हिस्से में विस्फोट हुआ, वहां केमिकल से बारूद तैयार किया जाता था। ब्लास्ट के बाद यह हिस्सा पूरी तरह मलबे में बदल गया। पास के ब्लॉकों में माचिस पटाखे बनाए जाते थे।

वहां बड़ी संख्या में अधजले पटाखे और पैकिंग सामग्री बिखरी मिली। परिसर में मजदूरों की चप्पलें, पानी की बोतलें और महिलाओं के इस्तेमाल का सामान पड़ा था। इससे अंदाजा लगाया गया कि बड़ी संख्या में महिलाएं पैकिंग का काम करती थीं।

धमाके के बाद मजदूर जान बचाकर भागे। वहां चप्पलें और पटाखा बनाने की सामग्री दिख रही।

धमाके के बाद मजदूर जान बचाकर भागे। वहां चप्पलें और पटाखा बनाने की सामग्री दिख रही।

खाना छोड़कर भागे बाकी मजदूर

फैक्ट्री के पिछले हिस्से में 20×20 फीट का एक हॉल मिला, जहां 25 से ज्यादा गद्दे बिछे थे। बताया गया कि बाहर से आए मजदूर यहीं रहते थे। कमरे में रोटी-सब्जी और खाने का सामान बिखरा पड़ा था। दृश्य देखकर लग रहा था कि लोग खाना खाने की तैयारी में थे और ब्लास्ट के बाद सबकुछ छोड़कर भागे।

ग्रामीण गौतम ने बताया, “मजदूरों के लिए खाना लेकर गाड़ी पहुंच चुकी थी। कुछ लोगों ने खाना ले भी लिया था, लेकिन खा नहीं पाए। उसी दौरान धमाका हो गया।” उन्होंने बताया कि कई मजदूर बिहार के थे और फैक्ट्री परिसर में बने शेड में ही रहते थे।

मजदूर खाना खाने की तैयारी में थे। धमाके के बाद जान बचाकर भागे।

मजदूर खाना खाने की तैयारी में थे। धमाके के बाद जान बचाकर भागे।

फैक्ट्री में 500 से ज्यादा मजदूर करते थे काम

मजदूरों के मुताबिक, फैक्ट्री में बारूद बनाने से लेकर पटाखा पैकिंग तक का काम होता था। रोजाना 500 से 600 मजदूर यहां काम करते थे। बाहर से आए 30 से ज्यादा मजदूर फैक्ट्री परिसर में ही रहते थे। मजदूरों ने बताया कि पुरुषों को प्रतिदिन 400 रुपए और महिलाओं को 250 रुपए दिहाड़ी मिलती थी। कुछ लोगों को मासिक वेतन भी दिया जाता था।

नासिर ने कहा- एल्युमीनियम पाउडर में ब्लास्ट

फैक्ट्री कर्मी मोहम्मद नासिर ने बताया, “कुछ लड़के काम खत्म करके खाना खाने गए थे, तभी एल्युमीनियम पाउडर में ब्लास्ट हो गया। पानी की सुविधा नहीं थी, गर्मी बढ़ने से हादसा हुआ।” नासिर के मुताबिक, उन्हें बिहार से “एमडी” नाम के सुपरवाइजर ने काम दिलाने के लिए यहां बुलाया था।

फैक्ट्री पूरी बनी नहीं, पटाखे बनने शुरू

हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर जमा हो गए और प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव किया। लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने बताया कि तीन बीघा से ज्यादा क्षेत्र में फैली इस फैक्ट्री में पिछले आठ महीने से काम चल रहा था। “फैक्ट्री पूरी तरह बनी भी नहीं थी और पटाखा निर्माण शुरू हो गया था। पहले भी छोटे हादसे हुए थे, लेकिन जनहानि नहीं हुई तो किसी ने ध्यान नहीं दिया।”

फैक्ट्री पूरी तरह बनी भी नहीं थी। इसमें पटाखे का निर्माण शुरू हो गया था।

फैक्ट्री पूरी तरह बनी भी नहीं थी। इसमें पटाखे का निर्माण शुरू हो गया था।

कलेक्टर बोले- हादसे में 5 की मौत, 25 घायल

कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में कुल 28 लोग घायल हुए थे। इनमें 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 25 घायल हैं। 12 घायलों को जिला अस्पताल देवास में भर्ती कराया गया है, जिनकी हालत स्थिर है। उन्हें शाम तक डिस्चार्ज किया जा सकता है। करीब 6 घायल अमलतास अस्पताल देवास में भर्ती हैं। वहीं, इंदौर के एमवाय अस्पताल में 4 और चोइथराम अस्पताल में 4 घायलों का इलाज चल रहा है।

अस्पताल के बेड पर दर्द से तड़पता घायल। पास बैठी महिला मदद मांगती रही।

अस्पताल के बेड पर दर्द से तड़पता घायल। पास बैठी महिला मदद मांगती रही।

संचालकों के पास दो लाइसेंस, चार नाम सामने आए

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री को 23 दिसंबर को लाइसेंस जारी किया गया था, जबकि 6 मई को ही उसका रिन्यूअल हुआ था। संचालकों के पास दो लाइसेंस थे—एक पटाखा निर्माण का और दूसरा विक्रय का। मामले की जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। जांच में अब तक चार लोगों के नाम चिन्हित किए गए हैं। इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

लोगों का कहना है कि कई बार कॉल करने के बाद ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची।

लोगों का कहना है कि कई बार कॉल करने के बाद ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची।

31 एंबुलेंस तत्काल पहुंची: सीनियर मैनेजर

108 एंबुलेंस सेवा मध्य प्रदेश के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह ने बताया कि इस घटना के लिए हमारी 31 एम्बुलेंस गाड़ियों को तत्काल रवाना किया गया था। सभी टीमें तेजी से मौके पर पहुंचीं। शुरुआती पहुंची 10 से अधिक एम्बुलेंसों ने घायलों को तुरंत सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया, जिससे उन्हें समय पर उपचार मिल सका।

उमंग सिंघार बोले- यह हादसा नहीं, प्रशासनिक लापरवाही

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुआ विस्फोट केवल हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की भयावह तस्वीर है। उन्होंने कहा, “3 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई लोग गंभीर रूप से घायल, महिलाओं के लापता होने की खबरें और शवों के अवशेष 20-25 फीट दूर तक बिखर जाना बेहद विचलित करने वाला है।”

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि ग्रामीण लगातार फैक्ट्री के अवैध संचालन की शिकायत करते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दोषी फैक्ट्री संचालकों, जिम्मेदार अधिकारियों और संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

यह खबर भी पढ़ें एमपी में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, 3 की मौत

मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में धीरज, सनी और सुमित नाम के 3 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए। इनमें 13 गंभीर घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया। पूरी खबर पढ़ें…

पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट की 20 तस्वीरें, झुलसे लोग भागते दिखे

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हादसे में धीरज, सनी, सुमित, अमर और गुड्डू की मौत हो गई, जबकि 25 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें 13 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को देवास और इंदौर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।

काले चश्मे में सुमित। उसके साथ ही धीरज की फोटो। दोनों की हादसे में जान चली गई।

फैक्ट्री मालिक पर रासुका की कार्रवाई

घटना के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने आरोपी अनिल मालवीय के विरुद्ध रासुका की कार्रवाई की है। आरोपी अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एसपी की रिपोर्ट पर पटाखा लाइसेंस का गलत तरीके से उपयोग करने एवं नियम शर्तों का पालन नहीं करने पर की गई है। मामले में पुलिस चार लोगों पर प्रकरण दर्ज करने की तैयारी कर रही है, जिसमें तीन फैक्ट्री के ठेकेदार शामिल है। कलेक्टर ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

दैनिक भास्कर टीम जब आगरा-मुंबई हाईवे किनारे स्थित फैक्ट्री पहुंची, तब तक परिसर से धुआं उठ रहा था। चारों तरफ अफरा-तफरी थी। बारूद से झुलसे मजदूरों को बाहर निकालने की कोशिशें जारी थीं। कई घायल बिना कपड़ों के तपती जमीन पर पड़े थे। उनके शरीर की चमड़ी तक झुलस चुकी थी और दर्द से उनकी चीखें निकल रही थीं।

मजदूरों ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद एंबुलेंस मौके तक नहीं पहुंच सकी। साथी मजदूर ही घायलों को कंधों पर उठाकर हाईवे तक लेकर आए। कुछ लोग गत्तों से हवा कर झुलसे लोगों को राहत देने की कोशिश करते रहे।

पढ़िए रिपोर्ट…

फैक्ट्री के अंदर पटाखों और पैकिंग सामग्री के बीच बैठे कर्मचारी बदहवास थे।

फैक्ट्री के अंदर पटाखों और पैकिंग सामग्री के बीच बैठे कर्मचारी बदहवास थे।

कपड़ों को उठाकर बोरे में भरती टीम।

कपड़ों को उठाकर बोरे में भरती टीम।

मृतकों में दो बिहार, एक यूपी का

10 मीटर दूर हुआ ब्लास्ट, पूरा जल गया सुमित शशि कुमार पासवान ने बताया कि हादसे में उनके दोस्त सुमित कुमार पासवान की मौत हुई है। सुमित उनसे करीब 10 मीटर की दूरी पर काम कर रहा था।

शशि ने कहा, “ब्लास्ट होते ही मैं जान बचाकर भागा। कुछ देर बाद लौटा तो सुमित जला हुआ पड़ा था। उसे और अन्य लोगों को बाहर निकाला। अंदर का मंजर इतना भयावह था कि शवों को देखना भी मुश्किल था।”

उन्होंने बताया कि सुमित फैक्ट्री में केमिकल बनाने का काम करता था। “हम खाना खाने के बाद वापस काम पर बैठे ही थे कि धमाका हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि लोगों के कपड़े तक जल गए।” सुमित के परिवार में माता-पिता और पत्नी हैं।

चचेरे भाई धीरज ने आंखों के सामने दम तोड़ा

अंजेश कुमार ने बताया कि हादसे में उनके चचेरे भाई धीरज कुमार की मौत हो गई। दोनों साथ में रहते थे। घटना के समय अंजेश फैक्ट्री के दूसरे सेगमेंट में काम कर रहे थे, जबकि धीरज पास के कमरे में था। अंजेश ने बताया, “ब्लास्ट में धीरज बुरी तरह झुलस गया था। लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं बच सका।”

दोस्त ने कहा-सुबह साथ में खाया था खाना बिहार के अररिया निवासी नीरज कुमार ने बताया कि वह भी कुछ दूरी पर दूसरे सेगमेंट में काम कर रहा था। सुबह दोनों साथ में फैक्ट्री पहुंचे थे और साथ बैठकर खाना खाया था। नीरज ने कहा, “हम अपने काम पर लौटे ही थे कि जोरदार धमाका हुआ।

धुआं हटने के बाद देखा तो सबकुछ खत्म हो चुका था। धीरज बुरी तरह झुलस चुका था और उसकी सांसें थम चुकी थीं।” नीरज ने बताया कि धीरज की शादी हो चुकी थी। उसकी पत्नी और माता-पिता गांव में रहते हैं। वह करीब एक माह पहले ही दोस्तों के साथ यहां काम करने आया था।

धमाके के बाद मजदूर बुरी तरह झुलस गए। कपड़े तक चमड़ी में चिपक गए।

धमाके के बाद मजदूर बुरी तरह झुलस गए। कपड़े तक चमड़ी में चिपक गए।

यूपी का रहने वाला था शनि

हादसे में शनि नाम के युवक की भी मौत हुई है, जो उत्तर प्रदेश का रहने वाला था। उसके दोस्त विपिन कुमार ने बताया, “मैं मशीन चला रहा था। हम दोनों लंबे समय से साथ रह रहे थे। सुबह 9 बजे की शिफ्ट में साथ फैक्ट्री पहुंचे थे। हंसते हुए काम पर आए थे, नहीं पता था कि यह आखिरी मुलाकात होगी।” विपिन ने बताया कि ब्लास्ट के बाद शनि पूरी तरह झुलस गया था।

2 किमी दूर गांव तक सुनाई दी धमाके की आवाज

प्रत्यक्षदर्शी राकेश मंडलोई ने बताया कि उनका घर फैक्ट्री से कुछ दूरी पर है। “सुबह करीब 11 बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ। बाहर निकला तो फैक्ट्री से धुआं उठ रहा था। टीन शेड हवा में उड़ते दिखे। पास जाकर देखा तो हाईवे तक शरीर के टुकड़े पड़े थे।”

ग्रामीणों के मुताबिक, धमाके की आवाज करीब 2 किलोमीटर दूर गांवों तक सुनाई दी। टोंककलां और कलमा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। कई घरों में धमाके से बर्तन तक हिल गए।

धमाका इतना तेज था कि मजदूरों के शरीर के चीथड़े हाईवे तक जा गिरे।

धमाका इतना तेज था कि मजदूरों के शरीर के चीथड़े हाईवे तक जा गिरे।

हाईवे तक पहुंचे शरीर के अवशेष

ब्लास्ट इतना तेज था कि फैक्ट्री का टीन शेड उड़कर हाईवे पर जा गिरा। विस्फोट वाली इमारत पूरी तरह ढह गई। मौके पर मलबे के बीच बारूद और केमिकल दबे दिखाई दिए। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद शवों के अवशेष 20 से 25 फीट दूर तक बिखरे पड़े थे। कुछ हिस्से हाईवे पर मिले, जबकि कुछ फैक्ट्री परिसर के आसपास। राहत टीम ने उन्हें समेटकर बोरे में भरा।

हादसे में झुलसे लोगों को इस तरह से बाहर निकाला।

हादसे में झुलसे लोगों को इस तरह से बाहर निकाला।

जहां बारूद बनता था, वहां अब सिर्फ मलबा

फैक्ट्री परिसर में छह से ज्यादा ब्लॉक बने थे। जिस हिस्से में विस्फोट हुआ, वहां केमिकल से बारूद तैयार किया जाता था। ब्लास्ट के बाद यह हिस्सा पूरी तरह मलबे में बदल गया। पास के ब्लॉकों में माचिस पटाखे बनाए जाते थे।

वहां बड़ी संख्या में अधजले पटाखे और पैकिंग सामग्री बिखरी मिली। परिसर में मजदूरों की चप्पलें, पानी की बोतलें और महिलाओं के इस्तेमाल का सामान पड़ा था। इससे अंदाजा लगाया गया कि बड़ी संख्या में महिलाएं पैकिंग का काम करती थीं।

धमाके के बाद मजदूर जान बचाकर भागे। वहां चप्पलें और पटाखा बनाने की सामग्री दिख रही।

धमाके के बाद मजदूर जान बचाकर भागे। वहां चप्पलें और पटाखा बनाने की सामग्री दिख रही।

खाना छोड़कर भागे बाकी मजदूर

फैक्ट्री के पिछले हिस्से में 20×20 फीट का एक हॉल मिला, जहां 25 से ज्यादा गद्दे बिछे थे। बताया गया कि बाहर से आए मजदूर यहीं रहते थे। कमरे में रोटी-सब्जी और खाने का सामान बिखरा पड़ा था। दृश्य देखकर लग रहा था कि लोग खाना खाने की तैयारी में थे और ब्लास्ट के बाद सबकुछ छोड़कर भागे।

ग्रामीण गौतम ने बताया, “मजदूरों के लिए खाना लेकर गाड़ी पहुंच चुकी थी। कुछ लोगों ने खाना ले भी लिया था, लेकिन खा नहीं पाए। उसी दौरान धमाका हो गया।” उन्होंने बताया कि कई मजदूर बिहार के थे और फैक्ट्री परिसर में बने शेड में ही रहते थे।

मजदूर खाना खाने की तैयारी में थे। धमाके के बाद जान बचाकर भागे।

मजदूर खाना खाने की तैयारी में थे। धमाके के बाद जान बचाकर भागे।

फैक्ट्री में 500 से ज्यादा मजदूर करते थे काम

मजदूरों के मुताबिक, फैक्ट्री में बारूद बनाने से लेकर पटाखा पैकिंग तक का काम होता था। रोजाना 500 से 600 मजदूर यहां काम करते थे। बाहर से आए 30 से ज्यादा मजदूर फैक्ट्री परिसर में ही रहते थे। मजदूरों ने बताया कि पुरुषों को प्रतिदिन 400 रुपए और महिलाओं को 250 रुपए दिहाड़ी मिलती थी। कुछ लोगों को मासिक वेतन भी दिया जाता था।

नासिर ने कहा- एल्युमीनियम पाउडर में ब्लास्ट

फैक्ट्री कर्मी मोहम्मद नासिर ने बताया, “कुछ लड़के काम खत्म करके खाना खाने गए थे, तभी एल्युमीनियम पाउडर में ब्लास्ट हो गया। पानी की सुविधा नहीं थी, गर्मी बढ़ने से हादसा हुआ।” नासिर के मुताबिक, उन्हें बिहार से “एमडी” नाम के सुपरवाइजर ने काम दिलाने के लिए यहां बुलाया था।

फैक्ट्री पूरी बनी नहीं, पटाखे बनने शुरू

हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर जमा हो गए और प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव किया। लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने बताया कि तीन बीघा से ज्यादा क्षेत्र में फैली इस फैक्ट्री में पिछले आठ महीने से काम चल रहा था। “फैक्ट्री पूरी तरह बनी भी नहीं थी और पटाखा निर्माण शुरू हो गया था। पहले भी छोटे हादसे हुए थे, लेकिन जनहानि नहीं हुई तो किसी ने ध्यान नहीं दिया।”

फैक्ट्री पूरी तरह बनी भी नहीं थी। इसमें पटाखे का निर्माण शुरू हो गया था।

फैक्ट्री पूरी तरह बनी भी नहीं थी। इसमें पटाखे का निर्माण शुरू हो गया था।

कलेक्टर बोले- हादसे में 5 की मौत, 25 घायल

कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में कुल 28 लोग घायल हुए थे। इनमें 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 25 घायल हैं। 12 घायलों को जिला अस्पताल देवास में भर्ती कराया गया है, जिनकी हालत स्थिर है। उन्हें शाम तक डिस्चार्ज किया जा सकता है। करीब 6 घायल अमलतास अस्पताल देवास में भर्ती हैं। वहीं, इंदौर के एमवाय अस्पताल में 4 और चोइथराम अस्पताल में 4 घायलों का इलाज चल रहा है।

अस्पताल के बेड पर दर्द से तड़पता घायल। पास बैठी महिला मदद मांगती रही।

अस्पताल के बेड पर दर्द से तड़पता घायल। पास बैठी महिला मदद मांगती रही।

संचालकों के पास दो लाइसेंस, चार नाम सामने आए

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री को 23 दिसंबर को लाइसेंस जारी किया गया था, जबकि 6 मई को ही उसका रिन्यूअल हुआ था। संचालकों के पास दो लाइसेंस थे—एक पटाखा निर्माण का और दूसरा विक्रय का। मामले की जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। जांच में अब तक चार लोगों के नाम चिन्हित किए गए हैं। इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

लोगों का कहना है कि कई बार कॉल करने के बाद ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची।

लोगों का कहना है कि कई बार कॉल करने के बाद ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची।

31 एंबुलेंस तत्काल पहुंची: सीनियर मैनेजर

108 एंबुलेंस सेवा मध्य प्रदेश के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह ने बताया कि इस घटना के लिए हमारी 31 एम्बुलेंस गाड़ियों को तत्काल रवाना किया गया था। सभी टीमें तेजी से मौके पर पहुंचीं। शुरुआती पहुंची 10 से अधिक एम्बुलेंसों ने घायलों को तुरंत सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया, जिससे उन्हें समय पर उपचार मिल सका।

उमंग सिंघार बोले- यह हादसा नहीं, प्रशासनिक लापरवाही

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुआ विस्फोट केवल हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की भयावह तस्वीर है। उन्होंने कहा, “3 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई लोग गंभीर रूप से घायल, महिलाओं के लापता होने की खबरें और शवों के अवशेष 20-25 फीट दूर तक बिखर जाना बेहद विचलित करने वाला है।”

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि ग्रामीण लगातार फैक्ट्री के अवैध संचालन की शिकायत करते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दोषी फैक्ट्री संचालकों, जिम्मेदार अधिकारियों और संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

यह खबर भी पढ़ें एमपी में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, 3 की मौत

मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में धीरज, सनी और सुमित नाम के 3 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए। इनमें 13 गंभीर घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया। पूरी खबर पढ़ें…

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