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Health Tips: बच्चों के ‘दूध के दांत’ गिरने वाले समझकर न करें इग्नोर, बन सकती है उम्र भर की परेशानी

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Health News : डॉ. आशीष जोशी के अनुसार, बच्चों के दांतों की सही देखभाल जरूरी है. 11-12 साल तक दांतों की नींव बनती है. मीठा और बोतल से दूध पीकर सोने की आदत नुकसानदायक है. अंगूठा चूसना भी हानिकारक है. . अगर इस दौरान दूध के दांतों में कैविटी हो जाए, तो इसका असर अंदर विकसित हो रहे परमानेंट दांतों पर भी पड़ता है.

पाली. अक्सर माता-पिता यह सोचकर बच्चों के दांतों की सफाई पर ध्यान नहीं देते कि ये तो दूध के दांत हैं, टूटेंगे और नए आ जाएंगे. लेकिन यह छोटी सी लापरवाही आगे चलकर परमानेंट दांतों को नुकसान पहुंचा सकती है. दंत विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में ओरल हाइजीन की अनदेखी करने से कैविटीज का संक्रमण मसूड़ों की गहराई तक पहुंच जाता है. बोतल से दूध पीकर सोने की आदत और कम उम्र में मीठा ज्यादा खाना बच्चों के दांतों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है. ऐसे में जरूरी है कि समय रहते बच्चों में सही आदतें विकसित की जाएं.

11-12 साल की उम्र तक बनती है दांतों की नींव
राजस्थान के दंत विशेषज्ञ और ओरोडेंटल सर्जन डॉ. आशीष जोशी ने बताया कि जन्म से लेकर 11-12 साल तक का समय बच्चों के दांतों के लिए सबसे अहम होता है. यही वह समय होता है जब स्थायी दांतों की नींव तैयार होती है. अगर इस दौरान दूध के दांतों में कैविटी हो जाए, तो इसका असर अंदर विकसित हो रहे परमानेंट दांतों पर भी पड़ता है. ऐसे में शुरुआती समय से ही दांतों की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है.

3 साल से पहले की आदतें बनती हैं समस्या की जड़
आमतौर पर माता-पिता बच्चों में ब्रश करने की आदत 3 साल की उम्र के बाद शुरू कराते हैं, लेकिन तब तक बच्चे के मुंह में 12 से 15 दांत आ चुके होते हैं. इन शुरुआती वर्षों में ही समस्या की शुरुआत हो जाती है. इस उम्र में बच्चों को मीठा और चॉकलेट ज्यादा पसंद आने लगता है. सबसे नुकसानदायक आदत है बच्चों को दूध की बोतल मुंह में लगाकर सुला देना. रातभर दांतों पर जमी शुगर बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देती है. समय पर सफाई न होने से दांत काले पड़ने लगते हैं और दर्द व पस जैसी समस्या भी हो सकती है, जिससे बच्चे के आत्मविश्वास पर भी असर पड़ता है.

अंगूठा चूसने की आदत भी है नुकसानदायक
डॉ. जोशी के अनुसार, अंगूठा चूसने की आदत भी बच्चों के दांतों और जबड़े के लिए हानिकारक होती है. लंबे समय तक ऐसा करने से दांतों का प्राकृतिक आकार बिगड़ सकता है. अंगूठे के दबाव के कारण दांत बाहर की ओर निकलने लगते हैं, जिसे बाद में ठीक करने के लिए लंबा और महंगा इलाज कराना पड़ता है.

पेरेंट्स के लिए एक्सपर्ट की सलाह, इन बातों का रखें ध्यान

  1. शुगर कंट्रोल: बच्चों को कम से कम मीठा और चिपचिपी चॉकलेट खिलाएं.
  2.  क्लीनिंग हैबिट: बोतल से दूध पिलाने के बाद बच्चे का मुंह साफ और गीले कपड़े से जरूर पोंछें.
  3.  सोते समय सावधानी: कभी भी दूध की बोतल मुंह में लगाकर बच्चे को न सुलाएं.
  4. जल्द शुरुआत: जैसे ही पहला दांत दिखाई दे, उसकी सफाई शुरू कर दें और 2-3 साल की उम्र तक सॉफ्ट ब्रश की आदत डाल दें.

About the Author

Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

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पाली. अक्सर माता-पिता यह सोचकर बच्चों के दांतों की सफाई पर ध्यान नहीं देते कि ये तो दूध के दांत हैं, टूटेंगे और नए आ जाएंगे. लेकिन यह छोटी सी लापरवाही आगे चलकर परमानेंट दांतों को नुकसान पहुंचा सकती है. दंत विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में ओरल हाइजीन की अनदेखी करने से कैविटीज का संक्रमण मसूड़ों की गहराई तक पहुंच जाता है. बोतल से दूध पीकर सोने की आदत और कम उम्र में मीठा ज्यादा खाना बच्चों के दांतों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है. ऐसे में जरूरी है कि समय रहते बच्चों में सही आदतें विकसित की जाएं.

11-12 साल की उम्र तक बनती है दांतों की नींव
राजस्थान के दंत विशेषज्ञ और ओरोडेंटल सर्जन डॉ. आशीष जोशी ने बताया कि जन्म से लेकर 11-12 साल तक का समय बच्चों के दांतों के लिए सबसे अहम होता है. यही वह समय होता है जब स्थायी दांतों की नींव तैयार होती है. अगर इस दौरान दूध के दांतों में कैविटी हो जाए, तो इसका असर अंदर विकसित हो रहे परमानेंट दांतों पर भी पड़ता है. ऐसे में शुरुआती समय से ही दांतों की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है.

3 साल से पहले की आदतें बनती हैं समस्या की जड़
आमतौर पर माता-पिता बच्चों में ब्रश करने की आदत 3 साल की उम्र के बाद शुरू कराते हैं, लेकिन तब तक बच्चे के मुंह में 12 से 15 दांत आ चुके होते हैं. इन शुरुआती वर्षों में ही समस्या की शुरुआत हो जाती है. इस उम्र में बच्चों को मीठा और चॉकलेट ज्यादा पसंद आने लगता है. सबसे नुकसानदायक आदत है बच्चों को दूध की बोतल मुंह में लगाकर सुला देना. रातभर दांतों पर जमी शुगर बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देती है. समय पर सफाई न होने से दांत काले पड़ने लगते हैं और दर्द व पस जैसी समस्या भी हो सकती है, जिससे बच्चे के आत्मविश्वास पर भी असर पड़ता है.

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  4. जल्द शुरुआत: जैसे ही पहला दांत दिखाई दे, उसकी सफाई शुरू कर दें और 2-3 साल की उम्र तक सॉफ्ट ब्रश की आदत डाल दें.

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Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

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