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Liver Cirrhosis : फरीदाबाद में लिवर सिरोसिस के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. ये ऐसा रोग है जो किसी को भी हो सकता है. इस बीमारी का असर सिर्फ लीवर तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे शरीर पर पड़ता है. सिर्फ दवाइयों से ही इस बीमारी को संभाला नहीं जा सकता. ऐसे में क्या करना होगा? लोकल 18 ने इस बारे में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की डॉ. धीरजा बब्बर से बात की. डॉ. धीरजा बताती हैं कि सिरोसिस के मरीजों में अक्सर मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती है.
फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में लीवर से जुड़ी बढ़ती बीमारियों के बीच एक अहम जानकारी सामने आई है. लीवर सिरोसिस से जूझ रहे मरीजों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस बीमारी का असर सिर्फ लीवर तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे शरीर पर पड़ता है. इस बारे में लोकल 18 ने फरीदाबाद सर्वोदय हॉस्पिटल की डॉ. धीरजा बब्बर (Group Head – Physiotherapy) से बात की. डॉ. धीरजा कहती हैं कि सिरोसिस के मरीजों में अक्सर मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती है. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में सारकोपेनिया कहा जाता है. ऐसे मरीजों को अक्सर हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस होती है. जल्दी थकान लगती है और कई बार सांस फूलने जैसी समस्या भी होने लगती है. ये सभी लक्षण इस बात का संकेत हैं कि शरीर की मसल्स कमजोर हो रही हैं.
डॉ. धीरजा बब्बर कहती हैं कि सिर्फ दवाइयों से ही इस बीमारी को संभाला नहीं जा सकता. मरीज की लाइफ को बेहतर बनाने के लिए फिजियोथैरेपी बहुत बड़ा रोल निभाती है. सही समय पर अगर सही तरीके से फिजियोथैरेपी शुरू की जाए तो मरीज की हालत में काफी सुधार आ सकता है. डॉ. धीरजा के मुताबिक, लीवर सिरोसिस के मरीजों में अक्सर चलने-फिरने में दिक्कत, शरीर में असहायपन और संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. ऐसे में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, बैलेंस और को ऑर्डिनेशन एक्सरसाइज काफी मददगार साबित होती हैं. इससे मरीज के गिरने का खतरा भी कम हो जाता है.
अमोनिया लेवल
डॉ. धीरजा कहती हैं कि हर मरीज की स्थिति अलग होती है इसलिए फिजियोथैरेपी भी उसी हिसाब से कस्टमाइज की जाती है. कौन सी मसल कितनी कमजोर है उसी के अनुसार एक्सरसाइज प्लान किया जाता है. धीरे-धीरे मसल्स को मजबूत किया जाता है जिससे मरीज के लिए रोजमर्रा के काम करना और चलना-फिरना आसान हो जाता है. सही एक्सरसाइज करने से शरीर में बढ़ा हुआ अमोनिया लेवल भी कम करने में मदद मिलती है जो लीवर सिरोसिस के मरीजों के लिए काफी जरूरी होता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें















































