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Israeli Tourists Seek Peace in Kasaar Devi, Uttarakhand Amidst War

Israeli Tourists Seek Peace in Kasaar Devi, Uttarakhand Amidst War

कसार में ट्रेकिंग करते इजराइली टूरिस्ट और होटल में शांति से लंच करते हुए।

इजराइल में जारी युद्ध और लगातार बने तनावपूर्ण हालात के बीच वहां के लोग शांति की खोज में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पहुंच रहे हैं। यहां पर स्थित कसार देवी क्षेत्र इजराइली टूरिस्टों के लिए ऐसा सुरक्षित और शांत ठिकाना बना हुआ है, जहां वे कुछ समय के लिए य

.

हर साल की तरह इस बार भी इजराइली पर्यटक यहां पहुंचे हैं। हालांकि इस बार उनकी संख्या पहले के मुकाबले कम है। वीकेंड के दौरान जहां पहले 250 से 300 विदेशी पर्यटक पहुंचते थे, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर करीब 100 से 120 के बीच रह गया है।

इसी बीच इजराइली समुदाय का प्रमुख धार्मिक पर्व ‘पासओवर’ भी इन दिनों चल रहा है, जो 1 अप्रैल से शुरू होकर 9 अप्रैल तक मनाया जा रहा है। इस पर्व के बीच ये विदेशी मेहमान शांत वादियों के बीच अपना समय बिता रहे हैं।

पर्यटकों का कहना है कि इन शांत वादियों में आकर उन्हें शांति मिली है।

पहले कसार देवी क्षेत्र के बारे में जानिए…

अल्मोड़ा शहर से 8 किलोमीटर दूर स्थित कसार देवी क्षेत्र लंबे समय से ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना का केंद्र रहा है। देवदार और चीड़ के जंगलों से घिरा यह इलाका शांत वातावरण और हिमालय के सुंदर दृश्यों के लिए जाना जाता है।

दशकों से विदेशी पर्यटक यहां मानसिक शांति और ध्यान के लिए आते रहे हैं। साल 1850 के आसपास से ही इस क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई थी। पहले यहां मुख्य रूप से विदेशी ही पहुंचते थे, लेकिन कोविड के बाद देश के पर्यटकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।

अपने मेडिटेटिव माहौल और प्राकृतिक सुंदरता के कारण हर हफ्ते यहां पर करीब सौ से सवा सौ तक विदेशी पर्यटक पहुंच रहे हैं, इनमें से ज्यादातर इजराइली हैं।

कसार क्षेत्र में स्थित कसार माता का मंदिर।

कसार क्षेत्र में स्थित कसार माता का मंदिर।

पासओवर के चलते पहुंचे 100 से ज्यादा इजराइली

पासओवर पर्व के चलते इस सप्ताह करीब 110 से ज्यादा इजराइली अल्मोड़ा पहुंचे हैं। इनमें से अधिकतर कसार देवी और उसके आसपास के क्षेत्रों में ठहरे हुए हैं, जहां वे अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मना रहे हैं।

हर साल इस दौरान यहां विदेशी पर्यटकों की अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय हालातों का असर साफ दिखाई दे रहा है। संख्या बनी हुई है, लेकिन पहले जैसी भीड़ नहीं है, जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसाय पर भी असर पड़ा है।

अल्मोड़ा में पहुंचा इजराइली टूरिस्ट ओई।

अल्मोड़ा में पहुंचा इजराइली टूरिस्ट ओई।

इजरायली पर्यटक ओई ने सुनाई आपबीती

कसार देवी पहुंचे इजराइल के कच्छमोना निवासी ओई ने अपने देश के हालात को लेकर दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए युद्ध के बाद इजरायल में हालात लगातार खराब बने हुए हैं और आम लोगों के लिए सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो गया है।

ओई ने कहा कि देश के कई हिस्सों में लगातार बमबारी और धमाकों की आवाज सुनाई देती है। उत्तरी और दक्षिणी दोनों क्षेत्रों में हवाई हमले हो रहे हैं, जिससे लोगों के भीतर डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इसी कारण उन्हें और उनके साथियों को अपना देश छोड़कर बाहर आना पड़ा।

‘पहले 300 तक आते थे, अब 100-125’

कसार देवी होटल एसोसिएशन के नगर अध्यक्ष मोहन रयाल के अनुसार, इस बार पर्यटकों की संख्या में गिरावट साफ तौर पर देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले वीकेंड के दौरान 250 से 300 तक विदेशी पर्यटक पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 100 से 125 रह गई है।

मोहन रयाल ने कहा कि इजरायल में चल रहे हालात इसका प्रमुख कारण हैं। वहां लगभग हर नागरिक किसी न किसी रूप में सेना से जुड़ा होता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस बुला लिया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग यात्रा नहीं कर पा रहे हैं।

क्या है यहूदियों का पासओवर पर्व?

पासओवर यहूदियों का प्रमुख धार्मिक पर्व है, जो उनके इतिहास और आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह पर्व मिस्र में गुलामी से मिली आजादी की याद में मनाया जाता है और स्वतंत्रता, विश्वास तथा सामूहिक एकता का संदेश देता है।

इस दौरान ‘मट्ज़ा’ यानी बिना खमीर की रोटी का विशेष महत्व होता है और ‘सेडर’ नामक पारंपरिक भोजन का आयोजन किया जाता है। परिवार एक साथ बैठकर इस पर्व को मनाते हैं और परंपरागत विधि से मुक्ति की कथा को याद करते हैं।

कसार देवी में ठहरे इजरायली पर्यटक भी इन्हीं परंपराओं के साथ इस पर्व को मना रहे हैं, जिससे यहां का माहौल सांस्कृतिक रूप से अलग और जीवंत नजर आ रहा है।

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ये खबर भी पढ़ें…

उत्तराखंड के कालसी मंदिर में चमत्कारी पेड़:पुजारी बोले- यहां आने से हर मुराद होती है पूरी, पांडवों को यहीं मिला जीत का आशीर्वाद

यहां जो सुकून और शांति मन को मिलती है वो अलग ही होती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर तक पहुंचते-पहुंचते ही मन हल्का हो जाता है, जैसे कोई अदृश्य शक्ति अपनी ओर खींच रही हो। (पढ़ें पूरी खबर)

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कसार में ट्रेकिंग करते इजराइली टूरिस्ट और होटल में शांति से लंच करते हुए।

इजराइल में जारी युद्ध और लगातार बने तनावपूर्ण हालात के बीच वहां के लोग शांति की खोज में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पहुंच रहे हैं। यहां पर स्थित कसार देवी क्षेत्र इजराइली टूरिस्टों के लिए ऐसा सुरक्षित और शांत ठिकाना बना हुआ है, जहां वे कुछ समय के लिए य

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हर साल की तरह इस बार भी इजराइली पर्यटक यहां पहुंचे हैं। हालांकि इस बार उनकी संख्या पहले के मुकाबले कम है। वीकेंड के दौरान जहां पहले 250 से 300 विदेशी पर्यटक पहुंचते थे, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर करीब 100 से 120 के बीच रह गया है।

इसी बीच इजराइली समुदाय का प्रमुख धार्मिक पर्व ‘पासओवर’ भी इन दिनों चल रहा है, जो 1 अप्रैल से शुरू होकर 9 अप्रैल तक मनाया जा रहा है। इस पर्व के बीच ये विदेशी मेहमान शांत वादियों के बीच अपना समय बिता रहे हैं।

पर्यटकों का कहना है कि इन शांत वादियों में आकर उन्हें शांति मिली है।

पहले कसार देवी क्षेत्र के बारे में जानिए…

अल्मोड़ा शहर से 8 किलोमीटर दूर स्थित कसार देवी क्षेत्र लंबे समय से ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना का केंद्र रहा है। देवदार और चीड़ के जंगलों से घिरा यह इलाका शांत वातावरण और हिमालय के सुंदर दृश्यों के लिए जाना जाता है।

दशकों से विदेशी पर्यटक यहां मानसिक शांति और ध्यान के लिए आते रहे हैं। साल 1850 के आसपास से ही इस क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई थी। पहले यहां मुख्य रूप से विदेशी ही पहुंचते थे, लेकिन कोविड के बाद देश के पर्यटकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।

अपने मेडिटेटिव माहौल और प्राकृतिक सुंदरता के कारण हर हफ्ते यहां पर करीब सौ से सवा सौ तक विदेशी पर्यटक पहुंच रहे हैं, इनमें से ज्यादातर इजराइली हैं।

कसार क्षेत्र में स्थित कसार माता का मंदिर।

कसार क्षेत्र में स्थित कसार माता का मंदिर।

पासओवर के चलते पहुंचे 100 से ज्यादा इजराइली

पासओवर पर्व के चलते इस सप्ताह करीब 110 से ज्यादा इजराइली अल्मोड़ा पहुंचे हैं। इनमें से अधिकतर कसार देवी और उसके आसपास के क्षेत्रों में ठहरे हुए हैं, जहां वे अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मना रहे हैं।

हर साल इस दौरान यहां विदेशी पर्यटकों की अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय हालातों का असर साफ दिखाई दे रहा है। संख्या बनी हुई है, लेकिन पहले जैसी भीड़ नहीं है, जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसाय पर भी असर पड़ा है।

अल्मोड़ा में पहुंचा इजराइली टूरिस्ट ओई।

अल्मोड़ा में पहुंचा इजराइली टूरिस्ट ओई।

इजरायली पर्यटक ओई ने सुनाई आपबीती

कसार देवी पहुंचे इजराइल के कच्छमोना निवासी ओई ने अपने देश के हालात को लेकर दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए युद्ध के बाद इजरायल में हालात लगातार खराब बने हुए हैं और आम लोगों के लिए सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो गया है।

ओई ने कहा कि देश के कई हिस्सों में लगातार बमबारी और धमाकों की आवाज सुनाई देती है। उत्तरी और दक्षिणी दोनों क्षेत्रों में हवाई हमले हो रहे हैं, जिससे लोगों के भीतर डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इसी कारण उन्हें और उनके साथियों को अपना देश छोड़कर बाहर आना पड़ा।

‘पहले 300 तक आते थे, अब 100-125’

कसार देवी होटल एसोसिएशन के नगर अध्यक्ष मोहन रयाल के अनुसार, इस बार पर्यटकों की संख्या में गिरावट साफ तौर पर देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले वीकेंड के दौरान 250 से 300 तक विदेशी पर्यटक पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 100 से 125 रह गई है।

मोहन रयाल ने कहा कि इजरायल में चल रहे हालात इसका प्रमुख कारण हैं। वहां लगभग हर नागरिक किसी न किसी रूप में सेना से जुड़ा होता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस बुला लिया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग यात्रा नहीं कर पा रहे हैं।

क्या है यहूदियों का पासओवर पर्व?

पासओवर यहूदियों का प्रमुख धार्मिक पर्व है, जो उनके इतिहास और आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह पर्व मिस्र में गुलामी से मिली आजादी की याद में मनाया जाता है और स्वतंत्रता, विश्वास तथा सामूहिक एकता का संदेश देता है।

इस दौरान ‘मट्ज़ा’ यानी बिना खमीर की रोटी का विशेष महत्व होता है और ‘सेडर’ नामक पारंपरिक भोजन का आयोजन किया जाता है। परिवार एक साथ बैठकर इस पर्व को मनाते हैं और परंपरागत विधि से मुक्ति की कथा को याद करते हैं।

कसार देवी में ठहरे इजरायली पर्यटक भी इन्हीं परंपराओं के साथ इस पर्व को मना रहे हैं, जिससे यहां का माहौल सांस्कृतिक रूप से अलग और जीवंत नजर आ रहा है।

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उत्तराखंड के कालसी मंदिर में चमत्कारी पेड़:पुजारी बोले- यहां आने से हर मुराद होती है पूरी, पांडवों को यहीं मिला जीत का आशीर्वाद

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