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NCERT Judicial Corruption Chapter Controversy; CJI Surya Kant

NCERT Judicial Corruption Chapter Controversy; CJI Surya Kant
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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने NCERT की क्लास 8 की नई किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” का चैप्टर शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI ने कहा- किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कानून अपना काम करेगा। कोर्ट इस मामले पर खुद एक्शन लेने के लिए विचार कर रहा है।

दरअसल, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया है। इस चैप्टर में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार, हाईकोर्ट्स के 62 लाख 40, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला

बुधवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिबल ने कोर्ट में NCERT के इस कदम के बारे में बताया। उन्होंने कहा- 8वीं के छात्रों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह चिंता का विषय है। हम यहां बार की चिंता लेकर आए हैं।

एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सेलेक्टिविटी, यह दूसरे एरिया में भी है लेकिन ज्यूडिशियल करप्शन में नहीं। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह किताब बेसिक स्ट्रक्चर के ही खिलाफ लगती है।

CJI सूर्यकांत ने कहा- “प्लीज कुछ दिन इंतजार करें। बार और बेंच सभी परेशान हैं। सभी हाई कोर्ट के जज परेशान हैं। मैं इस मामले को खुद से देखूंगा। कानून अपना काम करेगा।

किताब के चैप्टर का एक हिस्सा जिसमें पेंडिंग केस का जिक्र है…

नए सेक्शन में ज्यूडीशियरी से जुड़े पॉइंट

  • इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है।
  • करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है।
  • ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं।
  • किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं।
  • किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है।
  • बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।
  • चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है।
  • यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है।

किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र

किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।”

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने NCERT की क्लास 8 की नई किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” का चैप्टर शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI ने कहा- किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कानून अपना काम करेगा। कोर्ट इस मामले पर खुद एक्शन लेने के लिए विचार कर रहा है।

दरअसल, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया है। इस चैप्टर में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार, हाईकोर्ट्स के 62 लाख 40, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला

बुधवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिबल ने कोर्ट में NCERT के इस कदम के बारे में बताया। उन्होंने कहा- 8वीं के छात्रों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह चिंता का विषय है। हम यहां बार की चिंता लेकर आए हैं।

एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सेलेक्टिविटी, यह दूसरे एरिया में भी है लेकिन ज्यूडिशियल करप्शन में नहीं। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह किताब बेसिक स्ट्रक्चर के ही खिलाफ लगती है।

CJI सूर्यकांत ने कहा- “प्लीज कुछ दिन इंतजार करें। बार और बेंच सभी परेशान हैं। सभी हाई कोर्ट के जज परेशान हैं। मैं इस मामले को खुद से देखूंगा। कानून अपना काम करेगा।

किताब के चैप्टर का एक हिस्सा जिसमें पेंडिंग केस का जिक्र है…

नए सेक्शन में ज्यूडीशियरी से जुड़े पॉइंट

  • इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है।
  • करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है।
  • ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं।
  • किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं।
  • किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है।
  • बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।
  • चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है।
  • यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है।

किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र

किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।”

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