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Rajesh Mehta SEBI Ban | Rajesh Exports Revenue Fraud Allegations

Rajesh Mehta SEBI Ban | Rajesh Exports Revenue Fraud Allegations

मुंबई3 मिनट पहले

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सेबी ने गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी है। बाजार नियमाक ने शुरुआती जांच में पाया कि कंपनी ने अपने कुल रेवेन्यू का करीब 97% हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। इस खबर के बाद कंपनी का शेयर 5% टूट गया।

सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं पूरा मामला….

सवाल 1: सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता पर क्या कार्रवाई की है?

जवाब: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और चेयरमैन राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने से अंतरिम रोक लगा दी है। सेबी को कंपनी के वित्तीय कामकाज में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।

सवाल 2: सेबी को जांच में क्या गड़बड़ी मिली है, जिसे रेगुलेटर ने चौंकाने वाला कहा है?

जवाब: सेबी ने 109 पन्नों का एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शुरुआती जांच के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी कुल रिपोर्ट की गई बिक्री को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। सेबी के मुताबिक कंपनी का लगभग 97% से 99% रेवेन्यू केवल कागजों पर हो सकता है। आदेश में कहा गया है कि इतनी बड़ी मात्रा में रेवेन्यू बढ़ाना चौंकाने वाला है।

सवाल 3: सेबी के आरोपों पर राजेश एक्सपोर्ट्स ने क्या आधिकारिक सफाई दी है?

जवाब: कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि उन्हें 3 जून 2026 को सेबी का अंतरिम आदेश मिला है। कंपनी के मुताबिक, यह सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और सेबी ने अभी तक किसी भी पहलू पर कोई अंतिम या प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला है।

रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप पर कंपनी ने कहा कि कंपनी का घोषित किया गया रेवेन्यू पूरी तरह सही है और इसमें कोई बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना नहीं है। ऐसा लगता है कि सेबी और कंपनी के बीच किसी तरह का ‘कम्युनिकेशन गैप’ और भ्रम पैदा हुआ है।

सवाल 4: सेबी के ऑर्डर के बाद आज कंपनी के शेयरों का बाजार में क्या हाल रहा?

जवाब: वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बाद गुरुवार के पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में बिकवाली रही। कंपनी का शेयर लगातार 5% के लोअर सर्किट पर लॉक रहा। यानी कि बाजार में सिर्फ सेलर मौजूद थे और कोई खरीदार नहीं था।

सवाल 5: राजेश मेहता कौन हैं और उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत कैसे की थी?

जवाब: 60 साल के राजेश जे. मेहता बेंगलुरु के रहने वाले हैं और वे राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर और चेयरमैन हैं। उन्होंने कॉलेज छोड़ने के बाद बहुत कम उम्र में कीमती धातुओं के बिजनेस में कदम रखा था। शुरुआती दिनों में वे चांदी का व्यापार करते थे, जिसके बाद वे ज्वेलरी बिजनेस में आए।

उन्होंने साल 1989 में राजेश एक्सपोर्ट्स की स्थापना की और इसे दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक बना दिया।

सवाल 6: राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस मॉडल क्या है और कंपनी कितनी बड़ी है?

जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस कच्चे सोने को खरीदने से शुरू होता है। कंपनी इसे रिफाइन करके शुद्ध सोना बनाती है, फिर इससे ज्वेलरी तैयार करती है और सोने के प्रोडक्ट्स बेचती है। कंपनी का सालाना रेवेन्यू लगभग 39.2 बिलियन डॉलर (करीब 3.75 लाख करोड़ रुपए) है।

सवाल 7: कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट या मील का पत्थर क्या रहा है?

जवाब: कंपनी के बिजनेस में सबसे बड़ा बदलाव साल 2015 में आया था। तब राजेश एक्सपोर्ट्स ने स्विट्जरलैंड की मशहूर गोल्ड रिफाइनरी ‘वैलकैम्बी’ का अधिग्रहण किया था।

वैलकैम्बी को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग फैसिलिटीज में से एक माना जाता है। इस डील के बाद राजेश मेहता की कंपनी ग्लोबल लेवल पर एक बड़ी ताकत बनकर उभरी थी।

सवाल 8: रेवेन्यू में गड़बड़ी का कुल आंकड़ा कितना आंका जा रहा है?

जवाब: निवेशकों और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर सेबी के दावे को आधार माना जाए तो रेवेन्यू में गड़बड़ी का यह आंकड़ा करीब 15.15 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि इसे कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े संदिग्ध रेवेन्यू मामलों में से एक माना जा रहा है।

सवाल 9: इस कार्रवाई का देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC पर क्या असर पड़ा है?

जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी के इस एक्शन का सीधा असर लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) पर पड़ा है। LIC के पास राजेश एक्सपोर्ट्स की कुल 10.8% हिस्सेदारी है। सेबी का ऑर्डर आने के बाद LIC के शेयरों में भी करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई है।

सवाल 10: आम निवेशकों और LIC को इस मामले से क्या नुकसान हो सकता है?

जवाब: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर रेवेन्यू के फर्जी होने के आरोपों से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी गिरावट आ सकती है। शेयर की कीमतें गिरने से कंपनी में LIC के किए गए निवेश की वैल्यू कम हो जाएगी। इसके अलावा, जिन रिटेल निवेशकों ने इस कंपनी के शेयर खरीद रखे हैं, उनकी पूंजी भी डूबने का खतरा बढ़ गया है।

सवाल 11: इस अंतरिम आदेश के बाद आगे क्या प्रक्रिया होगी?

जवाब: सेबी का यह आदेश अभी अंतरिम है, जिसका मतलब है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। सेबी अपनी विस्तृत जांच जारी रखेगा। इस दौरान राजेश मेहता और कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। यदि आरोप अंतिम जांच में भी सही साबित होते हैं, तो सेबी कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ प्रमोटर्स को लंबे समय के लिए बाजार से प्रतिबंधित कर सकता है और मामला आपराधिक जांच एजेंसियों को भी भेजा जा सकता है।

नॉलेज पार्ट: जानें क्या होता है ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ ?

जब कोई कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत दिखाने, बैंक लोन हासिल करने या शेयर बाजार में अपने शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए असल बिक्री से ज्यादा कमाई कागजों पर दिखाती है, तो उसे ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ या रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना कहते हैं। इसमें अक्सर बिना किसी वास्तविक माल की डिलीवरी के केवल बिल बना दिए जाते हैं।

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मुंबई3 मिनट पहले

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सेबी ने गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी है। बाजार नियमाक ने शुरुआती जांच में पाया कि कंपनी ने अपने कुल रेवेन्यू का करीब 97% हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। इस खबर के बाद कंपनी का शेयर 5% टूट गया।

सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं पूरा मामला….

सवाल 1: सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता पर क्या कार्रवाई की है?

जवाब: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और चेयरमैन राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने से अंतरिम रोक लगा दी है। सेबी को कंपनी के वित्तीय कामकाज में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।

सवाल 2: सेबी को जांच में क्या गड़बड़ी मिली है, जिसे रेगुलेटर ने चौंकाने वाला कहा है?

जवाब: सेबी ने 109 पन्नों का एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शुरुआती जांच के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी कुल रिपोर्ट की गई बिक्री को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। सेबी के मुताबिक कंपनी का लगभग 97% से 99% रेवेन्यू केवल कागजों पर हो सकता है। आदेश में कहा गया है कि इतनी बड़ी मात्रा में रेवेन्यू बढ़ाना चौंकाने वाला है।

सवाल 3: सेबी के आरोपों पर राजेश एक्सपोर्ट्स ने क्या आधिकारिक सफाई दी है?

जवाब: कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि उन्हें 3 जून 2026 को सेबी का अंतरिम आदेश मिला है। कंपनी के मुताबिक, यह सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और सेबी ने अभी तक किसी भी पहलू पर कोई अंतिम या प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला है।

रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप पर कंपनी ने कहा कि कंपनी का घोषित किया गया रेवेन्यू पूरी तरह सही है और इसमें कोई बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना नहीं है। ऐसा लगता है कि सेबी और कंपनी के बीच किसी तरह का ‘कम्युनिकेशन गैप’ और भ्रम पैदा हुआ है।

सवाल 4: सेबी के ऑर्डर के बाद आज कंपनी के शेयरों का बाजार में क्या हाल रहा?

जवाब: वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बाद गुरुवार के पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में बिकवाली रही। कंपनी का शेयर लगातार 5% के लोअर सर्किट पर लॉक रहा। यानी कि बाजार में सिर्फ सेलर मौजूद थे और कोई खरीदार नहीं था।

सवाल 5: राजेश मेहता कौन हैं और उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत कैसे की थी?

जवाब: 60 साल के राजेश जे. मेहता बेंगलुरु के रहने वाले हैं और वे राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर और चेयरमैन हैं। उन्होंने कॉलेज छोड़ने के बाद बहुत कम उम्र में कीमती धातुओं के बिजनेस में कदम रखा था। शुरुआती दिनों में वे चांदी का व्यापार करते थे, जिसके बाद वे ज्वेलरी बिजनेस में आए।

उन्होंने साल 1989 में राजेश एक्सपोर्ट्स की स्थापना की और इसे दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक बना दिया।

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जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस कच्चे सोने को खरीदने से शुरू होता है। कंपनी इसे रिफाइन करके शुद्ध सोना बनाती है, फिर इससे ज्वेलरी तैयार करती है और सोने के प्रोडक्ट्स बेचती है। कंपनी का सालाना रेवेन्यू लगभग 39.2 बिलियन डॉलर (करीब 3.75 लाख करोड़ रुपए) है।

सवाल 7: कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट या मील का पत्थर क्या रहा है?

जवाब: कंपनी के बिजनेस में सबसे बड़ा बदलाव साल 2015 में आया था। तब राजेश एक्सपोर्ट्स ने स्विट्जरलैंड की मशहूर गोल्ड रिफाइनरी ‘वैलकैम्बी’ का अधिग्रहण किया था।

वैलकैम्बी को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग फैसिलिटीज में से एक माना जाता है। इस डील के बाद राजेश मेहता की कंपनी ग्लोबल लेवल पर एक बड़ी ताकत बनकर उभरी थी।

सवाल 8: रेवेन्यू में गड़बड़ी का कुल आंकड़ा कितना आंका जा रहा है?

जवाब: निवेशकों और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर सेबी के दावे को आधार माना जाए तो रेवेन्यू में गड़बड़ी का यह आंकड़ा करीब 15.15 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि इसे कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े संदिग्ध रेवेन्यू मामलों में से एक माना जा रहा है।

सवाल 9: इस कार्रवाई का देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC पर क्या असर पड़ा है?

जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी के इस एक्शन का सीधा असर लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) पर पड़ा है। LIC के पास राजेश एक्सपोर्ट्स की कुल 10.8% हिस्सेदारी है। सेबी का ऑर्डर आने के बाद LIC के शेयरों में भी करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई है।

सवाल 10: आम निवेशकों और LIC को इस मामले से क्या नुकसान हो सकता है?

जवाब: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर रेवेन्यू के फर्जी होने के आरोपों से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी गिरावट आ सकती है। शेयर की कीमतें गिरने से कंपनी में LIC के किए गए निवेश की वैल्यू कम हो जाएगी। इसके अलावा, जिन रिटेल निवेशकों ने इस कंपनी के शेयर खरीद रखे हैं, उनकी पूंजी भी डूबने का खतरा बढ़ गया है।

सवाल 11: इस अंतरिम आदेश के बाद आगे क्या प्रक्रिया होगी?

जवाब: सेबी का यह आदेश अभी अंतरिम है, जिसका मतलब है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। सेबी अपनी विस्तृत जांच जारी रखेगा। इस दौरान राजेश मेहता और कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। यदि आरोप अंतिम जांच में भी सही साबित होते हैं, तो सेबी कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ प्रमोटर्स को लंबे समय के लिए बाजार से प्रतिबंधित कर सकता है और मामला आपराधिक जांच एजेंसियों को भी भेजा जा सकता है।

नॉलेज पार्ट: जानें क्या होता है ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ ?

जब कोई कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत दिखाने, बैंक लोन हासिल करने या शेयर बाजार में अपने शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए असल बिक्री से ज्यादा कमाई कागजों पर दिखाती है, तो उसे ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ या रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना कहते हैं। इसमें अक्सर बिना किसी वास्तविक माल की डिलीवरी के केवल बिल बना दिए जाते हैं।

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