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Summer Body Swelling; What Is Heat Edema ? Symptoms, Reason And Treatment

Summer Body Swelling; What Is Heat Edema ? Symptoms, Reason And Treatment

4 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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गर्मियों में कई बार हाथ-पैर में सूजन हो जाती है। ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, यह ‘हीट एडेमा’ का संकेत हो सकता है। दरअसल गर्मी बढ़ने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए कई बदलाव करता है, जिनका असर ब्लड वेसल्स और फ्लूइड बैलेंस पर पड़ता है।

नतीजा ये होता है कि पैरों, टखनों या हाथों में हल्की सूजन हो जाती है। यह स्थिति आमतौर पर खतरनाक नहीं होती, लेकिन ये बार-बार होना किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हीट एडेमा की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • यह क्यों होता है?
  • हीट एडेमा के क्या लक्षण हैं?
  • हीट एडेमा से बचाव के क्या उपाय हैं?

सवाल- हीट एडेमा क्या है?

जवाब- हीट एडेमा एक मेडिकल कंडीशन है। इसमें कुछ बॉडी ऑर्गन्स (खासकर पैरों, टखनों और हाथों) में हल्की सूजन हो जाती है। इसमें आमतौर पर दर्द नहीं होता, सिर्फ हैवीनेस या स्किन में खिंचाव महसूस होता है। यह कंडीशन आमतौर पर खतरनाक नहीं होती।

सवाल- हीट एडेमा क्यों होता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • हीट एडेमा मुख्य रूप से शरीर की थर्मोरेगुलेशन (बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल करने की प्रक्रिया) का साइड इफेक्ट है।
  • जब बाहरी तापमान बढ़ता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए स्किन के पास मौजूद ब्लड वेसल्स को फैलाता है। इसे ‘वेसोडाइलेशन’ कहते हैं।
  • इससे ब्लड फ्लो स्किन की ओर बढ़ता है ताकि गर्मी बाहर निकल सके। लेकिन इसी प्रक्रिया में नसों के अंदर का प्रेशर बदल सकता है।
  • प्रेशर बदलने से फ्लूइड की कुछ मात्रा कैपिलरी (सबसे छोटी नसें) से बाहर निकलकर आसपास के टिश्यूज में जमा होने लगती है।
  • गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) के कारण यह फ्लूइड नीचे की ओर जाता है, इसलिए पैरों, टखनों और कभी-कभी हाथों में सूजन दिखाई देती है।
  • अगर व्यक्ति लंबे समय तक खड़ा या बैठा रहता है, तो ब्लड सर्कुलेशन और धीमा हो जाता है। इससे टिश्यूज में फ्लूइड अधिक मात्रा में जमा होने लगता है।

हीट एडेमा के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हीट एडेमा के क्या संकेत हैं?

जवाब- हीट एडेमा के कारण हाथ-पैर और टखनों में सूजन दिखाई देती है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हीट एडेमा शरीर के किन हिस्सों को ज्यादा प्रभावित करता है?

जवाब- यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों को ज्यादा प्रभावित करता है, जहां आसानी से फ्लूइड जमा हो सकता है। सबसे ज्यादा प्रभावित हिस्से-

  • पैर
  • टखने
  • टांगों का निचला हिस्सा (पिंडलियां)
  • कभी-कभी हाथ और उंगलियां

सवाल- किन लोगों में हीट एडेमा का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- जो लोग गर्म और उमस भरे माहौल में रहते हैं, उन्हें हीट एडेमा का रिस्क ज्यादा होता है। किन्हें ज्यादा रिस्क होता है, ग्राफिक में पूरी लिस्ट देखिए-

सवाल- क्या हीट एडेमा अपने आप ठीक भी हो जाता है?

जवाब- हां, हीट एडेमा आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है।

  • शरीर की थर्मोरिगुलेशन प्रक्रिया तापमान संतुलित करती है।
  • ठंडी जगह पर आराम करने से सूजन कम होती है।
  • पैरों को ऊपर रखने से फ्लूइड का जमाव घटता है।
  • नमक कम लेने से वाटर रिटेंशन (शरीर में पानी जमा होना) कम होता है।
  • अगर सूजन लंबे समय तक रहे, दर्द या रेडनेस हो तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- क्या बार-बार हीट एडेमा होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है?

जवाब- हां, अगर यह कंडीशन बार-बार बन रही है तो यह शरीर की किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है।

  • अगर सूजन बार-बार हो या गर्मी न होने पर भी दिखे, तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।
  • यह कार्डियोवस्कुलर प्रॉब्लम (जैसे हार्ट फेल्योर) का संकेत हो सकता है।
  • किडनी डिजीज में शरीर एक्स्ट्रा फ्लूइड बाहर नहीं निकाल पाता, जिससे सूजन हो जाती है।
  • लिवर डिजीज में भी फ्लूइड बैलेंस बिगड़ सकता है।
  • हॉर्मोनल इंबैलेंस या कुछ मेडिकेशन के कारण भी ऐसा हो सकता है।

सवाल- किन कंडीशंस में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए?

जवाब- हीट एडेमा नॉर्मली हल्का होता है, लेकिन कुछ कंडीशंस में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है-

  • सूजन अचानक ज्यादा बढ़ जाए या तेजी से फैलने लगे।
  • सूजन के साथ तेज दर्द, रेडनेस या स्किन गर्म लगे।
  • सांस लेने में दिक्कत हो या सीने में दबाव महसूस हो।
  • एक ही पैर में सूजन, दर्द और रेडनेस हो।
  • सूजन कई दिनों तक ठीक न हो या बार-बार हो।
  • पेशाब कम आए या शरीर में भारीपन लगे।

सवाल- हीट एडेमा और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) में क्या फर्क है?

जवाब- हीट एडेमा और डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) दोनों में सूजन दिख सकती है, लेकिन इनके कारण, लक्षण और गंभीरता अलग होते हैं-

1. कारण

हीट एडेमा: गर्मी में ब्लड वेसल्स फैलने से फ्लूइड जमा होता है।

DVT: नसों के अंदर ब्लड क्लॉट बन जाते हैं।

2. सूजन का पैटर्न

हीट एडेमा: आमतौर पर दोनों पैरों/टखनों में समान सूजन।

DVT: अक्सर एक ही पैर में सूजन।

3. दर्द

हीट एडेमा: आमतौर पर दर्द नहीं या बहुत हल्का।

DVT: दर्द, जकड़न या दबाव जैसा एहसास।

4. स्किन के लक्षण

हीट एडेमा: सामान्य रंग की स्किन।

DVT: रेडनेस, गर्माहट और सेंसिटिविटी।

5. गंभीरता

हीट एडेमा: आमतौर पर हल्का और अस्थायी।

DVT: गंभीर कंडीशन में क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक जा सकता है।

सवाल- हीट एडेमा से बचाव के लिए लाइफस्टाइल और डाइट में क्या बदलाव करने चाहिए?

जवाब- इसके लिए रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव काफी असरदार होते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

  • ज्यादा गर्मी में लंबे समय तक खड़े या बैठे न रहें, बीच-बीच में चलें।
  • सोते समय पैरों को थोड़ी ऊंचाई पर रखें, इससे फ्लूइड नहीं जमा होता।
  • ढीले और हल्के कपड़े पहनें, ताकि शरीर की थर्मोरेगुलेशन बेहतर रहे।
  • रेगुलर एक्सरसाइज करें, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बना रहे।
  • बहुत ज्यादा गर्म वातावरण से बचें।

डाइट में करें ये बदलाव

  • नमक कम खाएं, यह शरीर में पानी रोकता है।
  • पर्याप्त पानी पिएं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।
  • पोटेशियम से भरपूर केला, नारियल पानी और हरी सब्जियां लें। ये फ्लूइड बैलेंस में मदद करते हैं।
  • प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड न खाएं।

……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म से प्रतीक यादव की मौत: जानें क्या है ये बीमारी, किसे रिस्क ज्यादा, बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

हाल ही में 38 साल की उम्र में प्रतीक यादव का निधन हो गया। वह दिवंगत नेता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे। डॉक्टर्स ने उनकी मौत की वजह ‘पल्मोनरी एम्बॉलिज्म’ बताई है। इस कंडीशन में फेफड़ों की नसें ब्लॉक हो जाती हैं और हार्ट फेल हो जाता है। आगे पढ़िए…

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4 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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गर्मियों में कई बार हाथ-पैर में सूजन हो जाती है। ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, यह ‘हीट एडेमा’ का संकेत हो सकता है। दरअसल गर्मी बढ़ने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए कई बदलाव करता है, जिनका असर ब्लड वेसल्स और फ्लूइड बैलेंस पर पड़ता है।

नतीजा ये होता है कि पैरों, टखनों या हाथों में हल्की सूजन हो जाती है। यह स्थिति आमतौर पर खतरनाक नहीं होती, लेकिन ये बार-बार होना किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हीट एडेमा की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • यह क्यों होता है?
  • हीट एडेमा के क्या लक्षण हैं?
  • हीट एडेमा से बचाव के क्या उपाय हैं?

सवाल- हीट एडेमा क्या है?

जवाब- हीट एडेमा एक मेडिकल कंडीशन है। इसमें कुछ बॉडी ऑर्गन्स (खासकर पैरों, टखनों और हाथों) में हल्की सूजन हो जाती है। इसमें आमतौर पर दर्द नहीं होता, सिर्फ हैवीनेस या स्किन में खिंचाव महसूस होता है। यह कंडीशन आमतौर पर खतरनाक नहीं होती।

सवाल- हीट एडेमा क्यों होता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • हीट एडेमा मुख्य रूप से शरीर की थर्मोरेगुलेशन (बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल करने की प्रक्रिया) का साइड इफेक्ट है।
  • जब बाहरी तापमान बढ़ता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए स्किन के पास मौजूद ब्लड वेसल्स को फैलाता है। इसे ‘वेसोडाइलेशन’ कहते हैं।
  • इससे ब्लड फ्लो स्किन की ओर बढ़ता है ताकि गर्मी बाहर निकल सके। लेकिन इसी प्रक्रिया में नसों के अंदर का प्रेशर बदल सकता है।
  • प्रेशर बदलने से फ्लूइड की कुछ मात्रा कैपिलरी (सबसे छोटी नसें) से बाहर निकलकर आसपास के टिश्यूज में जमा होने लगती है।
  • गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) के कारण यह फ्लूइड नीचे की ओर जाता है, इसलिए पैरों, टखनों और कभी-कभी हाथों में सूजन दिखाई देती है।
  • अगर व्यक्ति लंबे समय तक खड़ा या बैठा रहता है, तो ब्लड सर्कुलेशन और धीमा हो जाता है। इससे टिश्यूज में फ्लूइड अधिक मात्रा में जमा होने लगता है।

हीट एडेमा के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हीट एडेमा के क्या संकेत हैं?

जवाब- हीट एडेमा के कारण हाथ-पैर और टखनों में सूजन दिखाई देती है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हीट एडेमा शरीर के किन हिस्सों को ज्यादा प्रभावित करता है?

जवाब- यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों को ज्यादा प्रभावित करता है, जहां आसानी से फ्लूइड जमा हो सकता है। सबसे ज्यादा प्रभावित हिस्से-

  • पैर
  • टखने
  • टांगों का निचला हिस्सा (पिंडलियां)
  • कभी-कभी हाथ और उंगलियां

सवाल- किन लोगों में हीट एडेमा का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- जो लोग गर्म और उमस भरे माहौल में रहते हैं, उन्हें हीट एडेमा का रिस्क ज्यादा होता है। किन्हें ज्यादा रिस्क होता है, ग्राफिक में पूरी लिस्ट देखिए-

सवाल- क्या हीट एडेमा अपने आप ठीक भी हो जाता है?

जवाब- हां, हीट एडेमा आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है।

  • शरीर की थर्मोरिगुलेशन प्रक्रिया तापमान संतुलित करती है।
  • ठंडी जगह पर आराम करने से सूजन कम होती है।
  • पैरों को ऊपर रखने से फ्लूइड का जमाव घटता है।
  • नमक कम लेने से वाटर रिटेंशन (शरीर में पानी जमा होना) कम होता है।
  • अगर सूजन लंबे समय तक रहे, दर्द या रेडनेस हो तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- क्या बार-बार हीट एडेमा होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है?

जवाब- हां, अगर यह कंडीशन बार-बार बन रही है तो यह शरीर की किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है।

  • अगर सूजन बार-बार हो या गर्मी न होने पर भी दिखे, तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।
  • यह कार्डियोवस्कुलर प्रॉब्लम (जैसे हार्ट फेल्योर) का संकेत हो सकता है।
  • किडनी डिजीज में शरीर एक्स्ट्रा फ्लूइड बाहर नहीं निकाल पाता, जिससे सूजन हो जाती है।
  • लिवर डिजीज में भी फ्लूइड बैलेंस बिगड़ सकता है।
  • हॉर्मोनल इंबैलेंस या कुछ मेडिकेशन के कारण भी ऐसा हो सकता है।

सवाल- किन कंडीशंस में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए?

जवाब- हीट एडेमा नॉर्मली हल्का होता है, लेकिन कुछ कंडीशंस में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है-

  • सूजन अचानक ज्यादा बढ़ जाए या तेजी से फैलने लगे।
  • सूजन के साथ तेज दर्द, रेडनेस या स्किन गर्म लगे।
  • सांस लेने में दिक्कत हो या सीने में दबाव महसूस हो।
  • एक ही पैर में सूजन, दर्द और रेडनेस हो।
  • सूजन कई दिनों तक ठीक न हो या बार-बार हो।
  • पेशाब कम आए या शरीर में भारीपन लगे।

सवाल- हीट एडेमा और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) में क्या फर्क है?

जवाब- हीट एडेमा और डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) दोनों में सूजन दिख सकती है, लेकिन इनके कारण, लक्षण और गंभीरता अलग होते हैं-

1. कारण

हीट एडेमा: गर्मी में ब्लड वेसल्स फैलने से फ्लूइड जमा होता है।

DVT: नसों के अंदर ब्लड क्लॉट बन जाते हैं।

2. सूजन का पैटर्न

हीट एडेमा: आमतौर पर दोनों पैरों/टखनों में समान सूजन।

DVT: अक्सर एक ही पैर में सूजन।

3. दर्द

हीट एडेमा: आमतौर पर दर्द नहीं या बहुत हल्का।

DVT: दर्द, जकड़न या दबाव जैसा एहसास।

4. स्किन के लक्षण

हीट एडेमा: सामान्य रंग की स्किन।

DVT: रेडनेस, गर्माहट और सेंसिटिविटी।

5. गंभीरता

हीट एडेमा: आमतौर पर हल्का और अस्थायी।

DVT: गंभीर कंडीशन में क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक जा सकता है।

सवाल- हीट एडेमा से बचाव के लिए लाइफस्टाइल और डाइट में क्या बदलाव करने चाहिए?

जवाब- इसके लिए रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव काफी असरदार होते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

  • ज्यादा गर्मी में लंबे समय तक खड़े या बैठे न रहें, बीच-बीच में चलें।
  • सोते समय पैरों को थोड़ी ऊंचाई पर रखें, इससे फ्लूइड नहीं जमा होता।
  • ढीले और हल्के कपड़े पहनें, ताकि शरीर की थर्मोरेगुलेशन बेहतर रहे।
  • रेगुलर एक्सरसाइज करें, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बना रहे।
  • बहुत ज्यादा गर्म वातावरण से बचें।

डाइट में करें ये बदलाव

  • नमक कम खाएं, यह शरीर में पानी रोकता है।
  • पर्याप्त पानी पिएं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।
  • पोटेशियम से भरपूर केला, नारियल पानी और हरी सब्जियां लें। ये फ्लूइड बैलेंस में मदद करते हैं।
  • प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड न खाएं।

……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म से प्रतीक यादव की मौत: जानें क्या है ये बीमारी, किसे रिस्क ज्यादा, बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

हाल ही में 38 साल की उम्र में प्रतीक यादव का निधन हो गया। वह दिवंगत नेता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे। डॉक्टर्स ने उनकी मौत की वजह ‘पल्मोनरी एम्बॉलिज्म’ बताई है। इस कंडीशन में फेफड़ों की नसें ब्लॉक हो जाती हैं और हार्ट फेल हो जाता है। आगे पढ़िए…

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