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Summer Sleep Struggles; High Temperatures – REM Immunity Impact

Summer Sleep Struggles; High Temperatures - REM Immunity Impact

14 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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क्या आपने भी नोटिस किया है कि गर्मियों में देर से सोते हैं, फिर भी सुबह जल्दी आंख खुल जाती है? हाई टेम्परेचर और उमस नींद की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं। इसलिए हम नींद की तीसरी स्टेज यानी डीप स्लीप में नहीं पहुंच पाते और पूरी रात सोने के बाद भी शरीर को आराम नहीं मिलता।

साइंस जर्नल ‘नेचर’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, तापमान बढ़ने के साथ नींद की अवधि कम हो जाती है और गहरी नींद पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। हर 10°C तापमान बढ़ने पर नींद की कमी का रिस्क और बढ़ जाता है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-

  • टेम्परेचर का नींद पर क्या असर पड़ता है?
  • कौन-सी गलतियां नींद को प्रभावित करती हैं?
  • अच्छी और गहरी नींद के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट: डॉ. विनीला सुरपनेनी, कंसल्टेंट, पल्मोनरी मेडिसिन, स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरु

सवाल- टेम्परेचर (तापमान) और नींद का क्या संबंध है?

जवाब- हमारे शरीर की अपनी एक क्लॉक होती है। इसे बॉडी क्लॉक या सर्केडियन रिद्म कहते हैं। ये अपने तरीके से शरीर की जरूरत के अनुसार नींद का इशारा करती है, पाचन शुरू करती है और शरीर को एक्टिव मोड में ले जाती है।

इसका एक काम और है, शरीर को रात में नींद के समय गहरी नींद में ले जाने के लिए उसका टेम्परेचर सामान्य से कुछ डिग्री कम करना। अगर रात में हमारे आसपास का टेम्परेचर कम हो तो शरीर को कम मेहनत पड़ती है, अच्छी नींद आती है। अगर टेम्परेचर ज्यादा हो तो ज्यादा मेहनत पड़ती है।

सवाल- तापमान जैसे-जैसे बढ़ता है, नींद की क्वालिटी खराब होती जाती है। ऐसा क्यों होता है?

जवाब- ज्यादा तापमान में शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे बॉडी रिलैक्स मोड में नहीं जा पाती और नींद डिस्टर्ब हो जाती है। साथ ही गर्मी में डिहाइड्रेशन और बेचैनी भी बढ़ती है, जिससे बार-बार नींद खुलती है और पूरी नहीं हो पाती है।

सवाल- क्या गर्मी का असर हमारी REM (रैपिड आई मूवमेंट) स्लीप पर भी पड़ता है?

जवाब- हां, REM स्लीप प्रभावित होती है। दरअसल नींद की 4 स्टेज होती हैं-

N1 (हल्की नींद की शुरुआत)

जागने से नींद में जाने की अवस्था। ब्रेन धीरे-धीरे शांत होने लगता है।

N2 (सामान्य नींद)

शरीर रिलैक्स होता है, सांस और धड़कन धीमी होती है। सबसे ज्यादा समय इसी स्टेज में गुजरता है।

N3 (गहरी नींद)

सबसे गहरी नींद। शरीर की मरम्मत, ताकत वापस आना और इम्यून सिस्टम मजबूत होना इसी में होता है।

REM (सपने वाली गहरी नींद)

इस स्टेज में ज्यादा सपने आते हैं। ब्रेन एक्टिव रहता है लेकिन शरीर की मसल्स शांत रहती हैं।

REM नींद की सबसे गहरी स्टेज है, यहां तक पहुंचने के लिए शरीर को बहुत आराम की जरूरत होती है। गर्मी में बेचैनी के कारण शरीर इस स्टेज तक नहीं पहुंच पाता है।

सवाल- गर्मियों में नींद कम आती है। क्या ये नॉर्मल है या ऐसा कमरे के ज्यादा टेम्परेचर के कारण होता है?

जवाब- हां, यह काफी हद तक नॉर्मल है। कमरे के ज्यादा टेम्परेचर की वजह से भी ऐसा हाेता है। हाई टेम्परेचर, पसीना और असहजता शरीर के स्लीप सिग्नल्स को डिस्टर्ब कर देते हैं। अगर कमरे का तापमान कंट्रोल में रखा जाए, वेंटिलेशन अच्छा हो और शरीर हाइड्रेटेड रहे तो नींद अच्छी आती है।

सवाल- गर्मियों में मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है, पाचन प्रभावित होता है। ऐसे में अगर नींद भी कम हो तो इसका ओवरऑल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- गर्मियों में शरीर पहले ही हाई टेम्परेचर के कारण स्ट्रेस में रहता है। इससे मेटाबॉलिज्म और पाचन पर असर पड़ता है। ऐसे में अगर नींद भी पूरी न हो, तो यह स्थिति और बिगड़ सकती है। नींद की कमी शरीर के मेटाबॉलिक फंक्शन, डाइजेशन, इम्यूनिटी और ब्रेन परफॉर्मेंस को सीधे प्रभावित करती है। ग्राफिक में देखिए इसका शरीर पर क्या असर होता है-

सवाल- क्या गर्मियों में नींद न आना किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है?

जवाब- आमतौर पर गर्मियों में नींद न आना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। ऐसा शरीर का तापमान बढ़ने, ज्यादा पसीना, डिहाइड्रेशन और असहज माहौल की वजह से होता है।

सवाल- क्या गर्मी का प्रभाव स्लीप हॉर्मोन मेलाटोनिन पर भी पड़ता है?

जवाब- मेलाटोनिन का सिक्रेशन (रिलीज होना) शरीर के तापमान और अंधेरे पर निर्भर करता है। रात में अंधेरा गहराने और शरीर का टेम्परेचर कम होने के साथ इसका सिक्रेशन बढ़ता है। अगर इन दोनों सें कोई एक कंडीशन न मिले तो यह प्रभावित हो सकता है।

सवाल- क्या डिहाइड्रेशन होने या ज्यादा पसीना आने के कारण भी स्लीप क्वालिटी खराब हो सकती है?

जवाब- हां, ये शरीर की नेचुरल कूलिंग प्रक्रिया को बाधित करते हैं। जब शरीर में पानी की कमी होती है तो मेलाटोनिन लेवल कम हो जाता है और मांसपेशियों में ऐंठन या गला सूखने जैसी समस्याएं होती हैं, जिससे नींद बार-बार टूटती है।

साथ ही अधिक पसीना आने से बिस्तर और कपड़ों में होने वाली असहजता आपको गहरी नींद में जाने से रोकती है, जिससे अगले दिन थकान और भारीपन महसूस होता है।

सवाल- गर्मियों में स्लीप क्वालिटी मेंटेन रखने और अच्छी, गहरी नींद के टिप्स क्या हैं?

जवाब– कुछ आसान आदतें और सही स्लीप एनवायर्नमेंट गहरी और आरामदायक नींद में मददगार होते हैं। ग्राफिक में गहरी नींद के लिए आसान टिप्स देखिए-

सवाल- हमारी कौन-सी गलतियां गर्मी के मौसम में नींद को प्रभावित करती हैं?

जवाब- स्लीप एनवायर्नमेंट, लाइफस्टाइल और खाने-पीने की गलतियां मिलकर नींद की क्वालिटी को खराब कर सकती हैं। अगर इन आदतों को समय रहते न सुधारा जाए, तो नींद से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी रह सकती हैं। सभी गलतियां ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में अच्छी नींद के लिए डाइट कैसी होनी चाहिए?

जवाब- अच्छी नींद के लिए डाइट हल्की और सुपाच्य होनी चाहिए। डाइट में ऐसी चीजें शामिल करें, जो शरीर के तापमान को कंट्रोल करें और स्लीप हॉर्मोन मेलाटोनिन और सेरोटोनिन को बढ़ाएं। ग्राफिक में देखिए कैसी डाइट होनी चाहिए-

गहरी और आरामदायक नींद के लिए सही स्लीप एनवायर्नमेंट, संतुलित डाइट, पर्याप्त हाइड्रेशन और रेगुलर स्लीप रूटीन अपनाएं। छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर गर्मी के मौसम में भी नींद और ओवरऑल हेल्थ दोनों को बेहतर हो सकते हैं।

………………………………. ये खबर भी पढ़ें…

जरूरत की खबर- गर्मियों में बदलें अपनी डाइट:ये 20 चीजें खाएं, 9 फूड्स अवॉइड करें, डाइटीशियन से जानें कंप्लीट समर डाइट प्लान

गर्मियों में शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं। तेज धूप के कारण पसीने के साथ शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स निकल जाते हैं। अगर खानपान में बदलाव न किया जाए तो डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर, अपच और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

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क्या आपने भी नोटिस किया है कि गर्मियों में देर से सोते हैं, फिर भी सुबह जल्दी आंख खुल जाती है? हाई टेम्परेचर और उमस नींद की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं। इसलिए हम नींद की तीसरी स्टेज यानी डीप स्लीप में नहीं पहुंच पाते और पूरी रात सोने के बाद भी शरीर को आराम नहीं मिलता।

साइंस जर्नल ‘नेचर’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, तापमान बढ़ने के साथ नींद की अवधि कम हो जाती है और गहरी नींद पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। हर 10°C तापमान बढ़ने पर नींद की कमी का रिस्क और बढ़ जाता है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-

  • टेम्परेचर का नींद पर क्या असर पड़ता है?
  • कौन-सी गलतियां नींद को प्रभावित करती हैं?
  • अच्छी और गहरी नींद के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट: डॉ. विनीला सुरपनेनी, कंसल्टेंट, पल्मोनरी मेडिसिन, स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरु

सवाल- टेम्परेचर (तापमान) और नींद का क्या संबंध है?

जवाब- हमारे शरीर की अपनी एक क्लॉक होती है। इसे बॉडी क्लॉक या सर्केडियन रिद्म कहते हैं। ये अपने तरीके से शरीर की जरूरत के अनुसार नींद का इशारा करती है, पाचन शुरू करती है और शरीर को एक्टिव मोड में ले जाती है।

इसका एक काम और है, शरीर को रात में नींद के समय गहरी नींद में ले जाने के लिए उसका टेम्परेचर सामान्य से कुछ डिग्री कम करना। अगर रात में हमारे आसपास का टेम्परेचर कम हो तो शरीर को कम मेहनत पड़ती है, अच्छी नींद आती है। अगर टेम्परेचर ज्यादा हो तो ज्यादा मेहनत पड़ती है।

सवाल- तापमान जैसे-जैसे बढ़ता है, नींद की क्वालिटी खराब होती जाती है। ऐसा क्यों होता है?

जवाब- ज्यादा तापमान में शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे बॉडी रिलैक्स मोड में नहीं जा पाती और नींद डिस्टर्ब हो जाती है। साथ ही गर्मी में डिहाइड्रेशन और बेचैनी भी बढ़ती है, जिससे बार-बार नींद खुलती है और पूरी नहीं हो पाती है।

सवाल- क्या गर्मी का असर हमारी REM (रैपिड आई मूवमेंट) स्लीप पर भी पड़ता है?

जवाब- हां, REM स्लीप प्रभावित होती है। दरअसल नींद की 4 स्टेज होती हैं-

N1 (हल्की नींद की शुरुआत)

जागने से नींद में जाने की अवस्था। ब्रेन धीरे-धीरे शांत होने लगता है।

N2 (सामान्य नींद)

शरीर रिलैक्स होता है, सांस और धड़कन धीमी होती है। सबसे ज्यादा समय इसी स्टेज में गुजरता है।

N3 (गहरी नींद)

सबसे गहरी नींद। शरीर की मरम्मत, ताकत वापस आना और इम्यून सिस्टम मजबूत होना इसी में होता है।

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जवाब- हां, यह काफी हद तक नॉर्मल है। कमरे के ज्यादा टेम्परेचर की वजह से भी ऐसा हाेता है। हाई टेम्परेचर, पसीना और असहजता शरीर के स्लीप सिग्नल्स को डिस्टर्ब कर देते हैं। अगर कमरे का तापमान कंट्रोल में रखा जाए, वेंटिलेशन अच्छा हो और शरीर हाइड्रेटेड रहे तो नींद अच्छी आती है।

सवाल- गर्मियों में मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है, पाचन प्रभावित होता है। ऐसे में अगर नींद भी कम हो तो इसका ओवरऑल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- गर्मियों में शरीर पहले ही हाई टेम्परेचर के कारण स्ट्रेस में रहता है। इससे मेटाबॉलिज्म और पाचन पर असर पड़ता है। ऐसे में अगर नींद भी पूरी न हो, तो यह स्थिति और बिगड़ सकती है। नींद की कमी शरीर के मेटाबॉलिक फंक्शन, डाइजेशन, इम्यूनिटी और ब्रेन परफॉर्मेंस को सीधे प्रभावित करती है। ग्राफिक में देखिए इसका शरीर पर क्या असर होता है-

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जवाब- आमतौर पर गर्मियों में नींद न आना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। ऐसा शरीर का तापमान बढ़ने, ज्यादा पसीना, डिहाइड्रेशन और असहज माहौल की वजह से होता है।

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जवाब- मेलाटोनिन का सिक्रेशन (रिलीज होना) शरीर के तापमान और अंधेरे पर निर्भर करता है। रात में अंधेरा गहराने और शरीर का टेम्परेचर कम होने के साथ इसका सिक्रेशन बढ़ता है। अगर इन दोनों सें कोई एक कंडीशन न मिले तो यह प्रभावित हो सकता है।

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जवाब- हां, ये शरीर की नेचुरल कूलिंग प्रक्रिया को बाधित करते हैं। जब शरीर में पानी की कमी होती है तो मेलाटोनिन लेवल कम हो जाता है और मांसपेशियों में ऐंठन या गला सूखने जैसी समस्याएं होती हैं, जिससे नींद बार-बार टूटती है।

साथ ही अधिक पसीना आने से बिस्तर और कपड़ों में होने वाली असहजता आपको गहरी नींद में जाने से रोकती है, जिससे अगले दिन थकान और भारीपन महसूस होता है।

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जवाब– कुछ आसान आदतें और सही स्लीप एनवायर्नमेंट गहरी और आरामदायक नींद में मददगार होते हैं। ग्राफिक में गहरी नींद के लिए आसान टिप्स देखिए-

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जवाब- स्लीप एनवायर्नमेंट, लाइफस्टाइल और खाने-पीने की गलतियां मिलकर नींद की क्वालिटी को खराब कर सकती हैं। अगर इन आदतों को समय रहते न सुधारा जाए, तो नींद से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी रह सकती हैं। सभी गलतियां ग्राफिक में देखिए-

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जवाब- अच्छी नींद के लिए डाइट हल्की और सुपाच्य होनी चाहिए। डाइट में ऐसी चीजें शामिल करें, जो शरीर के तापमान को कंट्रोल करें और स्लीप हॉर्मोन मेलाटोनिन और सेरोटोनिन को बढ़ाएं। ग्राफिक में देखिए कैसी डाइट होनी चाहिए-

गहरी और आरामदायक नींद के लिए सही स्लीप एनवायर्नमेंट, संतुलित डाइट, पर्याप्त हाइड्रेशन और रेगुलर स्लीप रूटीन अपनाएं। छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर गर्मी के मौसम में भी नींद और ओवरऑल हेल्थ दोनों को बेहतर हो सकते हैं।

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