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Water Weight Vs Body Fat; Warning Signs – Health Risk

Water Weight Vs Body Fat; Warning Signs - Health Risk
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9 दिन पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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मनुष्य के शरीर में लगभग 60% हिस्सा पानी होता है। यह शरीर के हर फंक्शन में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन क्या होगा अगर शरीर जरूरत से ज्यादा पानी स्टोर करने लगे?

इससे अचानक वजन बढ़ सकता है। शरीर फूला हुआ महसूस हो सकता है। इसे ‘वाटर वेट’ कहते हैं। आमतौर पर यह कुछ समय के लिए होता है। बॉडी में पानी, नमक और हॉर्मोन्स का बैलेंस बिगड़ने से ये कंडीशन पैदा होती है। इससे शरीर पानी जमा करने लगता है।

क्या इस अतिरिक्त पानी से शरीर को नुकसान हो सकता है? क्या ये किसी बीमारी का संकेत हो सकता है? शरीर का मोटापा फैट वेट है या वाटर वेट?

आज जरूरत की खबर में वाटर वेट से जुड़े इन्हीं कुछ सवालों पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • वाटर वेट क्यों बढ़ता है?
  • इसे कैसे कम कर सकते हैं?
  • ये कब गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है?

एक्सपर्ट: डॉ. अंकित बंसल, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड इनफेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- वाटर वेट क्या है और यह बॉडी फैट से कैसे अलग है?

जवाब- वाटर वेट ऐसी कंडीशन है, जब शरीर अपने टिश्यूज में जरूरत से ज्यादा पानी रोककर रखना शुरू कर देता है।

  • बॉडी फैट के मामले में शरीर में फैट सेल्स बढ़ जाती हैं। इन अतिरिक्त सेल्स के कारण वजन बढ़ता है।
  • वाटर वेट के मामले में शरीर में जमा अतिरिक्त पानी से वजन बढ़ता है।
  • वाटर वेट आमतौर पर नमक ज्यादा खाने, हॉर्मोनल बदलाव होने, कम पानी पीने, स्ट्रेस या सिडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण बढ़ता है।
  • इसमें शरीर भारी और सूजा हुआ लगता है।
  • वाटर वेट बहुत कम दिनों में तेजी से बढ़ता-घटता है, जबकि बॉडी फैट धीरे-धीरे बढ़ता और घटता है।
  • इसलिए अचानक बढ़ा वजन अक्सर वाटर वेट ही होता है।

सवाल- वाटर वेट क्यों बढ़ता है?

जवाब- प्रकृति और हमारे शरीर, दोनों के काम करने का साइंस एक जैसा है। दोनों बैलेंस के लिए काम करते हैं। शरीर को जब लगता है कि बैलेंस बनाने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत है तो वह ज्यादा पानी जमा कर लेता है।

आपने शायद महसूस किया होगा कि जब आप ज्यादा नमक खाते हैं तो ज्यादा प्यास लगती है। इसकी वजह ये है कि शरीर नमक में मौजूद सोडियम को बैलेंस करने के लिए ज्यादा पानी जमा करता है।

वाटर वेट बढ़ने के सभी कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर वाटर वेट बढ़ने की एक वजह वाटर रिटेंशन है तो सवाल ये है कि शरीर में वाटर रिटेंशन क्यों होता है?

जवाब- शरीर के संतुलित कामकाज के लिए बॉडी फ्लूइड का बैलेंस रहना जरूरी है।

  • शरीर तय करता है कि कितने सोडियम, पोटेशियम या किसी अन्य मिनरल के अनुपात में शरीर में कितना पानी रखना जरूरी है।
  • ज्यादा नमक खाने पर सोडियम का स्तर बढ़ जाता है, जिसे संतुलित करने के लिए शरीर पानी जमा करता है।
  • नींद पूरी नहीं होने पर ऐसे हॉर्मोन प्रभावित होते हैं, जो पानी और नमक के संतुलन को कंट्रोल करते हैं, जिससे पानी जमा होने लगता है।
  • वहीं ज्यादा स्ट्रेस में कॉर्टिसोल हॉर्मोन बढ़ता है, जो शरीर को इमरजेंसी का संकेत देता है। इस डर से शरीर पानी और नमक जमा करने लगता है।
  • इसके अलावा अगर कोई शख्स अक्सर जरूरत से कम पानी पीता है तो शरीर को डिहाइड्रेशन का डर सताने लगता है। इस डर से शरीर पानी जमा करने लगता है।
  • सिडेंटरी लाइफस्टाइल फॉलो करने से सर्कुलेशन धीमा पड़ता है, जिससे शरीर में पानी जमा होने लगता है।

सवाल- अगर अचानक किसी का वजन बढ़े तो क्या इसके पीछे वाटर वेट कारण हो सकता है?

जवाब- हां, अगर किसी का वजन अचानक बढ़ जाए, तो इसके पीछे वाटर वेट एक बड़ी वजह हो सकता है।

  • बॉडी फैट धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन वाटर वेट एक-दो दिन में भी 1-3 किलो तक बढ़ सकता है।
  • ज्यादा नमक खाने, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाने, कम पानी पीने, हॉर्मोनल बदलाव या नींद की कमी से शरीर पानी जमा करने लगता है।
  • इसके कारण शरीर भारी, फूला हुआ महसूस होता है।
  • वाटर वेट जितनी तेजी से बढ़ता है, उतनी ही तेजी घट भी सकता है।
  • अगर शरीर में नमक-पानी का बैलेंस बन जाए और पर्याप्त नींद ली जाए तो ये अपने आप कम हो जाता है।

सवाल- ये कैसे पता चलेगा है कि हमारा वजन फैट वेट है या वाटर वेट?

जवाब- यह पहचानना बहुत मुश्किल काम नहीं है कि बढ़ा हुआ वजन फैट वेट है या वाटर वेट।

वाटर वेट में वजन अचानक बढ़ता या घटता है। इसमें पेट, चेहरे, हाथों या पैरों में सूजन दिखती है। कई बार तो स्किन दबाने पर हल्का गड्ढा भी बन जाता है, जो कुछ सेकंड में भर जाता है।

जबकि फैट वेट धीरे-धीरे बढ़ता है और इसमें सूजन नहीं होती है। अगर पर्याप्त पानी पीने, नमक कम करने या फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने से वजन कुछ दिनों में घट जाए, तो यह वाटर वेट हो सकता है।

सवाल- डॉक्टरों का कहना है कि पानी कम पीने से भी वाटर वेट बढ़ता है? ऐसा क्यों होता है?

जवाब- यह बात एकदम सही है। दरअसल, हमारा शरीर साइंटिफिक तरीके से काम करता है।

जब इंसान सभ्यता के रास्ते पर नहीं चला था, तो जंगलों और गुफाओं में छिपकर रहता था। तब हर दिन के खाने के लिए रोज शिकार करना होता था। उस समय शरीर को कई दिन बिना खाना-पानी के रहना होता था। उस दौरान शरीर ने सीखा कि जो चीजें शरीर के लिए वाइटल (जिंदा रहने के लिए बेहद जरूरी) हैं, अगर वो कम मात्रा में मिल रही हैं तो उसे बचाकर रखना जरूरी है।

इसलिए जब शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो उसे डिहाइड्रेशन का खतरा महसूस होता है। डिहाइड्रेशन का मतलब है शरीर में पानी की कमी। इस स्थिति में शरीर खुद को सुरक्षित रखने के लिए पानी को जमा करके रखने लगता है।

सवाल- नमक, हॉर्मोन और स्ट्रेस वाटर वेट को कैसे बढ़ाते हैं?

जवाब- नमक, हॉर्मोन और स्ट्रेस तीनों का वाटर वेट से सीधा कनेक्शन है।

नमक

  • ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडियम बढ़ता है।
  • फ्लूइड बैलेंस बनाने के लिए शरीर पानी जमा करता है।

हॉर्मोन

  • एल्डोस्टेरॉन (सोडियम को संतुलित करने वाला हॉर्मोन) और एंटी-डाइयूरेटिक हॉर्मोन्स शरीर को पानी जमा करने का संकेत देते हैं।
  • पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, थायरॉइड या हॉर्मोनल बदलाव में वाटर वेट बढ़ सकता है।

स्ट्रेस

  • स्ट्रेस बढ़ने पर कॉर्टिसोल हॉर्मोन रिलीज होता है।
  • ये हॉर्मोन ब्रेन को संकट का मैसेज देता है। इससे शरीर पानी जमा करता है।

सवाल- अगर वाटर वेट बढ़ा हुआ हो तो उसे कम करने के लिए क्या करें?

जवाब- अगर वाटर वेट बढ़ गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें, क्योंकि इनमें सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है। इसके कारण शरीर में पानी जमा होने लगता है।

सभी उपाय ग्राफिक में देखिए-

सवाल- वाटर वेट बढ़ने से रोकना है तो हमारी लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

जवाब- इसके लिए लाइफस्टाइल संतुलित होना जरूरी है। रोज पर्याप्त पानी पिएं, ताकि शरीर को पानी जमा करने की जरूरत न पड़े।

  • खाने में नमक और प्रोसेस्ड फूड सीमित रखें, क्योंकि ज्यादा सोडियम से शरीर में पानी जमा होता है।
  • रोजाना हल्की एक्सरसाइज, वॉक या योग करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और अतिरिक्त पानी बाहर निकलता है।
  • सिडेंटरी लाइफस्टाइल से बचें। पर्याप्त नींद लें, क्योंकि नींद की कमी से हॉर्मोन असंतुलन होता है।
  • शराब न पिएं और बहुत ज्यादा कॉफी से बचें। फल, सब्जियां और फाइबर रिच डाइट लें।
  • स्ट्रेस मैनेज करें, क्योंकि तनाव भी वाटर रिटेंशन बढ़ा सकता है।

सवाल- वाटर वेट के किन लक्षणों में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है?

जवाब- अगर लंबे समय तक हाथ, पैर, टखने या चेहरे पर सूजन बनी रहे। ये सूजन आराम करने या पर्याप्त पानी पीने से कम न हो, तो सावधान होने की जरूरत है। ऐसे सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या बार-बार वाटर वेट बढ़ना किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है?

जवाब- हां, ये किडनी, लिवर या हार्ट से जुड़ी समस्या की ओर इशारा हो सकता है। थायरॉइड हॉर्मोन का असंतुलन भी वजह हो सकती है। वाटर वेट बढ़ने के साथ सांस फूल रही है, पेशाब कम आ रहा है, लगातार थकान है या चेहरे-पैरों में सूजन भी है तो डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है।

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  • वाटर वेट क्यों बढ़ता है?
  • इसे कैसे कम कर सकते हैं?
  • ये कब गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है?

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जवाब- वाटर वेट ऐसी कंडीशन है, जब शरीर अपने टिश्यूज में जरूरत से ज्यादा पानी रोककर रखना शुरू कर देता है।

  • बॉडी फैट के मामले में शरीर में फैट सेल्स बढ़ जाती हैं। इन अतिरिक्त सेल्स के कारण वजन बढ़ता है।
  • वाटर वेट के मामले में शरीर में जमा अतिरिक्त पानी से वजन बढ़ता है।
  • वाटर वेट आमतौर पर नमक ज्यादा खाने, हॉर्मोनल बदलाव होने, कम पानी पीने, स्ट्रेस या सिडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण बढ़ता है।
  • इसमें शरीर भारी और सूजा हुआ लगता है।
  • वाटर वेट बहुत कम दिनों में तेजी से बढ़ता-घटता है, जबकि बॉडी फैट धीरे-धीरे बढ़ता और घटता है।
  • इसलिए अचानक बढ़ा वजन अक्सर वाटर वेट ही होता है।

सवाल- वाटर वेट क्यों बढ़ता है?

जवाब- प्रकृति और हमारे शरीर, दोनों के काम करने का साइंस एक जैसा है। दोनों बैलेंस के लिए काम करते हैं। शरीर को जब लगता है कि बैलेंस बनाने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत है तो वह ज्यादा पानी जमा कर लेता है।

आपने शायद महसूस किया होगा कि जब आप ज्यादा नमक खाते हैं तो ज्यादा प्यास लगती है। इसकी वजह ये है कि शरीर नमक में मौजूद सोडियम को बैलेंस करने के लिए ज्यादा पानी जमा करता है।

वाटर वेट बढ़ने के सभी कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर वाटर वेट बढ़ने की एक वजह वाटर रिटेंशन है तो सवाल ये है कि शरीर में वाटर रिटेंशन क्यों होता है?

जवाब- शरीर के संतुलित कामकाज के लिए बॉडी फ्लूइड का बैलेंस रहना जरूरी है।

  • शरीर तय करता है कि कितने सोडियम, पोटेशियम या किसी अन्य मिनरल के अनुपात में शरीर में कितना पानी रखना जरूरी है।
  • ज्यादा नमक खाने पर सोडियम का स्तर बढ़ जाता है, जिसे संतुलित करने के लिए शरीर पानी जमा करता है।
  • नींद पूरी नहीं होने पर ऐसे हॉर्मोन प्रभावित होते हैं, जो पानी और नमक के संतुलन को कंट्रोल करते हैं, जिससे पानी जमा होने लगता है।
  • वहीं ज्यादा स्ट्रेस में कॉर्टिसोल हॉर्मोन बढ़ता है, जो शरीर को इमरजेंसी का संकेत देता है। इस डर से शरीर पानी और नमक जमा करने लगता है।
  • इसके अलावा अगर कोई शख्स अक्सर जरूरत से कम पानी पीता है तो शरीर को डिहाइड्रेशन का डर सताने लगता है। इस डर से शरीर पानी जमा करने लगता है।
  • सिडेंटरी लाइफस्टाइल फॉलो करने से सर्कुलेशन धीमा पड़ता है, जिससे शरीर में पानी जमा होने लगता है।

सवाल- अगर अचानक किसी का वजन बढ़े तो क्या इसके पीछे वाटर वेट कारण हो सकता है?

जवाब- हां, अगर किसी का वजन अचानक बढ़ जाए, तो इसके पीछे वाटर वेट एक बड़ी वजह हो सकता है।

  • बॉडी फैट धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन वाटर वेट एक-दो दिन में भी 1-3 किलो तक बढ़ सकता है।
  • ज्यादा नमक खाने, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाने, कम पानी पीने, हॉर्मोनल बदलाव या नींद की कमी से शरीर पानी जमा करने लगता है।
  • इसके कारण शरीर भारी, फूला हुआ महसूस होता है।
  • वाटर वेट जितनी तेजी से बढ़ता है, उतनी ही तेजी घट भी सकता है।
  • अगर शरीर में नमक-पानी का बैलेंस बन जाए और पर्याप्त नींद ली जाए तो ये अपने आप कम हो जाता है।

सवाल- ये कैसे पता चलेगा है कि हमारा वजन फैट वेट है या वाटर वेट?

जवाब- यह पहचानना बहुत मुश्किल काम नहीं है कि बढ़ा हुआ वजन फैट वेट है या वाटर वेट।

वाटर वेट में वजन अचानक बढ़ता या घटता है। इसमें पेट, चेहरे, हाथों या पैरों में सूजन दिखती है। कई बार तो स्किन दबाने पर हल्का गड्ढा भी बन जाता है, जो कुछ सेकंड में भर जाता है।

जबकि फैट वेट धीरे-धीरे बढ़ता है और इसमें सूजन नहीं होती है। अगर पर्याप्त पानी पीने, नमक कम करने या फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने से वजन कुछ दिनों में घट जाए, तो यह वाटर वेट हो सकता है।

सवाल- डॉक्टरों का कहना है कि पानी कम पीने से भी वाटर वेट बढ़ता है? ऐसा क्यों होता है?

जवाब- यह बात एकदम सही है। दरअसल, हमारा शरीर साइंटिफिक तरीके से काम करता है।

जब इंसान सभ्यता के रास्ते पर नहीं चला था, तो जंगलों और गुफाओं में छिपकर रहता था। तब हर दिन के खाने के लिए रोज शिकार करना होता था। उस समय शरीर को कई दिन बिना खाना-पानी के रहना होता था। उस दौरान शरीर ने सीखा कि जो चीजें शरीर के लिए वाइटल (जिंदा रहने के लिए बेहद जरूरी) हैं, अगर वो कम मात्रा में मिल रही हैं तो उसे बचाकर रखना जरूरी है।

इसलिए जब शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो उसे डिहाइड्रेशन का खतरा महसूस होता है। डिहाइड्रेशन का मतलब है शरीर में पानी की कमी। इस स्थिति में शरीर खुद को सुरक्षित रखने के लिए पानी को जमा करके रखने लगता है।

सवाल- नमक, हॉर्मोन और स्ट्रेस वाटर वेट को कैसे बढ़ाते हैं?

जवाब- नमक, हॉर्मोन और स्ट्रेस तीनों का वाटर वेट से सीधा कनेक्शन है।

नमक

  • ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडियम बढ़ता है।
  • फ्लूइड बैलेंस बनाने के लिए शरीर पानी जमा करता है।

हॉर्मोन

  • एल्डोस्टेरॉन (सोडियम को संतुलित करने वाला हॉर्मोन) और एंटी-डाइयूरेटिक हॉर्मोन्स शरीर को पानी जमा करने का संकेत देते हैं।
  • पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, थायरॉइड या हॉर्मोनल बदलाव में वाटर वेट बढ़ सकता है।

स्ट्रेस

  • स्ट्रेस बढ़ने पर कॉर्टिसोल हॉर्मोन रिलीज होता है।
  • ये हॉर्मोन ब्रेन को संकट का मैसेज देता है। इससे शरीर पानी जमा करता है।

सवाल- अगर वाटर वेट बढ़ा हुआ हो तो उसे कम करने के लिए क्या करें?

जवाब- अगर वाटर वेट बढ़ गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें, क्योंकि इनमें सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है। इसके कारण शरीर में पानी जमा होने लगता है।

सभी उपाय ग्राफिक में देखिए-

सवाल- वाटर वेट बढ़ने से रोकना है तो हमारी लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

जवाब- इसके लिए लाइफस्टाइल संतुलित होना जरूरी है। रोज पर्याप्त पानी पिएं, ताकि शरीर को पानी जमा करने की जरूरत न पड़े।

  • खाने में नमक और प्रोसेस्ड फूड सीमित रखें, क्योंकि ज्यादा सोडियम से शरीर में पानी जमा होता है।
  • रोजाना हल्की एक्सरसाइज, वॉक या योग करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और अतिरिक्त पानी बाहर निकलता है।
  • सिडेंटरी लाइफस्टाइल से बचें। पर्याप्त नींद लें, क्योंकि नींद की कमी से हॉर्मोन असंतुलन होता है।
  • शराब न पिएं और बहुत ज्यादा कॉफी से बचें। फल, सब्जियां और फाइबर रिच डाइट लें।
  • स्ट्रेस मैनेज करें, क्योंकि तनाव भी वाटर रिटेंशन बढ़ा सकता है।

सवाल- वाटर वेट के किन लक्षणों में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है?

जवाब- अगर लंबे समय तक हाथ, पैर, टखने या चेहरे पर सूजन बनी रहे। ये सूजन आराम करने या पर्याप्त पानी पीने से कम न हो, तो सावधान होने की जरूरत है। ऐसे सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या बार-बार वाटर वेट बढ़ना किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है?

जवाब- हां, ये किडनी, लिवर या हार्ट से जुड़ी समस्या की ओर इशारा हो सकता है। थायरॉइड हॉर्मोन का असंतुलन भी वजह हो सकती है। वाटर वेट बढ़ने के साथ सांस फूल रही है, पेशाब कम आ रहा है, लगातार थकान है या चेहरे-पैरों में सूजन भी है तो डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है।

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