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इटली का ‘क्रिकेट’ वाला चमत्कार:जिस देश में घास की पिच तक नहीं, वह वर्ल्ड कप में नेपाल को हरा चुका; 78 साल के बुजुर्ग का सपना सच

इटली का ‘क्रिकेट’ वाला चमत्कार:जिस देश में घास की पिच तक नहीं, वह वर्ल्ड कप में नेपाल को हरा चुका; 78 साल के बुजुर्ग का सपना सच

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टी20 वर्ल्ड कप के एक मैच में इटली ने नेपाल को 10 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया था। यह 78 साल के फ्रांसिस जयराजा के लिए एक चमत्कार था, जो स्टेडियम में बैठकर अपनी आंखों के सामने अपने 50 साल के संघर्ष को जीत में बदलते देख रहे थे। यह कहानी है एक ऐसे देश इटली की, जहां फुटबॉल तो धर्म है, लेकिन क्रिकेट के लिए एक जूनून कुछ लोगों के दिल में धड़कता रहा और इन जुनूनी लोगों ने देश में क्रिकेट को बचाए रखा। श्रीलंका के जाफना से रोम तक का सफर श्रीलंका के जाफना से 1968 में गणित पढ़ने रोम पहुंचे फ्रांसिस जयराजा ने नहीं सोचा था कि वे इटली के पहले क्रिकेट कप्तान बनेंगे। वे दिन में नौकरी करते और फिर शाम को विदेशी दूतावासों के कर्मचारियों के साथ खेलते। यहीं उनकी मुलाकात सिमोन गैम्बिनो से हुई। गैम्बिनो गर्मियों में इंग्लैंड में क्रिकेट देख चुके थे। दोनों ने 1980 में ‘इटालियन क्रिकेट फेडरेशन’ की नींव रखी। 1984 में इटली की टीम पहली बार इंग्लैंड दौरे पर गई, जिसके कप्तान जयराजा थे। मिलान और युवेंटस जैसे मशहूर क्लबों की शुरुआत में शामिल था क्रिकेट इटली में आम आदमी को क्रिकेट समझाना टेढ़ी खीर है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इटली के मशहूर फुटबॉल क्लब एसी मिलान और युवेंटस की शुरुआत क्रिकेट और फुटबॉल क्लब के रूप में ही हुई थी। शुरुआत में एसी मिलान का नाम ‘मिलान फुटबॉल एंड क्रिकेट क्लब’ था, लेकिन 1900 के दशक में वहां से क्रिकेट गायब हो गया। इसका एक बड़ा कारण था बेनिटो मुसोलिनी का फासीवादी शासन। उन्होंने क्रिकेट को ‘अन-इटालियन’ और ‘अंग्रेजों का खेल’ बताकर इसे दबा दिया और फुटबॉल को राष्ट्रवाद के हथियार के तौर पर प्रचारित किया। 2023-24 में कुछ शहरों में क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध भी लग चुका 2023-24 के आसपास मोनफाल्कन शहर की मेयर ने पार्कों में क्रिकेट पर यह कहकर बैन लगा दिया था कि यह संस्कृति और सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। इटली में क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। गैम्बिनो बताते हैं, ‘शायद हम वर्ल्ड कप खेलने वाले पहले ऐसे देश हैं, जिसके पास अपने देश में ढंग की घास वाली विकेट तक नहीं हैं।’ हालांकि, इस जीत के बाद इटली में क्रिकेट को लेकर माहौल बन रहा है। गैम्बिनो व लिएंड्रो का मानना है कि असली बदलाव ओलिंपिक से आएगा। जब इटली के लोग क्रिकेट को ओलिंपिक में देखेंगे, तभी यह खेल वहां का हिस्सा बन पाएगा।

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मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टी20 वर्ल्ड कप के एक मैच में इटली ने नेपाल को 10 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया था। यह 78 साल के फ्रांसिस जयराजा के लिए एक चमत्कार था, जो स्टेडियम में बैठकर अपनी आंखों के सामने अपने 50 साल के संघर्ष को जीत में बदलते देख रहे थे। यह कहानी है एक ऐसे देश इटली की, जहां फुटबॉल तो धर्म है, लेकिन क्रिकेट के लिए एक जूनून कुछ लोगों के दिल में धड़कता रहा और इन जुनूनी लोगों ने देश में क्रिकेट को बचाए रखा। श्रीलंका के जाफना से रोम तक का सफर श्रीलंका के जाफना से 1968 में गणित पढ़ने रोम पहुंचे फ्रांसिस जयराजा ने नहीं सोचा था कि वे इटली के पहले क्रिकेट कप्तान बनेंगे। वे दिन में नौकरी करते और फिर शाम को विदेशी दूतावासों के कर्मचारियों के साथ खेलते। यहीं उनकी मुलाकात सिमोन गैम्बिनो से हुई। गैम्बिनो गर्मियों में इंग्लैंड में क्रिकेट देख चुके थे। दोनों ने 1980 में ‘इटालियन क्रिकेट फेडरेशन’ की नींव रखी। 1984 में इटली की टीम पहली बार इंग्लैंड दौरे पर गई, जिसके कप्तान जयराजा थे। मिलान और युवेंटस जैसे मशहूर क्लबों की शुरुआत में शामिल था क्रिकेट इटली में आम आदमी को क्रिकेट समझाना टेढ़ी खीर है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इटली के मशहूर फुटबॉल क्लब एसी मिलान और युवेंटस की शुरुआत क्रिकेट और फुटबॉल क्लब के रूप में ही हुई थी। शुरुआत में एसी मिलान का नाम ‘मिलान फुटबॉल एंड क्रिकेट क्लब’ था, लेकिन 1900 के दशक में वहां से क्रिकेट गायब हो गया। इसका एक बड़ा कारण था बेनिटो मुसोलिनी का फासीवादी शासन। उन्होंने क्रिकेट को ‘अन-इटालियन’ और ‘अंग्रेजों का खेल’ बताकर इसे दबा दिया और फुटबॉल को राष्ट्रवाद के हथियार के तौर पर प्रचारित किया। 2023-24 में कुछ शहरों में क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध भी लग चुका 2023-24 के आसपास मोनफाल्कन शहर की मेयर ने पार्कों में क्रिकेट पर यह कहकर बैन लगा दिया था कि यह संस्कृति और सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। इटली में क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। गैम्बिनो बताते हैं, ‘शायद हम वर्ल्ड कप खेलने वाले पहले ऐसे देश हैं, जिसके पास अपने देश में ढंग की घास वाली विकेट तक नहीं हैं।’ हालांकि, इस जीत के बाद इटली में क्रिकेट को लेकर माहौल बन रहा है। गैम्बिनो व लिएंड्रो का मानना है कि असली बदलाव ओलिंपिक से आएगा। जब इटली के लोग क्रिकेट को ओलिंपिक में देखेंगे, तभी यह खेल वहां का हिस्सा बन पाएगा।

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